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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान स्वास्थ्य शिविर में 499 गर्भवती माताओं की जांच

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान स्वास्थ्य शिविर में 499 गर्भवती माताओं की हुई जांच

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एक मजबूत कदम

भारत में मातृ मृत्यु दर को कम करने और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सुलभ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) आज स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है। इसी कड़ी में हाल ही में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर में 499 गर्भवती माताओं की व्यापक जांच की गई, जो इस अभियान की सफलता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

यह शिविर न केवल नियमित जांच तक सीमित रहा, बल्कि इसमें गर्भावस्था के दौरान आने वाली जटिलताओं की पहचान, पोषण परामर्श, आवश्यक दवाइयों का वितरण और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को विशेष चिकित्सा सुविधा से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किए गए।


प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान क्या है?

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत गर्भवती महिलाओं को हर महीने की 9 तारीख को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी महिला को स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में जान का जोखिम न उठाना पड़े।

इस योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गर्भवती महिलाओं की जांच करती है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 499 गर्भवती माताओं की जांच की गई। इनमें सिविल अस्पताल खरसिया में 24, लैलूंगा विकासखंड में 98, घरघोड़ा में 111, तमनार में 108, पुसौर में 55, चपले में 50, धरमजयगढ़ में 29 एवं लोईंग विकासखंड में 24 गर्भवती माताओं की जांच शामिल है।

शासन के दिशा-निर्देशानुसार कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री रंजना पैंकरा के संचालन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक स्वल्पाहार प्रदान कर उनकी समुचित स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श दिया गया।

प्रत्येक गर्भवती महिला की आवश्यक जांच जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, शुगर, सिकल सेल, मलेरिया, एचआईवी, वजन, ऊंचाई आदि की गई। साथ ही आयरन व कैल्शियम टैबलेट का वितरण कर महिला चिकित्सकों द्वारा व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण एवं सुरक्षित मातृत्व को लेकर विशेष काउंसलिंग की गई।

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें निजी एवं शासकीय सोनोग्राफी केंद्रों में निःशुल्क जांच सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को लेबर रूम एवं ऑपरेशन थियेटर का भ्रमण कराया गया, जिससे प्रसव से जुड़ा भय एवं तनाव कम हो तथा वे सुरक्षित प्रसव के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।

जिला प्रशासन द्वारा सभी गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं से अपील की गई कि वे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और नियमित स्वास्थ्य जांच कराकर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करें। महिलाओं को यह भी जागरूक किया गया कि किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क कर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा आंगनबाड़ी में अवश्य जाएं। AajTak


499 गर्भवती माताओं की जांच: शिविर की मुख्य झलकियाँ

आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 499 गर्भवती माताओं ने पंजीकरण कराया और उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में महिलाओं की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया।

प्रमुख जांच सेवाएँ

इन सभी जांचों का उद्देश्य गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही स्थिति का पता लगाना था।


उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान

शिविर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रही उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान। कई महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कुपोषण और अन्य जटिलताओं के लक्षण पाए गए।

ऐसी महिलाओं को तुरंत विशेष श्रेणी में चिन्हित कर:

यह पहल मातृ मृत्यु और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है।


पोषण और स्वास्थ्य परामर्श पर विशेष जोर

शिविर में केवल जांच ही नहीं, बल्कि पोषण और जीवनशैली परामर्श को भी विशेष महत्व दिया गया। डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को बताया कि:

महिलाओं को यह भी समझाया गया कि गर्भावस्था के दौरान छोटी-छोटी सावधानियाँ कैसे बड़े खतरों से बचा सकती हैं।


निःशुल्क दवाइयों और जांच सुविधाओं का लाभ

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित इस शिविर में सभी सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क रहीं। गर्भवती महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ, कैल्शियम टैबलेट, आवश्यक विटामिन सप्लीमेंट और अन्य जरूरी दवाइयाँ मुफ्त में वितरित की गईं।

इससे खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को बड़ा लाभ मिला, जो अक्सर महंगे इलाज के कारण नियमित जांच नहीं करा पाती थीं।


स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासन की सक्रिय भूमिका

इस सफल आयोजन के पीछे स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और चिकित्सा स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने मिलकर गर्भवती महिलाओं को शिविर तक लाने, पंजीकरण कराने और जांच पूरी कराने में अहम भूमिका निभाई।

आशा कार्यकर्ताओं ने पहले से ही महिलाओं को शिविर की जानकारी दी और उन्हें समय पर केंद्र तक पहुँचाने में सहयोग किया, जिससे अधिकतम संख्या में गर्भवती माताएँ इस योजना का लाभ उठा सकीं।


ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का बढ़ता प्रभाव

यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है। जहाँ पहले गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुँचने में कठिनाई होती थी, वहीं अब यह सुविधा उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध हो रही है।

इससे:


मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में प्रभावी कदम

भारत में मातृ मृत्यु दर को कम करना लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसे कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

नियमित जांच, विशेषज्ञ सलाह और समय पर उपचार से:


गर्भवती महिलाओं की प्रतिक्रिया

शिविर में जांच कराने पहुँची महिलाओं ने इस पहल की सराहना की। कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें पहली बार इतनी विस्तृत जांच और डॉक्टरों से सीधी बातचीत का अवसर मिला।

महिलाओं का कहना था कि:


भविष्य में ऐसे शिविरों की आवश्यकता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शिविरों को और अधिक नियमित, व्यापक और सुलभ बनाया जाना चाहिए। यदि हर गर्भवती महिला को समय पर जांच और परामर्श मिले, तो मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

साथ ही, पुरुषों और परिवार के अन्य सदस्यों को भी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि घर पर भी उन्हें पूरा सहयोग मिल सके।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित स्वास्थ्य शिविर, जिसमें 499 गर्भवती माताओं की जांच की गई, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय और प्रभावी पहल है। यह अभियान न केवल गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखने में मदद कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य की नींव भी मजबूत कर रहा है।

सरकार, स्वास्थ्य विभाग और समाज के संयुक्त प्रयासों से यदि इस तरह के कार्यक्रम निरंतर चलते रहें, तो वह दिन दूर नहीं जब हर माँ सुरक्षित होगी और हर बच्चा स्वस्थ जन्म ले सकेगा।

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