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रायगढ़ में आवारा कुत्तों का एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान 67 कुत्तों को लगा टीका, रैबीज रोकथाम की बड़ी पहल

 रायगढ़ जिले में आवारा कुत्तों के लिए एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान तेज अब तक 67 कुत्तों को लगाया गया टीका, रैबीज से बचाव की दिशा में बड़ा कदम

रायगढ़ जिले में आवारा कुत्तों से फैलने वाली रैबीज (Rabies) जैसी जानलेवा बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन और नगर निगम द्वारा एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। इस अभियान के तहत अब तक 67 आवारा कुत्तों को एंटीरेबीज का टीका लगाया जा चुका है। यह पहल न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी मानी जा रही है।

यह अभियान रायगढ़ जिला में तेजी से चलाया जा रहा है, जिसे नगर निगम रायगढ़ और पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में मौजूद अधिक से अधिक आवारा कुत्तों को टीकाकरण के दायरे में लाया जाए, ताकि रैबीज जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

जिले में नागरिकों की सुरक्षा और रेबीज संक्रमण की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा सभी नगरीय निकायों में एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कलेक्टर  श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग और नगरीय निकायों ने संयुक्त रूप से अभियान को सुचारू और सतत रूप से संचालित किया है, जिसके परिणामस्वरूप जिलेभर में आवारा कुत्तों का टीकाकरण लगातार जारी है।

अभियान के अंतर्गत नगर पंचायत किरोड़ीमलनगर में 10 दिसंबर को 20 आवारा कुत्तों का डिवर्मिंग और एंटीरेबीज टीकाकरण किया गया। इससे पूर्व नगर पालिका परिषद खरसिया में 8 दिसंबर को 22 कुत्तों का टीकाकरण संपन्न हुआ था। इसी क्रम में नगर पंचायत पुसौर में 5, 8 और 10 दिसंबर को कुल 8 आवारा कुत्तों में टीकाकरण किया गया। नगर पंचायत धरमजयगढ़ में 29 नवंबर को 10 कुत्तों तथा नगर पंचायत लैलूंगा में 11 दिसंबर को 7 आवारा कुत्तों का डिवर्मिंग और टीकाकरण किया गया।

जिले के सभी शहरी क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक कुल 67 आवारा कुत्तों में एंटीरेबीज टीकाकरण और डिवर्मिंग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अभियान की गति में किसी प्रकार की कमी न आने पाए और सभी नगरीय निकाय अपने-अपने क्षेत्र में आवारा कुत्तों का व्यापक टीकाकरण सुनिश्चित करें।

उप संचालक, पशु चिकित्सा डॉ धरम दास झरिया ने बताया कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में यह अभियान जिले में रेबीज संक्रमण से सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि के मद्देनजर नियमित टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि संक्रमण का खतरा न्यूनतम रहे। जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग के इस संयुक्त प्रयास से रायगढ़ जिले में रेबीज नियंत्रण को नई गति मिली है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अभियान में सहयोग करें, आवारा कुत्तों के प्रति संवेदनशील रहें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित अधिकारी को अवगत कराएँ।

रैबीज क्या है और यह कितना खतरनाक है?

रैबीज एक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित कुत्ते या अन्य जानवर के काटने से मनुष्य में फैलती है। यह वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।

रैबीज के प्रमुख लक्षण

भारत जैसे देश में रैबीज के मामलों का बड़ा कारण आवारा कुत्तों की अधिक संख्या और उनका टीकाकरण न होना माना जाता है। यही वजह है कि रायगढ़ में चलाया जा रहा यह अभियान अत्यंत आवश्यक और सराहनीय है।


रायगढ़ में एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान की शुरुआत

रायगढ़ जिले में बीते कुछ समय से कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही थी। इसके बाद प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आवारा कुत्तों के लिए व्यवस्थित एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य


अब तक 67 कुत्तों को लगाया गया टीका

नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम द्वारा अब तक 67 आवारा कुत्तों का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया जा चुका है। यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ाई जाएगी।

टीम द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों—

में जाकर आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर टीका लगाया जा रहा है।


कैसे किया जा रहा है टीकाकरण?

टीकाकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह मानवता और सुरक्षा के साथ अंजाम दिया जा रहा है।

टीकाकरण की प्रक्रिया

इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कुत्ते को कोई चोट न पहुंचे और वह टीकाकरण के बाद सामान्य रूप से जीवन व्यतीत कर सके।


आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह अभियान?

रायगढ़ जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों और इंसानों का संपर्क लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि कुत्ते रैबीज से संक्रमित हों, तो यह जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

इस अभियान से मिलने वाले लाभ


प्रशासन और नगर निगम की भूमिका

नगर निगम रायगढ़ द्वारा इस अभियान के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा पशु चिकित्सा विशेषज्ञों, सफाई कर्मियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि—

“यह अभियान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि शहर को रैबीज मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले समय में टीकाकरण की संख्या और बढ़ाई जाएगी।”


पशु प्रेमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग

इस अभियान में पशु प्रेमियों और एनजीओ की भूमिका भी अहम रही है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं कुत्तों की पहचान करने, उन्हें पकड़ने और लोगों में जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।

जागरूकता के प्रयास


कुत्ते के काटने पर क्या करें?

हालांकि टीकाकरण अभियान चल रहा है, फिर भी यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो उसे लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। IBC24 News

जरूरी सावधानियां


भविष्य की योजना

प्रशासन की योजना है कि आने वाले महीनों में—

रायगढ़ जिले में आवारा कुत्तों के लिए चलाया जा रहा एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान एक सराहनीय और आवश्यक पहल है। अब तक 67 कुत्तों को टीका लगाया जाना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। यदि इसी तरह यह अभियान निरंतर और व्यापक स्तर पर चलता रहा, तो आने वाले समय में रायगढ़ को रैबीज मुक्त जिला बनाया जा सकता है।

यह अभियान हमें यह भी सिखाता है कि मानव और पशु दोनों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, और दोनों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास ही सबसे कारगर समाधान है।

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