“मधु गुंजन सतरंग 2025” में नन्ही डिविषा शर्मा ने बिखेरा जलवा
सोलो डांस में प्रथम पुरस्कार जीतकर बनीं कार्यक्रम की शान
कला, संस्कृति और प्रतिभा जब एक मंच पर एकत्र होती है, तब ऐसे क्षण जन्म लेते हैं जो लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहते हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय क्षण हाल ही में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “मधु गुंजन सतरंग” में देखने को मिला, जब नन्ही बाल कलाकार डिविषा शर्मा ने अपने मनमोहक सोलो डांस से दर्शकों, निर्णायकों और आयोजकों सभी का दिल जीत लिया।
अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता, भाव-भंगिमा और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत की गई उनकी नृत्य प्रस्तुति ने उन्हें प्रथम पुरस्कार का हकदार बनाया और पूरे आयोजन की शान बना दिया।
शहर के पंजीरी संयंत्र स्थित निगम ऑडिटोरियम में आयोजित चार दिवसीय “मधु गुंजन सतरंग” डांस प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रतियोगिता के दूसरे दिन, 22 दिसंबर को बच्चों के वर्ग में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच डिविषा शर्मा ने एकल नृत्य (सेमी-क्लासिकल) में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी कला का लोहा मनवाया।
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा ऑडिटोरियम
मधु गुंजन सतरंग संस्था द्वारा 21 से 24 दिसंबर तक आयोजित इस भव्य प्रतियोगिता में बच्चों ने एकल, युगल और समूह नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। खचाखच भरे ऑडिटोरियम में जब डिविषा ने मंच संभाला, तो उनकी सधी हुई मुद्राओं और आत्मविश्वास ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विजेताओं को प्रमाण पत्र और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। उपस्थित जनसमुदाय ने उम्मीद जताई कि ये नन्हे सितारे आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर रायगढ़ का नाम रोशन करेंगे। Amar Ujala
“मधु गुंजन सतरंग” : कला और रंगों का उत्सव
“मधु गुंजन सतरंग” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कला, संगीत, नृत्य और रचनात्मकता का ऐसा मंच है, जहां हर वर्ग और हर आयु के कलाकार अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर पाते हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय एवं आधुनिक कला विधाओं से जोड़ना और उनमें छिपी प्रतिभा को निखारना है।
कार्यक्रम में
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गायन
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वादन
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समूह नृत्य
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एकल नृत्य
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नाट्य प्रस्तुति
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कविता पाठ
जैसी कई विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
आयोजन का माहौल: उत्साह, रंग और तालियों की गूंज
कार्यक्रम स्थल को रंग-बिरंगी सजावट, रोशनी और कलात्मक पृष्ठभूमि से सजाया गया था। मंच पर जैसे ही कलाकार अपनी प्रस्तुति देने आते, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठता।
दर्शकों में बच्चों के अभिभावक, शिक्षक, कला प्रेमी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। हर प्रस्तुति को पूरे मनोयोग से देखा और सराहा गया।
नन्ही डिविषा शर्मा: कम उम्र, बड़ी उड़ान
कार्यक्रम में सबसे अधिक चर्चा में रहीं नन्ही डिविषा शर्मा, जिनकी उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास किसी अनुभवी कलाकार से कम नहीं है।
डिविषा ने सोलो डांस प्रतियोगिता में भाग लिया और मंच पर कदम रखते ही दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
प्रतिभा की धनी हैं डिविषा
उल्लेखनीय है कि डिविषा शर्मा शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं “टूटी कलम” के संपादक टिल्लू शर्मा की पौत्री तथा कल्पना कार श्रृंगार के व्यवस्थापक कुलदीपक एवं काव्य शर्मा की सुपुत्री हैं। ओ.पी. जिंदल स्कूल में के.जी.-2 की छात्रा डिविषा न केवल नृत्य, बल्कि शिक्षा और अन्य स्कूली गतिविधियों में भी सदैव अग्रणी रहती हैं।
बधाइयों का लगा तांता
हाल ही में ओ.पी. जिंदल स्कूल के प्राचार्य आर.के. द्विवेदी ने भी डिविषा की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया था। इस ताज़ा उपलब्धि के बाद डिविषा के परिजनों, शिक्षकों और शुभचिंतकों द्वारा उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर बधाइयां दी जा रही हैं।
सोलो डांस प्रस्तुति: भाव, लय और अभिव्यक्ति का संगम
डिविषा शर्मा की नृत्य प्रस्तुति केवल कदमों का तालमेल नहीं थी, बल्कि वह एक संपूर्ण कहानी कहती हुई दिखाई दी।
उनके नृत्य में—
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चेहरे के भाव (एक्सप्रेशन)
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आंखों की भाषा
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हाथों की मुद्राएं
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पैरों की सटीक थाप
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संगीत के साथ तालमेल
सब कुछ इतना संतुलित और प्रभावशाली था कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
प्रस्तुति की विशेषताएं
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नृत्य के दौरान डिविषा का आत्मविश्वास साफ झलक रहा था
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हर भाव को उन्होंने पूरी सच्चाई और भावना के साथ निभाया
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मंच पर उनकी ऊर्जा और मुस्कान दर्शकों को बांधे रखने में सफल रही
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संगीत की हर लय पर उनका नियंत्रण अद्भुत था
दर्शकों की प्रतिक्रिया: तालियों की गड़गड़ाहट
जैसे-जैसे डिविषा की प्रस्तुति आगे बढ़ती गई, दर्शकों की तालियां तेज होती गईं। प्रस्तुति समाप्त होते ही पूरा सभागार जोरदार तालियों से गूंज उठा।
कई दर्शक अपनी सीटों से खड़े होकर तालियां बजाते नजर आए, जो इस बात का प्रमाण था कि डिविषा का नृत्य सभी के दिलों को छू गया।
निर्णायकों का निर्णय: सर्वसम्मति से प्रथम पुरस्कार
सोलो डांस प्रतियोगिता में कई प्रतिभाशाली बच्चों ने हिस्सा लिया, लेकिन निर्णायक मंडल ने डिविषा शर्मा की प्रस्तुति को तकनीक, भाव-प्रदर्शन, मंच उपस्थिति और समग्र प्रभाव के आधार पर सर्वोच्च अंक दिए।
निर्णायकों ने कहा कि—
“इतनी कम उम्र में इस तरह की परिपक्व और भावपूर्ण प्रस्तुति विरले ही देखने को मिलती है।”
इसी के साथ डिविषा को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पुरस्कार वितरण का भावुक क्षण
जब मंच से डिविषा शर्मा का नाम प्रथम पुरस्कार के लिए पुकारा गया, तो उनके चेहरे पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया।
पुरस्कार स्वरूप उन्हें
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ट्रॉफी
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प्रमाण पत्र
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और आयोजकों की ओर से सम्मान
प्रदान किया गया।
इस अवसर पर मंच पर मौजूद अतिथियों ने डिविषा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अभिभावकों की भूमिका: सफलता के पीछे मजबूत आधार
डिविषा की इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता और परिवार का भी बड़ा योगदान है।
उनके अभिभावकों ने—
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समय पर अभ्यास
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कला के प्रति प्रोत्साहन
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आत्मविश्वास बढ़ाने
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मंच का अनुभव दिलाने
में अहम भूमिका निभाई।
डिविषा के माता-पिता ने कहा कि वे हमेशा उनकी रुचि और प्रतिभा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहेंगे।
गुरु और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन
हर सफल कलाकार के पीछे एक कुशल गुरु का हाथ होता है। डिविषा की नृत्य कला में उनके प्रशिक्षक का योगदान भी सराहनीय रहा है।
गुरु ने न केवल नृत्य की तकनीक सिखाई, बल्कि
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मंच पर डर को कैसे जीतना है
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भावों को कैसे व्यक्त करना है
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और प्रस्तुति को प्रभावशाली कैसे बनाना है
यह भी सिखाया।
“मधु गुंजन सतरंग” जैसे मंचों की अहमियत
आज के समय में ऐसे सांस्कृतिक मंच बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इन मंचों से—
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बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है
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उनकी छुपी प्रतिभा सामने आती है
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कला और संस्कृति से जुड़ाव होता है
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प्रतिस्पर्धा की भावना सकारात्मक रूप लेती है
डिविषा शर्मा की सफलता इसका जीवंत उदाहरण है।
क्षेत्र में खुशी की लहर
डिविषा की जीत की खबर फैलते ही
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उनके स्कूल
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मोहल्ले
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रिश्तेदारों
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और शुभचिंतकों
में खुशी की लहर दौड़ गई।
लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आने वाला भविष्य: नई उड़ान की शुरुआत
डिविषा शर्मा की यह जीत केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
यदि इसी लगन, मेहनत और मार्गदर्शन के साथ वे आगे बढ़ती रहीं, तो वह—
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जिला
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राज्य
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और राष्ट्रीय स्तर
पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं।
“मधु गुंजन सतरंग” में नन्ही डिविषा शर्मा द्वारा जीता गया प्रथम पुरस्कार यह साबित करता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।
उनकी सोलो डांस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि यदि बच्चों को सही मंच, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो वे असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
डिविषा शर्मा की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
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