26 राइस मिलर्स ने नहीं जमा किया 21 हजार क्विंटल चावल कारण, प्रभाव और समाधान

26 राइस मिलर्स ने नहीं जमा किया 21 हजार क्विंटल चावल पूरा सच, कारण और समाधान

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हुआ है। हाल ही में खबर आई कि 26 राइस मिलर्स ने लगभग 21 हजार क्विंटल चावल जमा नहीं किया, जो कि पिछली फसल से संबंधित है और जिसे सरकारी एजेंसियों को सौंपना था। यह मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि इसमें खाद्य सुरक्षा, किसान हित और प्रशासनिक प्रणाली सभी जुड़े हैं।

 रायगढ़ जिले में कस्टम मिलिंग की पुरानी कहानी फिर से शुरू हो चुकी है। पिछले साल का चावल जमा नहीं किया जा रहा है। राइस मिलर्स ने धान उठाया लेकिन चावल जमा नहीं किया। अभी भी केवल नागरिक आपूर्ति निगम में 26 मिलर्स के करीब 21 हजार क्विंटल चावल शेष है। एफसीआई में तो हालत और भी खराब है। यह स्थिति रायगढ़ जिले में हर साल होती है। राइस मिलर्स जानबूझकर चावल जमा करने में देरी करते हैं ताकि एफसीआई का कोटा कन्वर्ट होकर नान को मिल जाए। एक पूरी लॉबी इस काम में लगती है।

सूत्रों के मुताबिक राइस मिलर्स ने इसकी फील्डिंग भी शुरू कर दी है। कैसे भी करके एफसीआई में जमा किए जाने वाले चावल को नान में कन्वर्ट करवा लिया जाता है। इस बार भी नान में 26 मिलर्स ने करीब 21 हजार क्विंटल चावल जमा नहीं किया है। वहीं एफसीआई में अरवा चावल 80 प्रतिशत ही जमा हो सका है। उसना चावल भी मात्र 20 प्रश जमा हो पाया है।

अब मिलर्स की कोशिश है कि पिछले साल एफसीआई में जमा होने योग्य चावल को नान के कोटे में ट्रांसफर करवाया जाए। एफसीआई में एज टेस्ट होने की वजह से चावल रिजेक्ट हो जाता है। इसलिए नान में जमा कराया जाता है ताकि चावल पीडीएस दुकानों में बंट जाए। अब राइस मिलर्स 25-26 का धान उठाना प्रारंभ कर चुके हैं। हालांकि चावल जमा करने के लिए अभी अनुमति नहीं मिली है।


क्या हुआ?

रायगढ़ जिले में कस्टम मिलिंग के तहत तैयार होने वाले चावल की एक बड़ी खेप अभी तक जमा नहीं की गई। कुल मिलाकर 26 मिलर्स के पास करीब 21,000 क्विंटल चावल पड़ा हुआ है, लेकिन उन्होंने इसे सरकारी एजेंसियों में नहीं सौंपा।

सरकारी एजेंसियों को मिलकों द्वारा तैयार चावल समय पर नहीं मिलने से PDS (Public Distribution System) और अन्य खाद्य सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा किसानों को अपने समर्थन मूल्य का भुगतान मिलने में भी देरी हो सकती है।


कस्टम मिलिंग क्या है?

कस्टम मिलिंग एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसमें किसान अपना धान सरकारी केंद्रों पर बेचते हैं। यह धान राइस मिलर्स को दिया जाता है, जो इसे चावल में बदलते हैं।

बाद में यह चावल सरकारी एजेंसियों को दिया जाता है ताकि इसे गरीब और लाभार्थियों तक पहुँचाया जा सके

इस प्रक्रिया के मुख्य चरण हैं:

  1. किसान का धान सरकारी खरीद केंद्र पर जमा करना।

  2. मिलर्स द्वारा धान को चावल में बदलना।

  3. सरकारी एजेंसियों को चावल की डिलीवरी।

यदि ये चरण समय पर नहीं होते हैं, तो चावल जमा नहीं होता और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है


चावल न जमा होने के कारण

इस घटना के पीछे कई कारण हैं:

1. जानबूझकर देरी

कुछ मिलर्स लाभ के लिए चावल जमा करने में जानबूझकर देरी कर सकते हैं। वे यह कोशिश करते हैं कि चावल को अलग तरीके से बेचकर अधिक लाभ कमाया जा सके।सूत्रों के अनुसार मिलर्स जानबूझकर चावल जमा करने में देरी कर रहे हैं ताकि उन्हें FCI और नागरिक आपूर्ति निगम के कोटा में अपने फायदे के लिए बदलाव/हेरफेर की संभावना मिल सके।

ऐसा आरोप पहले भी उठ चुका है कि मिलर्स चावल को “नॉन कोटा” (NAAN) के हिसाब से कनवर्ट करवाने की कोशिश करते हैं ताकि वे उसे अलग तरह से बेच सकें या लाभ उठा सकें।

2. गुणवत्ता परीक्षण में देरी

सरकारी एजेंसियां चावल की गुणवत्ता जांच करती हैं। यदि चावल रिजेक्ट हो जाता है, तो मिलर्स को उसे फिर से जमा करना पड़ता है, जिससे देरी होती है।ईस्ट टेस्टिंग (Quality Test) की वजह से चावल रिजेक्ट हो जाता है और फिर मिलर्स “नॉन कोटा” में जमा कराने के लिए फिर से कोशिश करते हैं। इससे जमा होने में समय लगता है।

3. पिछले साल का बकाया भुगतान

अगर मिलर्स को पिछले साल का भुगतान लंबित है, तो वे नए चावल जमा करने में हिचकिचाते हैं।कई बार राइस मिलर्स के पास पिछले साल के कस्टम मिलिंग के भुगतान बकाया रह जाते हैं, जिसकी वजह से वे चावल जमा करने में आनाकानी करते हैं।

ऐसा ऑडिट रिपोर्ट्स में भी देखा गया है कि भुगतान की देरी और मिलरों के लंबित खाते इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं

4. प्रशासनिक और लॉजिस्टिक समस्याएं

कभी-कभी सरकारी तंत्र में समय पर निगरानी न होने, पंजीकरण में देरी या प्रक्रियाओं में गड़बड़ी जैसी वजहों से भी चावल जमा नहीं होता।

सरकारी प्रणालियों में समय पर निगरानी न होने, गुणवत्ता परीक्षणों में लैग और पंजीकरण/लाइसेंसिंग में गड़बड़ी जैसी वजह से भी इन मामलों का समाधान समय पर नहीं हो पाता। यह वही समस्या है जैसा अन्य राज्यों में देखा गया है — हरियाणा में 19 मिलर्स ने सरकार को करोड़ों का चावल नहीं दिया था। The Indian Express


प्रभाव और खतरे

1. PDS और खाद्य सुरक्षा प्रभावित

सरकारी एजेंसियों को चावल न मिलने से PDS में चावल की कमी हो सकती है। इससे गरीब परिवारों और राशनकार्ड धारकों को समस्या हो सकती है।इससे गरीब परिवार, राशन कार्ड धारक और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

2. किसानों को भुगतान में देरी

अगर चावल जमा नहीं होता, तो किसानों को उनका समर्थन मूल्य समय पर नहीं मिलता, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है। चावल सरकारी एजेंसियों को समय पर नहीं मिलता, तो किसानों को उनके समर्थन मूल्य और भुगतान में देरी हो सकती है। इससे वित्तीय भार बढ़ता है।

3. सरकारी स्टॉक प्रभावित

चावल का स्टॉक कम होने से भंडारण और वितरण योजनाओं में बाधा आती है।FCI और नागरिक आपूर्ति निगम के चावल के स्टॉक में कमी आ सकती है, जिससे राज्यों की खाद्य भंडारण नीतियों में कमी और संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

4. कालाबाज़ारी और भ्रष्टाचार

अगर चावल समय पर सरकारी डिपो में नहीं पहुंचता, तो काला बाज़ार और भ्रष्टाचार के अवसर बढ़ जाते हैं।


व्यापक परिप्रेक्ष्य

इस प्रकार की समस्याएं केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं हैं। कई राज्यों में भी मिलर्स द्वारा चावल समय पर न जमा करना देखा गया है।

  • मिलर्स कभी-कभी सरकारी आदेशों का पालन नहीं करते और चावल जमा करने में देरी करते हैं।

  • इससे नए धान क्रय और PDS वितरण प्रभावित होते हैं।

यह दर्शाता है कि कस्टम मिलिंग प्रणाली में एक व्यापक चुनौती मौजूद है।


समस्याओं की मुख्य वजहें

  1. कंट्रैक्ट और समझौते: मिलर्स और सरकारी एजेंसियों के बीच स्पष्ट और समयबद्ध समझौते न होने से देरी होती है।

  2. गुणवत्ता परीक्षण: चावल रिजेक्ट होने पर पुनः जमा करना पड़ता है।

  3. वित्तीय दबाव: बकाया भुगतान और वित्तीय तनाव भी विलंब का कारण है।


समाधान और सुझाव

1. समयबद्ध गुणवत्ता परीक्षण

सरकारी एजेंसियों को गुणवत्ता जांच समय पर पूरी करनी चाहिए, जिससे मिलर्स चावल समय पर जमा कर सकें।

2. डिजिटल ट्रैकिंग

धान से लेकर चावल की अंतिम डिलीवरी तक की प्रक्रिया डिजिटल रूप से ट्रैक की जानी चाहिए।

3. भुगतान की समयबद्धता

सरकार का भुगतान समय पर होना चाहिए, ताकि मिलर्स के वित्तीय बोझ में कमी आए।

4. जवाबदेही और सख्ती

गैर-डिलीवरी करने वाले मिलर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

5. संगठित समाधान मंच

राज्य स्तर पर मिलर्स, किसानों और सरकारी एजेंसियों का संयुक्त मंच बनाना चाहिए ताकि मुद्दों का समाधान शीघ्र हो।

रायगढ़ जिले में 26 राइस मिलर्स द्वारा 21 हजार क्विंटल चावल न जमा करने की घटना खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है।

इसका प्रभाव PDS, किसान हित और सरकारी स्टॉक पर पड़ता है। बेहतर समाधान के लिए सरकार, मिलर्स और किसानों को मिलकर रणनीति बनानी होगी, ताकि चावल समय पर जमा हो, किसान को भुगतान मिले और गरीबों तक राशन पहुंचे।

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