रायगढ़ जिले में धान खरीदी कार्य प्रगति पर 5.24 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी पूरी, व्यवस्था बनी सुचारू

छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है, और इसका सबसे बड़ा कारण है यहाँ के किसानों का धान उत्पादन में अद्वितीय योगदान। हर वर्ष खरीफ सीजन के बाद प्रदेश में धान खरीदी का विशाल अभियान शुरू होता है, जिसमें लाखों किसान अपनी मेहनत की फ़सल सहकारी समितियों के माध्यम से बेचते हैं। इस वर्ष भी रायगढ़ जिले में धान खरीदी का कार्य तेज़ी से जारी है और अब तक 5.24 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है, जो जिले के किसान हितैषी माहौल और सुचारू व्यवस्थाओं का बड़ा संकेत है।
जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं सतत रूप से संचालित किया जा रहा है। राज्य शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिले में अब तक 9734 किसानों से कुल 5,24,936.80 क्विंटल धान की खरीदी पूर्ण की जा चुकी है। इनमें 3,865 सीमांत कृषक, 5135 लघु कृषक तथा 734 दीर्घ कृषक शामिल हैं। वहीं इस अवधि में किसानों को 10186.28 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। किसानों से 2044.69 लाख रुपये की ऋण वसूली भी की गई है। धान खरीदी प्रक्रिया के अंतर्गत 4434 कृषकों ने अब तक कुल 238.75 हेक्टेयर कृषि रकबा किसानों द्वारा समर्पित किया गया है।
उपार्जन केंद्रों में टोकन व्यवस्था को लेकर कलेक्टर के सख्त निर्देश
कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं जिला नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वर्तमान में उपार्जन केंद्रों की खरीदी सीमा में वृद्धि की गई है। इस परिप्रेक्ष्य में सभी समितियां मैनुअल टोकन वास्तविक धान की आवक एवं निर्धारित लिमिट के अनुरूप ही जारी करें। टोकन काटते समय लघु एवं सीमांत कृषकों को अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाए।
निर्धारित सीमा शेष रहने की स्थिति में दीर्घ कृषकों के टोकन काटे जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले की किसी भी समिति में लघु अथवा सीमांत कृषकों का टोकन नहीं कटने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि धान उपार्जन केंद्रों पर खरीदे गए धान एवं शेष बारदानों का साप्ताहिक भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए तथा संबंधित विवरण समय पर पोर्टल में प्रविष्ट किया जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
रायगढ़ जिले में धान खरीदी की वर्तमान स्थिति
रायगढ़ जिला हर वर्ष राज्य के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में शामिल रहता है। इस बार भी स्थिति उत्साहजनक है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
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जिले में धान खरीदी अपनी चरम गति पर है
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अब तक 5.24 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खरीदा जा चुका है
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किसानों की बड़ी संख्या प्रतिदिन अलग-अलग समितियों में पंजीकृत राशनकार्ड के आधार पर धान बेच रही है
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खरीदी प्रक्रिया में तकनीक और सुव्यवस्थित व्यवस्था से किसानों को राहत मिली है
इस तेजी की वजह है प्रशासन का बेहतर प्रबंधन, समन्वय, स्टाफ की तैनाती और समितियों में समय से समुचित तैयारी।
खरीदी केंद्रों में की गई प्रमुख व्यवस्थाएँ
धान खरीदी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए रायगढ़ जिले में कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। इनमें शामिल हैं:
• पर्याप्त चॉइस सेंटर एवं समितियाँ स्थापित
जिले के सभी विकासखंडों में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को खरीदी हेतु पहले से तैयार किया गया था। इससे किसानों को केंद्रों तक पहुँचने में कम दूरी और अधिक सुविधा मिली।
• टोकन सिस्टम से भीड़ नियंत्रण
ऑनलाइन और ऑफ़लाइन टोकन प्रणाली ने खरीदी केंद्रों में भीड़भाड़ पर महत्वपूर्ण नियंत्रण किया। किसान निर्धारित समय पर ही केंद्र पहुँचते हैं, जिससे व्यवस्था व्यवस्थित रूप से चल रही है।
• बारदाना उपलब्धता
धान भंडारण और तुलाई के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया गया है। इससे किसानों एवं केंद्र संचालकों दोनों को आसानी हुई।
• तुलाई मशीनों की जांच
सभी खरीदी केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक तुलाई मशीनों का परीक्षण और सुधार पहले ही कर लिया गया था, ताकि वजन में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो।
• परिवहन और भंडारण की बेहतर सुविधा
खरीदे गए धान को बारदाने में पैक कर समय पर गोदामों और मिलों तक पहुँचाने की व्यवस्था लगातार जारी है।

किसानों में उत्साह — समर्थन मूल्य का बड़ा योगदान
धान खरीदी में बड़ी मात्रा में किसानों की भागीदारी का मुख्य कारण है राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)। इस वर्ष भी किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है।
सरकार की यह नीति किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
• MSP मिलने से बढ़ा भरोसा
किसान बिना किसी बिचौलिये के अपनी उपज सीधे समितियों में बेचते हैं, जिससे उन्हें पूरी राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त होती है। यह पारदर्शिता किसानों के लिए विश्वास बढ़ाने वाली है।
• बोनस की उम्मीद भी एक कारण
पिछले वर्षों में मिले बोनस ने किसानों में उत्साह बढ़ाया है। किसान उम्मीद रखते हैं कि उन्हें इस बार भी अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
• समय पर भुगतान
रायगढ़ जिले में किसानों के खातों में भुगतान की प्रक्रिया तेज़ रखी गई है, जिससे किसानों को आर्थिक राहत महसूस हो रही है।
खरीदी प्रक्रिया: कैसे होती है धान खरीदी?
धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमानुसार और पारदर्शी व्यवस्था पर आधारित होती है। इसका क्रम इस प्रकार है:
1. किसानों का पंजीयन
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खरीफ सीजन से पूर्व किसानों को अपनी खेती का पंजीयन कराना होता है
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खेती का क्षेत्र, फसल का प्रकार आदि विवरण दर्ज किए जाते हैं
2. टोकन जारी होना
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खरीदी केंद्र पर धान बेचने के लिए किसान को अग्रिम टोकन मिलता है
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इससे भीड़ कम होती है और किसान निर्धारित तिथि पर धान बेचते हैं
3. धान की गुणवत्ता जांच
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धान की नमी, दाने की गुणवत्ता आदि की जांच की जाती है
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निर्धारित मानकों के अनुरूप होने पर ही धान स्वीकार किया जाता है
4. तुलाई और रसीद
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तुलाई इलेक्ट्रॉनिक मशीन से की जाती है
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किसान को पूरी तुलाई पर्ची और रसीद दी जाती है
5. भुगतान प्रक्रिया
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रसीद के आधार पर भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है
रायगढ़ में इस प्रक्रिया को और सरल और सुव्यवस्थित बनाया गया है।
प्रशासन की भूमिका—समस्याओं को पहले ही चिन्हित कर समाधान
धान खरीदी जैसे बड़े अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं:
• नियमित निरीक्षण
कलेक्टर एवं जिला प्रशासन की टीम लगातार खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर रही है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या का समय पर समाधान किया जा सके।
• स्टाफ की पर्याप्त तैनाती
केंद्रों पर कर्मचारी, ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड और मजदूरों को पर्याप्त संख्या में नियुक्त किया गया है।
• किसानों से संवाद
किसानों की शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से सुना जा रहा है। कई केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए छायादार स्थान, पानी, बैठने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।
परिवहन एवं भंडारण—एक बड़ी चुनौती पर सफल नियंत्रण
धान खरीदी में केवल तुलाई और भुगतान ही चुनौती नहीं होती, बल्कि खरीदे गए धान का सुरक्षित भंडारण और परिवहन भी उतना ही आवश्यक होता है।
रायगढ़ में—
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गोदामों में पहले से पर्याप्त स्थान तैयार किया गया
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धान को परिवहन हेतु वाहनों की उपलब्धता में सुधार
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गोदामों और मिलों तक समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीम बनाई गई
इन व्यवस्थाओं की वजह से खरीदी केंद्रों में धान का अंबार नहीं लग रहा है और प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
किसानों के अनुभव और प्रतिक्रियाएँ
रायगढ़ जिले के किसानों ने इस बार की धान खरीदी व्यवस्था पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। किसानों का कहना है:
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इस बार खरीदी केंद्रों में अधिक भीड़ नहीं है
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तुलाई जल्दी हो रही है
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बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता है
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कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगी है
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ऑनलाइन टोकन से बड़ी आसानी हुई
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भुगतान भी समय पर मिल रहा है
इन सभी कारणों से किसानों में संतोष और खुशी का माहौल है।Kelo Pravah+1
जिले की खरीदी प्रगति से प्रदेश में बढ़ा योगदान
रायगढ़ जिले में तेज़ी से हो रही खरीदी ने प्रदेश की कुल धान खरीदी में उल्लेखनीय योगदान दिया है। हर वर्ष रायगढ़:
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धान उत्पादन में शीर्ष जिलों में शामिल रहता है
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राज्य की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है
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कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है
इस बार भी रिकॉर्ड गति से हुई 5.24 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी जिले की बड़ी उपलब्धि है।
मौसम की चुनौतियाँ—फिर भी तेज़ी से खरीदी जारी
इस वर्ष ठंड, कोहरा और मौसम की अनिश्चितता ने कई बार खरीदी कार्य में चुनौतियाँ उत्पन्न कीं। लेकिन व्यवस्थाओं के कारण—
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केंद्र समय पर खोले जाते हैं
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किसानों को प्रतीक्षा में कठिनाई न हो, इसका ध्यान रखा जाता है
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बारिश या मौसम बिगड़ने पर तिरपाल और कवर उपलब्ध हैं
इससे खरीदी कार्य बाधित नहीं हुआ।
आगे की रणनीति—लक्ष्य और तैयारियाँ
आने वाले दिनों में प्रशासन की योजना है:
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खरीदी की गति को और तेज किया जाए
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शेष किसानों को टोकन आसानी से मिले
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गोदामों में स्थान कम न पड़े
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भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो
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गुणवत्ता परीक्षण में पारदर्शिता बनाए रखी जाए
सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले और केंद्रों में कोई किसान परेशान न हो।
रायगढ़ जिले में इस वर्ष धान खरीदी अभियान अत्यंत सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। 5.24 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी यह दर्शाती है कि—
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प्रशासनिक तैयारियाँ मजबूत थीं
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किसानों का विश्वास प्रणाली पर कायम है
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तकनीकी और व्यवस्थागत सुधारों ने प्रक्रिया को सरल बनाया
धान खरीदी केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि किसानों के पूरे वर्ष की मेहनत का सम्मान है। रायगढ़ जिले की यह उपलब्धि न केवल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत अहम है।
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