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PDS घोटाला 80 हजार बारदाने गायब, जांच करने पहुंची उच्चस्तरीय टीम, मचा हड़कंप

पीडीएस के 80 हजार बारदाने गायब, जांच करने पहुंची टीम – पूरा मामला विस्तार से

भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसी व्यवस्था के माध्यम से लाखों लोगों को सस्ती दरों पर चावल, गेहूं और अन्य खाद्यान्न उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन जब इसी प्रणाली में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी सामने आती है, तो सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होता है।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पीडीएस के लगभग 80 हजार बारदाने (खाली बोरे) गायब पाए गए हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। मामला उजागर होते ही जांच टीम मौके पर पहुंची, और अब पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है।


 क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, यह मामला पीडीएस से जुड़े वेयरहाउस/गोदाम से संबंधित है, जहां सरकारी खाद्यान्न के परिवहन और भंडारण के लिए उपयोग किए जाने वाले बारदानों का हिसाब-किताब किया जा रहा था।

नियमित ऑडिट और रिकॉर्ड मिलान के दौरान जब दस्तावेजों की जांच की गई, तो पाया गया कि लगभग 80,000 बारदाने रिकॉर्ड से गायब हैं। न तो गोदाम में इनकी भौतिक मौजूदगी मिली और न ही इनके निपटान से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सका।

 धान खरीदी के बीच में मार्कफेड के गोदाम से हजारों नग पीडीएस बारदाने चोरी होने का मामला सामने आया है। जिस ठेकेदार को मार्कफेड ने काम दिया था, उसने समितियों में बारदाने पहुंचाए ही नहीं। बताया जा रहा है कि 80 हजार बारदाने बाहर बेच दिए गए हैं। अब कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

राशन दुकानों में जो चावल सप्लाई होता है, उसके खाली बारदाने मार्कफेड वापस ले लेता है ताकि समितियों में धान खरीदी की जा सके। ये बारदाने एक बार ही उपयोग किए होते हैं। पुराने बारदाने कम होते हैं। राशन दुकानों से पास की समितियों में बारदाने पहुंचाए जाते हैं। इसके अलावा पीडीएस बारदानों को मार्कफेड के संग्रहण केंद्रों में भी एकत्र किया जाता है। वहां से फिर समितियों में बारदाने भेजे जाते हैं जिसकी पावती प्रबंधक देता है।

लेकिन रायगढ़ में पीडीएस बारदानों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। लैलूंगा क्षेत्र के पीडीएस दुकानों से बारदाने एकत्र करके समिति में पहुंचाने का काम किशन, देव और शिवाकांत तिवारी कर रहे थे। तिवारी के पास घरघोड़ा संग्रहण केंद्र का प्रभार भी है। इनका काम था बारदाने एकत्र करके समितियों में पहुंचाना।

लैलूंगा क्षेत्र की पीडीएस दुकानों से इकट्ठा किए गए बारदानों में करीब 80 हजार बारदाने समितियों में नहीं पहुंचे। इन बोरों को बेचे जाने की जानकारी मिल रही है। कलेक्टर ने जांच और एफआईआर के आदेश दिए थे। सोमवार को जांच टीम ने पावती मिलान की जिसमें 80 हजार बारदानों की जानकारी मिली।

कहां बेचे बारदाने

लैलूंगा क्षेत्र में बिना किसी घोटाले के धान खरीदी हो जाए, ऐसा संभव ही नहीं है। मार्कफेड के संग्रहण केंद्र से गायब बारदाने समितियों में या राइस मिलर्स को बेचे गए होंगे। बड़े कोचियों के साथ मिलकर भी साजिश रची गई होगी। प्रारंभिक जांच में बारदानों की कमी पकड़ी जा चुकी है। समितियों में पीडीएस बारदाने कम मिले तो जांच शुरू हुई। कलेक्टर ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

खाद भी हो चुका है चोरी

घरघोड़ा संग्रहण केंद्र में ऐसी पहली गड़बड़ी नहीं है। इसके पूर्व टेंडा नवापारा समिति को भेजा गया 25 एमटी डीएपी और 25.20 एमटी यूरिया भी गायब हो चुका है। लिबरा समिति में भी 30 एमटी डीएपी भी नहीं पहुंचा। कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी ने एफआईआर नहीं करवाई बल्कि वसूली के आदेश दिए। खाद की कुल कीमत 15,58,699 रुपए में से पूर्व प्रभारी घरघोड़ा संग्रहण केंद्र वर्तमान सेवानिवृत्त से 10,98,309 रुपए वसूले जाने थे। शिवाकांत उसी का पुत्र बताया जा रहा है जो घरघोड़ा संग्रहण केंद्र का प्रभारी बन बैठा है।

क्या कहते हैं चितरंजन

बारदाने चोरी होने की जांच की जा रही है। कलेक्टर साहब के निर्देश पर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई होगी।

– चितरंजन सिंह, खाद्य अधिकारी


 बारदाना क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

कई लोग सोचते हैं कि बारदाना केवल एक बोरा है, लेकिन सरकारी व्यवस्था में इसका विशेष महत्व है:

एक बारदाने की औसत कीमत भले ही कम हो, लेकिन 80 हजार बारदानों की कुल कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है


 कैसे सामने आया घोटाला?

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब:

  1. स्टॉक रजिस्टर और भौतिक सत्यापन में भारी अंतर पाया गया

  2. पुराने रिकॉर्ड से मिलान करने पर संख्या लगातार कम होती गई

  3. संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला

इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया और पूरे प्रकरण को संभावित घोटाला मानते हुए जांच के आदेश दिए गए।


 जांच करने पहुंची विशेष टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला/राज्य स्तर से विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम में शामिल हैं:

टीम ने मौके पर पहुंचकर गोदाम का निरीक्षण किया और सभी दस्तावेज जब्त कर लिए।


 किन बिंदुओं पर हो रही है जांच?

जांच टीम फिलहाल निम्न बिंदुओं पर फोकस कर रही है:


 भ्रष्टाचार की आशंका गहराई

80 हजार बारदानों का अचानक गायब होना कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं मानी जा रही। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि:

यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति की हेराफेरी की श्रेणी में आएगा।


 किन पर गिरेगी गाज?

जांच के दायरे में कई लोग आ सकते हैं:

सूत्रों की मानें तो कुछ अधिकारियों से लिखित जवाब भी मांगा गया है।


 प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि:

“सरकारी संपत्ति की हेराफेरी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि जांच में बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) या एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपा जा सकता है।The New Indian Express


 आम जनता पर क्या असर?

पीडीएस की गड़बड़ी का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ता है:

इसी कारण इस तरह के मामलों को लेकर जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है।


 विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

मामला सामने आते ही विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं:

कुछ संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।


 कानूनी कार्रवाई की संभावना

यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो आरोपियों पर लग सकती हैं:

यह मामला आगे चलकर न्यायिक जांच का रूप भी ले सकता है।


 पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मौका नहीं है जब पीडीएस में गड़बड़ी उजागर हुई हो। पहले भी कई जिलों में:

जैसे मामले सामने आ चुके हैं।


 आगे क्या?

अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में:

पीडीएस के 80 हजार बारदाने गायब होना न केवल एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनहित और सरकारी ईमानदारी से जुड़ा मामला है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों से जनता का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा।

अब देखना यह होगा कि जांच टीम कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से इस मामले को अंजाम तक पहुंचाती है और क्या वास्तव में दोषियों को सजा मिल पाती है या नहीं।

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