4 महीने पहले SDM ने किया डायवर्सन निरस्त, अब बचाने की तैयारी — रायगढ़ में प्रशासनिक विवाद

भारत में भूमि विवाद, प्रशासनिक फैसले और जमीन के उपयोग को लेकर अक्सर टकराव देखने को मिलता है। हाल ही में रायगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में एक विवाद सामने आया है, जिसमें पूर्व SDM ने एक डायवर्सन आवेदन को निरस्त किया था, लेकिन चार महीने बाद भी उस निर्णय को लागू नहीं किया गया। वर्तमान SDM और तहसीलदार पर आरोप है कि वे गोलमोल रवैया अपनाकर मामला प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद प्रशासन, कानून और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को दर्शाता है।
एक कारोबारी ने बिना डायवर्सन के जमीन पर गोदाम बना लिया और व्यावसायिक उपयोग भी शुरू कर दिया। जानकारी मिली कि कोटवारी जमीन पर रास्ता बना लिया गया। गांव के मंदिर जाने की पगडंडी को बंद कर दिया गया। पता चला कि पूर्व एसडीएम ने डायवर्सन आवेदन ही निरस्त कर दिया था। कलेक्टर के आदेश के बावजूद वर्तमान एसडीएम और तहसीलदार कारोबारी के बचाव में आ गए हैं। यह मामला सरिया से बोंदा रोड पर पंचधार का है।
यहां व्यवसायी रुपेश मेहर की भूमि खनं 1038/5 रकबा 0.1980 हे और खनं 1038/6 रकबा 0.1330 हे. स्थित है। इस भूमि के बाईं ओर मेर रोड से लगी हुई मीना देवी की कृषि भूमि खनं 1038/1 स्थित है। सामने कोटवारी सेवा भूमि खनं 1033 रकबा 0.4410 हे. है। रुपेश मेहर ने अपनी जमीन पर लंबा-चौड़ा गोदाम का निर्माण किया है। इसमें आरआर स्टील के नाम से फर्म भी खोली है।
इस गोदाम तक जाने का रास्ता नहीं था, इसलिए रुपेश ने सामने की कोटवारी भूमि पर ही अतिक्रमण कर लिया है। दादागिरी करते हुए शासकीय कोटवारी जमीन को अपने कब्जे में कर लिया है। इस पर तार भी घेर लिया है। राजस्व विभाग में सांठगांठ के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हुई। यहीं पर पुजेरीपाली के ऐतिहासिक स्वयंभू शिव मंदिर जाने के लिए संकरा रास्ता था।
उस रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसकी शिकायत कलेक्टर संजय कन्नौजे से हुई तो उन्होंने सारंगढ़ एसडीएम और सरिया तहसीलदार को जांच के आदेश दिए। दोनों ही अधिकारी जांच और कार्रवाई से कारोबारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। कोटवारी जमीन पर शासन का आधिपत्य पाने के लिए कोई कोशिश नहीं हो रही है। Kelo Pravah
जुलाई में हुआ था डायवर्सन आवेदन निरस्त
पंचधार के कोटवारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले रुपेश मेहर ने एसडीएम के समक्ष खनं 1038/5 रकबा 0.1980 हे और खनं 1038/6 रकबा 0.1330 हे. के डायवर्सन के लिए आवेदन किया था। 28 जुलाई को एसडीएम ने आवेदन खारिज कर दिया था। पटवारी प्रतिवेदन में बताया गया था कि उक्त भूमि तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग राजस्व अभिलेखों में नहीं है। यहीं पर कोटवारी भूमि और अन्य भूमिस्वामियों की जमीन से होकर मंदिर जाने का रास्ता भी बना है। इतने स्पष्ट प्रतिवेदन को भी वर्तमान एसडीएम और तहसीलदार नहीं मान रहे।
मामले का मूल — भूमि, रास्ता और गोदाम
पंचधार के पास स्थित दो खसरा संख्या 1038 के भूखंड (0.1980 हेक्टेयर और 0.1330 हेक्टेयर) पर एक व्यवसायी ने गोदाम निर्माण शुरू किया। इन भूखंडों के सामने कोटवारी सेवा भूमि (खसरा संख्या 1033 — लगभग 0.4410 हेक्टेयर) है, जहाँ से गाँव के लोगों का मंदिर तक जाने का रास्ता था।
व्यवसायी ने बिना वैध रास्ते के भूमि तक पहुँचने के लिए कोटवारी जमीन पर कब्जा कर लिया और गोदाम का उपयोग व्यावसायिक रूप से शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि सरकारी कोटवारी भूमि का कोई वैध डायवर्सन रिकॉर्ड में नहीं है, फिर भी निर्माण कार्य जारी रहा।
डायवर्सन क्या है और क्यों जरूरी है?
राजस्व प्रशासन में डायवर्सन का अर्थ होता है — भूमि उपयोग या रास्ता बदलने की अनुमति। विशेषकर ऐसी जमीनों पर, जहाँ सार्वजनिक रास्ता या मार्ग रिकॉर्ड में नहीं है, किसी भी निर्माण या मार्ग परिवर्तन से पहले डायवर्सन आवेदन और अनुमति अनिवार्य होती है।
SDM का निर्णय इस मामले में निर्णायक होता है, क्योंकि उनका काम होता है राजस्व रिकॉर्ड, भूमि उपयोग और सार्वजनिक हित का संतुलन बनाना।

पूर्व SDM का निर्णय — आवेदन निरस्त
28 जुलाई को जब व्यवसायी ने डायवर्सन के लिए आवेदन किया, पूर्व SDM ने इसे खारिज कर दिया। मुख्य कारण थे:
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कोटवारी भूमि तक पहुंचने का कोई वैध रास्ता रिकॉर्ड में नहीं होना।
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यह रास्ता सार्वजनिक मार्ग का हिस्सा था।
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भूमि उपयोग नियमों और राजस्व कानून के अनुरूप आवेदन पूरी तरह से मान्य नहीं था।
पूर्व SDM ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना वैध मार्ग और रिकॉर्ड के डायवर्सन नहीं दिया जा सकता।
चार महीने बाद की स्थिति
चार महीने बीतने के बाद भी:
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कोटवारी जमीन पर अवैध कब्जा जारी है।
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गोदाम का संचालन बिना रोक-टोक जारी है।
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वर्तमान SDM और तहसीलदार पर आरोप है कि वे कारोबारी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने कलेक्टर से शिकायत की, जिसके बाद जांच का निर्देश दिया गया। लेकिन अधिकारी स्पष्ट कदम उठाने के बजाय गोलमोल रवैया अपना रहे हैं।
गोलमोल जांच के संकेत
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार:
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जांच में देरी: प्रक्रिया लंबित है और अवैध कब्जा जारी है।
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राजस्व रिकॉर्ड की अवहेलना: पटवारी रिपोर्ट और रिकॉर्ड होने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे।
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धार्मिक और सामाजिक प्रभाव: मंदिर जाने का मार्ग बंद होने से धार्मिक गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं।
इससे यह धारणा बन रही है कि प्रशासनिक दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण निर्णय लागू नहीं हो रहा।
कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा
1. राजस्व रिकॉर्ड और डायवर्सन
राजस्व कानून के अनुसार, भूमि का मार्ग बदलना या किसी सरकारी भूमि पर निर्माण करना केवल डायवर्सन अनुमति लेने के बाद ही वैध है।
2. SDM का अधिकार और कर्तव्य
SDM के कर्तव्य:
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राजस्व रिकॉर्ड की जांच करना।
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पटवारी और कनिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट लेना।
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निर्णय में सार्वजनिक हित का ध्यान रखना।
पूर्व SDM ने यही किया और आवेदन निरस्त कर दिया।
3. राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत
स्थानीय शिकायतों के अनुसार:
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वर्तमान SDM और तहसीलदार ने कठोर कार्रवाई नहीं की।
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कारोबारी के पक्ष में निर्णय बदलने के प्रयास चल रहे हैं।
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कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक सुस्ती का संकेत देता है।
समाज पर प्रभाव
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विश्वासघात की भावना: निर्णय लागू न होने से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कम हुआ।
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धार्मिक और सामाजिक परेशानियाँ: मंदिर जाने का रास्ता बंद।
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सामाजिक न्याय की बहस: प्रभावशाली व्यक्ति की अवैध गतिविधियों को रोकने में प्रशासन की देरी।
संभावित अगली कार्रवाई
1. कलेक्टर की सख्त निगरानी
जांच की जिम्मेदारी कलेक्टर को दी गई है। उनसे अपेक्षा है कि वे बिना देरी के भूमि खाली कराने के निर्देश जारी करें।
2. उच्च न्यायालय या प्रशासनिक अपील
लोक शिकायतकर्ता PIL के जरिए न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं।
3. फैसले के पालन की निगरानी
निर्णय के पालन में देरी पर विजिलेंस विभाग या राजस्व जांच विभाग जांच कर सकता है।
यह मामला प्रशासनिक फैसलों के पालन, भूमि कानून, और प्रभावशाली लोगों के दबाव के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाता है।
चार महीने पहले लिया गया स्पष्ट निर्णय अगर लागू नहीं होता, तो यह प्रशासनिक सुस्ती, नीति पालन में ढील, और न्याय प्रक्रिया में देरी का उदाहरण बनता है।
यह सिर्फ़ स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि भूमि अधिकार, सार्वजनिक मार्ग और प्रशासनिक आदेश का निष्पक्ष पालन कितना महत्वपूर्ण है।
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