ऑपरेशन साइबर शील्ड छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन शादी घोटाले का पर्दाफाश, 11 आरोपी गिरफ्तार

 ऑपरेशन साइबर शील्ड छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन शादी घोटाले का बड़ा पर्दाफाश

छत्तीसगढ़ में 2025 का सबसे बड़ा साइबर अपराध उजागर हुआ जब राज्य पुलिस की साइबर सेल और झारखंड पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर एक ऑनलाइन वैवाहिक घोटाले (Online Matrimony Scam) का भंडाफोड़ किया।
इस अभियान को “ऑपरेशन साइबर शील्ड (Operation Cyber Shield)” नाम दिया गया।

पुलिस ने इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों से जुड़े हैं। यह गिरोह देशभर में शादी के नाम पर ठगी कर रहा था और अब तक सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुका था।

ऑपरेशन साइबर शील्ड — छत्तीसगढ़ में एक बड़े ऑनलाइन मैट्रिमोनी घोटाले का पर्दाफाश किया गया, जिसमें झूठे सोशल प्रोफाइल से लोगों को धोखा दिया गया। 11 आरोपी गिरफ्तार। The Times of India


 ऑपरेशन साइबर शील्ड क्या है?

ऑपरेशन साइबर शील्ड एक राज्य स्तरीय साइबर जांच अभियान है, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने डिजिटल ठगी, सोशल मीडिया अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ शुरू किया था।

इसका मुख्य उद्देश्य था —

  • साइबर अपराधियों की पहचान करना

  • ठगी के नेटवर्क को ट्रेस करना

  • लोगों को डिजिटल फ्रॉड से बचाने के लिए जागरूक करना

यह ऑपरेशन सितंबर 2025 से सक्रिय था और पिछले हफ्ते इसकी सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी, जब ऑनलाइन मैट्रिमोनी फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश हुआ।


 घटना की समयरेखा

तिथि घटना
अगस्त 2025 पुलिस को पहली शिकायत मिली कि एक युवक से शादी का झांसा देकर ₹3.8 लाख की ठगी हुई।
सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ साइबर सेल ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाई।
अक्टूबर 2025 (सप्ताह 1) झारखंड के धनबाद और गिरिडीह में संदिग्ध खातों की पहचान हुई।
15 अक्टूबर 2025 “ऑपरेशन साइबर शील्ड” के तहत छापेमारी शुरू हुई।
16 अक्टूबर 2025 11 आरोपी गिरफ्तार, 73 मोबाइल, 24 बैंक कार्ड, 18 फर्जी सिम बरामद।

 घोटाले का तरीका (Modus Operandi)

यह गिरोह ऑनलाइन शादी पोर्टल्स (जैसे Shaadi.com, Jeevansathi.com, Bharat Matrimony आदि) पर नकली प्रोफाइल बनाता था।

ठगी की पूरी प्रक्रिया

  1. आकर्षक प्रोफाइल बनाना
    आरोपी नकली फोटो और गलत पहचान के साथ “डॉक्टर”, “NRI इंजीनियर”, या “सरकारी अधिकारी” जैसी प्रोफाइल डालते थे।

  2. विश्वास जीतना
    पीड़ितों से भावनात्मक रूप से जुड़ते, अक्सर परिवार के रूप में बातचीत करते थे।

  3. शादी का झांसा
    शादी तय करने के बाद गिफ्ट या पैसे भेजने के बहाने से बैंक डिटेल्स मांगते थे।

  4. साइबर ठगी
    “कस्टम्स क्लियरेंस”, “विदेशी गिफ्ट टैक्स” या “वीज़ा प्रोसेसिंग” के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेते थे।

  5. डिजिटल पहचान छिपाना
    पैसे तुरंत ई-वॉलेट और क्रिप्टो खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे ताकि ट्रैक करना मुश्किल हो।


 गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई जिलों से गिरफ्तारी की —

  • छत्तीसगढ़: रायपुर, दुर्ग, कोरबा

  • झारखंड: धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा

बरामद वस्तुएँ

  • 73 मोबाइल फोन

  • 24 बैंक एटीएम कार्ड

  • 18 फर्जी सिम कार्ड

  • ₹12.7 लाख नकद

  • 4 लैपटॉप और 3 हार्डड्राइव

  • 2 क्रिप्टो वॉलेट जिनमें ₹8 लाख से अधिक की डिजिटल करेंसी


 जांच में क्या सामने आया?

जांच अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह जामताड़ा नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जो पूरे देश में साइबर ठगी के लिए कुख्यात है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के नेता अजय मंडल ने पिछले तीन वर्षों में लगभग ₹1.8 करोड़ की ठगी की है।

साइबर सेल प्रमुख अभिषेक मिश्रा ने बताया:

“यह गिरोह बहुत संगठित तरीके से काम करता था। इनके पास डेटा ब्रोकर होते थे जो वैवाहिक साइट्स से व्यक्तिगत जानकारी चुराकर बेचते थे।”


 पीड़ितों की कहानियाँ

 रायपुर की शिक्षिका की ठगी

एक 32 वर्षीय शिक्षिका ने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को “लंदन में डॉक्टर” बताया। कुछ महीनों की बातचीत के बाद उसने कहा कि वह शादी के लिए भारत आ रहा है और उसने उपहार भेजे हैं। कुछ दिन बाद “कस्टम ऑफिसर” बनकर कॉल आया और ₹1.5 लाख मांगे गए।

“मैंने विश्वास किया, लेकिन जब उसने और पैसे मांगे तो शक हुआ। तब तक देर हो चुकी थी।”

 बिलासपुर के इंजीनियर की कहानी

बिलासपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ₹2.2 लाख की ठगी हुई। उसने बताया कि ठग ने उससे शादी के लिए रिश्ता जोड़ा और “वीज़ा प्रक्रिया शुल्क” के नाम पर पैसे ले लिए।


 पुलिस की भूमिका और तकनीकी जांच

पुलिस ने AI-संचालित ट्रैकिंग टूल्स, डिजिटल फिंगरप्रिंट एनालिसिस और IP ट्रेसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया।
साइबर सेल ने पता लगाया कि आरोपी VPN और डार्क वेब आधारित चैट सर्वर का उपयोग करते थे।

इसके अलावा, Google Voice और WhatsApp Business API से नकली नंबर बनाकर बातचीत की जाती थी।

राज्य के DGP अजय यादव ने कहा:

“यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि साइबर अपराध की नई परत है। हमारी प्राथमिकता अब ‘डिजिटल जागरूकता’ को स्कूल और कॉलेज स्तर पर अनिवार्य बनाना है।”


 ऑपरेशन साइबर शील्ड के चरण

 चरण 1 — जागरूकता

लोगों को डिजिटल सुरक्षा की जानकारी देने के लिए वर्कशॉप और सोशल मीडिया अभियान चलाए गए।

 चरण 2 — निगरानी

साइबर निगरानी सेल ने 200 से अधिक फर्जी प्रोफाइल्स को ट्रैक किया।

 चरण 3 — गिरफ्तारी

रियल-टाइम ट्रैकिंग से लोकेशन पहचान कर 48 घंटे में संयुक्त छापेमारी की गई।

 चरण 4 — डेटा रिकवरी

कई ठगी के बैंक खातों से ₹27 लाख जब्त किए गए और पीड़ितों को पैसे वापस करने की प्रक्रिया शुरू हुई।


 साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

साइबर विशेषज्ञ डॉ. नितिन ठाकुर ने कहा:

“ऑनलाइन मैट्रिमोनी फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि लोग भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं। जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।”

उन्होंने सुझाव दिया कि हर वैवाहिक साइट को —

  • प्रोफाइल वेरिफिकेशन को अनिवार्य करना चाहिए

  • एडवांस AI फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू करना चाहिए

  • उपयोगकर्ताओं के लिए “सुरक्षा चेतावनी” पॉप-अप दिखाना चाहिए


 भारत में साइबर ठगी के आंकड़े

वर्ष रिपोर्टेड केस अनुमानित नुकसान (₹ करोड़)
2021 50,035 132
2022 72,641 214
2023 90,513 289
2024 1,05,000+ 367
2025 (अक्टूबर तक) 82,000+ 308

इनमें से करीब 18% केस ऑनलाइन डेटिंग या शादी से जुड़े धोखाधड़ी के हैं


 सरकार की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अभियान के बाद “साइबर सुरक्षा मिशन 2025” की घोषणा की। इसके अंतर्गत —

  1. हर जिले में साइबर अवेयरनेस सेंटर

  2. डिजिटल फ्रॉड हेल्पलाइन – 1930 का प्रचार

  3. स्कूल और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा सिलेबस

  4. महिला सुरक्षा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

केंद्रीय गृह मंत्रालय भी इस दिशा में “Cyber Suraksha Bharat” योजना पर काम कर रहा है।


 भविष्य की योजनाएँ

  1. AI आधारित Cyber Command Center रायपुर में स्थापित किया जाएगा।

  2. साइबर पुलिस थानों का नेटवर्क 33 जिलों में बढ़ाया जाएगा।

  3. डेटा रिकवरी और ट्रेसिंग टीम को अत्याधुनिक टूल्स दिए जाएंगे।

  4. Cyber Volunteers Program के तहत युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।


 जनता के लिए चेतावनी

पुलिस ने जनता से अपील की है कि —

  • शादी के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न भेजें।

  • किसी भी प्रोफाइल की पहचान सत्यापित (verified) करें।

  • संदिग्ध कॉल या लिंक मिलने पर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

“आपका एक कॉल किसी और को ठगी से बचा सकता है।” — छत्तीसगढ़ पुलिस संदेश

ऑपरेशन साइबर शील्ड ने साबित कर दिया कि डिजिटल अपराध चाहे कितना भी जटिल क्यों न हो, तकनीक और इच्छाशक्ति के बल पर उसे पकड़ा जा सकता है।
यह सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सुरक्षा के प्रति चेतावनी और जागरूकता का संदेश है।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस ऑपरेशन से न केवल साइबर अपराधियों को सबक सिखाया, बल्कि पूरे देश को यह याद दिलाया कि —

“डिजिटल दुनिया में भरोसा तभी सुरक्षित है, जब सतर्कता आपके साथ है।”

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