जनसंपर्क विभाग के सहायक ग्रेड-1 विदेशीलाल परजा का आकस्मिक निधन, विभाग व समाज में शोक की लहर

जनसंपर्क विभाग के सहायक ग्रेड-1 विदेशीलाल परजा के आकस्मिक निधन पर शोक की लहर

छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग में कार्यरत सहायक ग्रेड-1 विदेशीलाल परजा के आकस्मिक निधन की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे विभाग, शासकीय महकमे और समाज में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। एक कर्मठ, अनुशासित और मिलनसार व्यक्तित्व के असमय चले जाने से न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित हुआ, बल्कि उन सभी के दिलों में शून्यता छा गई, जिन्होंने उन्हें नजदीक से जाना, उनके साथ काम किया या उनसे प्रेरणा ली। यह घटना केवल एक कर्मचारी के निधन की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समर्पित मानव जीवन के अचानक थम जाने की पीड़ा है।

शोकाकुल माहौल और स्तब्धता

विदेशीलाल परजा के निधन की सूचना मिलते ही जनसंपर्क विभाग के कार्यालयों में कामकाज कुछ समय के लिए ठहर सा गया। सहकर्मियों की आंखें नम थीं और हर चेहरा गमगीन। जिन गलियारों में उनकी हंसी, उनकी सधी हुई आवाज और काम के प्रति लगन दिखाई देती थी, वहां आज सन्नाटा पसरा था। अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया जगत से जुड़े लोग और आम नागरिक—हर कोई इस आकस्मिक घटना से स्तब्ध था।

जनसंपर्क विभाग रायपुर में पदस्थ रहे सहायक ग्रेड-1 श्री विदेशीलाल परजा के आकस्मिक निधन से जनसंपर्क विभाग सहित समूचे शासकीय सेवा जगत में शोक की लहर व्याप्त है। उनके निधन की सूचना मिलते ही रायगढ़ जिला जनसंपर्क कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

उल्लेखनीय है कि सहायक ग्रेड-1 श्री विदेशीलाल परजा ने अपने सेवाकाल के दौरान जिला जनसंपर्क कार्यालय रायगढ़, जशपुर एवं राजनांदगांव सहित विभिन्न स्थानों पर निष्ठा एवं समर्पण भाव से सेवाएं प्रदान कीं। वर्तमान में वे जनसंपर्क संचालनालय इंद्रावती भवन, नवा रायपुर में पदस्थ थे। विगत कुछ माह पूर्व ही उनका स्थानांतरण नवा रायपुर हुआ था।

श्री परजा मूलतः रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत महलोई के आश्रित ग्राम झार के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में रायगढ़ में निवासरत है। अस्वस्थता के चलते उनका उपचार रायपुर के एक निजी चिकित्सालय में चल रहा था, जहां उपचार के दौरान उनका शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार रायगढ़ जिले के ग्राम झार में किया गया।

अपने सौम्य, सरल एवं मिलनसार स्वभाव के कारण श्री परजा सहकर्मियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। वे कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित एवं सहयोगी अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। विभागीय कार्यों के प्रति उनकी निष्ठा एवं सकारात्मक व्यवहार को सदैव स्मरण किया जाएगा।

एक जिम्मेदार अधिकारी का परिचय

विदेशीलाल परजा जनसंपर्क विभाग में सहायक ग्रेड-1 के पद पर कार्यरत थे। यह पद केवल फाइलें निपटाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि शासन और जनता के बीच संवाद की कड़ी को मजबूत रखने की जिम्मेदारी भी निभाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सूचना के संप्रेषण, दस्तावेज़ों के सुव्यवस्थित रखरखाव और समयबद्ध निष्पादन में उच्च मानक स्थापित किए। उनकी कार्यशैली शांत, सटीक और नियमों के अनुरूप थी—जो किसी भी शासकीय सेवा में आदर्श मानी जाती है।

कार्य के प्रति समर्पण

उनके सहकर्मी बताते हैं कि विदेशीलाल परजा समय से पहले कार्यालय पहुंचना, कार्यों की प्राथमिकता तय करना और हर जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाना अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते थे। चाहे दबाव में काम हो या समय-सीमा की चुनौती—उन्होंने कभी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों को अमल में लाने में उन्होंने पहल की और टीम को साथ लेकर लक्ष्य हासिल किया।

मानवीय संवेदनाएं और व्यवहार

कार्यालयीन जिम्मेदारियों के साथ-साथ विदेशीलाल परजा का मानवीय पक्ष भी सभी के दिलों में बसा था। वे सहकर्मियों की व्यक्तिगत समस्याओं को सुनते, यथासंभव मदद करते और नए कर्मचारियों को काम समझाने में धैर्य रखते थे। उनका व्यवहार विनम्र, सहयोगात्मक और प्रेरक था। यही कारण है कि उनके जाने की खबर ने हर आयु-वर्ग और हर स्तर के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया।

आकस्मिक निधन: एक अपूरणीय क्षति

उनका निधन आकस्मिक था—जिसके लिए कोई भी मानसिक रूप से तैयार नहीं था। परिवार, मित्र और सहकर्मी—सभी के लिए यह विश्वास कर पाना कठिन था कि कल तक जो व्यक्ति हमारे बीच सक्रिय था, आज वह सदा के लिए विदा हो चुका है। यह क्षति केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे विभाग और समाज की है। ऐसे कर्मठ अधिकारी का जाना शासकीय सेवा के लिए भी एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।

शोक सभा का आयोजन

निधन की सूचना के बाद जनसंपर्क विभाग में शोक सभा का आयोजन किया गया। दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ बिताए गए पलों को याद किया और उनके योगदान को शब्दों में पिरोया। कई सहकर्मियों की आंखें नम थीं—क्योंकि शब्दों में उस खालीपन को व्यक्त करना आसान नहीं था।

वरिष्ठ अधिकारियों की संवेदना

विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विदेशीलाल परजा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे एक निष्ठावान और भरोसेमंद कर्मचारी थे, जिन पर किसी भी कार्य के लिए आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता था। अधिकारियों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में विभाग परिवार के साथ खड़ा है।

सहकर्मियों की यादें

सहकर्मियों ने बताया कि विदेशीलाल परजा हर चुनौती को मुस्कान के साथ स्वीकार करते थे। किसी भी नए कार्य को सीखने की उनमें जिज्ञासा थी और वे दूसरों को भी सीखने के लिए प्रेरित करते थे। कार्यालय में वे सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत थे—जहां तनाव होता, वहां वे सहजता से समाधान की राह निकालते।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

विदेशीलाल परजा के आकस्मिक निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार ने अपना एक सशक्त सहारा खो दिया है—एक ऐसा व्यक्ति, जो न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाता था, बल्कि सबका मार्गदर्शन भी करता था। इस शोक की घड़ी में समाज और विभाग की संवेदनाएं परिवार के साथ हैं।

समाज में भी शोक

उनके निधन की खबर केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रही। समाज के विभिन्न वर्गों—स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और परिचितों—ने भी शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से लोगों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को संबल देने की बात कही।

शासकीय सेवा में उनका योगदान

विदेशीलाल परजा का कार्यकाल भले ही काल-सीमा में सीमित रहा हो, लेकिन उनके योगदान की छाप लंबे समय तक रहेगी। शासकीय सेवा में ईमानदारी, अनुशासन और मानवीय मूल्यों के साथ काम करना आसान नहीं होता—पर उन्होंने इसे संभव कर दिखाया। यह उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

युवा कर्मचारियों के लिए प्रेरणा

उनका जीवन और कार्यशैली युवा कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। समय की पाबंदी, नियमों का पालन, टीमवर्क और संवेदनशीलता—ये सभी गुण उनके व्यक्तित्व में सहज रूप से मौजूद थे। ऐसे उदाहरण ही किसी भी विभाग की कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ बनाते हैं।Amar Ujala

प्रशासनिक व्यवस्था में मानवीय चेहरा

अक्सर प्रशासन को कठोर और औपचारिक माना जाता है, लेकिन विदेशीलाल परजा जैसे अधिकारी इस धारणा को बदलते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि नियमों के भीतर रहते हुए भी संवेदनशील और सहयोगी बना जा सकता है। यही कारण है कि उनके प्रति सम्मान केवल पेशेवर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी था।

शोक की इस घड़ी में एकजुटता

निधन के बाद विभागीय स्तर पर जो एकजुटता देखने को मिली, वह उनके प्रति लोगों के स्नेह और सम्मान का प्रमाण है। सभी ने मिलकर परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास किया और भविष्य में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

ईश्वर से प्रार्थना

इस दुखद घड़ी में हर कोई ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा है कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान हो। किसी प्रियजन का अचानक जाना शब्दों से परे पीड़ा देता है—और यही समय है जब संवेदनाएं सबसे बड़ा सहारा बनती हैं।

छत्तीसगढ़ की शासकीय सेवा के लिए क्षति

छत्तीसगढ़ की शासकीय सेवा, विशेषकर जनसंपर्क विभाग, ने एक ऐसा कर्मचारी खो दिया है जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सेवा का यह सादगीपूर्ण और समर्पित चेहरा अब स्मृतियों में जीवित रहेगा।

 स्मृतियों में अमर

विदेशीलाल परजा भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके कार्य, उनका व्यवहार और उनकी मानवीयता उन्हें स्मृतियों में अमर बनाए रखेगी। यह लेख केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके जीवन से सीख लेने का भी अवसर है—कि कैसे सीमित समय में भी सार्थक और प्रेरणादायक योगदान दिया जा सकता है।

ॐ शांति।
दिवंगत आत्मा को शत-शत नमन और परिवार के प्रति गहरी संवेदना।

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