3 बड़े सवाल सूची एप में करना है सर्वे, रायगढ़ जिला पंचायत फिसड्डी, कागजों पर स्वच्छ भारत?

भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन देश की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार परिवर्तन, स्वच्छता की आदतों को अपनाना और तकनीक के माध्यम से निगरानी सुनिश्चित करना भी है। इसी कड़ी में केंद्र और राज्य सरकारों ने डिजिटल सर्वे और मॉनिटरिंग के लिए “सूची एप” जैसे प्लेटफॉर्म को अनिवार्य किया है।
लेकिन जब जमीनी हकीकत की बात आती है तो तस्वीर उतनी उजली नहीं दिखती। रायगढ़ जिला पंचायत की स्थिति इस बात का उदाहरण बनती जा रही है कि कैसे कागजों और पोर्टल पर स्वच्छ भारत सफल दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में व्यवस्थाएं लड़खड़ा रही हैं।
प्रदेश को स्वच्छ रखने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ही सूचि एप क्रिएट किया गया है जिसमें जिले के सभी संरचनाओं की वर्तमान स्थिति की रिपोर्टिंग की जानी है। इस काम में रायगढ़ जिला फिसड्डी साबित हो रहा है। गांवों में कचरा प्रबंधन सेटअप के अलावा शौचालय आदि की एंट्री भी की जानी है।
रायगढ़ जिले में अब तक पांच इकाइयों की जानकारी डाली जा सकी है। शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, सेग्रीगेशन, डंपिंग, डिस्पोजल आदि के लिए सेटअप बनाया गया है। इसी तर्ज पर गांवों में भी सफाई की जानी है। जिले में कई गांवों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निर्माण भी हुए हैं। महिला समूहों के लिए शेड भी बनाए गए हैं। हकीकत यह है कि इनका उपयोग ही नहीं हो रहा है।
गांवों में सफाई रखने के लिए सरकार ने सूचि एप तैयार किया है। इसमें व्यक्तिगत शौचालय, नाडेप, स्कूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्व सहायता समूह, पंचायत भवन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, आंगनबाड़ी, सेग्रीगेशन शेड, सीएससी, रिक्शा, फिकल स्लज आदि का सर्वे करके एंट्री की जानी है। प्रत्येक जिला पंचायत को अपने कर्मचारियों से सर्वे करवाना है। एप को आए कई महीने हो गए हैं लेकिन जिला पंचायत की ओर से कोई सक्रियता नहीं देखी गई है।
अब तक चार व्यक्तिगत शौचालय और एक तरल अपशिष्ट प्रबंधन को ही सर्वे में दर्ज किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान को पूरा करने के लिए पंचायत स्तर पर काम करना जरूरी है। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई भी व्यवस्था ही नहीं है।
गांवों में भर रहा प्लास्टिक कचरा
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर केवल झूठ कहा जा रहा है। सरपंच और सचिवों को खुली छूट दी गई है। जबकि सच यह है कि अभी तक ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई भी उपाय नहीं किए गए हैं। प्लास्टिक कचरे से हर गांव परेशान है। इसके निराकरण के लिए कोई रास्ता नहीं निकाला गया है।
क्या है सूची एप और इसका उद्देश्य
सूची एप को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इसलिए लागू किया गया ताकि
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हर घर, हर ग्राम पंचायत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो
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खुले में शौच की स्थिति का रीयल टाइम सर्वे हो
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शौचालय उपयोग, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जा सके
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फर्जी रिपोर्टिंग और कागजी खानापूर्ति पर रोक लगे
सरल शब्दों में, सूची एप पारदर्शिता और जवाबदेही का माध्यम है।
रायगढ़ जिला पंचायत की जमीनी हकीकत

रायगढ़ जिले में सूची एप के माध्यम से सर्वे कार्य को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई पंचायतों में
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सर्वे समय पर नहीं हो पा रहा
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एप अपडेट अधूरा है
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फील्ड कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण नहीं मिला
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नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं का बहाना बनाकर काम टाला जा रहा है
जिला पंचायत स्तर पर यह स्थिति बताती है कि डिजिटल सिस्टम को केवल आदेश मानकर छोड़ा जा रहा है, उसे गंभीरता से लागू नहीं किया जा रहा।
सर्वे करने वाले कर्मचारियों की परेशानी
सूची एप में सर्वे का जिम्मा जिन कर्मचारियों और पंचायत कर्मियों पर है, वे खुद कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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कई पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों के पास स्मार्टफोन या अपडेटेड डिवाइस नहीं
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इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर
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तकनीकी खराबी आने पर कोई त्वरित समाधान तंत्र नहीं
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उच्च अधिकारियों का दबाव, लेकिन सहयोग का अभाव
इन सबके कारण सर्वे कार्य बोझ बन गया है, न कि सुधार का साधन।
कागजों पर स्वच्छ भारत, जमीन पर गंदगी
सरकारी रिकॉर्ड में रायगढ़ जिले की कई पंचायतें
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ओडीएफ घोषित
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100 प्रतिशत शौचालय उपयोग वाली
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स्वच्छता में अव्वल
लेकिन जमीनी स्तर पर
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खुले में शौच आज भी जारी है
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कई शौचालय जर्जर या बंद पड़े हैं
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पानी की व्यवस्था नहीं
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कचरा प्रबंधन नाम मात्र का
यह विरोधाभास सवाल खड़ा करता है कि क्या स्वच्छ भारत केवल फाइलों तक सीमित रह गया है?
सूची एप: निगरानी का साधन या दिखावा?

सूची एप का सही उपयोग होता तो
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गलत रिपोर्टिंग पकड़ी जाती
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अधिकारियों की जवाबदेही तय होती
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पंचायतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती
लेकिन रायगढ़ में एप का इस्तेमाल
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पुराने डेटा को दोहराने
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फोटो अपलोड कर औपचारिकता निभाने
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लक्ष्य पूरे दिखाने
तक सीमित नजर आ रहा है।
जिला पंचायत की भूमिका पर सवाल
जिला पंचायत का दायित्व होता है
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सभी जनपद पंचायतों की निगरानी
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प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना
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फील्ड रिपोर्ट का सत्यापन
लेकिन रायगढ़ जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर यह आरोप लग रहे हैं कि
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समीक्षा बैठकें सिर्फ कागजी
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फीडबैक सिस्टम कमजोर
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लापरवाही पर कार्रवाई नहीं
यही वजह है कि जिला पंचायत को स्वच्छ भारत मिशन में फिसड्डी कहा जाने लगा है।
लक्ष्यपूर्ति का दबाव और फर्जी आंकड़े
सरकारी योजनाओं में लक्ष्यपूर्ति का दबाव अक्सर गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
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समय सीमा में रिपोर्ट चाहिए
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आंकड़े ऊपर भेजने की जल्दी
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असली स्थिति जानने की रुचि कम
रायगढ़ में भी कई पंचायतों ने
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बिना सर्वे पूरे किए डेटा अपलोड
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पुराने आंकड़ों को अपडेट बता दिया
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वास्तविक समस्याओं को छिपा लिया
आम जनता की भागीदारी क्यों नहीं
स्वच्छता अभियान तभी सफल होता है जब
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जनता जागरूक हो
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पंचायत पारदर्शी हो
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शिकायतों पर कार्रवाई हो
लेकिन रायगढ़ में
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ग्रामीणों को सूची एप की जानकारी नहीं
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शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था कमजोर
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फीडबैक लेने का कोई ठोस प्रयास नहीं
इससे जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की कमी
सूची एप जैसे डिजिटल टूल तभी सफल होते हैं जब
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कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण मिले
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तकनीकी हेल्पडेस्क सक्रिय हो
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समस्याओं का त्वरित समाधान हो
रायगढ़ में यह व्यवस्था लगभग न के बराबर है। नतीजा यह कि
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एप डर का कारण बन गया
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कर्मचारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं
प्रशासनिक उदासीनता या सिस्टम फेल?
यह सवाल अहम है कि
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क्या जिला पंचायत जानबूझकर लापरवाह है?
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या फिर सिस्टम ही इतना कमजोर है कि सुधार संभव नहीं?
वास्तविकता शायद दोनों का मिश्रण है।
जब
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निगरानी ढीली
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जवाबदेही तय नहीं
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और गलत रिपोर्टिंग पर सजा नहीं
तो योजनाएं कागजों में ही सफल होती हैं।
स्वच्छ भारत मिशन की आत्मा से खिलवाड़
स्वच्छ भारत केवल
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शौचालय निर्माण योजना नहीं
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फोटो और ऐप अपलोड का कार्यक्रम नहीं
यह
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स्वास्थ्य
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सम्मान
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और जीवन स्तर सुधार का मिशन है
जब सूची एप जैसे टूल का गलत या अधूरा उपयोग होता है, तो यह मिशन की आत्मा के साथ खिलवाड़ है।
सुधार के लिए क्या जरूरी
रायगढ़ जिला पंचायत को
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वास्तविक सर्वे पर जोर देना होगा
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फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य करना होगा
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प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता बढ़ानी होगी
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लापरवाही पर स्पष्ट कार्रवाई करनी होगी
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जनता को भी प्रक्रिया में शामिल करना होगा
सूची एप में सर्वे की अनिवार्यता ने स्वच्छ भारत मिशन को पारदर्शी बनाने का अवसर दिया था, लेकिन रायगढ़ जिला पंचायत की वर्तमान स्थिति इस अवसर को गंवाने जैसी प्रतीत होती है। जब तक
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कागजी रिपोर्टिंग की जगह जमीनी सच्चाई
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लक्ष्य की जगह गुणवत्ता
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और दिखावे की जगह जवाबदेही
को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक स्वच्छ भारत केवल फाइलों में ही स्वच्छ बना रहेगा।
आज जरूरत है कि रायगढ़ जिला पंचायत आत्ममंथन करे, वरना आने वाले समय में यह जिला स्वच्छ भारत के कागजी मॉडल का नकारात्मक उदाहरण बन जाएगा।
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