रैबीज क्या है और यह कितना खतरनाक है?
रैबीज एक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित कुत्ते या अन्य जानवर के काटने से मनुष्य में फैलती है। यह वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।
रैबीज के प्रमुख लक्षण
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तेज बुखार
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सिरदर्द और कमजोरी
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पानी से डर (Hydrophobia)
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चिड़चिड़ापन और भ्रम
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अंततः कोमा और मृत्यु
भारत जैसे देश में रैबीज के मामलों का बड़ा कारण आवारा कुत्तों की अधिक संख्या और उनका टीकाकरण न होना माना जाता है। यही वजह है कि रायगढ़ में चलाया जा रहा यह अभियान अत्यंत आवश्यक और सराहनीय है।
रायगढ़ में एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान की शुरुआत
रायगढ़ जिले में बीते कुछ समय से कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही थी। इसके बाद प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आवारा कुत्तों के लिए व्यवस्थित एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य
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रैबीज के फैलाव को रोकना
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आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
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पशु कल्याण को बढ़ावा देना
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भविष्य में कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को शून्य करना
अब तक 67 कुत्तों को लगाया गया टीका
नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम द्वारा अब तक 67 आवारा कुत्तों का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया जा चुका है। यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ाई जाएगी।
टीम द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों—
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रिहायशी कॉलोनियां
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बाजार क्षेत्र
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स्कूलों और अस्पतालों के आसपास
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बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन क्षेत्र
में जाकर आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर टीका लगाया जा रहा है।
कैसे किया जा रहा है टीकाकरण?
टीकाकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह मानवता और सुरक्षा के साथ अंजाम दिया जा रहा है।
टीकाकरण की प्रक्रिया
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पहले इलाके का सर्वे किया जाता है
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प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा कुत्तों को पकड़ा जाता है
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पशु चिकित्सक द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण
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एंटीरेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन
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टीकाकरण के बाद कुत्ते को सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाता है
इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कुत्ते को कोई चोट न पहुंचे और वह टीकाकरण के बाद सामान्य रूप से जीवन व्यतीत कर सके।
आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह अभियान?
रायगढ़ जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों और इंसानों का संपर्क लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि कुत्ते रैबीज से संक्रमित हों, तो यह जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इस अभियान से मिलने वाले लाभ
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कुत्तों के काटने से होने वाले रैबीज संक्रमण में कमी
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बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा
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अस्पतालों पर बोझ कम
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शहर को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना
प्रशासन और नगर निगम की भूमिका
नगर निगम रायगढ़ द्वारा इस अभियान के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा पशु चिकित्सा विशेषज्ञों, सफाई कर्मियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि—
“यह अभियान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि शहर को रैबीज मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले समय में टीकाकरण की संख्या और बढ़ाई जाएगी।”
पशु प्रेमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग
इस अभियान में पशु प्रेमियों और एनजीओ की भूमिका भी अहम रही है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं कुत्तों की पहचान करने, उन्हें पकड़ने और लोगों में जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।
जागरूकता के प्रयास
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लोगों को रैबीज के खतरे के बारे में जानकारी
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कुत्तों के प्रति हिंसा न करने की अपील
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काटने की स्थिति में तुरंत अस्पताल जाने की सलाह
कुत्ते के काटने पर क्या करें?
हालांकि टीकाकरण अभियान चल रहा है, फिर भी यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो उसे लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। IBC24 News
जरूरी सावधानियां
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घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं
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किसी झाड़-फूंक या घरेलू उपाय पर भरोसा न करें
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नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में तुरंत जाएं
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डॉक्टर द्वारा सुझाया गया पूरा एंटीरेबीज कोर्स लें
भविष्य की योजना
प्रशासन की योजना है कि आने वाले महीनों में—
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सैकड़ों आवारा कुत्तों को टीकाकरण के दायरे में लाया जाए
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डॉग बर्थ कंट्रोल (नसबंदी) कार्यक्रम को भी तेज किया जाए
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रैबीज को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में ठोस रणनीति बनाई जाए
रायगढ़ जिले में आवारा कुत्तों के लिए चलाया जा रहा एंटीरेबीज टीकाकरण अभियान एक सराहनीय और आवश्यक पहल है। अब तक 67 कुत्तों को टीका लगाया जाना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। यदि इसी तरह यह अभियान निरंतर और व्यापक स्तर पर चलता रहा, तो आने वाले समय में रायगढ़ को रैबीज मुक्त जिला बनाया जा सकता है।
यह अभियान हमें यह भी सिखाता है कि मानव और पशु दोनों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, और दोनों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास ही सबसे कारगर समाधान है।
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