‘मोर गांव‑मोर पानी’ 5 तरीकों से बदल रही है गांवों की तस्वीर

‘मोर गांव‑मोर पानी’ — 5 तरीकों से गांवों की तस्वीर बदलने वाला अभियान

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का मूल आधार पानी है। पानी के बिना खेती, पशुपालन और सामान्य जीवन की कल्पना भी असंभव है। आज जब जल संकट और भूमिगत जल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं, तब जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन हमारी प्राथमिकता बन चुका है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मोर गांव‑मोर पानी’ अभियान शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाना और जल संरक्षण को एक सामाजिक आंदोलन बनाना है।


अभियान का उद्देश्य और महत्व

‘मोर गांव‑मोर पानी’ अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और भूजल संवर्धन करना है। यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपने गांव के पानी की जिम्मेदारी खुद लेने के लिए प्रेरित करता है।

रायगढ़ जिला आज जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत डबरी निर्माण को राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “मोर गाँव मोर पानी” महा अभियान से जोड़ते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण जीवन को स्थायी मजबूती देने का संकल्प लिया है।

यह पहल केवल वर्षा जल को सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की ठोस नींव भी रख रही है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में शुरू इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों को राहत देना और आजीविका के दीर्घकालिक अवसर उपलब्ध कराना है। जल संरक्षण के ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की आधारशिला साबित होंगे।

मनरेगा अंतर्गत डबरी निर्माण से रायगढ़ जिले के किसानों को वर्ष भर सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी और जायद फसलों की खेती संभव हो सकेगी, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। डबरियों में मछली पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों के लिए आय के अतिरिक्त और स्थायी स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।

जिला पंचायत अधिकारियों के अनुसार, जिले में 500 से अधिक डबरियों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन कार्यों से एक ओर हजारों ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आर्थिक स्वावलंबन को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल ग्रामीण युवाओं के पलायन को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

“मोर गाँव-मोर पानी” महा अभियान वर्षा जल संवर्धन, भूजल संरक्षण और ग्रे वाटर प्रबंधन पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत चेक डेम, फार्म पॉन्ड, कंटूर ट्रेंच, परकॉलेशन टैंक, सोक पिट, वृक्षारोपण जैसे विविध कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ जिले में इसे एक जन आंदोलन का रूप देने के लिए ग्राम सभाओं, जल शपथ कार्यक्रमों, रैलियों और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

स्व-सहायता समूहों और “बिहान” योजना की दीदियों को इस अभियान से जोड़कर जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका गतिविधियों को भी सशक्त किया जा रहा है। साथ ही, जीआईएस तकनीक के माध्यम से योजना की पारदर्शिता, भूजल स्तर की निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। राज्य स्तरीय सशक्त समिति द्वारा भी इस अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है, जिससे रायगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी जिला बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

जून 2025 से शुरू हुआ यह महा अभियान अब पूरे राज्य में जन सहभागिता का प्रतीक बन रहा है। इसके सफल क्रियान्वयन से न केवल मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि हरित गांवों, समृद्ध किसानों और खुशहाल परिवारों की नई तस्वीर उभरकर सामने आएगी। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे ग्राम पंचायतों के माध्यम से आवेदन कर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दें।

अभियान के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • वर्षा जल और स्थानीय जल संसाधनों का संरक्षण

  • भूमिगत जल स्तर को स्थिर करना और बढ़ावा देना

  • जल संकट की समस्याओं को रोकना

  • ग्रामीणों में जल प्रबंधन और जागरूकता बढ़ाना

इस अभियान के माध्यम से गांवों में पानी की कमी को दूर करने और सतत जल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ाने की पहल की जा रही है।


अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ

अभियान में कई तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं, जो गांवों की जल व्यवस्था को मज़बूत बनाने में मदद करती हैं।

सोख्ता गड्ढे और रिचार्ज पिट का निर्माण
गांवों में घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर सोख्ता गड्ढे बनाए जाते हैं। ये गड्ढे वर्षा जल को जमीन में प्रवेश कराने और भूमिगत जल स्तर बढ़ाने में मदद करते हैं।

बोरी बंधान और जल संरचनाएँ
किसानों और ग्रामीणों के सहयोग से बोरी बंधान और अन्य जल संरचनाएँ बनाई जाती हैं, जिससे वर्षा जल का संग्रहण और भूजल में पुनर्भरण सुनिश्चित होता है।

ग्रामीण प्रशिक्षण और जागरूकता
अभियान के तहत ग्रामवासियों को जल संरक्षण तकनीकों, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल प्रबंधन के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे ग्रामीण स्वयं अपने गांव में जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

ग्राम पंचायत का डेटा और निगरानी
ग्राम पंचायतों द्वारा जल स्तर और जल संरचनाओं की निगरानी की जाती है। इससे यह पता चलता है कि गांव में पानी की उपलब्धता और भूमिगत जल स्तर में सुधार हो रहा है या नहीं।


जनभागीदारी की भूमिका

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी है।

  • ग्रामीण अपने खेतों और घरों के आसपास जल संरचनाओं का निर्माण करते हैं।

  • महिलाएँ और स्वयं‑सहायता समूह जल संरक्षण की गतिविधियों में नेतृत्व करते हैं।

  • युवाओं और ग्राम कार्यकर्ताओं द्वारा जल संरचनाओं की नियमित देखभाल और निगरानी की जाती है।

  • पंचायतें समाज में नेतृत्व और संगठन क्षमता बढ़ाती हैं।

इस प्रकार यह पहल केवल सरकारी प्रयास नहीं है, बल्कि समाज का हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी समझकर इसमें योगदान दे रहा है।


अभियान से बदलती तस्वीर

अभियान के कारण गांवों में जल संचयन की तकनीकें अपनाई जा रही हैं। इससे भूमिगत जल स्तर में सुधार हो रहा है और पानी की उपलब्धता स्थिर हो रही है।

समुदाय में जागरूकता और नेतृत्व
गांवों के लोग समझ गए हैं कि पानी सिर्फ़ सरकार का काम नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। लोग तालाब की सफाई, सोख्ता गड्ढे और वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ
जल संरक्षण से पानी की उपलब्धता बढ़ती है, मिट्टी की नमी बनी रहती है और फसलों की वृद्धि में मदद मिलती है। साथ ही यह जैव विविधता और पर्यावरण के संतुलन को भी बनाए रखने में मदद करता है।


अभियान के लाभ

  • भूमिगत जल स्तर में सुधार

  • पेयजल की नियमित उपलब्धता

  • कृषि के लिए जल संरचनाओं का निर्माण

  • समुदाय में सहयोग और साझा जिम्मेदारी की भावना

  • ग्राम पंचायतों और समाज में नेतृत्व कौशल में वृद्धि

  • सतत जल प्रबंधन की दीर्घकालिक सोच


चुनौतियाँ और समाधान

अभियान में कुछ चुनौतियाँ भी हैं।

  • हर गांव में जल स्रोत और भूगोल अलग होते हैं, इसलिए एक जैसी तकनीक सभी जगह नहीं अपनाई जा सकती।

  • कई गांवों में तकनीकी और वित्तीय संसाधनों की कमी होती है।

  • जल संरचनाओं की सफलता के लिए नियमित निगरानी और रखरखाव आवश्यक है।

इन चुनौतियों का समाधान पंचायतों को सशक्त बनाने, विशेषज्ञ मार्गदर्शन देने और प्रशिक्षण व संसाधन उपलब्ध कराने से किया जा सकता है। Daily Chhattisgarh News+1


अभियान को अपनाने के तरीके

  • गांव में बैठक आयोजित कर जल स्रोतों और जल स्तर की समस्या पर चर्चा करें।

  • सोख्ता गड्ढे और वर्षा जल संरचनाएँ बनाएं।

  • ग्रामीण प्रशिक्षण लें और दें।

  • जल संरचनाओं और जल स्तर की नियमित जांच करें।

‘मोर गांव‑मोर पानी’ महाअभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं है। यह एक सामाजिक आंदोलन, जल सुरक्षा का समाधान और जल संरक्षण की दीर्घकालिक सोच है।

अभियान यह दिखाता है कि जब गांव अपने पानी की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तो समस्याएँ अवसर में बदल सकती हैं। जनभागीदारी, शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक सहयोग इस पहल की सफलता की कुंजी हैं।

यह अभियान पूरे भारत में जल संरक्षण की प्रेरणा बन रहा है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य देने में मदद कर रहा है।

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