1 लापता बालिका बेमेतरा से दस्तयाब, नाबालिग को भगा ले जाने वाले आरोपी युवक को चक्रधरनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आई यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी की भी याद दिलाती है। लापता बालिका को बेमेतरा से सकुशल दस्तयाब कर लिया गया है और नाबालिग को भगा ले जाने वाले आरोपी युवक को चक्रधरनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण
रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र से एक नाबालिग बालिका के अचानक लापता होने की सूचना मिलते ही परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तत्काल चक्रधरनगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिक जांच में यह आशंका सामने आई कि बालिका को एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस ने इसे उच्च प्राथमिकता पर लिया।
चक्रधरनगर थाना क्षेत्र से लापता नाबालिग बालिका को पुलिस ने जिला बेमेतरा से सुरक्षित दस्तयाब कर लिया है और बालिका को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने वाले आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर पॉक्सो एक्ट में न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में चक्रधरनगर पुलिस की सक्रिय विवेचना और अंतरजिला समन्वय से बड़ी सफलता मिली है।
जानकारी के अनुसार दिनांक 31 जुलाई 2025 को एक स्थानीय महिला द्वारा थाना चक्रधरनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि उसकी नाबालिग पुत्री 29 जुलाई 2025 की सुबह घर से बिना बताए कहीं चली गई है। परिजनों ने संदेह व्यक्त किया कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर थाना चक्रधरनगर में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 333/25 धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि बालिका किसी सुमीत यादव नामक युवक के संपर्क में थी और मोबाइल के माध्यम से उससे बातचीत करती थी। पुलिस द्वारा बालिका और संदेही युवक की पतासाजी की जा रही थी। इसी दौरान सूचना प्राप्त हुई कि दोनों थाना बेरला, जिला बेमेतरा क्षेत्र में हैं। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 दिसंबर 2025 को चक्रधरनगर पुलिस की टीम बेमेतरा रवाना हुई, जहां संदेही सुमीत यादव तक पहुंचकर उसके कब्जे से नाबालिग बालिका को सुरक्षित बरामद कर थाना लाया गया।
अपहृता से पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सुमीत यादव ने उससे शादी करने का झांसा देकर घर से भगा ले गया था और बेमेतरा में किराये के मकान में रखा हुआ था। बालिका का महिला उप निरीक्षक द्वारा कथन दर्ज कराया गया तथा विधिअनुरूप मेडिकल परीक्षण कराया गया।
जिसमें धारा 87,64(2) (एम) बीएनएस, 06 पॉक्सो एक्ट की पुष्टि होने पर धारा विस्तारित कर विवेचना में आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर आरोपी सुमीत यादव पिता जेहारू यादव उम्र 23 वर्ष निवासी थाना क्षेत्र सरिया, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ को गिरफ्तार कर कल न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
इस संपूर्ण कार्रवाई में प्रभारी थाना चक्रधरनगर उप निरीक्षक गेंदलाल साहू, प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू एवं महिला आरक्षक अनिता बेक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक नाबालिग बालिका को सुरक्षित परिजनों से मिलाया जा सका, बल्कि ऐसे अपराधों के प्रति कड़ा संदेश भी दिया गया है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और खोज अभियान
शिकायत मिलते ही पुलिस ने अपहरण/बहला-फुसलाकर ले जाने से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। टीम ने निम्न कदम उठाए—
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बालिका की अंतिम लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी इनपुट जुटाए
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संदिग्ध युवक के मोबाइल कॉल डिटेल्स और आवाजाही की जानकारी खंगाली
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संभावित ठिकानों पर स्थानीय मुखबिर तंत्र सक्रिय किया
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सीसीटीवी फुटेज और परिवहन मार्गों की जांच की
इन प्रयासों के आधार पर पुलिस को संकेत मिले कि बालिका को रायगढ़ से बाहर ले जाया गया है।
बेमेतरा से दस्तयाबी: सुरक्षित वापसी
लगातार निगरानी और समन्वय के बाद पुलिस टीम को पुख्ता जानकारी मिली कि बालिका बेमेतरा जिले में मौजूद है। स्थानीय पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई की गई और बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया गया। दस्तयाबी के बाद बालिका की तत्काल काउंसलिंग कराई गई और आवश्यक चिकित्सकीय जांच भी सुनिश्चित की गई, ताकि उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति का आकलन किया जा सके।
आरोपी की गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया
दस्तयाबी के साथ ही पुलिस ने आरोपी युवक को भी हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर उसके खिलाफ कठोर कानूनी धाराओं में कार्रवाई की गई। आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई
नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त है। इस प्रकरण में—
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नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने
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अवैध रूप से कहीं और ले जाकर छिपाने
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बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन
जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही बाल संरक्षण कानून के तहत भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की गई, ताकि पीड़िता के अधिकारों की रक्षा हो सके।
बालिका की सुरक्षा और पुनर्वास
दस्तयाबी के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि—
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बालिका को परिजनों के सुपुर्द सुरक्षित तरीके से किया जाए
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आवश्यकता होने पर काउंसलिंग और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जाए
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बालिका की पहचान और निजी विवरण गोपनीय रखे जाएं
यह कदम नाबालिग की गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
पुलिस की भूमिका और सराहना
इस पूरे मामले में चक्रधरनगर पुलिस की भूमिका सराहनीय रही—
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तेज रिस्पॉन्स टाइम
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अंतर-जिला समन्वय
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तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग
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संवेदनशीलता के साथ पीड़िता का संरक्षण
इन सबके चलते एक गंभीर मामला समय रहते सुलझाया जा सका।
समाज और अभिभावकों के लिए सीख
इस घटना से कई अहम संदेश निकलते हैं—
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अभिभावक बच्चों की दिनचर्या और संपर्कों पर नजर रखें
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किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत पुलिस को सूचित करें
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बच्चों को अच्छे-बुरे स्पर्श और सुरक्षित व्यवहार की जानकारी दें
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सोशल मीडिया और मोबाइल उपयोग पर संतुलित निगरानी रखें
प्रशासन का संदेश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी और ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। Amar Ujala
बेमेतरा से लापता बालिका की सकुशल दस्तयाबी और आरोपी की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि यदि पुलिस, प्रशासन और समाज मिलकर काम करें तो किसी भी गंभीर चुनौती का समाधान संभव है। यह घटना एक चेतावनी भी है और आश्वासन भी—चेतावनी उन लोगों के लिए जो कानून को चुनौती देते हैं, और आश्वासन उन परिवारों के लिए जो न्याय की उम्मीद रखते हैं।
नाबालिगों की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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