“रायगढ़ अपेक्स बैंक में 5 बड़ी गड़बड़ियां और मुख्यालय की संदिग्ध भूमिका”

बैंक प्रणाली का एक मूल स्तंभ है भरोसा — खासकर ग्रामीण और सहकारी बैंक व्यवस्था में, जहां मेहनतकश किसान और आम जनता अपनी संचित पूंजी को सुरक्षित स्थान पर जमा करते हैं। लेकिन जब वही बैंक, जिसे सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, अपनी ही शाखाओं में गड़बड़ियों और अनियमितताओं का धब्बा बनने लगे, तो सवाल उठते हैं — यह सिर्फ व्यक्तिगत भ्रष्टाचार है या सिस्टम में गहराया रोग? हाल ही में अपेक्स बैंक की रायगढ़ शाखा में सामने आयी गड़बड़ियों का मामला इस गंभीर प्रश्न को दोहराता है।
गड़बड़ी का खुलासा – क्या हुआ था?
रायगढ़ की अपेक्स बैंक शाखा में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग विश्वसनीयता को हिला दिया है। शिकायत के अनुसार, कुछ खातों से अनधिकृत राशि निकाली गई, और यह मामला जब सामने आया तो बैंक प्रशासन ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी तरीके से खातों से पैसे निकाले थे।
जांच और उसकी छुपाई — अफ़सोस की कहानी
जांच के लिए नियुक्त अधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई शुरू की, लेकिन इस बीच विवादास्पद कदम उठाए गए। वही कर्मचारी, जिनकी भूमिका गड़बड़ी में संदिग्ध पाई गई थी, उन्हें ट्रांसफर कर दिया गया। दूसरे शब्दों में कहें, जांचकर्ता ने उस व्यक्ति को, जिसमें गड़बड़ी की संदेहास्पद भूमिका थी, उसी बैंक के दूसरे हिस्से में भेज दिया — जिससे यह शंका उठती है कि गड़बड़ी को दबाने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यालय की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि मुख्यालय ने जांच की गंभीरता को कम करने या गड़बड़ी को सार्वजनिक जांच के व्यापक दायरे से दूर रखने की कोशिश की।
लोन गड़बड़ियों का पैमाना
यह पहली गड़बड़ी नहीं है। रायगढ़ जिले में अपेक्स बैंक और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के बीच किसान लोन वितरण और वसूली में बड़े पैमाने पर असंतुलन सामने आया है। मामले की गंभीरता इस बात से स्पष्ट होती है कि बैंक का वही हिस्सा, जो किसान समितियों को लोन देता है, वहाँ बैंक की वसूली भी नहीं हो रही है। उदाहरण के लिए, बैंक का शेष ऋण बहुत अधिक है, जबकि समितियों के किसानों पर बकाया ऋण अपेक्षाकृत कम है। यह असंतुलन केवल आंकड़ों की गलती नहीं हो सकती — यह गड़बड़ी का संकेत है।
रायगढ़ अपेक्स बैंक शाखा में गड़बड़ी केवल कुछ खातों तक सीमित नहीं थी। स्थानीय किसानों और सहकारी समितियों की रिपोर्ट से पता चला कि लोन वितरण और वसूली में बड़ी अनियमितताएं हो रही थीं।
1. लोन वितरण में अनियमितताएं
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कई किसानों को उनके वास्तविक जरूरत के अनुसार लोन नहीं मिला, जबकि कुछ खातों में फर्जी लोन रिकॉर्ड दर्ज किए गए।
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कुछ किसानों ने शिकायत की कि उनके खाते में लोन की राशि जमा नहीं हुई, लेकिन बैंक के रिकॉर्ड में वह राशि दिखाई दे रही थी।
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इससे स्पष्ट हुआ कि कुछ कर्मचारियों ने खातों में हेरफेर करके लोन राशि का गलत इस्तेमाल किया।
2. वसूली में गड़बड़ी
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वसूली के रिकॉर्ड भी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते थे। कई किसानों का दावा था कि उन्होंने लोन की किश्तें समय पर चुकाई थीं, लेकिन बैंक के सिस्टम में बकाया ऋण अधिक दिखाया गया।
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इसका परिणाम यह हुआ कि किसानों पर अतिरिक्त ब्याज और जुर्माना लगाया गया।
3. वित्तीय नुकसान और पैमाना
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शुरुआती जांच में पता चला कि लाखों रुपए की गड़बड़ी हुई थी।
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केवल एक शाखा में ही इतनी बड़ी रकम गायब होने से यह स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की संरचनात्मक कमजोरी का संकेत है।
4. कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका
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कुछ कर्मचारियों ने फर्जी खाता आईडी और सॉफ़्टवेयर हेरफेर का इस्तेमाल किया।
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जांच में यह भी सामने आया कि कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों ने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की, जिससे गड़बड़ी लंबा खिंच गई।
सहकारी बैंक में गबन: मुख्यालय का दायित्व
इस तरह के मामलों में कभी-कभी करोड़ों रुपए का गबन सामने आया है। जांच दल ने पाया कि कई कर्मचारियों ने बिना वाउचर के रकम निकाली थी, और बैंक कर्मचारियों ने फर्जी खाता आईडी का उपयोग किया। FIR दर्ज की गई, और बैंक मुख्यालय ने प्रारंभिक रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपी अधिकारियों को निलंबित किया।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गबन की जांच और रोकथाम में मुख्यालय की भूमिका न केवल सक्रिय, बल्कि संदिग्ध भी रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानांतरण और निलंबन जैसी कार्रवाई का उपयोग दोषियों को छिपाने की रणनीति के रूप में किया जा रहा है, बजाय कि पूरी जवाबदेही सुनिश्चित करने के।
ट्रांसफर और सत्ता संतुलन — क्या हो रहा है बड़े स्तर पर?
मुख्यालय द्वारा बैंक में पदस्थ अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। कुछ अधिकारी जिन्हें जांच में सक्रिय माना जाता था, उन्हें नोडल कार्यालय या मुख्यालय भेज दिया गया। यह फेरबदल अकेले व्यक्तिगत ट्रांसफर नहीं लगता, बल्कि यह रणनीतिक कदम लगता है — उन अधिकारियों को पीछे हटाना जो जांच में सख्ती ला सकते थे, और नए चेहरों को लाकर नियंत्रण बनाए रखना। इससे यह सवाल उठता है कि क्या बैंक उच्चाधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय करने के बजाय, दोषियों को “ढाल” के रूप में बचाने की रणनीति अपना रहा है।ABP News
नियोजन और जवाबदेही में कमज़ोरी
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बैंक के भीतर जवाबदेही की व्यवस्था काफ़ी कमजोर दिखाई देती है। गड़बड़ी की घटनाओं के सामने आने के बाद भी, कार्रवाई और नतीजे आते समय बहुत देरी होती है या आंशिक होते हैं।
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जब जांच अधिकारी और ट्रांसफ़र पॉलिसी एक-दूसरे में उलझते हैं, तो सार्वजनिक विश्वास गिरता है।
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बैंक की नीतिगत संरचना (मुख्यालय + नोडल कार्यालय) में शक्ति का असंतुलन ऐसा है कि संदेहों को दबाये जाने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
प्रभाव और सामाजिक निहितार्थ
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किसानों का भरोसा टूटता है
किसानों के लिए सहकारी बैंक में जमा राशि और लोन उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा है। जब उनकी रकम या लोन में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो उनका वित्तीय विश्वास हिलता है। -
सार्वजनिक विश्वास का संकट
बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कम होने से सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। यदि जनता को लगे कि बैंक केवल भ्रष्टाचार का माध्यम बन गया है, तो लोग अपनी मेहनत की कमाई बैंक से निकालना चाहेंगे, जिससे बैंक की वित्तीय स्थिति भी कमजोर हो सकती है। -
नीतिगत सुधार की जरूरत
अपेक्स बैंक और अन्य सहकारी बैंकों को ऐसे नियंत्रण तंत्र की ज़रूरत है जो स्थानांतरण और निलंबन को जांचों से जोड़कर रखे, न कि उन्हें नकारात्मक नतीजों से बचाने का साधन बनाये।जांच के दौरान हस्तक्षेप
रायगढ़ शाखा में गड़बड़ी सामने आने के बाद जब जांच शुरू हुई, तो शाखा मुख्यालय ने कई कदम उठाए। इन कदमों से यह प्रतीत हुआ कि मुख्यालय जांच को दबाने या प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
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जांच अधिकारी द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा रही थी, लेकिन मुख्यालय ने कुछ कर्मचारियों का ट्रांसफर उसी समय कर दिया।
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ऐसे ट्रांसफर उन कर्मचारियों को सुरक्षा देने के बजाय, गड़बड़ी के मामलों को दबाने की रणनीति के रूप में प्रतीत हुए।
दोषियों की सुरक्षा
मुख्यालय ने जिन कर्मचारियों की भूमिका गड़बड़ी में संदिग्ध पाई गई थी, उन्हें न केवल अन्य शाखाओं में ट्रांसफर किया, बल्कि कुछ मामलों में उन्हें संचालन या उच्च पदों पर पदस्थ किया।
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इसका प्रभाव यह हुआ कि जांच के दौरान दोषियों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
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इस प्रकार, स्थानीय स्तर पर जांचकर्ता की निष्पक्षता पर भी सवाल उठे।
सिस्टम में शक्ति असंतुलन
मुख्यालय का नियंत्रण इतना शक्तिशाली है कि शाखा स्तर पर किए गए किसी भी कामकाज या रिपोर्टिंग में मुख्यालय का हस्तक्षेप हमेशा संभव होता है।
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इसका नकारात्मक पहलू यह है कि यदि किसी शाखा में अनियमितता होती है, तो मुख्यालय आकस्मिक कदमों से उसे दबा सकता है।
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इसके कारण कर्मचारियों में भय का माहौल बन जाता है और वे गड़बड़ी की रिपोर्ट करने से डरते हैं।
जवाबदेही की कमी
मुख्यालय की भूमिका के कारण, अक्सर शाखा स्तर की जांच अपूर्ण रह जाती है।
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दोषी कर्मचारियों को निलंबित करने या जिम्मेदार ठहराने के बजाय, स्थानीय रूप से मामूली कार्रवाई की जाती है।
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इससे जनता का विश्वास बैंक पर कम होता है और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है।
संभावित नीति का दुरुपयोग
मुख्यालय द्वारा अपनाई गई स्थानांतरण और पदस्थापन नीति को कभी-कभी जांच और जवाबदेही को प्रभावित करने के लिए प्रयोग किया गया है।
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उदाहरण: रायगढ़ शाखा के कुछ अधिकारियों को जांच से जुड़े मामलों में हटाकर मुख्यालय या नोडल कार्यालय भेज दिया गया।
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इससे शाखा स्तर पर जांचकर्ता अकेला पड़ जाता है और गड़बड़ी की वास्तविकता पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।
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इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि रायगढ़ शाखा की गड़बड़ियों को सिर्फ स्थानीय स्तर की समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता — इसमें बैंक मुख्यालय की भूमिका बहुत बड़ी और संदिग्ध है। यदि दोषियों को पदच्युत करने, जिम्मेदार बनाने और सिस्टम सुधारने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो यह एक ऐसे दुष्चक्र में बदल सकता है, जो सहकारी बैंकिंग की नींव को हिला दे।
कुछ सुझाव दिए जा सकते हैं:
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जांच अधिकारी की तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट कमेटी बनानी चाहिए।
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गड़बड़ी की रिपोर्टिंग और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए सीसीटीवी रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा और बाह्य निगरानी हो।
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ट्रांसफर नीति को पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि यह जांच को बाधित करने का साधन न बने।
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बैंक के आंतरिक नियंत्रण और लेखा परीक्षा तंत्र को मजबूत बनाया जाए और समय-समय पर बाहरी ऑडिट किया जाए।
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सहकारी बैंक कर्मचारियों को नैतिकता और जवाबदेही पर प्रशिक्षण देना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को जड़ से रोका जा सके।
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यह वही कारण है कि रायगढ़ शाखा की गड़बड़ी अब केवल स्थानीय घटना नहीं रह गई, बल्कि यह संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौती बन गई है।
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