कोंड़ातराई धान संग्रहण केंद्र शिफ्ट 10 लाख खर्च, किसानों को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें?

कोंड़ातराई में शिफ्ट हो रहा धान संग्रहण केंद्र, 10 लाख रुपये होंगे खर्च

किसानों की सुविधा, व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक दावों की पूरी पड़ताल

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार धान की खरीदी है। हर वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए शासन द्वारा सैकड़ों संग्रहण केंद्र बनाए जाते हैं। इन्हीं केंद्रों के माध्यम से किसानों की महीनों की मेहनत का मूल्य तय होता है। लेकिन जब ये केंद्र अव्यवस्थित होते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान किसान को उठाना पड़ता है।

रायगढ़ जिले के कोंड़ातराई क्षेत्र में स्थित धान संग्रहण केंद्र को शिफ्ट करने का निर्णय भी इसी पृष्ठभूमि में लिया गया है। प्रशासन के अनुसार इस शिफ्टिंग पर करीब 10 लाख रुपये का खर्च आएगा। सवाल यह है कि यह निर्णय क्यों लिया गया, इससे किसानों को क्या लाभ होगा और क्या यह खर्च वास्तव में जरूरी है?

धान खरीदी की रफ्तार बढ़ गई है। कई खरीदी केंद्र बफर लिमिट पार कर चुके हैं। राईस मिलर्स के डीओ काटे जा रहे हैं लेकिन उठाव धीमा है। अब संग्रहण केंद्र खोले जाने की नौबत आ गई है। इस बार मार्कफेड ने लोहरसिंग संग्रहण केंद्र को बंद करके कोंड़ातराई हवाई पट्टी में ही धान संग्रहण की तैयारी की है। इसमें करीब दस लाख रुपए का खर्च आ रहा है। धान खरीदी से सीजन में हर साल संग्रहण केंद्रों की जरूरत पड़ती है। समितियों में धान नहीं रखा जाता। उपार्जन केंद्रों से धान लाकर संग्रहण केंद्रों में जमा किया जाता है।

अब तब जिले में खरसिया और लोहरसिंग दोनों संग्रहण केंद्रों में धान जमा किया जाता रहा है। लोहरसिंग में 42 एकड़ जमीन पीडब्ल्यूडी को दी जा चुकी है जिसमें इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनने वाला है। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है और अब तकनीकी मंजूरी का इंतजार है। इस बार धान संग्रहण नहीं किया जा रहा है। मार्कफेड ने वैकल्पिक उपाय के तौर पर कोंड़ातराई हवाई पट्टी को संग्रहण केंद्र बनाने की तैयारी की है। लेकिन यह मैदान चारों ओर से खुला है। यहां कंटीले तारों से घेराव समेत कई व्यवस्थाएं करने के लिए करीब दस लाख का बजट स्वीकृत किया गया है। कोंड़ातराई में पहले भी धान संग्रहण किया जाता रहा है।

हमालों को चिंता, काम मिलेगा या नहीं

लोहरसिंग में कई सालों से हमालों का एक समूह काम कर रहा है। लोडिंग, स्टेकिंग में इनका रेट तय है। इस बार कोंड़ातराई में संग्रहण केंद्र खुलने से उनको चिंता सता रही है कि वहां काम मिलेगा या नहीं। जगह बदलने पर स्थानीयों का काम पर कब्जा हो जाता है। स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का काम शुरू होने में अभी कम से कम तीन-चार महीने लग सकते हैं।


कहां स्थित था पुराना धान संग्रहण केंद्र

कोंड़ातराई में संचालित धान संग्रहण केंद्र पिछले कई वर्षों से एक ऐसे स्थान पर संचालित हो रहा था, जहां जगह की कमी, जलभराव, आवागमन की दिक्कत और भंडारण की अव्यवस्था लगातार सामने आ रही थी।

बारिश के मौसम में केंद्र परिसर में कीचड़ और पानी भर जाना आम बात थी। इससे न केवल धान की गुणवत्ता प्रभावित होती थी, बल्कि किसानों को ट्रैक्टर और बैलगाड़ी लेकर केंद्र तक पहुंचने में भी भारी परेशानी होती थी।


शिफ्टिंग का निर्णय क्यों लिया गया

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कोंड़ातराई धान केंद्र को शिफ्ट करने के पीछे कई अहम कारण हैं—

  1. पुराने स्थल पर जगह की कमी

  2. धान के सुरक्षित भंडारण में परेशानी

  3. लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका

  4. बारिश में धान भीगने की लगातार शिकायतें

  5. किसानों और कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल

इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने केंद्र को नए और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला लिया।


नए धान संग्रहण केंद्र की विशेषताएं

जिस नए स्थान पर कोंड़ातराई का धान संग्रहण केंद्र शिफ्ट किया जा रहा है, वहां कई मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं—

  • पर्याप्त खुला परिसर

  • ऊंचा और समतल प्लेटफॉर्म

  • जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था

  • ट्रैक्टर और ट्रकों के लिए सुगम रास्ता

  • अस्थायी शेड और तिरपाल की व्यवस्था

  • कर्मचारियों के लिए अलग कक्ष

प्रशासन का दावा है कि नए केंद्र पर धान खरीदी की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।


10 लाख रुपये का खर्च कहां होगा

कोंड़ातराई धान संग्रहण केंद्र की शिफ्टिंग पर अनुमानित 10 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से निम्न कार्यों में किया जाएगा—

  • जमीन का समतलीकरण

  • अस्थायी गोदाम और शेड निर्माण

  • प्लेटफॉर्म और रैंप की व्यवस्था

  • विद्युत और प्रकाश व्यवस्था

  • सुरक्षा और बाउंड्री से जुड़ा कार्य

  • मजदूरी और परिवहन खर्च

हालांकि, ग्रामीणों और किसानों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह खर्च पहले से बेहतर योजना बनाकर कम नहीं किया जा सकता था।Amar Ujala


किसानों की प्रतिक्रिया: राहत या नई चिंता?

कोंड़ातराई और आसपास के गांवों के किसानों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई नजर आती है।

समर्थन में किसानों का कहना

कुछ किसानों का मानना है कि—

  • नया केंद्र खुला और सुविधाजनक होगा

  • धान भीगने और खराब होने की समस्या कम होगी

  • लाइन और अव्यवस्था से राहत मिलेगी

  • तौल और भुगतान प्रक्रिया में सुधार होगा

विरोध में उठ रहे सवाल

वहीं कई किसानों ने सवाल खड़े किए—

  • पहले केंद्र को सुधारने पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?

  • शिफ्टिंग के दौरान खरीदी प्रभावित तो नहीं होगी?

  • 10 लाख रुपये का खर्च कितना पारदर्शी है?

  • क्या यह खर्च अंततः किसानों की सुविधा के लिए है या सिर्फ कागजी काम?


प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय किसानों के हित में लिया गया है। उनके अनुसार—

  • शिफ्टिंग से खरीदी व्यवस्था सुचारु होगी

  • धान की गुणवत्ता बनी रहेगी

  • कर्मचारियों और किसानों दोनों को सुविधा मिलेगी

  • भविष्य में किसी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सकेगा

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।


धान खरीदी व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील विषय है। ऐसे में किसी भी केंद्र को शिफ्ट करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

कोंड़ातराई मामले में दावा किया जा रहा है कि—

  • किसानों को पहले से सूचना दी जा रही है

  • ग्राम पंचायत और समिति को साथ में लिया गया है

  • कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी

  • शिकायत निवारण के लिए अलग व्यवस्था रहेगी


क्या पहले ही बन सकता था स्थायी केंद्र?

स्थानीय लोगों का एक बड़ा सवाल यह भी है कि—

“हर साल अस्थायी इंतजाम पर लाखों खर्च करने की बजाय, क्या एक बार में स्थायी धान संग्रहण केंद्र नहीं बनाया जा सकता?”

यदि पहले ही पक्के गोदाम, प्लेटफॉर्म और सड़क की व्यवस्था होती, तो न शिफ्टिंग की जरूरत पड़ती और न ही अतिरिक्त खर्च का बोझ।


राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप

धान खरीदी से जुड़ा हर फैसला राजनीति से अछूता नहीं रहता। कोंड़ातराई केंद्र के शिफ्ट होने को लेकर भी—

  • विपक्षी दल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं

  • खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग हो रही है

  • स्थानीय जनप्रतिनिधि श्रेय लेने की होड़ में हैं

हालांकि प्रशासन इसे नियमित और आवश्यक प्रक्रिया बता रहा है।


भविष्य में क्या बदलेगा?

यदि प्रशासन के दावे सही साबित होते हैं, तो—

  • कोंड़ातराई क्षेत्र के किसानों को राहत मिलेगी

  • धान खरीदी में अव्यवस्था कम होगी

  • समय पर तौल और भुगतान संभव होगा

  • नुकसान और विवाद की आशंका घटेगी

लेकिन यदि योजना आधी-अधूरी रही, तो यही शिफ्टिंग आगे चलकर नई समस्या भी बन सकती है।

कोंड़ातराई में धान संग्रहण केंद्र का शिफ्ट होना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला है। 10 लाख रुपये का खर्च तभी सार्थक माना जाएगा, जब इससे वास्तव में किसानों को सुविधा मिले और खरीदी व्यवस्था बेहतर हो।

धान खरीदी जैसे संवेदनशील विषय में केवल तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी योजना की जरूरत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोंड़ातराई का यह नया धान संग्रहण केंद्र प्रशासन के दावों पर कितना खरा उतरता है।

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