कहीं भी फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं, 1500 रुपए प्रति टन पेनाल्टी — पूरी जानकारी

फ्लाई ऐश क्या है?
फ्लाई ऐश को आम भाषा में उड़ने वाली राख कहते हैं। यह मुख्य रूप से कोयला आधारित तापीय बिजली संयंत्रों से निकलती है। जब कोयले को बिजली उत्पादन के लिए जलाया जाता है, तो उसके साथ राख का उत्पादन होता है। यह राख मुख्य रूप से इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिसिपेटर (ESP) और बैग फिल्टर के माध्यम से गैसों से अलग की जाती है।
फ्लाई ऐश का खुला में जमाव या निपटान पर्यावरण के लिए खतरनाक है। यह हवा, मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकती है। भारत में हर साल सैकड़ों मिलियन टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है। इसका सही और सुरक्षित उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो गया है।
पर्यावरण विभाग ने नगरीय क्षेत्रों के लिए आदेश दिए थे कि पावर प्लांट से 300 किमी की परिधि में फ्लाई एश उपलब्ध होने पर उसका उपयोग करना होगा। यदि एश उपलब्ध है और उपयोग नहीं किया गया तो 1500 रुपए प्रति टन की दर से पेनाल्टी देनी होगी। भवन निर्माण में 75 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से पर्यावरणीय प्रतिकर वसूला जाएगा। सरकार ने फ्लाई एश की समस्या को निराकृत करने की दिशा में एक कदम उठाया है। प्लांट से फ्लाई एश उत्सर्जित होने के बावजूद इसके उत्पाद नहीं बनाए जाते। सरकारी एजेंसियां भी इसका उपयोग नहीं करतीं। इस वजह से उत्सर्जित एश ढेर लग रहा है।
पर्यावरण विभाग ने नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश दिया था कि थर्मल पावर प्लांट के 300 किमी की परिधि में स्थित सभी भवन निर्माण परियोजनाओं में राख की ईंटों, टाईल्स या अन्य उत्पादों का उपयोग किया जाएगा। सभी स्थानीय प्राधिकरण इमारतों, सडक़ों, तटबंधों या अन्य निर्माण गतिविधि में इसका उपयोग करेंगे।
राखड़ उपलब्ध होने की स्थिति में उपयोगकर्ता अधिकरण द्वारा उपयोग नहीं किए जाने पर 1500 रुपए प्रति टन की दर से भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होगा। भवन निर्माण के संबंध में पर्यावरणीय प्रतिकर निर्मित क्षेत्र के 75 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से वसूल किया जाएगा। लेकिन रायगढ़ के किसी भी निकाय ने फ्लाई एश का इस्तेमाल नहीं किया है जबकि कई निर्माण कार्य चल रहे हैं।
नहीं होता उपयोग, ब्रिक्स प्लांट केवल सब्सिडी के लिए
रायगढ़ जिले में प्रतिवर्ष करीब डेढ़ करोड़ टन फ्लाई एश का उत्सर्जन होता है। इसका उपयोग जमीन में डंपिंग के लिए ज्यादा होता है। फ्लाई एश के उत्पाद के रूप में जिले में केवल ईंट ही बनती है। कहीं-कहीं पेवर ब्लॉक बन रहे हैं। सडक़ निर्माण में तो उपयोग होता ही नहीं है। केवल पेवर ब्लॉक और ईंट का इस्तेमाल हो रहा है। जितने ब्रिक्स प्लांट हैं, उतना उत्पादन ही नहीं होता। केवल सब्सिडी के लिए ब्रिक्स प्लांट लगते हैं।
फ्लाई ऐश का महत्व

फ्लाई ऐश का उपयोग सिर्फ पर्यावरण सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि निर्माण, कृषि और अन्य उद्योगों के लिए भी लाभकारी है।The Times of India
1. पर्यावरण संरक्षण
यदि फ्लाई ऐश का खुले में निपटान किया जाए तो यह हवा में फैलकर प्रदूषण पैदा करता है। साथ ही, मिट्टी और भूजल को भी नुकसान पहुंचाता है।
2. संसाधन के रूप में उपयोग
फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, ईंट, ब्लॉक, टाइल और Aggregate निर्माण में किया जा सकता है। यह निर्माण सामग्री हल्की, मजबूत और टिकाऊ होती है।
3. निर्माण कार्य में योगदान
फ्लाई ऐश का उपयोग सड़क, पुल, फ्लाईओवर और तटबंधों के निर्माण में भी किया जाता है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ निर्माण लागत भी कम होती है।
कानूनी पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने Environment (Protection) Act, 1986 के तहत Fly Ash Utilisation Notification 2021 जारी की। इसका उद्देश्य फ्लाई ऐश के 100% उपयोग को सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु:
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फ्लाई ऐश का उपयोग अनिवार्य है।
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खुले में फ्लाई ऐश का निपटान प्रतिबंधित है।
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नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी पेनाल्टी और दंड लागू होगा।
1500 रुपए प्रति टन पेनाल्टी का नियम
1. वाहक / Transporter पर दंड
यदि फ्लाई ऐश को अधिकृत उपयोगकर्ता तक नहीं पहुँचाया जाता, तो हर टन पर 1500 रुपए का Environmental Compensation लगाया जाता है।
2. उपयोगकर्ता / User Agency पर दंड
यदि उपयोगकर्ता एजेंसी निर्देशों के अनुसार फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं करती, तो भी 1500 रुपए प्रति टन का दंड लगेगा।
3. बिजली संयंत्रों पर दंड
थर्मल पावर प्लांट यदि 3‑साल के अनुपालन चक्र में 80% से कम उपयोग करता है, तो उसे 1000 रुपए प्रति टन Environmental Compensation देना होगा।
4. निर्माण कार्य में दंड
यदि निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं किया गया, तो 75 रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से अतिरिक्त दंड लगाया जाता है।
नियम क्यों सख्त हैं?
फ्लाई ऐश के खुले में निपटान से कई समस्याएँ पैदा होती हैं:
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वायु प्रदूषण
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मिट्टी और जल स्रोतों का नुकसान
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सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
इसलिए सरकार ने इसे ‘Polluter Pays’ Principle के तहत सख्त बनाया।
उपयोग अनिवार्य क्षेत्र
फ्लाई ऐश का उपयोग निम्न क्षेत्रों में अनिवार्य है:
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सड़क निर्माण और सड़क बेस सामग्री
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फ्लाईओवर, पुल और तटबंधों का निर्माण
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ईंट, ब्लॉक और टाइल निर्माण
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खदानों में backfilling
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कृषि और भूमि सुधार कार्य
यदि इन क्षेत्रों में उपलब्ध फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं होता, तो दंड लागू होता है।
दंड का उदाहरण
अगर किसी कंपनी ने 1000 टन फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं किया, तो दंड होगा:
1000 × 1500 = 15 लाख रुपए
यदि यह मात्रा 10,000 टन है, तो दंड 1.5 करोड़ रुपए तक हो सकता है।
FIR और प्रोसिक्यूशन का जोखिम
कानून उल्लंघन करने पर केवल दंड ही नहीं बल्कि प्रोसिक्यूशन का खतरा भी रहता है। Environmental laws के तहत SPCB और PCC प्रोसिक्यूशन कर सकते हैं।
न्यायिक सक्रियता
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई मामलों में फ्लाई ऐश के सही उपयोग पर सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायिक सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया है कि थर्मल पावर प्लांट और अन्य उपयोगकर्ता नियमों का पालन करें।
फ्लाई ऐश का उपयोग न करने पर 1500 रुपए प्रति टन पेनाल्टी पर्यावरण सुरक्षा और कानून का महत्वपूर्ण नियम है।
मुख्य संदेश:
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पर्यावरण सुरक्षा अनिवार्य है
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फ्लाई ऐश का उपयोग सभी निर्माण और कृषि क्षेत्रों में होना चाहिए
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उल्लंघन करने पर भारी दंड और प्रोसिक्यूशन का खतरा
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Polluter Pays Principle के अनुसार हर प्रदूषक को दंड भुगतना होगा
यह नियम उद्योग, निर्माण कंपनियों और सभी जिम्मेदार एजेंसियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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