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छत्तीसगढ़(2025) में रिकॉर्ड धान खरीदी 22.25 लाख MT, 4.39 लाख किसानों को 5277 करोड़ का भुगतान

छत्तीसगढ़(2025) में रिकॉर्ड धान खरीदी 22.25 लाख MT, 4.39 लाख किसानों की समृद्धि, सुशासन और कृषि‑सशक्तिकरण की बड़ी कहानी

छत्तीसगढ़ को हमेशा से “धान का कटोरा” कहा जाता रहा है। यहाँ की मिट्टी, जलवायु, कृषि‑परंपरा और मेहनतकश किसान मिलकर जो उत्पादन करते हैं, वह राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के खाद्य‑सुरक्षा तंत्र को मजबूती देता है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ ने धान खरीदी के क्षेत्र में ऐसा इतिहास रच दिया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।

राज्य में इस बार कुल 22.25 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हुई। करीब 4.39 लाख किसानों ने अपना धान बेचा और उन्हें कुल 5277 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। ये आँकड़े केवल संख्याएँ नहीं बल्कि उस मेहनत, नीति, सुशासन और पारदर्शिता का प्रमाण हैं जिसने छत्तीसगढ़ की कृषि को एक नई दिशा दी है।

राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला तेजी के साथ जारी हैं। पिछले माह के 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान में पांच दिसम्बर को सवेरे 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार 22 लाख 39 हजार 433 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान की खरीदी हो चुकी है। अब तक 4 लाख 39 हजार 511 पंजीकृत किसानों ने धान बेचा है।

धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत भुगतान हेतु मार्कफेड द्वारा 5277 करोड़ रूपए जारी किए गए है। चालू खरीफ सीजन के लिए इस वर्ष 27 लाख 30 हजार 96 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 31 लाख 51 हजार 771 हेक्टेयर रकबा शामिल है।


 धान खरीदी सिर्फ प्रक्रिया नहीं, किसानों की जीवनरेखा है

धान की खेती छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन के केंद्र में है। राज्य में लाखों किसान आज भी धान को ही अपनी मुख्य फसल के रूप में उगाते हैं। उनके परिश्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सिर्फ सरकारी पहल नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

इस बार सरकार ने समय पर तैयारियाँ कीं, तकनीक को अपनाया, खरीदी केंद्रों को बेहतर बनाया और किसानों के भुगतान को पूरी तरह पारदर्शी तथा त्वरित बनाया। परिणामस्वरूप इस बार एक नई उपलब्धि दर्ज हुई—इतिहास में सबसे तेज, सबसे बड़ी धान खरीदी और सबसे व्यवस्थित भुगतान।


क्यों बनी इस वर्ष धान खरीदी रिकॉर्ड‑तोड़?

 किसानों का भरोसा बढ़ा

जब किसानों को भरोसा हो कि उन्हें समय पर, उचित दाम पर और बिना किसी झंझट के भुगतान मिलेगा, वे बेझिझक सरकारी केंद्रों में धान बेचते हैं।
इस वर्ष सरकार की नीतियाँ सरल, पारदर्शी और किसान‑हितैषी थीं—

इस भरोसे ने लाखों किसानों को सरकारी खरीदी की ओर आकर्षित किया।


 MSP और अतिरिक्त सहायताओं ने भूमिका निभाई

धान खरीदी के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई अन्य वित्तीय सहायताओं का सीधा फायदा किसानों को मिला।

इन सब कारणों ने मिलकर रिकॉर्ड खरीद की राह बनाई।


 खरीदी व्यवस्था में तकनीकी सुधार

इस वर्ष छत्तीसगढ़ ने तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया—

तकनीक का उद्देश्य सिर्फ सुगमता बढ़ाना नहीं बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। अवैध परिवहन, फर्जी पंजीयन और पुनर्विक्रय जैसी समस्याओं पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया गया।


 प्रशासन की सख्त निगरानी और बेहतर तैयारियाँ

प्रत्येक जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव‑स्तर पर अधिकारियों की तैनाती की गई।

इन तैयारियों ने खरीदी प्रक्रिया को सुचारू रखा।


धान खरीदी की प्रक्रिया: किसान से लेकर गोदाम तक

किसान धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचता है, लेकिन इसके पहले कई चरणों से गुज़रता है। इन चरणों को समझना जरूरी है—


पंजीयन (Registration)

खरीफ सीजन के शुरु होते ही किसान अपनी फसल का पंजीयन करवाते हैं।
पंजीकरण के दौरान—

इस बार लाखों किसानों ने समय पर पंजीयन कराया, जिससे खरीदी का दायरा और बड़ा हुआ।


 टोकन सिस्टम

इस वर्ष “टोकन प्रणाली” को और अधिक व्यवस्थित किया गया।


केंद्र पर धान की जाँच

धान खरीदी केंद्रों में किसानों का धान निम्न चरणों से गुजरता है—

स्वीकृति के बाद किसान को तौल पर्ची मिलती है।


 भुगतान

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण है— सीधा भुगतान


 धान का उठाव और भंडारण

धान खरीदी के बाद उसे गोदामों और चावल मिलों तक पहुँचाया जाता है।
धान से चावल बनाकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन और अन्य योजनाओं में उपयोग किया जाता है।


जिलों का योगदान — किसने निभाई प्रमुख भूमिका?

इस वर्ष हर जिले ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन कुछ जिलों ने असाधारण प्रदर्शन किया।

इन जिलों की मेहनत और व्यवस्था ने राज्य के कुल खरीद आँकड़े को रिकॉर्ड तक पहुँचाया।


किसानों को क्या मिला — सिर्फ पैसा नहीं, सम्मान और सुरक्षा भी

 आर्थिक सशक्तिकरण

किसानों को मिली राशि उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई।


 आत्मविश्वास में वृद्धि

धान खरीदी अभियान की सफलता ने किसानों में विश्वास भरा है कि—


 समय पर भुगतान का लाभ

किसानों को कई पूर्व वर्षों में भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता था।
लेकिन इस बार:


 कर्ज से राहत

जो किसान पहले साहूकारों या महाजनों से कर्ज लेते थे, इस बार उन्हें ऐसी जरूरत बहुत कम पड़ी।
सरकार द्वारा समय पर भुगतान ने उनकी आर्थिक निर्भरता कम कर दी।


सरकारी तैयारियाँ: तकनीक + प्रबंधन + सुशासन का उत्कृष्ट मिश्रण

 डिजिटलाइजेशन

इन सुविधाओं ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और जन‑हितैषी बनाया।


अवैध गतिविधियों पर सख्ती

राज्य सरकार ने—

के माध्यम से अवैध धान परिवहन पर पूरी तरह नकेल कसी।


खरीदी केंद्रों का आधुनिकीकरण

इन सुधारों से किसानों का अनुभव बेहतर हुआ।


चुनौतियाँ जो अभी भी बनी हुई हैं

हालाँकि यह खरीदी अभियान बेहद सफल रहा, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भविष्य में सामने आ सकती हैं।

 भंडारण क्षमता

इतने बड़े पैमाने पर धान खरीदी के लिए अधिक गोदामों की आवश्यकता होती है।
भविष्य में—


चावल मिलों की क्षमता

धान को चावल में परिवर्तित करने में मिलों की क्षमता अहम है।


 मौसम और जलवायु परिवर्तन

धान की फसल पूरी तरह जलवायु पर निर्भर है।
अचानक बारिश, सूखा या तापमान में बदलाव उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।


 फर्जी पंजीयन व अनियमितताएँ

कुछ जगह इस तरह के मामले सामने आते हैं।
भविष्य में


राज्य के लिए इस उपलब्धि का महत्व

 कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत हुई

धान खरीदी से किसानों की आय बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण बाज़ारों में आर्थिक गतिविधियाँ तेज हुईं।


 रोजगार को बढ़ावा

धान उठाव, परिवहन, मिलिंग, भंडारण—
इन सब प्रक्रियाओं में हजारों लोगों को काम मिलता है। हरिभूमि+2The Rural Press+2


 सार्वजनिक वितरण प्रणाली मजबूत हुई

काफी मात्रा में चावल उपलब्ध होने से—

को लाभ मिलता है।


 राज्य की छवि मजबूत

इस वर्ष की धान खरीदी ने राज्य को कृषि क्षेत्र में अग्रणी के रूप में मजबूत पहचान दिलाई है।


छत्तीसगढ़ ने रचा कृषि इतिहास

इस वर्ष हुई 22.25 लाख MT धान खरीदी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि सरकार, किसानों और प्रशासन के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

यह सच है कि छत्तीसगढ़ ने इस खरीदी सीजन में एक नई मिसाल कायम की है —
“किसान सम्मान और कृषि सशक्तिकरण की मिसाल”

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