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मुख्यमंत्री जनदर्शन: 5 नई पहलें, पैरों से चित्र उकेरने वाली पूनम को मिली छात्रवृत्ति और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा सहयोग

मुख्यमंत्री जनदर्शन: पैरों से चित्र उकेरने वाली पूनम को मिली नई उड़ान — अब पढ़ाई के साथ छात्रवृत्ति और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा सहयोग

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री जनदर्शन” कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शासन केवल प्रशासनिक तंत्र नहीं, बल्कि संवेदनाओं और मानवीयता से भरा हुआ एक परिवार है। इस बार इस कार्यक्रम में दो ऐसे व्यक्तित्वों की कहानी सामने आई जिन्होंने समाज को यह सिखाया कि शारीरिक सीमाएँ नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति ही इंसान की असली ताकत होती है।

एक तरफ हैं पैरों से चित्र बनाने वाली पूनम, जो अपनी कला से लोगों को चकित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर हैं एक दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी, जिनके जज्बे ने सभी का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोनों को सहायता और सम्मान देकर यह संदेश दिया कि राज्य सरकार हर प्रतिभा के साथ खड़ी है — चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो।

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 पूनम: पैरों से सपनों को आकार देने वाली कलाकार

रायगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव की रहने वाली पूनम बचपन से ही शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रही हैं। उनके हाथ ठीक से काम नहीं करते, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी कला का आधार बना लिया।
पूनम पैरों से ऐसी शानदार पेंटिंग्स बनाती हैं, जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह जाता है। उनकी चित्रकारी में रंगों की गहराई के साथ जीवन के संघर्ष की झलक भी दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री जनदर्शन के दौरान जब पूनम की प्रतिभा का जिक्र हुआ, तो मुख्यमंत्री बघेल ने तुरंत निर्देश दिए कि पूनम की शिक्षा में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने यह घोषणा की कि पूनम को विशेष विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी छात्रवृत्ति भी दी जाएगी ताकि वह आगे की पढ़ाई और कला दोनों में अपना नाम रोशन कर सकें।

“पूनम जैसी बच्चियां हमारे समाज की प्रेरणा हैं। राज्य सरकार उनके सपनों को पूरा करने में हर संभव मदद करेगी।”
— मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

यह घोषणा सुनकर पूनम के चेहरे पर जो मुस्कान आई, वह पूरे जनदर्शन का सबसे भावुक क्षण बन गया।


 दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी को मिलेगा खेल सामग्री का सहयोग

मुख्यमंत्री जनदर्शन में एक और कहानी ने सबका ध्यान खींचा — एक दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी की। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद इस खिलाड़ी ने राज्य और देश दोनों स्तरों पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। लेकिन खेल सामग्री की कमी के कारण उसका प्रशिक्षण बाधित हो रहा था।

जब इस मुद्दे को जनदर्शन में रखा गया, तो मुख्यमंत्री बघेल ने तत्काल खेल विभाग को निर्देश दिया कि खिलाड़ी को सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए — जैसे रग्बी व्हीलचेयर, यूनिफॉर्म, जर्सी, और सुरक्षा उपकरण।
उन्होंने कहा कि “प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती”, और सरकार का दायित्व है कि ऐसे खिलाड़ियों को उचित सुविधाएँ मिलें।

राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि विशेष योग्यताओं वाले खिलाड़ियों को उचित संसाधन और अवसर प्रदान किए जाएँ। विशेषकर दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए खेल सामग्री और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पहल के तहत खिलाड़ी को रग्बी खेलने के लिए आवश्यक सभी उपकरण, जैसे विशेष रग्बी बॉल, हेलमेट, सुरक्षात्मक गियर और प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम न केवल खिलाड़ी की व्यक्तिगत क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगा।


 दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए खेल की महत्वता

दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए खेल केवल एक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मविश्वास, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक सशक्तिकरण का भी जरिया है। रग्बी जैसे खेल में शारीरिक मजबूती, टीमवर्क और धैर्य की आवश्यकता होती है।

राज्य सरकार की यह पहल यह संदेश देती है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक चुनौती प्रतिभा के विकास में बाधक नहीं हो सकती। यदि उन्हें सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो वे खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।


 खिलाड़ी और परिवार की प्रतिक्रिया

खिलाड़ी और उसके परिवार ने इस पहल को सकारात्मक रूप में लिया है। उनका कहना है कि इस सहयोग से खिलाड़ी का मनोबल बढ़ेगा और वह अपने खेल में और अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएगा।

खिलाड़ी ने कहा, “मुझे अब और अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली है। खेल सामग्री मिलने से मेरी तैयारी और बेहतर होगी और मैं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी छाप छोड़ सकता हूँ।”


 मुख्यमंत्री जनदर्शन: जनता से सीधा संवाद

“मुख्यमंत्री जनदर्शन” सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह जनता और सरकार के बीच संवाद का सेतु है। इसमें आम नागरिक सीधे मुख्यमंत्री से अपनी समस्याएँ, सुझाव या निवेदन रख सकते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है —

इस कार्यक्रम के ज़रिए हजारों परिवारों को राहत मिली है। चाहे वह उपचार के लिए आर्थिक सहायता हो, शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति हो या दिव्यांगों के लिए विशेष उपकरण — हर ज़रूरत पर सरकार तत्पर रहती है।RIG24


 पूनम की कहानी क्यों है प्रेरणादायक?

पूनम का संघर्ष और उनका हुनर सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख है।
जहाँ कई लोग छोटी असफलताओं से हार मान लेते हैं, वहीं पूनम ने यह साबित किया कि अगर मन में आत्मविश्वास हो तो शरीर की सीमाएँ कभी रोक नहीं सकतीं।

उनकी पेंटिंग्स अब सोशल मीडिया पर भी सराही जा रही हैं। कुछ कला संस्थानों ने उन्हें अपनी प्रदर्शनी में शामिल करने का निमंत्रण भी दिया है।
सरकार द्वारा दी गई छात्रवृत्ति से पूनम अब उच्च शिक्षा और कला दोनों में आगे बढ़ पाएँगी।


 दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए नई पहल

मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी कहा कि आने वाले समय में राज्य सरकार

दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी

को और सशक्त बनाएगी।
इस योजना के अंतर्गत—

यह कदम न केवल खेल को प्रोत्साहन देगा, बल्कि समाज में समावेश और समानता की भावना को भी मजबूत करेगा।


 मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में कई बार ऐसे मानवीय निर्णय लिए हैं जो सीधे जनभावनाओं से जुड़े हैं।
चाहे किसानों के ऋण माफ करने की बात हो, छात्रवृत्ति योजनाएँ हों, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन देना हो या दिव्यांगजनों के लिए सहायता — हर क्षेत्र में उनका दृष्टिकोण संवेदनशील रहा है।

जनदर्शन के दौरान जब वह लोगों की बातें सुनते हैं, तो वह सिर्फ मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक सहानुभूति से भरे जनसेवक के रूप में नजर आते हैं।

 एक जनसेवक की मानवीय पहचान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का प्रशासनिक दृष्टिकोण हमेशा से ही जनता के जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पहलें केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लोगों के भावनात्मक और सामाजिक जीवन को भी छूती हैं।
मुख्यमंत्री जनदर्शन जैसे कार्यक्रम इस बात का प्रतीक हैं कि शासन तब ही प्रभावी होता है जब उसमें संवेदनशीलता और सहानुभूति शामिल हो।

 हर वर्ग तक पहुँचने वाला शासन

मुख्यमंत्री बघेल का मानना है कि राज्य तभी मजबूत होगा जब समाज के हर वर्ग — चाहे वह किसान हो, छात्र, महिला, मजदूर या दिव्यांग व्यक्ति — सबको बराबरी का अवसर मिले।
इसी सोच से उन्होंने कई मानवीय पहल की हैं, जैसे:

 जनदर्शन में दिखाई देती संवेदना

मुख्यमंत्री जनदर्शन में जब कोई आम नागरिक अपनी समस्या लेकर आता है, तो मुख्यमंत्री खुद ध्यान से सुनते हैं। वे केवल प्रशासनिक आदेश नहीं देते, बल्कि कोशिश करते हैं कि मानवता के स्तर पर समाधान निकले।
जैसे इस बार पूनम और रग्बी खिलाड़ी के मामले में हुआ — उन्होंने केवल मदद की घोषणा नहीं की, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में भी उन्हें संघर्ष नहीं करना पड़े।

 एक जननायक की पहचान

भूपेश बघेल की यह पहलें दिखाती हैं कि शासन तभी सफल होता है जब उसका मुखिया जनता से जुड़ा हुआ हो।
वे अपने हर निर्णय में इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी की प्रतिभा परिस्थितियों की भेंट न चढ़े, और कोई भी नागरिक खुद को अकेला महसूस न करे।

“राज्य की प्रगति तभी संभव है जब हर नागरिक को सम्मान और अवसर मिले।”
— मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री की यह संवेदनशील पहलें न केवल शासन का चेहरा बदल रही हैं, बल्कि जनता के दिलों में विश्वास और आत्मबल भी जगा रही हैं।
आज छत्तीसगढ़ में शासन और जनभावनाओं के बीच जो पुल बना है, वह इन्हीं मानवीय प्रयासों की देन है।


 समाज के लिए सीख

यह खबर सिर्फ एक प्रशासनिक घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश है —

मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम में पूनम और दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में असंभव कुछ भी नहीं। सरकार का समर्थन, समाज का सहयोग और व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति — ये तीनों मिलकर किसी भी बाधा को सफलता में बदल सकते हैं।

छत्तीसगढ़ का यह जनदर्शन अब सिर्फ शिकायत समाधान का मंच नहीं, बल्कि आशा, अवसर और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है।
पूनम के रंगों में अब सरकार की उम्मीदें भी शामिल हैं — और यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगी।

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