निक्षय निरामय अभियान(2025) जिले में किया जा रहा प्रभावी क्रियान्वयन — एक विस्तृत विश्लेषण

भारत सरकार द्वारा तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा निक्षय निरामय अभियान आज देशभर के जिलों में स्वास्थ्य सुधार का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। टीबी जैसी घातक बीमारी को वर्ष 2025 तक समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी दिशा में यह अभियान स्वास्थ्य व्यवस्था, जनजागरूकता और सामुदायिक सहयोग का अनोखा सम्मिलन प्रस्तुत करता है।
जिले में इस अभियान को जिस तरह से प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है, वह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय मिलकर किस प्रकार एक बड़े लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अग्रसर हैं।
निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में टीबी रोगियों को समय पर जांच, उपचार और शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी कड़ी में विकासखण्ड घरघोड़ा के ग्राम-आमापाली निवासी 28 वर्षीय श्री संजय कुमार राठिया का योजना के तहत सफल इलाज किया गया। इससे उन्हें टीबी जैसे गंभीर बीमारी से मुक्ति मिल गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि उच्च शिक्षा के साथ-साथ छोटा-सा मार्केटिंग कार्य करने वाले संजय राठिया को कुछ समय से लगातार खांसी, शाम के समय बुखार, भूख में कमी, वजन घटना, शरीर में कमजोरी एवं थकान जैसी समस्याएं हो रही थीं। इसी दौरान निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ अभियान के तहत गांव में सर्वे कर रही मितानिन द्वारा उन्हें टीबी जांच कराने की सलाह दी गई।
निक्षय निरामय अभियान क्या है?
निक्षय निरामय अभियान, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह अभियान मुख्यतः दो स्तरों पर काम करता है—
पहला, टीबी मरीजों की खोज, और दूसरा, उनकी पूर्ण और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना।
साथ ही, यह अभियान टीबी से जुड़े मिथकों को तोड़ने और लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करने पर भी केंद्रित है।
निक्षय पोषण योजना, निक्षय मित्र, डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग, मोबाइल मेडिकल यूनिट, डिजिटल टीबी थेरेपी मॉनिटरिंग, इत्यादि इसके प्रमुख घटक हैं। ये सभी मिलकर अभियान को व्यापक और जनहितकारी बनाते हैं।
मितानिन की सलाह पर संजय राठिया ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, घरघोड़ा में जांच कराई, जहां खून जांच, बलगम जांच एवं एक्स-रे के बाद उनके टीबी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। तत्पश्चात उनका सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घरघोड़ा से टीबी उपचार प्रारंभ किया गया। विशेषज्ञों द्वारा उन्हें दवा सेवन की विधि और नियमित फॉलोअप के बारे में पूरी जानकारी दी गई।
उपचार के दौरान संजय राठिया को 6 माह तक पूर्णतः निःशुल्क टीबी की दवाएं (डॉट्स पद्धति) उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही प्रतिमाह पोषण आहार के रूप में फूड बास्केट प्रदान की गई। शासन की निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत 1000 प्रतिमाह की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में जमा की गई।
जिले में अभियान की आवश्यकता
जिले में टीबी बीमारी कई वर्षों से एक चुनौती रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ—
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स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं,
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लोग जागरूक नहीं हैं,
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कुपोषण उच्च है,
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आर्थिक स्थिति कमजोर है,
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और पारंपरिक मिथक अब भी बीमारी छुपाने को प्रेरित करते हैं।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए निक्षय निरामय अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक था, ताकि टीबी मरीजों को समय पर पहचाना जा सके और उन्हें मुफ्त, सुरक्षित एवं संपूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
वहीं ट्रायबल एवं पहाड़ी क्षेत्र का मरीज होने के कारण उन्हें 750 रुपए की प्रोत्साहन राशि यात्रा भत्ते के रूप में भी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, संक्रमण की रोकथाम हेतु उनके परिवार के सदस्यों को भी टीपीटी (टीबी प्रिवेंशन थैरेपी) दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
टीबी उपचार पूर्ण होने के बाद 05 सितंबर 2025 को की गई जांच में संजय राठिया की रिपोर्ट टीबी नेगेटिव पाई गई। वर्तमान में वे पूर्णतः स्वस्थ हैं और टीबी उपचार एवं डॉट्स दवा के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक करने का भी कार्य कर रहे हैं।
अभियान के अंतर्गत जिला स्तर पर उठाए गए प्रमुख कदम
जिले में निक्षय निरामय अभियान को कई चरणों और व्यवस्थाओं के साथ लागू किया गया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, सामाजिक संस्थाएँ और स्वयंसेवी समूह मिलकर कार्य कर रहे हैं।
घर-घर सर्वे और स्क्रीनिंग अभियान
जिले के सभी वार्डों और ग्राम पंचायतों में टीमों का गठन कर घर-घर जाकर टीबी संदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है।
आशा, एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों से यह जानकारी जुटाते हैं—
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क्या किसी घर में कोई 2 सप्ताह से ज्यादा खांस रहा है
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वजन तेजी से घट रहा है
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बुखार ठीक नहीं हो रहा
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भूख कम हो गई है
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सांस लेने में परेशानी है
संदिग्ध मरीजों के बलगम की तुरंत जांच कराकर रिपोर्ट निकाली जाती है।
टीबी मुक्त पंचायत एवं टीबी मुक्त वार्ड अभियान
हर ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त बनने के लिए लक्ष्य दिए गए हैं। इसके लिए—
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जागरूकता रैली
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ग्राम सभा में टीबी चर्चा
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महिला समूहों की सहभागिता
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स्कूल-कॉलेज स्तर पर अभियान
चलाए जा रहे हैं ताकि बीमारी को समाज के हर वर्ग तक समझाया जा सके।
मुफ्त जांच एवं नि:शुल्क उपचार
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों, पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में—
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एक्स-रे
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बलगम परीक्षण
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ट्रूनेट टेस्ट
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सीबीएनएएटी मशीन द्वारा जांच
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दवाइयों की मुफ्त उपलब्धता
सुनिश्चित की जा रही है।
साथ ही दवाइयाँ घर तक पहुँचाने और नियमितता सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की गई है।
निक्षय पोषण योजना का लाभ
टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्रति माह सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे मरीजों में उपचार के प्रति विश्वास और नियमितता दोनों बढ़ी हैं।
निक्षय मित्रों का योगदान
जिले के कई समाजसेवी, संस्थान, व्यापारी, शिक्षक, अधिकारी और जनप्रतिनिधि निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को—
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पौष्टिक आहार
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सप्लिमेंट
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कंबल
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दवाइयों के लिए सहायता
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काउंसलिंग
प्रदान कर रहे हैं।
इससे मरीजों को मानसिक सहयोग मिलता है और बीमारी से लड़ने की हिम्मत बढ़ती है।
डिजिटल मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
निक्षय पोर्टल के माध्यम से—
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मरीज की पहचान
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जांच रिपोर्ट
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उपचार की प्रगति
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दवा सेवन की दिनवार निगरानी
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पोषण योजना का वितरण
सब कुछ डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है।
इससे पारदर्शिता, जिम्मेदारी और त्वरित कार्रवाई आसान हो गई है।

जागरूकता अभियान और माइक्रो प्लानिंग
जिले में निक्षय निरामय अभियान केवल स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित नहीं रहा। इसे जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए—
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स्कूलों और कॉलेजों में टीबी जागरूकता व्याख्यान
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पंचायतों में विशेष टीबी चौपाल
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बस स्टैंड, बाजार, हाट-बाजार में माइक्रो कैंप
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पोस्टर, फ़्लेक्स और रेडियो विज्ञापन
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आंगनबाड़ी केंद्रों में माताओं को जागरूक करना
इससे लोगों में यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुँचा कि टीबी लाइलाज नहीं, बल्कि पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है—बस सही समय पर इलाज जरूरी है। Live Hindustan
अभियान से आई सकारात्मक उपलब्धियाँ
जिले में इस अभियान से अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले—
टीबी मरीजों की संख्या में सही आंकड़ों की पहचान
पहले कई मरीज छुपे रहते थे, अब स्क्रीनिंग के बाद उनकी संख्या सामने आने लगी है। इससे वास्तविक टीबी लोड का पता चल रहा है।Janta Serishta
उपचार पूर्ण होने का प्रतिशत बढ़ा
चूंकि मरीज को दवाइयाँ समय पर मिल रही हैं, पोषण मिल रहा है और काउंसलिंग भी नियमित है, इसलिए अब—
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दवा बीच में छोड़ने के मामले कम हुए हैं
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उपचार पूर्ण करने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है
कुपोषण में कमी
पोषण योजना और निक्षय मित्रों की सहायता से मरीजों का स्वास्थ्य तेजी से सुधर रहा है।
समुदाय में जागरूकता बढ़ी
अब लोग खुद टीबी जांच करवाने की मांग करने लगे हैं, जो अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।
टीबी मुक्त पंचायतों का गठन
कई पंचायतों ने निर्धारित शर्तें पूरी कर ‘टीबी मुक्त पंचायत’ का दर्जा प्राप्त किया है, जो जिले की बड़ी उपलब्धि है।
चुनौतियाँ जो अभियान अभी भी झेल रहा है
हर बड़े प्रयास की तरह इस अभियान के सामने भी कई कठिनाइयाँ हैं—
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कुछ ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी
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बीमारी छिपाने की प्रवृत्ति
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सामाजिक कलंक
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दवा नियमित नहीं लेने की आदत
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आर्थिक कठिनाइयों के कारण मरीजों का कमजोरी झेलना
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दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य टीमों का पहुँचना मुश्किल होना
हालाँकि इन चुनौतियों का हल निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार रणनीति अपडेट कर रहा है।
अभियान में समुदाय की भूमिका
टीबी उन्मूलन सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता से ही संभव है।
जिले में समुदाय द्वारा निभाई जा रही भूमिका महत्वपूर्ण है—
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टीबी मरीजों को सहयोग और प्रेरणा देना
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बीमारी के मिथकों को तोड़ना
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संदिग्ध लोगों को जांच के लिए भेजना
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निक्षय मित्र बनकर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना
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पंचायत स्तर पर अभियान को बढ़ावा देना
इससे अभियान एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी आंदोलन का रूप ले रहा है।
भविष्य की दिशा और लक्ष्य
जिला प्रशासन का लक्ष्य है—
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टीबी मुक्त जिला
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हर मरीज की 100% स्क्रीनिंग
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ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ वैन की पहुँच
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स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता को और बढ़ाना
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पोषण योजना में और सुधार
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उपचार पूर्ण करने की दर को 90% से ऊपर ले जाना
इन लक्ष्यों के साथ निक्षय निरामय अभियान जिले के स्वास्थ्य सुधार में एक नई दिशा बना रहा है।
निक्षय निरामय अभियान जिले के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई ऊँचाई दे रहा है।
यह सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामुदायिक संकल्प, एक प्रगतिशील मॉडल, और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ता राष्ट्रव्यापी प्रयास है।
जिले में इसका प्रभावी क्रियान्वयन इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, समाज और नागरिक एक साथ आते हैं, तो बड़ी से बड़ी बीमारी को भी खत्म किया जा सकता है।
टीबी उन्मूलन की राह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं—और यही संदेश यह अभियान स्पष्ट रूप से देता है।
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