रायगढ़ से निकली ऑर्गेनिक तेल की शुद्ध खुशबू किसान सत्याराम ने खड़ा किया ₹30 लाख का कारोबार, 4 युवाओं को भी दिया रोजगार
एक किसान, एक सोच और आत्मनिर्भरता की मिसाल
छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला अब सिर्फ धान की खेती या खनिज संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि 30 लाख के ऑर्गेनिक उत्पादों की नई पहचान के लिए भी जाना जाने लगा है। इसी जिले के एक साधारण किसान सत्याराम ने अपने परिश्रम, नवाचार और आत्मविश्वास के बल पर ऐसा काम कर दिखाया है, जो आज हजारों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है।
जहां अधिकांश किसान पारंपरिक खेती तक सीमित रहकर लागत और मुनाफे के बीच संघर्ष करते हैं, वहीं सत्याराम ने खेती को उद्यमिता (Entrepreneurship) से जोड़कर एक नया रास्ता चुना। आज उनके द्वारा निर्मित 30 लाख के ऑर्गेनिक तेल न सिर्फ शुद्धता और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इससे उन्होंने करीब ₹30 लाख का सालाना कारोबार भी खड़ा कर लिया है।
साधारण किसान से सफल उद्यमी बनने की कहानी
रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले सत्याराम का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा। सीमित जमीन, पारंपरिक खेती और बाजार पर निर्भरता—ये सभी चुनौतियां उनके सामने थीं। कई बार लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता था।
बड़े नवापारा बरमकेला के रहने वाले सत्याराम साहू, जो कभी केवल पारंपरिक खेती करते थे, आज जिले के 30 लाख के सफल ऑर्गेनिक ऑयल उद्यमियों में गिने जाते हैं। पीएमएफएमई योजना की सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय को बड़े स्तर पर विकसित किया और अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया।
सत्याराम साहू का परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था। बढ़ती लागत और कम दाम की वजह से उनकी आमदनी सीमित थी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान उन्होंने यह ठाना कि कुछ नया किया जाए और खेती भी से आय बढ़ाई जाए। उन्होंने महसूस किया कि बाजार में केमिकल-फ्री और 30 लाख ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
उनके क्षेत्र में सरसों, तिल और मूंगफली की अच्छी पैदावार थी। उन्होंने सोचा कि अगर वे खुद तेल तैयार करें और ब्रांडेड तरीके से बेचें, तो अधिक मुनाफा मिलेगा।
सत्याराम साहू ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र रायगढ़ से संपर्क किया और पीएमएफएमई योजना के तहत वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण की जानकारी ली। योजना के पात्रतानुसार उन्होंने आवेदन किया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ऋण एवं 10 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त कर 29.80 लाख रुपये की परियोजना में निवेश किया।
इसके बाद उन्होंने न्यू मरीन ड्राइव, रायगढ़ में ऑर्गेनिक ऑयल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना की। उन्होंने सरसों, तिल, नारियल और मूंगफली से केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक आयल का उत्पादन शुरू किया। इस कार्य में सत्याराम ने अपने साथ चार अन्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया। उनकी इकाई न केवल आर्थिक रूप से सफल है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन और रोजगार सृजन का प्रतीक भी बन चुकी है।
सत्याराम साहू कहते हैं कि पीएमएफएमई योजना ने उनकी सोच को आकार दिया और व्यवसाय को नई ऊँचाइयाँ दी। आज उनकी मासिक बिक्री 2.50 से 3 लाख रुपये तक पहुँच चुकी है। इससे वह अच्छा खासा आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। यह योजना उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक सुश्री अंजू नायक ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना भारत के छोटे फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को संगठित और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह योजना वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और समर्थन का संपूर्ण पैकेज देती है, जिससे छोटे उद्यमी अपनी उत्पादकता, गुणवत्ता और मुनाफा बढ़ा सकते हैं। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया सरल है, और इच्छुक उद्यमी पीएमएफएमई पोर्टल या जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
सत्याराम बताते हैं कि—
“खेती से आमदनी तो होती थी, लेकिन उसमें स्थायित्व नहीं था। मौसम खराब हो जाए या बाजार गिर जाए, तो मेहनत बेकार चली जाती थी।”
यहीं से उनके मन में कुछ अलग करने का विचार जन्मा।
ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ा कदम
सत्याराम ने महसूस किया कि आज बाजार में 30 लाख के शुद्ध और रसायन-मुक्त उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है और वे अब मिलावटी तेल की जगह 30 लाख ऑर्गेनिक तेल को प्राथमिकता देने लगे हैं।
उन्होंने सबसे पहले—
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रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग बंद किया
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देसी बीजों का चयन किया
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पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय किया
धीरे-धीरे उन्होंने सरसों, मूंगफली और तिल की ऑर्गेनिक खेती शुरू की।
तेल निकालने की पारंपरिक विधि ने दिलाया भरोसा
सत्याराम ने बाजार में मिलने वाले रिफाइंड तेल की बजाय कोल्ड प्रेस्ड (घानी विधि) से तेल निकालने का निर्णय लिया। इस विधि में—
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तेल को बिना अधिक तापमान के निकाला जाता है
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पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं
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खुशबू और स्वाद प्राकृतिक बना रहता है
यही वजह है कि उनके तेल की खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।
छोटी शुरुआत, बड़ा सपना
शुरुआत में सत्याराम ने केवल स्थानीय बाजार में ही अपने 30 लाख ऑर्गेनिक तेल की बिक्री की। उन्होंने खुद घर-घर जाकर लोगों को तेल की गुणवत्ता समझाई।
शुरुआती चुनौतियां कम नहीं थीं—
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लोग कीमत को लेकर सवाल करते थे
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ब्रांड पर भरोसा जमाना मुश्किल था
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पैकेजिंग और मार्केटिंग का अनुभव नहीं था
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे बढ़ता भरोसा और बाजार
जब लोगों ने सत्याराम के तेल का इस्तेमाल शुरू किया, तो—
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स्वाद और खुशबू ने सबको प्रभावित किया
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स्वास्थ्य लाभ नजर आने लगे
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दोबारा वही तेल खरीदने लगे
यहीं से मुंह-जुबानी प्रचार (Word of Mouth) ने काम किया और मांग तेजी से बढ़ने लगी।
₹30 लाख के कारोबार तक का सफर
आज सत्याराम का ऑर्गेनिक तेल कारोबार—
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सालाना करीब ₹30 लाख का टर्नओवर कर रहा है
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रायगढ़ के अलावा आसपास के जिलों तक पहुंच चुका है
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किराना दुकानों, ऑर्गेनिक स्टोर्स और सीधे उपभोक्ताओं तक बिक रहा है
यह सब बिना किसी बड़े निवेश या कॉर्पोरेट समर्थन के संभव हुआ।
4 युवाओं को मिला स्थायी रोजगार
सत्याराम की इस सफलता का सबसे बड़ा सामाजिक लाभ यह है कि उन्होंने 30 लाख स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है।
वर्तमान में उनके यूनिट में—
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4 युवा स्थायी रूप से कार्यरत हैं
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कोई पैकेजिंग संभालता है
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कोई मार्केटिंग और डिलीवरी
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कोई उत्पादन प्रक्रिया में मदद करता है
इससे न सिर्फ बेरोजगारी कम हुई, बल्कि युवाओं में स्वरोजगार की सोच भी विकसित हुई।
महिलाओं की भी बढ़ती भागीदारी
सत्याराम की पत्नी और गांव की अन्य महिलाएं भी इस काम में सहयोग कर रही हैं—
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बीजों की सफाई
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पैकेजिंग
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लेबलिंग
इससे महिलाओं को भी आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है।
सरकारी योजनाओं से मिला सहारा
सत्याराम ने बताया कि—
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कृषि विभाग की ट्रेनिंग
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जैविक खेती पर कार्यशालाएं
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लघु उद्योग से जुड़ी योजनाएं
इन सबका उन्हें लाभ मिला। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि—
“अगर किसान खुद आगे बढ़ने का मन बना ले, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।”
मिलावट के दौर में शुद्धता की पहचान
आज जब बाजार मिलावटी तेलों से भरा हुआ है, ऐसे समय में सत्याराम का 30 लाख के ऑर्गेनिक तेल—
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शुद्धता का प्रतीक बन गया है
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स्वास्थ्य के प्रति जागरूक परिवारों की पहली पसंद है
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बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सुरक्षित माना जा रहा है
यही वजह है कि उनकी ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ रही है।
आने वाले समय की योजनाएं
सत्याराम यहीं रुकने वाले नहीं हैं। उनकी भविष्य की योजनाओं में शामिल है—
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उत्पादन क्षमता बढ़ाना
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ऑनलाइन बिक्री की शुरुआत
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अन्य ऑर्गेनिक उत्पाद जैसे
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आटा
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दाल
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मसाले
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वे चाहते हैं कि रायगढ़ का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में 30 लाख ऑर्गेनिक ब्रांड के रूप में जाना जाए।
किसानों और युवाओं के लिए संदेश
सत्याराम का संदेश साफ है—
“खेती घाटे का सौदा नहीं है, अगर हम उसे सही दिशा और सोच के साथ करें। कच्चा माल बेचने की बजाय अगर हम उसे उत्पाद बनाएं, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।”
रायगढ़ की मिट्टी से निकली प्रेरणा
सत्याराम की यह कहानी साबित करती है कि—
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संसाधन सीमित हों तो भी सोच बड़ी होनी चाहिए
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गांव में रहकर भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है
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किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, सफल उद्यमी भी बन सकता है
रायगढ़ की मिट्टी से निकली यह 30 लाख के ऑर्गेनिक तेल की खुशबू अब आत्मनिर्भर भारत की सुगंध बनती जा रही है।
किसान सत्याराम की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह—
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ग्रामीण उद्यमिता का उदाहरण
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जैविक खेती की ताकत
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स्थानीय रोजगार सृजन की मिसाल
है। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा करना चाहता है।Amar Ujala
रायगढ़ का यह किसान आज न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन चुका है।
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