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“5 कारण क्यों शिवशक्ति प्लांट की चिमनी से घरों तक पहुँच रही काली डस्ट और इसके प्रभाव”

5 कारण क्यों शिवशक्ति प्लांट की चिमनी से घरों तक पहुँच रही काली डस्ट पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित शिवशक्ति स्टील प्लांट की चिमनी से निकलने वाली काली डस्ट और धुआँ स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। आसपास के गाँवों के निवासियों का कहना है कि यह धूल उनके घरों की छतों, आँगन और खेतों तक जम रही है, जिससे उनकी दैनिक ज़िंदगी प्रभावित हो रही है।

इस समस्या ने पर्यावरण, स्वास्थ्य और स्थानीय जीवनशैली को गहराई से प्रभावित किया है।  उद्योग केवल दिखावे के लिए गांवों को गोद लेते हैं। वादा किया जाता है कि इन गांवों में सुविधाओं का विकास किया जाएगा, लोगों की सहूलियत के लिए काम करेंगे। धरातल पर ऐसा कुछ होता नहीं है। हमीरपुर रोड पर स्थित शिव शक्ति स्टील प्लांट से आसपास के गांव त्रस्त हैं।

प्लांट की चिमनी से निकल रही कालिख लोगों के घरों में पहुंच रही है। चक्रधरपुर में शिव शक्ति स्टील प्लांट स्थित है। संयंत्रों को चिमनी से राख निकलने से रोकने के लिए ईएसपी और गंदे पानी को रोकने के लिए ईटीपी लगाना अनिवार्य होता है। प्लांट संचालन के दौरान दोनों ही इकाईयां चलनी जरूरी हैं।शिव शक्ति स्टील की चिमनी से गहरा काला धुआं उत्सर्जित हो रहा है। कंपनी ने चक्रधरपुर और चुनचुना को गोद लिया है। दोनों ही गांवों में रहना मुश्किल हो गया है। ईएसपी बंद करने की वजह से प्रदूषित डस्ट युक्त काला धुआं पूरे इलाके में फैल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि रोड से गुजरने पर भी डस्ट के कारण आंख में खुजली हो रही है। ठंड के मौसम में डस्ट नीचे बैठता जाता है। इसीलिए घरों में रोज काली डस्ट की परत छा रही है। प्लांट प्रबंधन को ईएसपी चलाने पर ज्यादा बिजली खपत करनी पड़ती है। इसलिए शिव शक्ति स्टील भी ईएसपी नहीं चला रहा है।

प्रदूषण से कौन बचाएगा

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी बेशकीमती जमीनें देकर शिव शक्ति स्टील प्लांट लगवाया। इसके बदले अब उनको बीमारियां मिल रही हैं। डस्ट के कारण आंखों में खुजली हो रही है। तालाब का पानी भी काला दिखता है। जंगल में पेड़ों के पत्ते भी काले ही दिख रहे हैं। घर के अंदर तक महीन डस्ट पहुंच रही है। इतने ज्यादा प्रदूषण से बचने के लिए ग्रामीण कहां जाएं, समझ नहीं आ रहा है।


काली डस्ट क्या है?

काली डस्ट मुख्यतः लोपत्त (particulate matter) और अधजलित कार्बन कण (soot) होती है।

ये सूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं और श्वसन तंत्र, हृदय और त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।Kelo Pravah


शिवशक्ति प्लांट के आसपास की स्थिति

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट की चिमनी से निरंतर गहरा काला धुआँ निकलता है। यह धूल सर्दियों में और भी ज्यादा घरों तक पहुँचती है क्योंकि ठंडी हवा के कारण धूल नीचे जम जाती है।

मुख्य शिकायतें:

  1. घरों में छत और फर्श पर काली‑भूरी परत जमना।

  2. बच्चों और बुज़ुर्गों में खाँसी, गले में जलन और सांस लेने में कठिनाई।

  3. खेतों और जल स्रोतों में धूल जमने से कृषि और पानी प्रभावित होना।

  4. पेड़‑पौधों की पत्तियाँ और आसपास की जमीन काली‑भूरी दिखाई देना।


काली डस्ट के मुख्य कारण

1. प्रदूषण नियंत्रण उपकरण का संचालन न होना

2. मौसम और हवा की स्थिति

3. भू‑आकृतिक स्थिति


स्वास्थ्य पर प्रभाव

काली डस्ट और सूक्ष्म कण मानव स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रभाव डालते हैं:

1. श्वसन स्वास्थ्य पर प्रभाव

2. हृदय और रक्त‑नली स्वास्थ्य पर प्रभाव

3. त्वचा और आंखों पर प्रभाव


पर्यावरण पर प्रभाव


समाधान और उपाय

1. औद्योगिक स्तर पर समाधान

2. स्थानीय और सामाजिक उपाय

3. व्यक्तिगत बचाव उपाय

शिवशक्ति प्लांट से निकलने वाली काली डस्ट न केवल स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और जीवन पर असर डाल रही है, बल्कि यह पर्यावरणीय और सामाजिक संकट का भी कारण बन रही है।

इस समस्या का समाधान:

  1. औद्योगिक प्लांटों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का सही संचालन।

  2. सरकारी निगरानी और कड़े नियमों का पालन।

  3. स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी।

  4. व्यक्तिगत और घरेलू सुरक्षा उपाय।

यदि सभी स्तरों पर सहयोग और जिम्मेदारी दिखाई जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और स्थानीय लोगों के लिए स्वच्छ हवा और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।

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