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22 दिसंबर एनटीपीसी कर्मी मोहन सिदार का असामयिक निधन, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर


22 दिसंबर मोहन सिदार एक उजली उम्मीद का अचानक अंत — क्षेत्र में शोक की लहर

जीवन अनिश्चितताओं से भरा होता है — कभी सुखद अनुभव, कभी कठिन दौर। लेकिन जब किसी की अचानक मृत्यु हो जाए, खासकर किसी युवा का जिसने अपने परिवार, समाज और कार्यस्थल पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ा हो, तो उसके पीछे केवल दुःख नहीं बल्कि विचारों की लहर भी उठती है। ऐसा ही है मोहन सिदार की कहानी — एक ऐसे कर्मी की, जो एनटीपीसी में अपनी ईमानदार सेवा से सबके दिल में जगह बना चुका था, लेकिन असामयिक निधन ने क्षेत्र को झकझोर दिया।


मोहन सिदार कौन थे?

मोहन सिदार रायगढ़ जिले के ग्राम बादमाल, पोस्ट रेंगालपाली के निवासी थे। उम्र केवल 30 वर्ष थी। वे एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से थे और अपने परिवार में तीन भाइयों में मंझले थे। पिता का नाम भगबतिया सिदार था।

मोहन ने अपने जीवन की शुरुआत ग्रामीण परिवेश से की, लेकिन उनकी मेहनत और निष्ठा ने उन्हें एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) के HR विभाग तक पहुँचाया — जहाँ उन्होंने अपने सरल स्वभाव, सहयोगी व्यवहार और कर्तव्यपरायणता से सबका सम्मान जीता।

स्वर्गीय मोहन सिदार अपने परिवार के तीन भाइयों में मंझले थे तथा एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। वे एनटीपीसी के एचआर विभाग में कार्यरत थे, जहां अपनी ईमानदार कार्यशैली, कर्तव्यनिष्ठा और सरल स्वभाव के कारण वे सहकर्मियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उनका व्यवहार हमेशा मधुर और सहयोगी रहा। वे समाज और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहने वाले व्यक्ति थे। उनके निधन से न केवल परिवार को बल्कि समाज और कार्यस्थल को भी अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।


घटना: असामयिक निधन

अचानक तबीयत बिगड़ी — और फिर…

22 दिसंबर, 2025 की सुबह मोहन सिदार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार और आस-पास के लोगों के अनुसार किसी भी तरह की पहले से गंभीर बीमारी का संकेत नहीं था। सुबह जैसे ही उनकी तबीयत अचानक गिरने लगी, उनके करीबियों ने तुरंत चिकित्सकीय सहायता की कोशिश की — लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

उनकी अचानक मृत्यु की खबर फैलते ही न केवल परिवार में बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि जीवन कितना अनिश्चित है और एक क्षण में ही सब कुछ बदल सकता है। Kelo Pravah


मोहन का व्यक्तित्व और कार्यशैली

मोहन सिदार बहुत ही सहज और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके बारे में एनटीपीसी में सहकर्मी बताते हैं कि:

उनके जैसे व्यक्ति सिर्फ एक कर्मचारी नहीं होते — वे अपनी सकारात्मक ऊर्जा से लोगों के बीच उत्साह, समर्थन और प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं। ऐसे लोग छोड़कर चले जाएँ तो उनका अभाव गहरा महसूस होता है।


परिवार पर प्रभाव: एक परिवार का दर्द

मोहन अपने परिवार के तीन भाइयों में मंझले थे। परिवार के लिए मोहन सिर्फ एक बेटा, भाई या सदस्य नहीं थे — वह परिवार की आशा, संकल्प और भविष्य की एक बड़ी उम्मीद थे। जैसे-जैसे खबर फैली, परिवार के चेहरे पर गहरा दुःख और निराशा साफ दिखाई देने लगी।

शोकाकुल परिजन बताते हैं कि मोहन किसी बड़ी इच्छा, लक्ष्य या जिम्मेदारी के साथ जी रहे थे, और उनका जाना परिवार को भावनात्मक और सामाजिक दोनों रूप से असहनीय क्षति दे गया है।


समाज में शोक और प्रतिक्रिया

मोहन के निधन की खबर मिलते ही…

मोहन के असामयिक निधन के बाद लोग जीवन की अनिश्चितता, स्वास्थ्य और आपदा-पूर्व तैयारी के बारे में भी सोचने लगते हैं। क्योंकि कभी-कभी अचानक जीवन की राह में उत्थान और पतन दोनों ही एक क्षण में आ जाते हैं।


कार्यस्थल एनटीपीसी में शोक

मोहन सिदार एनटीपीसी के HR विभाग में कार्यरत थे। वहाँ उनके सहकर्मियों ने उन्हें न केवल एक अच्छे सहकर्मी के रूप में याद किया, बल्कि एक दोस्त, मार्गदर्शक और उत्साह-वर्धक व्यक्ति के रूप में भी।

सहकर्मियों का मानना है कि मोहन जैसे कर्मी अपने काम में निष्ठावान रहने के साथ साथ सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लेते थे, और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहते थे। ऐसे व्यक्ति का अचानक जाना कार्यस्थल पर भी शून्य-भाव पैदा कर देता है।


जीवन के प्रति सीख: असामयिक घटनाओं का असर

1. जीवन की अनिश्चितता

मोहन सिदार की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। हम कल के बारे में नहीं जानते — और न ही यह पता है कि अगला क्षण क्या लेकर आएगा। ऐसे में अपने स्वास्थ्य, आत्म-देखभाल और समय का सदुपयोग करना कितना महत्वपूर्ण है।

2. सकारात्मकता का प्रभाव

मोहन का व्यक्तित्व यह दिखाता है कि सादगी, सहायता और सकारात्मकता लोगों के दिलों में कैसे स्थायी स्थान बना सकती है। जीवन चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, सकारात्मक कार्य हमेशा याद रहते हैं।

3. सामाजिक जिम्मेदारी

समाज के प्रति योगदान — छोटे-छोटे कार्यों से भी लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आता है। मोहन ने जो मदद और सेवा लोगों के लिए की, उसकी याद दिलाती है कि एक व्यक्ति भी समाज के विकास में योगदान दे सकता है


स्वास्थ्य, आकस्मिकता और तैयारी

जब किसी की अचानक मृत्यु होती है, तो उसके पीछे स्वास्थ्य, तनाव या किसी अज्ञात कारण की भूमिका हो सकती है। ऐसे में:

कों अपनाना ज़रूरी लगने लगता है। यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक स्वास्थ्य का भी प्रश्न है।


अंतिम विचार

मोहन सिदार का असामयिक निधन केवल एक खबर नहीं था — वह एक जीवन यात्रा की कहानी थी, जिसने हमें यह याद दिलाया कि जीवन की अनिश्चितता में भी अगर हम सकारात्मकता, सहानुभूति और सेवा-भावना के साथ जिएँ, तो वह हमारी यादें और प्रभाव हमेशा जीवित रहते हैं।

आज मोहन भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके कार्य, सादगी और सकारात्मक दृष्टिकोण हमें प्रेरित करता रहेगा।


शोक संदेश

मोहन सिदार की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस कठिन समय से उबरने की शक्ति मिले। मोहन जैसे व्यक्तियों का जीवन हमारे समाज को बेहतर बनाने का उदाहरण है — उनसे हम सभी सीख सकते हैं कि जीवन की अस्थिरता में भी कैसे स्थिरता और सकारात्मकता बनाए रखें

हम सभी के दिलों में उनका योगदान सदा स्मरणीय रहेगा।

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