PHE EE बैठक 2025 में नहीं पहुंचे TL में, कलेक्टर ने जल जीवन मिशन कार्यों में देरी पर दी कड़ी फटकार

भारत में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने का महत्वाकांक्षी प्रयास है। इस मिशन का लक्ष्य है कि ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। इस योजना की सफलता सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर अधिकारियों के समर्पण, अनुशासन और समयबद्ध कार्यान्वयन पर निर्भर करती है।
हाल ही में रायगढ़ जिले में आयोजित साप्ताहिक TL (Team Leader) समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन अभियंता (EE) की अनुपस्थिति ने प्रशासनिक स्तर पर हलचल मचा दी। बैठक में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने न केवल अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को यह संदेश दिया कि अब कार्य में देरी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक का माहौल और घटना का विवरण
रायगढ़ के कलेक्टर हर सप्ताह TL समीक्षा बैठक का आयोजन करते हैं। इस बैठक में जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी अपने विभागों के कार्यों की लक्ष्य-वार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभागीय कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरे हों।
16 दिसंबर 2025 को आयोजित बैठक में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के दौरान देखा गया कि PHE विभाग के EE बैठक में उपस्थित नहीं थे। जब कलेक्टर ने उनसे जवाब मांगा, तो पता चला कि अधिकारी अन्य कार्यों में व्यस्त होने के कारण अनुपस्थित थे और उन्होंने बैठक में अपनी अनुपस्थिति के लिए पूर्व में कोई अनुमति नहीं ली थी।
इस घटना के कारण बैठक में सन्नाटा छा गया। अधिकारी की अनुपस्थिति केवल नियमों का उल्लंघन नहीं थी, बल्कि यह योजना के समयबद्ध क्रियान्वयन में बाधा भी पैदा कर रही थी।
सोमवार को साप्ताहिक समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के कार्यपालन अभियंता की कार्यशैली को लेकर कलेक्टर बिफर गए। उन्होंने कड़ी फटकार लगाते हुए काम में जल्द सुधार करने की हिदायत दी। कलेक्टर की नाराजगी देखकर सभाकक्ष में सन्नाटा पसर गया था। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी प्रत्येक टीएल बैठक में सारे विभागों की लक्ष्यवार विस्तृत समीक्षा करते हैं।

विभागों को आवंटित कार्य और उनकी अद्यतन स्थिति के बारे में सही रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है। सोमवार को भी टीएल बैठक हुई, लेकिन इस बार ऐसा कुछ हुआ जिसने सभी अफसरों को सतर्क कर दिया है। बैठक में जल जीवन मिशन को लेकर जवाब-तलब हुआ तो कलेक्टर ने पीएचई ईई केएस कंवर के बारे में पूछा। बैठक में एसडीओ पहुंचे थे। पता चला कि बिलासपुर और रायपुर में कुछ जरूरी कार्य की वजह से ईई बैठक में नहीं पहुंचे थे।
कलेक्टर ने फोन करके ईई से बैठक में नहीं आने का कारण पूछा। ईई तब तक रायगढ़ में ही थे। बताया जा रहा है कि ईई ने बैठक में नहीं आ पाने की अनुमति भी नहीं मांगी थी। कलेक्टर ने ईई को तुरंत बैठक में पहुंचने का आदेश दिया। करीब 15 मिनट बाद जब ईई केएस कंवर पहुंचे तो कलेक्टर ने उन्हें जमकर डांटा। जल जीवन मिशन में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और लापरवाह रवैये को जल्द सुधारने की हिदायत दी। कलेक्टर का उग्र रूप देखकर एकबारगी सारे अफसर सहम गए। सूत्रों के मुताबिक काफी देर तक डांट-फटकार के बाद कलेक्टर ने ईई को वहां से जाने को कह दिया।
कलेक्टर की कड़ी प्रतिक्रिया
कलेक्टर ने तुरंत अधिकारी को फोन कर बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया। अधिकारी 15 मिनट बाद बैठक में पहुंचे, लेकिन तब तक बैठक का माहौल गंभीर और मौन हो चुका था।
कलेक्टर ने अधिकारी को स्पष्ट रूप से समझाया कि:
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बैठक में समय पर उपस्थित होना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
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काम की प्रगति की जानकारी समय पर प्रस्तुत करना हर अधिकारी का कर्तव्य है।
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जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर की टिप्पणी और फटकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
कार्य को लेकर बेहद गंभीर कलेक्टर
सूत्रों के मुताबिक सभी विभागों की समीक्षा में कलेक्टर प्वाइंट टू प्वाइंट बात करते हैं। एक सप्ताह में किए गए कार्यों की जानकारी मांगते हैं। जो विभाग ढिलाई करता है, उसे कड़े शब्दों में हिदायत मिलती है। इस वजह से कई विभागों में सुधार आ चुका है। हाजिरी सिस्टम में भी सुधार लाया जा रहा है ताकि सभी कर्मचारी समय पर दफ्तर पहुंचें।
जल जीवन मिशन की महत्ता और चुनौती
जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य है कि हर ग्रामीण घर तक नल से जल आपूर्ति पहुंचाई जाए।
इस योजना की सफलता अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, अनुशासन और समयबद्ध कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। लेकिन कई जिलों में कार्यों में देरी, निरीक्षण की कमी और कार्यान्वयन में लापरवाही के कारण ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस प्रकार की स्थिति योजना की वास्तविक सफलता पर सवाल उठाती है और प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही को भी चुनौती देती है।

TL समीक्षा बैठक का महत्व
TL समीक्षा बैठक का उद्देश्य केवल रिपोर्ट पढ़ना नहीं है, बल्कि यह विभागीय कार्यों की निगरानी, समस्याओं का समाधान और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का मंच है।
कलेक्टर की सख्ती इस बात का संकेत है कि अब अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति पूर्ण जिम्मेदारी दिखानी होगी। समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना और निर्धारित कार्यों को पूरा करना अब अनिवार्य है।
बैठक से यह संदेश भी जाता है कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तो उन्हें सीधे तौर पर फटकार और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अधिकारी की अनुपस्थिति का प्रभाव
PHE EE की अनुपस्थिति से स्पष्ट हुआ कि विभागीय कार्यों में समय पर प्रगति की कमी है। जब महत्वपूर्ण योजना जैसे जल जीवन मिशन पर कार्य स्थगित या अधूरा रह जाता है, तो इसका असर सीधे ग्रामीण जनता पर पड़ता है।
ग्रामीणों को सुरक्षित पानी नहीं मिल पाना न केवल उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर प्रभाव डालता है, बल्कि सरकार और प्रशासन के प्रति उनकी विश्वास भी कम करता है। इसलिए अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और समयबद्धता योजना की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।Kelo Pravah
प्रशासनिक संदेश और सबक
इस घटना से प्रशासनिक तंत्र को कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं:
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जिम्मेदारी से भागना स्वीकार्य नहीं: अधिकारी की अनुपस्थिति पूरे विभाग की प्रतिष्ठा पर असर डालती है।
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समयबद्ध कार्य आवश्यक है: योजनाओं के लक्ष्य तभी पूरे होंगे जब समय सीमा का पालन किया जाएगा।
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प्रभावी नेतृत्व जरूरी: कलेक्टर जैसे अधिकारी की सख्ती से अधिकारियों में कार्य के प्रति गंभीरता आती है।
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जनता का विश्वास: योजनाओं का समय पर कार्यान्वयन ग्रामीणों में प्रशासनिक विश्वास बढ़ाता है।
कलेक्टर की फटकार केवल एक अधिकारी को डांटने के लिए नहीं थी, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए सावधानी और चेतावनी भी थी कि अब कार्य में देरी और लापरवाही की जगह कर्तव्यपरायणता और जवाबदेही होगी।
जल जीवन मिशन: अवसर और ज़िम्मेदारी
जल जीवन मिशन सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और सम्मान का प्रतीक भी है।
इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी है कि:
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अधिकारियों द्वारा कार्यों का सही समय पर निष्पादन हो,
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संसाधनों का सटीक और प्रभावी उपयोग हो,
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योजना के कार्यों की नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग हो।
इन तत्वों के बिना योजना की सफलता संभव नहीं है। इसलिए कलेक्टर ने बैठक में यह संदेश स्पष्ट किया कि अब से प्रत्येक अधिकारी को अपने विभागीय कार्यों में पूर्ण जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभानी होगी।
रायगढ़ की यह घटना यह साबित करती है कि प्रशासनिक अनुशासन और समयबद्ध कार्यान्वयन किसी भी सरकारी योजना की सफलता की कुंजी हैं। जल जीवन मिशन जैसे महत्वाकांक्षी मिशन की सफलता केवल योजनाओं की घोषणा और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, कर्तव्यपरायणता और जिम्मेदारी भी अनिवार्य है।
कलेक्टर की कड़ी फटकार ने सभी अधिकारियों को यह संदेश दिया कि अब से देरी, लापरवाही और अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं है। अब हर अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाना होगा ताकि हर ग्रामीण घर तक सुरक्षित जल पहुँच सके और योजना अपने वास्तविक उद्देश्य में सफल हो सके।
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