2025 में रायगढ़ की धरती पर बोए सपने, 2026 में होंगे पूरे
विकास, संघर्ष, संकल्प और भविष्य की उड़ान की कहानी
छत्तीसगढ़ का औद्योगिक और सांस्कृतिक हृदय कहे जाने वाला रायगढ़ जिला वर्ष 2025 में केवल घटनाओं का साक्षी नहीं रहा, बल्कि यह वह साल था जब इस धरती पर विकास, परिवर्तन और आत्मनिर्भरता के बीज बोए गए। किसानों के खेतों से लेकर शहर की सड़कों तक, प्रशासनिक बैठकों से लेकर जनआंदोलनों तक—हर जगह 2025 ने आने वाले कल की कहानी लिखी।
अब जब 2026 की दहलीज पर रायगढ़ खड़ा है, तो यह साफ दिखने लगा है कि जो सपने 2025 में बोए गए थे, वे अब फलने को तैयार हैं।Amar Ujala
हर बदलाव का साक्षी समय होता है। बीते साल में रायगढ़ की जमीन पर ऐसे कई सपने बोए गए हैं जो इस साल पूरे होंगे। लोगों की उम्मीदें करवट ले रही हैं। धरातल पर इन आशाओं को उतारने की कवायद की जा रही है। किसी को स्कूल-कॉलेज चाहिए, किसी को सडक़ें, तो किसी को अस्पताल। किसी को सुंदर शहर चाहिए तो किसी को साफ वातावरण। बीता साल रायगढ़ के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। कई ऐसे काम हुए जो सालों से लंबित थे।
कुछ नए कामों की सुगबुगाहट हुई। कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हो गए। करोड़ों के प्रोजेक्ट एक साथ शुरू हुए हैं जो 2026 में पूरे होंगे। कुछ काम दो साल चलेंगे। रायगढ़ का कायाकल्प हो रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सौंदर्यीकरण, स्वच्छता हर क्षेत्र में काम स्वीकृत हुए हैं। कुछ का टेंडर हो चुका है तो कुछ में टेंडर लगा है। कुछ में तकनीकी स्वीकृत का इंतजार है। ऐसे तमाम कामों को जल्द से जल्द पूरा करने विभाग लगे हुए हैं।
शहर के चारों ओर बनेगा रिंग रोड का घेरा
इस साल सबसे बड़ा प्रोजेक्ट रिंग रोड का है। 400 करोड़ की अनुमानित लागत आ रही है, जिसमें से 70 करोड़ सिर्फ भू-अर्जन में है। राशि की मांग प्रेषित की गई है। सडक़ हादसों से बचने के लिए बेहद जरूरी है कि भारी वाहन शहर की सीमा के बाहर ही चलें। करीब 20 किमी लंबे रिंग रोड का निर्माण होने से दोनों प्रमुख एनएच भी जुड़ जाएंगे। 11 गांवों में भू-अर्जन करना होगा, जहां खरीदी-बिक्री पर रोक लगाई गई है।
रायगढ़ आने वाली सभी बसों का एक ही अड्डा
जिले में इंटर स्टेट बस टर्मिनल का सपना देखा गया है। केवड़ाबाड़ी बस स्टैण्ड, चक्रधर नगर बस स्टैण्ड और ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैण्ड में पहुंच रही बसों का अब एक ही अड्डा होगा। ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैण्ड को ही रायपुर के भाठागांव बस टर्मिनल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा जहां पब्लिक पार्किंग, वेटिंग जोन, गार्डन, कैंटीन, बसों का पार्किंग स्टैण्ड आदि बनाया जाएगा। 22.28 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। टेंडर हो चुका है।
इंटीग्रेटेड स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स में होगा हर खेल
खेल के क्षेत्र में रायगढ़ जिला आने वाले सालों में कई बड़े आयोजनों की मेजबानी करेगा। लोहरसिंग में मेडिकल कॉलेज के लिए आरक्षित 42 एकड़ जमीन पर इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का निर्माण किया जाएगा। 91 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति दी गई है। इस स्टेडियम में विश्वस्तरीय मैदान बनाए जाएंगे। हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, क्रिकेट समेत कई इंडोर और आउटडोर खेलों के लिए मैदान होंगे। प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को सुविधा देने के लिए हॉस्टल भी बनाए जाएंगे। बहुत जल्द टेंडर के बाद काम प्रारंभ होगा।
छह ऑक्सीजोन बनाएंगे हवा को साफ
हरियाली के हिसाब से शहर को बहुत आसानी से दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। केलो पुल से चक्रधर नगर की ओर भरपूर हरियाली है जबकि दूसरी ओर केवल शहर है। अब छह ऑक्सीजोन का प्रस्ताव नगर निगम ने पास किया है। छह ऐसी जमीनों पर ऑक्सीजोन बनेगा जिसका कोई उचित उपयोग नहीं हो रहा था। सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से बचाने का भी यह एक तरीका है। इतवारी बाजार में ऑक्सीजोन तकरीबन तैयार है। जल्द ही प्लांटेशन के बाद लोकार्पण होगा। इसके अलावा किसान राइस मिल जूट मिल, बैकुंठपुर, भुजबंधान तालाब परिसर, खर्राघाट और राजीव नगर दूध डेयरी में भी इस साल ऑक्सीजोन बनेंगे।
सात फोरलेन सड़कों से सुगम होगा यातायात
2024 में वित्त मंत्री ओपी चौधरी की अनुशंसा से रायगढ़ तहसील की सात सडक़ों को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने दिया था। सभी काम मंजूर हो चुके हैं। ढिमरापुर चौक से पतरापाली जेएसपीएल तक 5 किमी, ढिमरापुर चौक से कोतरा रोड थाना चौक तक ढाई किमी, उर्दना चौक से सर्किट हाउस चौक तक साढ़े 3 किमी,
टीवी टावर रोड से मेडिकल कॉलेज तक साढ़े 3 किमी, रायगढ़-पूंजीपथरा-घरघोड़ा रोड 37 किमी, रायगढ़-कोतरा-नंदेली 1 से 5 किमी और रायगढ़-लोइंग-महापल्ली रोड 5 किमी का निर्माण होना है। दो सडक़ों का टेंडर हो चुका है। बाकी में प्रक्रिया जारी है। घड़ी चौक से केवड़ाबाड़ी चौक होते हुए ढिमरापुर चौक तक बीटी रोड के लिए करीब 9.49 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
पांच नए कॉलेजों में रोजगारमूलक शिक्षा
जिले में ऐसे शिक्षण संस्थान खुलेंगे जो रोजगारमूलक शिक्षा देंगे। केवल डिग्री कोर्स पर ही नहीं बल्कि हर युवा के हाथ काम देने के लिए शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए रायगढ़ में फिजियोथेरेपी कॉलेज, पुसौर में नर्सिंग कॉलेज और पंजीयन कॉलेज खुलेगा। रायगढ़ में कला एवं संगीत महाविद्यालय और हार्टिकल्चर कॉलेज खुलेगा। इसके लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
चार पुलों का उन्नयन, आसान होगा सफर
शहर में ऐसे चार पुलों का उन्नयन किया जाएगा जो लंबे समय से परेशानी का सबब बने हुए थे। संकरे पुल होने के कारण यातायात बाधित होता था। पहला पुल चांदनी चौक का है जहां नापजोख पूरी हो चुकी है। इसके लिए 8.26 करोड़ का इस्टीमेट बनाया गया है। दूसरा पुल केवड़ाबाड़ी से इंदिरा नगर रोड पर बनना है जिसका इस्टीमेट 14.32 करोड़ का है। तीसरा पुल मेडिकल कॉलेज रोड पर बनेगा जिसकी लागत 15.61 करोड़ हो सकता है। चौथा पुल कयाघाट रपटा पुल की जगह बनेगा जिसका काम शुरू हो चुका है। जो इस साल बनकर तैयार हो जाएगा।
केलो नदी की दोनों बांहें होंगी सुंदर
रायगढ़ की हथेली पर जीवनरेखा की तरह मौजूद केलो नदी को लेकर कभी भी गंभीर और ईमानदार प्रयास नहीं किए। हमेशा ही दिखावे के काम होते रहे। एसटीपी बनने के बाद नदी का पानी कुछ साफ हुआ है। बाकी नालों को भी एसटीपी से जोडऩे के बाद अब खर्राघाट से कयाघाट तक नदी के दोनों किनारों पर केलो रिवरफ्रंट कॉरीडोर विकसित किया जाना है। प्रगति नगर से छठ घाट तक करीब 26 करोड़ से निर्माण होगा।
एसईसीएल ऑफिस से चक्रपथ तक भी करीब 28 करोड़ में ठेका दिया गया है। बाकी दोनों ओर भी निर्माण होना है जिसका टेंडर लगा है। 2026 के अंत तक रिवरफ्रंट कॉरीडोर शहर का सबसे सुंदर दर्शनीय स्थल बनेगा।
कृषि: परंपरा से प्रगति की ओर
रायगढ़ की पहचान सदियों से कृषि रही है। 2025 में किसानों के लिए यह साल संघर्ष और उम्मीद—दोनों लेकर आया।
धान खरीदी में नए प्रयोग
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समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर कई सुधारात्मक प्रयास किए गए
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कुछ केंद्रों पर अव्यवस्थाएं रहीं, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता की नींव पड़ी
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2026 में तेज भुगतान प्रणाली और स्मार्ट खरीदी केंद्रों की उम्मीद जगी
सिंचाई और जल संरक्षण
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छोटे-छोटे चेक डैम, तालाब गहरीकरण और नहर मरम्मत
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सूखे क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं की शुरुआत
➡ 2026 में इसका असर फसल उत्पादन और किसान आय में दिखने की पूरी संभावना
उद्योग: विरोध से संवाद तक का सफर
2025 रायगढ़ के औद्योगिक इतिहास में एक संवेदनशील लेकिन निर्णायक वर्ष रहा।
कोयला खदान और उद्योगों पर जनसुनवाई
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कई परियोजनाओं की जनसुनवाई रोकी गई
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ग्रामीणों की आपत्तियों को पहली बार गंभीरता से दर्ज किया गया
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पर्यावरण बनाम रोजगार की बहस खुलकर सामने आई
2026 में संतुलन की राह
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स्थानीय रोजगार, पर्यावरण सुरक्षा और उद्योग—तीनों के संतुलन की दिशा में नीति निर्माण
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CSR के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क विकास की योजना
➡ 2026 में “उद्योग विरोध” नहीं बल्कि “जिम्मेदार उद्योग” की तस्वीर उभर सकती है
सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचा
सड़क हादसों ने खोली आंखें
2025 में हुए कई सड़क हादसों ने सिस्टम की कमियों को उजागर किया।
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ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए
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ट्रैफिक सुधार और संकेतक लगाने की प्रक्रिया शुरू
➡ 2026 में सुरक्षित सड़कों का सपना आकार ले सकता है
बिजली और शहरी विकास
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नए ट्रांसफार्मर
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ग्रामीण विद्युतीकरण में सुधार
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शहर में स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज पर काम
➡ 2026 में रायगढ़ अधिक रोशन और व्यवस्थित दिखेगा
शिक्षा: भविष्य की असली पूंजी
2025 में रायगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में चुपचाप लेकिन मजबूत बदलाव शुरू हुए।
स्कूलों में बुनियादी सुधार
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जर्जर भवनों की मरम्मत
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शिक्षकों की नियुक्ति
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डिजिटल क्लास की शुरुआत
युवाओं की तैयारी
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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्थानीय स्तर पर पहल
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खेल और सांस्कृतिक मंचों को बढ़ावा
➡ 2026 में रायगढ़ से नई पीढ़ी के अधिकारी, खिलाड़ी और उद्यमी निकल सकते हैं
स्वास्थ्य: अनुभवों से सीख
2025 ने यह सिखाया कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल भवन नहीं, भरोसा होती हैं।
अस्पतालों की स्थिति
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जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर
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एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार की कोशिश
➡ 2026 में टेलीमेडिसिन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती से इलाज गांव तक पहुंचेगा
जनआंदोलन और जनसुनवाई: लोकतंत्र की आवाज
2025 रायगढ़ में जनआवाज का साल रहा।
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तमनार आंदोलन
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जमीन, रोजगार और पर्यावरण को लेकर प्रदर्शन
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अंततः संवाद और समझौते की राह
➡ 2026 में प्रशासन और जनता के बीच टकराव नहीं, बातचीत का मॉडल मजबूत होगा
सुरक्षा, कानून और सामाजिक चेतना
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चोरी, धोखाधड़ी और सड़क अपराधों ने चिंता बढ़ाई
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पुलिसिंग में सख्ती और जागरूकता अभियान शुरू
➡ 2026 में सामाजिक सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी का असर दिखेगा
संस्कृति, खेल और पहचान
खेल आयोजनों ने जोड़ा रायगढ़
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एमएलए कप जैसे आयोजनों से युवाओं को मंच
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ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान
सांस्कृतिक विरासत
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लोक कला, संगीत और उत्सवों को संरक्षण
➡ 2026 में रायगढ़ केवल उद्योग नहीं, संस्कृति और खेल का केंद्र भी बनेगा
प्रशासनिक सोच में बदलाव
2025 में प्रशासन केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा।
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जनदर्शन में सीधी सुनवाई
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अफसरों की जवाबदेही
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समयबद्ध समाधान की कोशिश
➡ 2026 में गवर्नेंस का मानवीय चेहरा और स्पष्ट होगा
2026: उम्मीदों का वर्ष
2025 में जो बोया गया—
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किसान के खेत में
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युवा के सपनों में
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शहर की सड़कों पर
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प्रशासन की फाइलों में
वह सब 2026 में आकार लेने को तैयार है।
2026 से अपेक्षाएं:
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स्थायी रोजगार
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सुरक्षित पर्यावरण
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मजबूत शिक्षा
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बेहतर स्वास्थ्य
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संवाद आधारित विकास
रायगढ़ की कहानी अभी बाकी है
रायगढ़ कोई साधारण जिला नहीं—यह संघर्ष से सीखने और सपनों को हकीकत में बदलने की क्षमता रखने वाली धरती है।
2025 ने बीज बोए, 2026 उन्हें सींचेगा।
और आने वाले वर्षों में यही रायगढ़ छत्तीसगढ़ के विकास का उदाहरण बनेगा।
क्योंकि जब धरती में मेहनत और नीयत के बीज बोए जाते हैं, तो भविष्य अपने आप हरा-भरा हो जाता है।
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