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7 बड़े खुलासे कैसे होती है राशन दुकानों में अनाज की चोरी?

7 बड़े खुलासे राशन दुकानों में हो रही खाद्यान्न की चोरी सबकी मौन सहमति का दर्दनाक सच

राशन दुकानों में चल रहे भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है। जानबूझकर ऐसे लोगों को ठेका दिया जाता है जिनके नाम पर कोई संपत्ति नहीं होती। कोई प्रॉपर्टी हुई भी तो वसूली नहीं होती। रायगढ़ जिले में 110 दुकानों में 12 हजार क्विंटल चावल का गबन पाया गया था। इसकी रिकवरी हुई नहीं और अब गबन के दूसरे मामले सामने आने लगे हैं।छाल तहसील के बेहरामुड़ा गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने राशन दुकानों में चल रही भर्राशाही को फिर से उजागर किया है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसे एक-दो नहीं सैकड़ों दुकानें हैं जहां राशन सामग्री का गबन किया जा रहा है।


राज्य सरकार ने मार्च 2025 की स्थिति में जब सभी उचित मूल्य की दुकानों का भौतिक सत्यापन करने के आदेश दिए थे तब जिले की 110 दुकानों में 12 हजार क्विं. से अधिक चावल गायब मिला था, जिसकी कीमत 5 करोड़ से भी अधिक है। राशन दुकानों में गड़बड़ी को पकडऩे के लिए भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया था। सभी दुकानों में जांच के बाद पता चला कि 110 दुकानों में 12190 क्विं. चावल गायब था। इतने चावल की कीमत करीब 5,07,34,780 रुपए होती है। इसके अलावा चना 82.78 क्विं. (मूल्य 3,81,698 रुपए), केरोसिन 4 लीटर, नमक 220 क्विं. (मूल्य 2.20 लाख रुपए) और शक्कर 108.32 क्विं. (मूल्य 4,76,391 रुपए) भी गबन कर लिया गया।

हितग्राहियों को बांटा जाने वाला चावल कहां गया, यह जांच का विषय है लेकिन पूरा फोकस रिकवरी पर किया गया। अभी तक इसकी रिकवरी नहीं की जा सकी है। खाद्य विभाग ले 2024 तक और उसके बाद पीडीएस दुकानों में गबन का आंकड़ा तैयार किया था। आरआरसी के जरि वसूली के लिए प्रकरण बढ़ाए जाने थे, लेकिन दुकानदारों को चावल का हिसाब बराबर करने का पर्याप्त समय दिया गया। जहां वसूली नहीं कर सके, उसको सस्पेंड करके दूसरे को दुकान सौंप दी। गबन करने वाला मजे में है।


राशन दुकानें: योजना का उद्देश्य और हकीकत का अंतर

PDS का मूल उद्देश्य है—
• गरीब परिवारों को निर्धारित मात्रा में अनाज
• सस्ती दर पर उपलब्ध कराना
• सब्सिडी का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना

लेकिन ज़मीन पर तस्वीर इससे अलग है। कई क्षेत्रों में शिकायतें मिलती हैं कि—
• पूरा अनाज नहीं दिया जाता
• वजन कम निकलता है
• वितरण की तिथि बिना सूचना बदल दी जाती है
• मशीन में आँकड़े कुछ और दर्ज किए जाते हैं
• लाभार्थियों के नाम पर फर्जी एंट्री की जाती है
• स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर होता है

इन सबके बीच असली नुकसान उस गरीब परिवार का होता है जो महीने भर अपनी थाली भरने के लिए इस राशन पर निर्भर रहता है।


खाद्यान्न चोरी कैसे होती है? चोरी के आम तरीके

अनाज की चोरी कोई एक तरीका अपनाकर नहीं होती, बल्कि यह कई स्तरों पर और कई तरह से होती है। कुछ प्रमुख तरीकें—

कम तौल देना

यह सबसे आम तरीका है।
• कार्ड पर 5 किलो लिखा है, लेकिन दिया सिर्फ 4 किलो।
• कोई गरीब परिवार 1 किलो कम होने पर झगड़ा नहीं करता, क्योंकि उसे अपने हिस्से का अनाज मिलना महत्वपूर्ण होता है।

मशीन में फर्जी एंट्री

ई-पॉस मशीनें लगाने का उद्देश्य था पारदर्शिता लाना, लेकिन चतुर दुकानदारों ने इसका भी रास्ता निकाल लिया।
• कार्ड को बिना बुलाए स्कैन करना
• ओटीपी खुद के मोबाइल पर प्राप्त करना
• किसी परिवार के नाम से अनाज निकाल कर बाज़ार में बेचना

स्टॉक में हेरफेर

राशन दुकान में आने वाले स्टॉक और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर रखा जाता है।
• रजिस्टर में फर्जी एंट्री
• अनाज के बोरे कम मात्रा में पहुंचाना
• सप्लाई गोदाम से ही कम वजन भेजा जाना

निम्न गुणवत्ता का अनाज देना

कई दुकानदार अच्छी क्वालिटी का अनाज किसी व्यापारी को बेच देते हैं और गरीब परिवारों को नमी लगे, पुराने या खराब दाने दे देते हैं।

खाद्यान्न को बाजार में बेचना

यह सबसे बड़ी चोरी है।
• चावल, गेहूं, चीनी और मिट्टी का तेल सस्ते में दिया जाता है
• व्यापारी इन्हें महंगे दामों पर खरीद लेते हैं
• दुकानदार को मोटा मुनाफा हो जाता है
• गरीब परिवार को पूरा राशन नहीं मिलता


चोरी में कौन-कौन शामिल होता है? मौन सहमति का असली अर्थ

खाद्यान्न की चोरी एक अकेले दुकानदार की कारस्तानी नहीं होती। इसके पीछे एक पूरा नेटवर्क काम करता है—

दुकानदार

मुख्य भूमिका दुकान संचालक की होती है।
• वजन कम देना
• फर्जी एंट्री
• स्टॉक छिपाना
• बाजार में बेच देना

सप्लाई विभाग के कुछ कर्मचारी

हर कर्मचारी भ्रष्ट नहीं होता, लेकिन कई ऐसे हैं जो—
• स्टॉक की जांच में लापरवाही करते हैं
• कमी मिलने पर भी कार्रवाई नहीं करते
• निरीक्षण रिपोर्ट में “सब सही” लिख देते हैं
• दुकानदारों से मिलीभगत रखते हैं

स्थानीय दलाल या व्यापारी

ये लोग दुकानदारों से अनाज खरीदकर बाजार में बेचते हैं।
कई बार यह अवैध खाद्यान्न बड़े गोदामों या होटलों तक पहुंचाया जाता है।

स्थानीय प्रभावशाली लोग

कई गांवों में कुछ रसूखदार लोग इस व्यवस्था को बचाने का काम करते हैं।
• शिकायतें दबानी
• गरीबों को धमकाना
• दुकानदार का पक्ष लेना

लाभार्थियों का भी मौन

कई बार गरीब परिवार शिकायत नहीं करते क्योंकि—
• उन्हें अगले महीने राशन से वंचित किए जाने का डर होता है
• दुकानदार बदले में व्यवहार बदल सकता है
• सरकारी शिकायत तंत्र पर भरोसा कम होता है
• लंबी प्रक्रिया से गुजरने की क्षमता नहीं होती

इसी मौन ने इस भ्रष्टाचार को एक प्रकार की सामूहिक सहमति में बदल दिया है।


किसका सबसे ज्यादा नुकसान?

सबसे अधिक प्रभावित वही गरीब परिवार होते हैं जिनके लिए यह योजना बनी थी।
• महीनेभर का राशन पूरा नहीं मिलता
• बच्चों के भोजन पर असर
• दाम बढ़ जाने पर बाज़ार से अनाज खरीदना मुश्किल
• कुपोषण का खतरा
• घरेलू बजट बिगड़ना

महिलाओं, मजदूरों, बुजुर्गों और विधवा परिवारों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई देता है।


शिकायत तंत्र: कागज़ पर मजबूती, जमीन पर कमज़ोरी

सरकार ने शिकायत के कई साधन दिए हैं—
• टोल-फ्री नंबर
• पोर्टल
• स्मार्ट कार्ड
• निरीक्षण दल

लेकिन समस्या यह है कि—
• शिकायत दर्ज करना गरीब परिवारों को कठिन लगता है
• कई बार कार्रवाई नहीं होती
• दुकानदार और शिकायतकर्ता का आमने-सामने रहना, विवाद का कारण बनता है
• ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है

इसलिए, लोग चुप रहकर ही आगे बढ़ जाते हैं।


सबकी मौन सहमति क्यों?

यह सबसे बड़ा और गहरा सवाल है।
लोग जानते हैं कि दुकानदार चोरी करता है, फिर भी कोई कुछ नहीं कहता। आखिर क्यों?

डर

दुकानदार अक्सर गांव में प्रभावशाली होता है।
लोग राशन बंद हो जाने का डर रखते हैं।

अज्ञानता

कई लाभार्थी यह ही नहीं जानते कि उन्हें कितना अनाज मिलना चाहिए।

सरकारी तंत्र पर अविश्वास

शिकायत करने पर कार्रवाई हो ही जाएगी, यह भरोसा कम हो गया है।

सुविधा

लोग सोचते हैं—
“झंझट में पड़ने से बेहतर जो मिल रहा है, ले लो।”

लंबी और जटिल प्रक्रिया

कागज़ी काम का झंझट गरीब परिवारों के बस की बात नहीं।


खाद्यान्न चोरी रोकने में सरकार की भूमिका

सरकार ने कई अच्छे कदम उठाए—
• आधार आधारित ई-पॉस सिस्टम
• राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी
• सीसीटीवी अनिवार्यता
• ऑनलाइन स्टॉक डिस्प्ले
• डीबीटी की योजना
परंतु इनका असर तभी दिखेगा जब—
• निगरानी ईमानदारी से होगी
• शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होगी
• दुकानदारों को लाइसेंस रद्द होने का वास्तविक डर होगा


कानून और दंड: क्या कहता है कानून?

खाद्यान्न चोरी केवल अनैतिक काम ही नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है।

कानून के अनुसार—
• Essential Commodities Act के तहत सख्त दंड
• लाइसेंस रद्द
• एफआईआर दर्ज
• जेल की सजा
• जुर्माना
• PDS Control Order के तहत आपराधिक दंडकई बार मामला जांच में ही “ठंडा” पड़ जाता है।


समाधान: चोरी को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?

खाद्यान्न की चोरी रोकने के लिए कुछ बड़े कदम जरूरी हैं—

पूर्ण डिजिटल निगरानी

• राशन दुकानों में लाइव सीसीटीवी
• स्टॉक ऑनलाइन दिखे
• ई-पॉस मशीन से छेड़छाड़ न हो

सामुदायिक निगरानी

गांव की उपभोक्ता समिति सच में काम करे, न कि सिर्फ कागज़ पर।

महिलाओं की निगरानी समिति

स्व-सहायता समूहों को निगरानी का अधिकार दिया जाए।

शिकायत पर तुरंत कार्रवाई

• 24 घंटे में जांच
• दोषी पाए जाने पर दुकान बंद
• पीड़ित परिवार को तुरंत राहत

लाभार्थियों को जागरूक करना

• उन्हें बताना कि उनका अधिकार क्या है
• कितना अनाज दिया जाना चाहिए
• शिकायत प्रक्रिया क्या है

सख्त पैमाने पर जांच

सप्लाई विभाग के जिम्मेदार कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।Kelo Pravah+1


आखिर चुप क्यों रहें? यह सिर्फ चोरी नहीं, गरीब के पेट की लूट है

खाद्यान्न की चोरी केवल सरकारी अनाज की चोरी नहीं है। यह गरीब की थाली से भोजन छीनने जैसा अपराध है।
एक थैला चावल की चोरी एक परिवार को एक सप्ताह भूखा रखने के बराबर है।
लेकिन यदि समाज चुप रहेगा, तो यह चोरी कभी रुकेगी नहीं।
जो सिस्टम मौन सहमति से चल रहा है, उसे बदलने के लिए आवाज़ उठानी ही होगी।

समाज, सरकार और जनता—तीनों को मिलकर इस समस्या का अंत करना होगा।

राशन दुकानें गरीबों के जीवन का आधार हैं।
खाद्यान्न की चोरी केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का चरम रूप है।
इसमें कई स्तरों की मिलीभगत और सार्वजनिक मौन एक बड़ी समस्या बन चुके हैं।
जब तक लाभार्थी जागरूक नहीं होंगे, जब तक शिकायतों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी और जब तक समाज अपने हिस्से की आवाज़ नहीं उठाएगा—यह चोरी चलती ही रहेगी।

अब समय आ गया है कि “मौन सहमति” की जगह “समूहिक जागरूकता और कार्रवाई” ले।
तभी गरीब की थाली फिर से भर सकेगी।

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