2025 उत्तर छत्तीसगढ़ में ठिठुरन बढ़ी, शीतलहर से जनजीवन प्रभावित, रायगढ़ में भी ठंड का असर तेज
उत्तर छत्तीसगढ़ समेत पूरे प्रदेश में सर्दी ने अब अपना असर तेज कर दिया है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ठंड का प्रकोप अचानक बढ़ गया है। शीतलहर के चलते सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रायगढ़ जिले में भी ठंड का असर साफ नजर आ रहा है। सुबह और देर रात कड़ाके की ठंड लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर रही है। ठंड बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य, यातायात, मजदूरी और दैनिक जीवन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में ठंड का असर लगातार गहराता जा रहा है। खासकर उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में सुबह-शाम सर्द हवा और गिरते तापमान ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि इसके बाद तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
अंबिकापुर सबसे ठंडा, दुर्ग में दिन का तापमान ज्यादा
बीते 24 घंटों में प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका अंबिकापुर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से करीब चार डिग्री कम रहा। वहीं दुर्ग में दिन का तापमान सबसे अधिक 29.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 27.3 डिग्री और न्यूनतम 12.1 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह और देर शाम ठंड का असर साफ तौर पर महसूस किया गया।
अन्य जिलों का हाल
बिलासपुर में अधिकतम तापमान 27.2 और न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस रहा। पेंड्रारोड में रात का पारा सात डिग्री तक गिर गया, जिससे सर्दी तेज रही। जगदलपुर, राजनांदगांव और दुर्ग में भी न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जिससे लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा।
उत्तर छत्तीसगढ़ में ठंड का बदला मिजाज
उत्तर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस समय शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। सुबह के समय घना कोहरा और ठंडी हवाएं चलने से तापमान में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ग्रामीण इलाकों में हालात और भी ज्यादा गंभीर हैं, जहां लोग अलाव और आग का सहारा लेने को मजबूर हैं। खेत-खलिहान और खुले इलाकों में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह ठंड बड़ी चुनौती बन गई है।
दिन के समय धूप निकलने के बावजूद ठंडी हवा के कारण ठिठुरन बनी रहती है। रात के समय तापमान और नीचे चला जा रहा है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष परेशानी हो रही है।
रायगढ़ में भी ठंड का असर तेज
रायगढ़ जिले में भी सर्दी का असर अब पूरी तरह दिखाई देने लगा है। सुबह-सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोग देर से घरों से निकल रहे हैं। बाजारों में रौनक भी अपेक्षाकृत कम देखी जा रही है। ठंडी हवाओं के चलते लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और मजदूर अलसुबह खेत जाने से पहले आग तापते दिखाई दे रहे हैं। शहरी इलाकों में भी चाय की दुकानों, ठेलों और चौराहों पर अलाव जलते देखे जा सकते हैं। ठंड ने लोगों की दिनचर्या को बदल दिया है।
शीतलहर का जनजीवन पर प्रभाव
शीतलहर का सीधा असर जनजीवन पर पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय ठंडी हवाओं के कारण लोग बाहर निकलने से बच रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरों को काम पर जाने में कठिनाई हो रही है। कई स्थानों पर मजदूरी के घंटे कम हो गए हैं।
छोटे दुकानदारों और फुटपाथ व्यापारियों की आमदनी पर भी असर पड़ा है। ग्राहक कम निकल रहे हैं, जिससे बाजार की गतिविधियां धीमी हो गई हैं। ठंड के कारण सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ कम दिखाई दे रही है।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
बढ़ती ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। छोटे बच्चों में सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायतें बढ़ रही हैं। बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द, सांस संबंधी समस्याओं और ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों की सलाह है कि इस मौसम में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनना, ठंडे पानी से बचना और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा दबाव
ठंड बढ़ने के साथ अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। सर्दी-खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस की समस्या वाले मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भीड़ देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को ठंड से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों को सुबह-शाम बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
स्कूलों और विद्यार्थियों पर ठंड का असर
शीतलहर का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ा है। सुबह के समय ठंड के कारण बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। कई अभिभावक बच्चों को अतिरिक्त गर्म कपड़ों में भेज रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में खुले वातावरण में पढ़ाई करने वाले बच्चों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। ठंड के चलते बच्चों की उपस्थिति पर भी असर देखने को मिल रहा है।
किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों
ठंड किसानों के लिए दोहरा असर लेकर आई है। एक ओर रबी फसलों के लिए हल्की ठंड फायदेमंद मानी जाती है, वहीं ज्यादा ठंड और पाला फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकता है। सब्जी उत्पादक किसानों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
रायगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसान फसलों को ठंड से बचाने के उपाय कर रहे हैं। खेतों में रात के समय निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि फसलों को नुकसान न हो।
अलाव और ठंड से बचाव के उपाय
ठंड से बचने के लिए शहर और गांव दोनों जगहों पर लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौराहों और बाजारों में अलाव जलते नजर आ रहे हैं। गरीब और जरूरतमंद लोग रात के समय आग के पास बैठकर ठंड से राहत पा रहे हैं।
हालांकि खुले में आग जलाने से दुर्घटनाओं और प्रदूषण का खतरा भी रहता है। प्रशासन द्वारा लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
प्रशासन की तैयारियां
बढ़ती ठंड को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण, रैन बसेरों की व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है। खासकर बेघर और गरीब लोगों को ठंड से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और सामाजिक संगठनों द्वारा मिलकर ठंड से राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यातायात और दैनिक गतिविधियों पर असर
ठंड और कोहरे के कारण सुबह के समय यातायात प्रभावित हो रहा है। दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ रही है। ग्रामीण सड़कों पर कोहरे का असर ज्यादा देखा जा रहा है।
दैनिक गतिविधियों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। लोग जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं। सुबह की सैर और व्यायाम करने वालों की संख्या में भी कमी आई है।
आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना
मौसम के रुझान को देखते हुए आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है। शीतलहर की स्थिति कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।
ऐसे में लोगों को पहले से सतर्क रहने और ठंड से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाने की जरूरत है।
ठंड में सावधानी क्यों जरूरी
ठंड का मौसम जितना सुहावना लगता है, उतना ही यह लापरवाही के लिए खतरनाक भी हो सकता है। अचानक तापमान गिरने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव करें और मौसम के अनुसार खुद को ढालें।
गर्म कपड़े पहनना, पर्याप्त नींद लेना, गर्म पेय पदार्थों का सेवन करना और बुजुर्गों-बच्चों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
उत्तर छत्तीसगढ़ में बढ़ती ठिठुरन और शीतलहर ने जनजीवन को काफी हद तक प्रभावित कर दिया है। रायगढ़ जिले में भी ठंड का असर तेज हो चुका है। सुबह-शाम की ठंड ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। जहां एक ओर लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं, वहीं प्रशासन भी राहत और बचाव के उपाय कर रहा है।
आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना को देखते हुए जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। ठंड से बचाव ही इस मौसम में सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर उपाय है।
Next-
