बालिका से छेड़खानी करने वाला 1 अधेड़ व्यक्ति गिरफ्तार महिला थाना की कार्रवाई, आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया

बालिका सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद कई बार ऐसे घटनाएँ सामने आती हैं जो समाज के लिए चेतावनी का संकेत हैं। हाल ही में एक मामले में महिला थाना ने एक अधेड़ व्यक्ति को बालिका से छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह मामला न केवल बालिका की सुरक्षा के लिए गंभीर है, बल्कि समाज में सुरक्षा की स्थिति और कानून के प्रभाव को भी उजागर करता है।
घटना की शुरुआत
घटना कुछ समय पहले हुई थी, जब एक अधेड़ व्यक्ति ने नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी की। घटना की जानकारी लड़की के परिजनों को लगी, जिन्होंने तुरंत महिला थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। बालिका और परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
महिला थाना पुलिस ने किशोर बालिका से छेड़छाड़ कर जान से मारने की धमकी देने वाले अधेड़ व्यक्ति को गिरफ्तार कर आज न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पीड़ित बालिका ने कल दिनांक 09.01.2026 को महिला थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह आईटीआई कॉलोनी चक्रधरनगर निवासी बजरंग चौहान (उम्र 40 वर्ष) को पहले से जानती-पहचानती है।
बालिका के अनुसार दिनांक 08.01.2026 को वह अपनी मां को लेने स्कूटी से जा रही थी, तभी शाम करीब 7.30 बजे सिटी कॉलेज बेलादुला के पास मुस्लिम कब्रिस्तान के सामने सुनसान सड़क पर आरोपी मोटरसाइकिल से पीछा करते हुए आया और स्कूटी के बराबर चलकर साथ चलने की बात कहने लगा। इसी दौरान उसने बुरी नीयत से बालिका के पहने हुए स्वेटर को खींचा, गंदी-गंदी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी।
घटना से घबराई बालिका स्कूटी लेकर वहां से भागकर कमला नेहरू पार्क रायगढ़ पहुंची और अपनी मां को फोन कर पूरी जानकारी दी। कुछ देर बाद आरोपी वहां भी पहुंच गया और सभी को गाली-गलौज करने लगा। बालिका की शिकायत पर महिला थाना में अपराध क्रमांक 01/2026 धारा 78, 74, 75(2), 76, 296, 351(3) बीएनएस एवं 8 पोक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण दर्ज होते ही महिला थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के घर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 11 एएस 1652 मय चाबी जप्त की।
पुलिस ने आरोपी को आज न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी की पतासाजी, गिरफ्तारी एवं विवेचना की कार्रवाई में महिला थाना प्रभारी उप निरीक्षक दीपिका निर्मलकर, सहायक उप निरीक्षक विल्फ्रेड मसीह एवं महिला थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
महिला थाना की त्वरित कार्रवाई

महिला थाना ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आरोपी की तलाश शुरू कर दी। छानबीन के दौरान पुलिस ने घटना की पूरी जानकारी जुटाई और साक्ष्यों को इकट्ठा किया। आरोपी की पहचान होते ही उसे गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोर्ट में पेश किया गया।
आरोपी पर लगे आरोप
अधेड़ व्यक्ति पर छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) के तहत मामला दर्ज किया गया। पॉक्सो एक्ट भारत में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, जो बालकों और बालिकाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के यौन अपराध को गंभीरता से देखता है।
न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी
महिला थाना की कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। न्यायिक रिमांड का मतलब है कि आरोपी को कोर्ट की अनुमति से पुलिस की हिरासत में रखा जाएगा ताकि पुलिस आगे की जांच कर सके। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि आरोपी को समाज में खतरा न पैदा हो और जांच पूरी तरह से निष्पक्ष ढंग से हो सके।
बालिका की सुरक्षा और समाज में जागरूकता
इस घटना ने एक बार फिर यह दर्शाया कि बालिकाओं की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस और न्यायपालिका की सक्रियता ही समाज में सुरक्षा की भावना को बनाए रखती है। इसके अलावा, यह घटना समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन सकती है। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को सुरक्षित रहने के लिए सतर्क रहने की सलाह दें और उन्हें यह बताएं कि किसी भी आपत्तिजनक स्थिति में तुरंत मदद मांगनी चाहिए।
कानून और न्याय

भारतीय कानून बालिकाओं और बालकों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध को गंभीरता से लेता है। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को सजा दिलाने की प्रक्रिया तेज और प्रभावी है। ऐसे मामलों में पुलिस की सक्रियता, न्यायिक प्रक्रिया और समाज की सहयोगिता मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
समाज में सुरक्षा की जिम्मेदारी
बालिकाओं की सुरक्षा केवल परिवार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। पड़ोसियों, स्कूल, शिक्षक, और समाज के सभी लोग मिलकर बच्चों की सुरक्षा की दिशा में योगदान कर सकते हैं। बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है।
हाल ही में महिला थाना द्वारा अधेड़ व्यक्ति को बालिका से छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार करना और न्यायिक रिमांड पर भेजना यह दिखाता है कि कानून बालिकाओं की सुरक्षा के मामले में गंभीर है। समाज में सुरक्षा की भावना, जागरूकता और कानून के प्रति विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि समय पर कार्रवाई और उचित कानूनी प्रक्रिया ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
बालिकाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए पुलिस, न्यायपालिका और समाज को मिलकर काम करना होगा। परिवारों को भी बच्चों की सुरक्षा और उन्हें जागरूक करने के लिए सतर्क रहना चाहिए। केवल ऐसा करके ही हम एक सुरक्षित और संरक्षित समाज का निर्माण कर सकते हैं।
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