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रायगढ़ की 2 बेटियों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान: वैभवी व गुलाल ने काशी-अयोध्या में किया शानदार प्रदर्शन

रायगढ़ की 2 बेटियों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान: वैभवी व गुलाल ने काशी-अयोध्या में मचाया धमाल

 बेटियों की उड़ान, प्रदेश की पहचान

छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से प्रतिभाओं की जननी रही है। यहां की माटी में मेहनत, संघर्ष और संस्कार बसते हैं। जब इसी माटी की बेटियां राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराती हैं, तो न केवल परिवार बल्कि पूरा जिला और राज्य गौरवान्वित होता है।
रायगढ़ की दो होनहार बेटियां वैभवी और गुलाल आज ऐसे ही गौरव का प्रतीक बन चुकी हैं। काशी और अयोध्या जैसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक नगरों में आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में उन्होंने जो प्रदर्शन किया, उसने छत्तीसगढ़ का नाम देशभर में रोशन कर दिया।

रायगढ़ की दो बेटियों ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या व वाराणसी में आयोजित नृत्य प्रतिस्पर्धार्ओँ में उम्दा प्रदर्शन कर चमकीली कीर्ति हासिल की । कु वैभवी शर्मा जो कि रायगढ़ के धांगरडीपा की रहने वाली है ने विगत 26 दिसम्बर को अयोध्या में कृष्णप्रिया इंटरनेशनल फेस्टिवल द्वारा आयोजित कॉम्पिटिशन में भाग लेकर बेहतरीन नृत्य कौशल के जरिये प्रथम स्थान हासिल किया । बेटी की इस उपलब्धि से गौरवान्वित उसके पिता विवेक कुमार शर्मा व माता वंदना शर्मा ने यह भी बताया कि वैभवी ने 12वीं नेशनल डांस व म्यूज़िक स्पर्धा व मेले में प्रशंसनीय प्रदर्शन किया जो कि विगत 28 दिसम्बर 25 को वाराणसी में आयोजित हुआ था।

वहां उसके कौशल एवं प्रतिभा को न केवल भरपूर वाह -वाही मिली वरन उसका सार्वजनिक अभिनन्दन भी हुआ। इसी तरह रायगढ़ की एक और बेटी कु गुलाल राठौर ने काशी विश्वनाथ नृत्य महोत्सव भाग लेकर रायगढ़ का मान बढ़ाते हुए शानदार द्वितीय स्थान को प्राप्त किया । 12 नेशनल डांस व म्यूजिक कॉम्पिटिशन में गुलाल का सम्मानित होना रायगढ़ के लिए निसन्देह गौरवपूर्ण उपलब्धि है । कु गुलाल स्थानिय सिविल लाइन काली बाड़ी दरोगा पारा निवासी मयूर राठौर व विनी राठौर की पुत्री है। कु गुलाल वैष्णव संगीत यूनिवर्सिटी की छात्रा है । इसके गुरु शरद वैष्णव तथा पायल माणिकपुरी हैं।

इस कीर्तिमान का श्रेय सुश्री गुलाल ने अपने गुरुजनों को दिया है। वैभवी जो कि नृत्य नाद अकेडमी की छात्रा है ने भी अपनी इस चमकीली सफलता का श्रेय भी पायल मानिकपुरी तथा शरद वैष्णव को दिया है । दोनों बालिकाओं की प्रतिभा से अचंभित समारोहों के दर्शकों ने उनके माता-पिता व प्रशक्षिकों को बधाई प्रेषित करते हुए दोनों बाल प्रतिभाओं के उज्जवल भविष्य की कामना की है।

Amar Ujala


रायगढ़ से काशी-अयोध्या तक का प्रेरणादायक सफर

रायगढ़ जिला भले ही छोटा माना जाता हो, लेकिन यहां की बेटियों के सपने बेहद बड़े हैं। सीमित संसाधनों, साधारण पृष्ठभूमि और कई सामाजिक चुनौतियों के बावजूद वैभवी और गुलाल ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

काशी और अयोध्या में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देशभर से सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे कड़े मुकाबले में रायगढ़ की इन दोनों बेटियों ने न सिर्फ अपनी जगह बनाई, बल्कि शानदार प्रदर्शन कर निर्णायकों और दर्शकों का दिल जीत लिया


कौन हैं वैभवी? – मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल

वैभवी बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपनी रुचि के क्षेत्र में निरंतर अभ्यास किया।
उनकी खासियत रही है:

परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने वैभवी को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज वह रायगढ़ की पहचान बन चुकी हैं।

काशी में हुए आयोजन के दौरान वैभवी ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि छोटे शहर की बेटियां भी बड़े मंच पर कमाल कर सकती हैं


गुलाल: जुनून और जज्बे से लिखी सफलता की कहानी

गुलाल की कहानी भी किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं है। उन्होंने कई बार असफलताओं का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी।
उनका मानना है—

“सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन रोज की मेहनत एक दिन जरूर रंग लाती है।”

अयोध्या में हुए कार्यक्रम में गुलाल ने अपनी प्रस्तुति से सबको चौंका दिया। उनके आत्मविश्वास, ऊर्जा और कौशल की जमकर सराहना हुई।


काशी और अयोध्या: सांस्कृतिक मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज

काशी और अयोध्या केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा हैं। ऐसे मंच पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है।

जब वैभवी और गुलाल ने वहां अपनी प्रतिभा दिखाई, तो:


प्रतियोगिता का स्तर और चुनौतियां

इस आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
चुनौतियां कई थीं:

लेकिन वैभवी और गुलाल ने हर चुनौती को अवसर में बदला।


परिवार और गुरुजनों का योगदान

किसी भी सफलता के पीछे परिवार और गुरुजनों का बड़ा योगदान होता है।
वैभवी और गुलाल के माता-पिता ने:

वहीं, उनके प्रशिक्षकों और शिक्षकों ने तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया।


रायगढ़ में खुशी की लहर

जैसे ही यह खबर रायगढ़ पहुंची, पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई।

रायगढ़ की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती


बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं वैभवी और गुलाल

आज भी कई जगह बेटियों को आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में वैभवी और गुलाल की सफलता उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सपने तो देखती हैं लेकिन हिम्मत जुटाने में पीछे रह जाती हैं।

इनकी कहानी कहती है कि:


छत्तीसगढ़ की बेटियां, देश का भविष्य

छत्तीसगढ़ की बेटियां आज हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं—खेल, कला, शिक्षा, प्रशासन और संस्कृति में।
वैभवी और गुलाल की यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का विषय है और सरकार व समाज के लिए यह संदेश भी कि बेटियों को अवसर दिया जाए, वे इतिहास रचेंगी

जब बेटियां आगे बढ़ती हैं, तब देश मजबूत होता है

किसी भी समाज और देश का भविष्य उसकी बेटियों से तय होता है। आज का छत्तीसगढ़ इस बात का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है, जहां बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ की बेटियां अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, खेल, प्रशासन, कला, विज्ञान और संस्कृति हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।


शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बेटियों की मजबूत मौजूदगी

छत्तीसगढ़ की बेटियों ने शिक्षा को अपने सशक्तिकरण का सबसे मजबूत हथियार बनाया है।

सरकार की योजनाएं और समाज की बदलती सोच ने बेटियों के लिए शिक्षा के रास्ते और आसान किए हैं।


खेल जगत में बेटियों का बढ़ता दबदबा

छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में भी देश का मान बढ़ा रही हैं।

रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर जैसे जिलों की बेटियां खेल के मैदान में छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी हैं।

प्रशासन और नेतृत्व में नई पीढ़ी की बेटियां

आज छत्तीसगढ़ की बेटियां प्रशासनिक सेवाओं में भी अपनी मजबूत भूमिका निभा रही हैं।

यह दिखाता है कि बेटियां सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सामर्थ्य भी रखती हैं।


संस्कृति, कला और मंचीय प्रतिभा में बेटियों की पहचान

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में बेटियों की बड़ी भूमिका है।

इससे न केवल कला को पहचान मिल रही है, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है।


सामाजिक संदेश: सोच बदले, समाज बदले

इस सफलता ने समाज को एक मजबूत संदेश दिया है—

जब समाज सोच बदलता है, तभी बेटियां खुलकर उड़ान भरती हैं।


भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य

वैभवी और गुलाल का यह सफर यहीं खत्म नहीं होता। दोनों का लक्ष्य है:

उनकी यह सोच बताती है कि सफलता के बाद भी जमीन से जुड़े रहना ही असली जीत है


सम्मान और बधाइयों का सिलसिला

इस उपलब्धि के बाद:

हर कोई रायगढ़ की इन बेटियों पर गर्व करता नजर आया।


 रायगढ़ की बेटियां, छत्तीसगढ़ का गौरव

वैभवी और गुलाल की सफलता केवल दो नामों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच की जीत है जो बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देती है।

काशी और अयोध्या में मचाया गया यह “धमाल” आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
रायगढ़ की बेटियों ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंच छोटा नहीं होता

 रायगढ़ की बेटियों को सलाम, छत्तीसगढ़ को गर्व!

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