27 साल की सेवाओं के बाद प्राचार्य बने मनोज कुमार कुजूर का भावुक विदाई समारोह — विद्यालय और गांव से जुदा होने पर छलके भाव
शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करते, वे समाज का भविष्य गढ़ते हैं। एक शिक्षक की सेवा और समर्पण उन पीढ़ियों में बस जाती है जिन्हें वह तैयार करता है। यही कारण है कि जब कोई शिक्षक या प्राचार्य अपने संस्थान को अलविदा कहता है, तो यह सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम होता है।
कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला मनोज कुमार कुजूर के विदाई समारोह में, जिन्होंने लगभग 27 वर्षों तक निरंतर सेवाएं देते हुए न केवल विद्यालय को उत्कृष्ट बनाया, बल्कि पूरे क्षेत्र के शैक्षिक वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।
उनकी विनम्रता, सरल व्यक्तित्व, और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए लगातार किए गए प्रयासों ने उन्हें स्थानीय समाज में एक आदर्श के रूप में स्थापित किया। आज वे प्राचार्य पद से विदाई लेकर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा छोड़ा गया प्रभाव और प्रेरणा हमेशा बनी रहेगी।
लोग अपनी पदोन्नति से खुश होते हैं परंतु मुझे इस खुशी से कहीं अधिक इस विद्यालय को, अपने सहकर्मियों को, विद्यार्थियों को और इस गांव के लोगों को छोड़कर दूसरी संस्था में जाने का दुख है। इतने वर्षों में आप लोगों ने जो अपनापन और स्नेह दिया है उसे भूल पाना आसान नहीं है। उक्त बातें नव पदोन्नत प्राचार्य मनोज कुमार कुजूर ने पदोन्नति पश्चात आयोजित अपनी विदाई के दौरान कही।
उन्होंने आगे कहा कि लगभग 27 वर्षों तक मैने इस विद्यालय में अपनी सेवाएं दी और इस दौरान यहां अध्ययनरत बच्चे आज भी किसी न किसी बहाने याद करते हैं, सलाह लेते हैं और यही मेरी असली पूंजी है जो मैने यहां कार्यरत रहते हुए कमाया है। मैं भले ही अब दूसरे विद्यालय जा रहा हूं परंतु मेरा लगाव हमेशा इस विद्यालय से इस गांव से उसी प्रकार ही रहेगा जैसे पहले हुआ करता था। मुझे इतना स्नेह और सम्मान देने के लिए आप सभी का मै सदा ऋणी रहूंगा।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पिछले दिनों ई संवर्ग के व्याख्याता, व्याख्याता एलबी और प्रधान पाठक की पदोन्नति प्राचार्य पद पर की है।
इसी के तहत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोडतराई में पिछले 27 वर्षों से कार्यरत रहे व्याख्याता एलबी मनोज कुमार कुजूर की पदोन्नति प्राचार्य के पद पर करते हुए उन्हें शासकीय हाई स्कूल तेलीपाली (पुसौर) में पदस्थ किया गया है। अपने पुराने साथी की पदोन्नति पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोडतराई के कर्मचारियों द्वारा उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन शाला विकास एवं प्रबंध समिति की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती लक्ष्मी देवी पटेल तथा विद्यालय के प्राचार्य एस आर भगत की विशेष उपस्थिति में किया गया।
इस दौरान नव पदोन्नत प्राचार्य मनोज कुमार कुजूर अपनी धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति कुजूर (शिक्षिका) तथा अपनी पुत्री ईशा रेनू कुजूर के साथ उपस्थित थे। अतिथियों सहित विद्यालय के कर्मचारियों और बच्चों ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। कुजूर परिवार ने भी अपनी ओर से विद्यालय सहित कर्मचारियों को खास भेंट दिया। कार्यक्रम में श्रीमती लक्ष्मी देवी पटेल, एस आर भगत, जी पी नायक, जे एस दीवान, नवीन कुमार दुबे सहित कुछ विद्यार्थियों ने अपनी बात रखते हुए कुजूर सर के साथ बिताए पलों को याद किया और उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। विदाई समारोह के दौरान बड़ी संख्या में विद्यालय के कर्मचारी, विद्यार्थिगण उपस्थित रहे।
मनोज कुमार कुजूर का शैक्षिक सफर — समर्पण से भरी कहानी
मनोज कुमार कुजूर की यात्रा साधारण नहीं रही। एक शिक्षक के रूप में शुरुआत करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत, निष्ठा और शैक्षिक गुणवत्ता के दम पर शिक्षक से हेडमास्टर और बाद में प्राचार्य का पद प्राप्त किया।
उनका मानना था—
“विद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास का माध्यम होना चाहिए।”
उनके पूरे कार्यकाल में यह सोच स्पष्ट दिखी:
1. 27 वर्षों का लंबा, अनुशासित और प्रेरणादायी सफर
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उन्होंने अपनी सेवाओं की शुरुआत एक सहायक शिक्षक के रूप में की।
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उनके कठोर परिश्रम और शानदार कार्यशैली ने उन्हें जल्द ही लोगों की नजरों में एक जिम्मेदार शिक्षक के रूप में स्थापित किया।
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बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए वे हमेशा नई शिक्षण विधियों का उपयोग करने को प्रेरित करते थे।
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ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा विस्तार में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
2. शैक्षिक गुणवत्ता को नई ऊँचाइयाँ देना
उनके कार्यकाल में—
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बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम लगातार बेहतर रहा।
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विद्यालय में ड्रॉपआउट दर कम हुई।
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बच्चों की उपस्थिति और अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास बढ़ा।
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सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया।
3. नेतृत्व क्षमता और टीमवर्क
एक प्राचार्य के रूप में उनका नेतृत्व सहयोग-आधारित रहा।
वे अक्सर शिक्षकों से कहते थे—
“हम सभी मिलकर विद्यालय को बेहतर बनाते हैं, एक व्यक्ति से कुछ नहीं होता।”
कुजूर सर की टीम भावना ने विद्यालय को एक परिवार की तरह बाँधकर रखा।
विदाई समारोह का माहौल — भावनाओं से भरा, अविस्मरणीय पल
उनके सम्मान में आयोजित विदाई समारोह का दृश्य अत्यंत भावुक था।
विद्यालय परिसर में शिक्षक, अभिभावक, गांव के लोग, पूर्व विद्यार्थी और वर्तमान विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
1. स्वागत और अभिनंदन
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से हुई—
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बच्चों ने पुष्पगुच्छ और तिलक से स्वागत किया।
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विद्यालय स्टाफ ने शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
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सभी की आँखों में एक ही संदेश था — आभार।
2. वक्ताओं के उद्गार
विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, और अभिभावकों ने क्रम से मंच पर आकर अपने विचार व्यक्त किए।
सभी ने बताया कि—
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कुजूर सर ने विद्यालय को कैसे बदल दिया,
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कैसे उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास दिया,
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और कैसे उनके मार्गदर्शन ने पूरे क्षेत्र को शिक्षित वातावरण प्रदान किया।
एक शिक्षक की बात आज भी सबको याद है—
“हमने स्कूल को एक परिवार की तरह चलाना सीखा, यह कुजूर सर की ही देन है।”
3. विद्यार्थियों की भावनाएं छलकीं
विद्यार्थियों के लिए यह विदाई सबसे कठिन थी।
कई बच्चों ने उनके मार्गदर्शन में मिली प्रेरणा के अनुभव साझा किए।
किसी ने कहा—
“सर की वजह से मैंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला बदल दिया।”
किसी ने कहा—
“सर की एक बात ने मुझे जीवन के लिए तैयार किया — हार मानना नहीं है!”
कुछ छात्र-छात्राएं भावुक होकर रो पड़े।
मनोज कुमार कुजूर का संबोधन — भावुक शब्दों में विदाई
जब कुजूर सर मंच पर आए, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु—
1. संघर्षों और उपलब्धियों का जिक्र
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सेवा शुरू की थी, तब विद्यालय की स्थिति बहुत अलग थी।
धीरे-धीरे सभी के सहयोग से आज विद्यालय एक आदर्श संस्थान बन पाया है।
2. शिक्षकों के प्रति आभार
उन्होंने कहा—
“मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता था, आप सभी शिक्षक मेरी ताकत थे।”
3. विद्यार्थियों के लिए संदेश
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हमेशा अनुशासन में रहना
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ईमानदारी और परिश्रम को जीवन में अपनाना
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शिक्षा को जीवन की ढाल बनाना
4. गांव के लोगों के प्रति सम्मान
गांव के लोगों ने जो प्यार और विश्वास उनकी सेवाओं पर रखा, उसके लिए वे भावुक हुए और कहा—
“मैंने यहां सिर्फ नौकरी नहीं की, मैंने जीवन का सुंदर हिस्सा जिया।” Amar Ujala
विद्यालय और गांव से जुड़ाव — क्यों छलके भाव?
मनोज कुमार कुजूर केवल एक प्राचार्य नहीं, बल्कि गांव और विद्यालय के लिए एक मार्गदर्शक, एक अभिभावक और एक मित्र की भूमिका में थे।
इसलिए उनसे जुदा होना सबके लिए कठिन था।
1. स्कूल परिवार का सदस्य
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उन्होंने हर संकट में विद्यालय को संभाला।
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बच्चों को घर जैसा वातावरण दिया।
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शिक्षकों को भाईचारे से जोड़े रखा।
2. गांव की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान
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ग्रामीण बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
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स्कूल–समाज के बीच पुल की तरह काम किया।
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शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाए।
3. सभी के मन में विशेष स्थान
यही कारण रहा कि विदाई के समय
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बच्चों की बातें रुक नहीं रही थीं,
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अभिभावकों की आँखें भर आई थीं,
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और शिक्षकों के शब्द कम पड़ रहे थे।
उपलब्धियां — जो हमेशा याद रखी जाएंगी
मनोज कुमार कुजूर की सेवा में कई ऐसी उपलब्धियाँ जुड़ी हैं जो लंबे समय तक प्रेरणा देती रहेंगी।
1. बोर्ड परीक्षाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन
उनके कार्यकाल में विद्यालय के परिणाम लगातार बेहतर हुए।
2. विद्यालय में भौतिक संसाधनों का विकास
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विज्ञान लैब
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पुस्तकालय
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खेल सामग्री
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स्वच्छ परिसर
यह सब उनके प्रयासों का परिणाम है।
3. बच्चों में आत्मविश्वास और अनुशासन
उनका प्रभाव ऐसा था कि बच्चों में पढ़ाई के साथ-साथ
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नेतृत्व,
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वक्तृत्व कला,
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निर्णय क्षमता
का भी विकास हुआ।
4. महिला शिक्षा को बढ़ावा
उन्होंने हमेशा लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया। Live Hindustan
गांव में कई बच्चियां आज कॉलेज और प्रोफेशनल कोर्स कर रही हैं, इसके पीछे उनका प्रोत्साहन रहा।
समारोह का समापन — यादों और शुभकामनाओं के साथ
कार्यक्रम के अंतिम चरण में—
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सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए
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बच्चों ने गीत और नृत्य प्रस्तुत किए
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शिक्षकों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी
अंत में, सभी ने एक साथ खड़े होकर उन्हें शुभकामनाएँ दीं और कहा—
“आप की कमी हमेशा महसूस होगी, पर आपकी सीख हमेशा हमारे साथ रहेगी।”
मनोज कुमार कुजूर ने भी सभी छात्रों और स्टाफ के साथ समूह फोटो खिंचवाई, जो विदाई समारोह की सबसे यादगार तस्वीर बन गई।
मनोज कुमार कुजूर का विदाई समारोह सिर्फ एक आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह 27 वर्षों की मेहनत, संघर्ष, उपलब्धियों और प्रेम का सम्मान था।
उन्होंने जिस समर्पण से सेवा की, उसका प्रभाव आने वाले कई वर्षों तक दिखेगा।
विद्यालय के बच्चे, शिक्षक और क्षेत्रवासी हमेशा गर्व के साथ कहेंगे—
“हमने एक महान शिक्षक को अपने बीच काम करते देखा है।”
उनकी विदाई भले भावुक रही, पर उनकी शिक्षाएँ हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।
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