5 बड़ी वजहें लापरवाही पर चला कलेक्टर का हंटर पुसौर के सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार हटाए गए

रायगढ़ जिले में प्रशासनिक सख्ती का एक और उदाहरण सामने आया है। लंबे समय से विकास कार्यों में लापरवाही और अनदेखी की शिकायतों के बाद आखिरकार जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। पुसौर विकासखंड में पदस्थ सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर कलेक्टर के निर्देश पर की गई, जिसे प्रशासनिक हलकों में “लापरवाही पर चला कलेक्टर का हंटर” कहा जा रहा है।Amar Ujala
यह मामला केवल एक अधिकारी के हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें साफ संदेश दिया गया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
नए साल की शुरुआत के साथ ही रायगढ़ जिला प्रशासन ने लापरवाह अधिकारियों को सख्त संदेश देना शुरू कर दिया है। पुसौर नगर पंचायत में विकास कार्यों की अनदेखी और पदीय कर्तव्यों के प्रति उदासीनता बरतने वाले उप अभियंता (सब-इंजीनियर) दुर्गेश मालाकार को उनके पद से हटा दिया गया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए उनका प्रभार तत्काल प्रभाव से दूसरे अधिकारी को सौंप दिया है।
31 दिसंबर 2025 को जारी सरकारी आदेश की कॉपी से साफ होता है कि दुर्गेश मालाकार पर यह गाज अचानक नहीं गिरी है। पुसौर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर वे लंबे समय से लापरवाह बने हुए थे। प्रशासन ने 24 नवंबर 2025 को ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (नवा रायपुर) को पत्र लिखा था। लेकिन चेतावनी के बावजूद उनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया और वे सरकारी योजनाओं के निरीक्षण में लगातार अरुचि दिखाते रहे।
तत्काल प्रभार सौंपने का अल्टीमेटम
प्रशासन ने इस मामले में कितनी कड़ाई बरती है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आदेश जारी होते ही दुर्गेश मालाकार को तत्काल अपना पूरा चार्ज गजेंद्र साहू को सौंपने और उसकी सूचना जिला कार्यालय को देने के निर्देश दिए गए हैं। अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो की ओर से संबंधित सभी विभागों को इस कार्रवाई की प्रतिलिपि भेज दी गई है। क्षेत्र में चर्चा है कि इस कार्रवाई से उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो विकास कार्यों के पर्यवेक्षण को गंभीरता से नहीं ले रहे थे।
गजेंद्र साहू को मिली अतिरिक्त कमान
नगर पंचायत पुसौर के विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संभाग रायगढ़) के उप अभियंता गजेंद्र साहू को नया जिम्मा सौंपा है। श्री साहू अब अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ पुसौर नगर पंचायत का पूरा प्रभार संभालेंगे। हालांकि, प्रशासनिक तकनीकी पक्ष को देखते हुए उनका वेतन और अन्य भत्ते उनके मूल विभाग (गृह निर्माण मंडल) से ही जारी रहेंगे।
कलेक्टर के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं की गति से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुसौर विकासखंड में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप था कि:
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निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है
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समय पर काम पूरा नहीं किया जा रहा
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निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता की जा रही है
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कागजों में कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है
इन सभी कार्यों की तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार के पास थी। जब शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं, तो जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई।
जांच में क्या-क्या खामियां सामने आईं?
जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि:
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कार्य स्थल पर मौजूदगी का अभाव
कई परियोजनाओं में यह पाया गया कि सब-इंजीनियर मौके पर निरीक्षण के लिए नियमित रूप से उपस्थित नहीं थे। -
गुणवत्ता मानकों की अनदेखी
निर्माण कार्यों में तय मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हुई। -
कार्य पूर्णता में देरी
समय-सीमा के भीतर कार्य पूरे नहीं किए गए, फिर भी संबंधित फाइलों में प्रगति संतोषजनक दर्शाई गई। -
शिकायतों की अनदेखी
ग्रामीणों द्वारा दी गई लिखित शिकायतों पर समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कलेक्टर का सख्त रुख

जैसे ही जांच रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की गई, उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
“सरकारी योजनाएं जनता के लिए हैं, किसी अधिकारी की लापरवाही के कारण यदि जनता को नुकसान होता है, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इसके बाद तत्काल प्रभाव से सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार को पुसौर से हटाने के आदेश जारी कर दिए गए।
कलेक्टर की कार्रवाई का उद्देश्य
इस कार्रवाई के पीछे कलेक्टर का उद्देश्य केवल एक अधिकारी को दंडित करना नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से एक मजबूत संदेश देना था:
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सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करें
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विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो
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जनता की शिकायतों को प्राथमिकता से सुना जाए
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सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए
प्रशासनिक हलकों में हलचल
सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार को हटाए जाने की खबर फैलते ही पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। अन्य विभागों के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। कई जगहों पर:
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अधूरे कार्यों की समीक्षा शुरू हो गई
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फील्ड निरीक्षण बढ़ा दिए गए
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पुराने लंबित मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन का स्वागत किया है।
ग्रामीणों की राय
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से खराब सड़कों, अधूरे भवनों और घटिया निर्माण से परेशान थे। अब उन्हें उम्मीद है कि:
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विकास कार्यों में सुधार होगा
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अधिकारी काम को गंभीरता से लेंगे
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शिकायत करने पर कार्रवाई होगी
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कलेक्टर की इस कार्रवाई को सराहनीय बताया और कहा कि:
“ऐसी कार्रवाई से ही सिस्टम में सुधार संभव है।”
क्या आगे और कार्रवाई हो सकती है?
सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं हो सकती। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि:
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अन्य विकासखंडों में भी जांच की जाएगी
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यदि कहीं लापरवाही पाई गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे
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ठेकेदारों पर भी कार्रवाई संभव है
सरकारी योजनाओं पर पड़ने वाला असर
इस निर्णय का सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा। उम्मीद की जा रही है कि:
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योजनाएं समय पर पूरी होंगी
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गुणवत्ता में सुधार आएगा
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जनता का प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा
प्रशासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम
यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि:
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पद और जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही भी जुड़ी है
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लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
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ईमानदारी से काम करने वालों को संरक्षण मिलेगा
पुसौर के सब-इंजीनियर दुर्गेश मालाकार को हटाने की कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि सुशासन की ओर बढ़ता एक ठोस कदम है। कलेक्टर द्वारा लिया गया यह फैसला आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और मजबूत करेगा।
यह मामला उन सभी अधिकारियों के लिए चेतावनी है, जो अपने कर्तव्यों को हल्के में लेते हैं। वहीं, आम जनता के लिए यह उम्मीद की किरण है कि अब उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और विकास कार्यों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
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