2025 कोकड़ीतराई जलाशय में भू‑माफिया द्वारा फ्लाईएश डालना पर्यावरण और समाज पर गंभीर असर

कोकड़ीतराई जलाशय रायगढ़ जिले का एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है। यह जलाशय वर्षों से आसपास के गाँवों और कृषि क्षेत्रों के लिए पानी का मुख्य साधन रहा है। इसके माध्यम से कृषि, पेयजल और पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रहता था।
हालांकि, हाल ही में इस जलाशय के कुछ हिस्सों में भू‑माफियाओं ने कब्ज़ा जमा लिया है और वहाँ थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाले फ्लाईएश को जमा करके जमीन समतल करने का कार्य शुरू कर दिया है। इस अवैध गतिविधि ने जलाशय के प्राकृतिक और सामाजिक महत्व को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
किरोड़ीमल नगर के कोकड़ीतराई जलाशय की जमीन पर धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहा है। खास बात यह है कि भू-माफिया उद्योगों से निकलने वाले फ्लाईएश का उपयोग खुलेआम पाटने में कर रहे हैं। अब तक हजारों टन फ्लाईएश जलाशय में डाल कर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। वहीं स्टाम्प पेपर में लिखा पढ़ी कर कौडिय़ों के दाम जमीन बेचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
बताया जा रहा है कि यहां अब तक लगभग दो से तीन सौ मकान बन चुके हैं। जलाशय का तकरीबन 40 प्रतिशत हिस्सा समतल हो चुका है। आश्चर्य की बात यह है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसका फायदा अतिक्रमणकारी उठा रहे हैं।
किरोड़ीमल नगर से लगे 895 हेक्टेयर कमाण्ड एरिया वाले कोकड़ीतराई जलाशय से पूर्व में आस-पास के गांवों में सिचाई की योजना बनाई गई थी, परंतु योजना केवल कागजों पर ही रह गई। वहीं, जलाशय में जल स्तर कम होने का फायदा भू-माफिया उठाने लगे। जिंदल उद्योग के कारण किरोड़ीमलनगर की आबादी भी बढऩे लगी है और इसका फायदा उठाते हुए भू-माफिया पूर्व में जलाशय की सूखी जमीन पर फ्लाईएश पाट कर समतलीकरण करते हुए अवैध रूप से कब्जा जमा लिया।
वहीं स्टांप पेपर पर लिखा पढ़ी कर बाहर से काम करने आये लोगों को कौडिय़ों के दाम पर जमीन बेच दी। शुरूआत में झोपड़ीनुमा घर बनाये गये थे जो अब पक्के मकान में तब्दील हो गये हैं। भू-माफियाओं का लालच इतने में नहीं रूका और अब जलाशय में फ्लाईएश डालकर समतलीकरण करने का कार्य किया जा रहा है।
फ्लाईएश क्या है और क्यों खतरनाक है?

फ्लाईएश वह बारीक औद्योगिक अवशेष है जो थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के जलने से उत्पन्न होता है। इसे नियंत्रित तरीके से उपयोग किया जा सकता है, जैसे सीमेंट निर्माण और सड़क निर्माण में।
लेकिन, अनियंत्रित और अवैध डंपिंग पर्यावरण के लिए खतरनाक है। यह जल स्रोतों को प्रदूषित करता है, मिट्टी की उर्वरता घटाता है, वायु प्रदूषण बढ़ाता है और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न करता है। फेफड़ों और त्वचा से जुड़े रोगों का खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर उन लोगों में जो लगातार फ्लाईएश के प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं।
अब तक हजारों टन फ्लाईएश जलाशय में उड़ेल दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक जलाशय का तकरीबन 40 प्रतिशत हिस्सा अब तक अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। स्थानिय लोगों का कहना है कि जलाशय की वजह से पूर्व में किरोड़ीमल नगर का भूजल स्तर भी काफी उपर था परंतु जलाशय को पाटने की वजह से अब भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।
वहीं यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ ही माह में कोकड़ीतराई जलाशय का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा जिससे जल संकट क्षेत्र में गहरा सकता है। कोकड़ीतराई जलाशय को पाट कर समतलीकरण करने के लिए लगातार फ्लाईएश का उपयोग किया जा रहा है।
वहीं फ्लाईएश खुले मेें डाल दिये जाने से तेज हवा चलने पर उड़ कर आस पास के घरों में जा रहा है जिससे काफी प्रदुषण भी फैल रहा है। इतनी भारी मात्रा में अवैध तरीके से फ्लाईएश डंप करना ही पर्यावरण विभाग की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। विभाग की ओर से इसकी सुध आज पर्यंत नहीं ली गई है।
कोकड़ीतराई जलाशय में हो रही अवैध गतिविधियाँ
भू‑माफिया द्वारा कब्ज़ा
भू‑माफियाओं ने जलाशय के लगभग 40% हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है। इस हिस्से को अवैध रूप से भरकर जमीन समतल की जा रही है। इसका उद्देश्य जमीन को बेचने या उस पर घर और अन्य निर्माण कार्य करना है।
फ्लाईएश का इस्तेमाल
भू‑माफियाओं ने फ्लाईएश का उपयोग जलाशय के हिस्सों को भरने के लिए किया। इसे जमा करके जमीन को समतल किया जा रहा है, ताकि उस पर अवैध निर्माण और बिक्री की जा सके।
बिक्री के लिए जमीन
समतल किए गए हिस्सों पर भू‑माफिया जमीन बेच रहे हैं। कई बार बाहरी लोगों को भी यह जमीन बेच दी जाती है, जिससे विवाद और सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
प्रशासन की उदासीनता
स्थानीय लोग बताते हैं कि प्रशासन और राजस्व विभाग के पास इस मामले की जानकारी के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पिछले बार जांच कमेटी बनाई गई थी, लेकिन उसके निष्कर्षों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व में हुई जांच ठण्डे बस्ते में
क्षेत्र के लोगों ने पूर्व में जलाशय में हो रहे अवैध कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से की थी। इसके बाद एक जांच कमेटी का गठन भी किया गया था तथा कमेटी द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया था कि जलाशय को पाट कर अवैध रूप से जमीन बिक्री की जा रही है और मौके पर सौ से अधिक मकानों का निर्माण होना भी पाया गया था।
इसके बाद जांच रिपोर्ट ठण्डे बस्ते में डाल दी गई। इस प्रशासनिक उदासीनता का फायदा उठाते हुए एक बार फिर भू- माफिया सक्रिय हो गये हैं और जलाशय की सूखी जमीन को तो पहले ही बेच चुके हैं अब जलभराव वाले हिस्से को पाट कर कब्जा किया जा रहा है। वहीं जांच के समय जितने मकान मिले थे अब उससे दो गुना मकानों का निर्माण और हो गया है । Kelo Pravah
जलाशय और आसपास के क्षेत्र पर प्रभाव

भूजल स्तर में गिरावट
जलाशय का पानी भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करता है। जलाशय के हिस्से को भरने से भूजल स्तर गिर रहा है, जिससे कृषि और पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है।
प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम
फ्लाईएश खुले में जमा होने से हवा में उड़कर आसपास के क्षेत्रों में फैलता है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों में श्वसन, त्वचा और आंखों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
जलाशय का समतलीकरण प्राकृतिक आवास और वनस्पति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जलाशय की मछलियाँ, पक्षी और अन्य जलीय जीवन प्रभावित होते हैं। यह पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ता है।
स्थानीय लोगों की समस्याएँ
-
जल स्रोतों की कमी: जलाशय के हिस्से भर जाने से पानी की उपलब्धता घट गई है।
-
अवैध बिक्री के कारण विवाद: कई लोगों ने जमीन खरीद ली थी, अब विवाद उत्पन्न हो गया है।
-
सुरक्षा का अभाव: प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थानीय लोग सुरक्षा और न्याय की आशा खो चुके हैं।
कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण
पर्यावरणीय कानून
भारत में फ्लाईएश और औद्योगिक अवशेष के निपटान के लिए सख्त नियम हैं। Environmental Impact Assessment और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और कार्रवाई की जा सकती है।
पिछली जांच
स्थानीय अधिकारियों ने पहले जलाशय में अवैध कब्ज़ा और फ्लाईएश जमा करने की जांच की थी। लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे समस्या बढ़ती रही।
बड़े परिप्रेक्ष्य में समस्या
कोकड़ीतराई जलाशय की स्थिति अकेली नहीं है। राज्य में कई जगह फ्लाईएश का अवैध डंपिंग और भू‑माफिया की गतिविधियाँ आम हो चुकी हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है बल्कि स्थानीय समाज पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
संभावित समाधान
-
प्रशासनिक कार्रवाई: जलाशय की सीमा चिन्हित करके अवैध कब्ज़े हटाना।
-
फ्लाईएश प्रबंधन: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फ्लाईएश के सही निपटान के लिए नियम लागू करना।
-
स्थानीय समुदाय की भागीदारी: लोगों को जागरूक करना और उनकी मदद से जलाशय बचाना।
-
न्यायालयीन हस्तक्षेप: लोकहित याचिका के माध्यम से न्यायालय से आदेश लेना।
कोकड़ीतराई जलाशय का मामला सिर्फ़ स्थानीय विवाद नहीं है। यह एक गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक समस्या है। अवैध कब्ज़ा, फ्लाईएश का अनियंत्रित डंपिंग और प्रशासन की उदासीनता ने जलाशय को खतरे में डाल दिया है।
समय है कि प्रशासन, न्यायपालिका और स्थानीय लोग मिलकर जलाशय को बचाएं, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखें और भू‑माफिया की गतिविधियों को रोका जाए। जलाशय को सुरक्षित रखना न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।
Next-
