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1 अजब-गजब रायगढ़ के आवारा कुत्तों की होगी मौज, नगर निगम खिलाएगी बिरयानी, महापौर जीवर्धन चौहान का अनोखा निर्देश

1 अजब-गजब रायगढ़ के आवारा कुत्तों की होगी मौज, नगर निगम खिलाएगी बिरयानी, महापौर जीवर्धन चौहान का अनोखा निर्देश जब खबर ने सबको चौंकाया

1 अजब-गजब छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोगों को हैरानी में डाल दिया है। आमतौर पर नगर निगम से सड़क, पानी, सफाई, नाली और बिजली जैसे मुद्दों पर फैसलों की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग ही है।
रायगढ़ नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों को बिरयानी खिलाने का निर्णय सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक चर्चा का विषय बन गया है।Amar Ujala

इस फैसले के पीछे महापौर जीवर्धन चौहान का अनोखा निर्देश बताया जा रहा है, जिसे कुछ लोग मानवीय पहल बता रहे हैं, तो कुछ इसे जनता के पैसों की बर्बादी करार दे रहे हैं।


क्या है पूरा मामला?

शहर के आवारा कुत्तों की जल्द ही मौज होने वाली है क्योंकि रायगढ़ नगर निगम अब स्ट्रीट डॉग्स को बिरयानी खिलाएगी। इस खबर को पढ़कर चौंकने की बात नहीं है और न ही हमारा मसखरी करने का कोई इरादा है। चाय वाले महापौर के रूप में पूरे देश में मशहूर मेयर जीवर्धन चौहान ने एक यू-ट्यूब चैनल से बात करते हुए उक्त बातें कहीं हैं। छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्ते इन दिनों सुर्खियों के केन्द्र में है।

प्रदेश के सरकारी शिक्षकों व प्राचार्यों को आवारा कुत्तों पर निगरानी करने के बकायदा फरमान जारी हो चुका है लेकिन इन सबको छोड़ रायगढ़ के स्ट्रीट डॉग्स के दिन बहुरने वाले हैं। आपको बताते चलें कि नगर निगम आवारा कुत्तों का बधियाकरण करने की मुहिम चला रही है और आवारा कुत्तोंं की सेहत के प्रति जीवर्धन चौहान कितने फिक्रमंद हैं, इसकी बानगी महापौर के वक्तव्य से मिलती है।

बहरहाल, मेयर चौहान ने इस बात का अभी खुलासा नहीं किया है कि स्ट्रीट डॉग्स को बिरयानी वेज खिलाया जाएगा या नॉनवेज…..! शहर में आवारा कुत्तों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई है, हर गली मोहल्लों में कुत्तों के झुण्ड देखे जा सकते हैं। कुत्तों की संख्या बढ़ने के साथ ही डॉग बाईट के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है। वहीं कुत्तों की वजह से किसी भी गली से नये आदमी का गुजरना मुहाल हो गया है। यही नहीं, बल्कि सडक़ पर झुण्ड बना कर घुमने वाले कुत्तों की वजह से दुर्घटनाएं भी घटित हो रही है।

केवल रायगढ़ जिले का ही नहीं यह हाल कमोबेश पूरे प्रदेश में का यही हाल है। शासन ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्कूली बच्चों को कुत्तों के शिकार होने से बचाने के लिए शासकीय स्कूलों के प्रचार्यों एवं शिक्षकों को स्ट्रीट डॉग्स पर निगरानी रखने स्कूल के आस पास दिखने पर भगाने का आदेश जारी किया है।

बात करें रायगढ़ शहर की तो आवारा कुत्तों से बचाव के लिए डॉग हाऊस निर्माण करने की भी लंबे समय से मांग की जा रही है। वर्तमान में इस समस्या से निपटने के लिए रायगढ़ नगर निगम ने आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाने उनकी नसबंदी का काम प्रारंभ किया है जिसका जिम्मा भिलाई के एक एनजीओ को दिया गया है।

एनजीओ के द्वारा शहर में आवारा कुत्तों को पकड़कर ट्रांसपोर्ट नगर ले जाया जाता है जहां उनका बधियाकरण कर दो दिनों तक रखने के बाद कुत्ते के पुरी तरह से स्वस्थ्य होने पर उसे वापस छोड़ दिया जाता है। बताया जा रहा है कि तीन डॉक्टरों की टीम एनजीओ के माध्यम से इस कार्य को कर रही हैं।वहीं अब बधियाकरण के लिए ले जाये जाने वाले इन आवारा कुत्तों की मौज होने वाली है। रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान ने कुत्तों को बिरयानी खिलाने का निर्देश दिया है।

रायगढ़ शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ महीनों में:

इन समस्याओं को देखते हुए नगर निगम पर लगातार दबाव बन रहा था कि कोई ठोस समाधान निकाला जाए।

इसी बीच नगर निगम की एक बैठक में महापौर जीवर्धन चौहान ने आवारा कुत्तों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। चर्चा आगे बढ़ी और बात बिरयानी तक पहुंच गई।


बिरयानी क्यों? सवाल सबके मन में

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आवारा कुत्तों के लिए भोजन की व्यवस्था करनी थी, तो बिरयानी ही क्यों?

नगर निगम सूत्रों के अनुसार:

हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे “बिरयानी” नाम से प्रचारित नहीं किया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर यही शब्द चलन में आ गया।


महापौर जीवर्धन चौहान का क्या कहना है?

महापौर जीवर्धन चौहान का कहना है कि:

“यह फैसला किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। आवारा पशु भी जीव हैं, उनके प्रति संवेदनशील होना हमारी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि:


नगर निगम की योजना: कैसे होगा क्रियान्वयन?

नगर निगम द्वारा प्रस्तावित योजना के अनुसार:

  1. चिन्हित स्थानों पर भोजन वितरण
    शहर के चुनिंदा इलाकों में ही भोजन दिया जाएगा।

  2. निगरानी में वितरण
    निगम कर्मी और स्वयंसेवी संस्थाएं मिलकर व्यवस्था देखेंगी।

  3. भोजन की मात्रा सीमित
    जरूरत से ज्यादा या फिजूलखर्ची नहीं होगी।

  4. पशु चिकित्सक की भूमिका
    कुत्तों की सेहत और भोजन की गुणवत्ता पर नजर।

  5. जनता की सुरक्षा प्राथमिकता
    आक्रामक कुत्तों पर अलग से कार्रवाई।


जनता की प्रतिक्रिया: समर्थन और विरोध दोनों

इस फैसले को लेकर रायगढ़ की जनता दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।

समर्थन करने वालों का कहना है:

विरोध करने वालों की दलीलें:


सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज

खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर:

कुछ यूजर्स ने लिखा कि “अब कुत्ते भी वोट मांगेंगे”, तो किसी ने कहा “पहले इंसानों को तो बिरयानी खिला दो।”


राजनीतिक हलकों में हलचल

इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे फैसले भावनात्मक तो होते हैं, लेकिन जमीन पर असर मिश्रित रहता है।


पशु प्रेम बनाम प्रशासनिक प्राथमिकताएं

यह पूरा मामला एक बड़े सवाल को जन्म देता है:

क्या पशु प्रेम और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बन पाया है?

एक ओर:

दूसरी ओर:

यहीं से बहस और तेज हो जाती है।


देश के अन्य शहरों में क्या होता है?

भारत के कई शहरों में:

लेकिन बिरयानी जैसे विशेष भोजन की व्यवस्था बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए रायगढ़ का मामला अलग और अनोखा बन गया है।


क्या इससे समस्या का स्थायी समाधान होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि:

यदि इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम नहीं हुआ, तो बिरयानी खिलाने का असर अस्थायी ही रहेगा।


 1 अजब भी, 1 गजब भी

रायगढ़ नगर निगम का यह फैसला वाकई 1 अजब-गजब है।
एक ओर यह मानवीय और संवेदनशील पहल लगती है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल भी खड़े करती है।

महापौर जीवर्धन चौहान का यह अनोखा निर्देश रायगढ़ को देशभर की सुर्खियों में ले आया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह प्रयोग सफल होता है या जनता के विरोध के आगे इसे वापस लेना पड़ता है।

एक बात तय है—
रायगढ़ के आवारा कुत्तों के लिए फिलहाल तो मौज ही मौज है।

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