रायगढ़(2025) युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा हर्जाना पूरा मामला

क्यों यह मामला चर्चा में
बीमा (इंश्योरेंस) सामाजिक सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा है। यह दुर्घटना, चोरी, नुकसान आदि की स्थिति में सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति — चाहे वह वाहन मालिक हो या व्यवसायी — आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे। लेकिन जब बीमा कंपनी दावे (claim) का निपटान (settlement) नहीं करती या अनावश्यक बाधाएँ खड़ी करती है, तो उपभोक्ता के हक़ों का हनन होता है।
गैस एजेंसी की खड़ी ट्रक को अज्ञात वाहन द्वारा पीछे से ठोकर मारने से क्षतिग्रस्त होने के बाद किये गये बीमा क्लेम की राशि इंश्योरेंस कंपनी द्वारा नहीं दिये जाने पर ट्रक मालिक एवं एजेंसी संचालिका ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बीमित रकम दिलाने की गुहार लगाई थी। फोरम ने उभयपक्ष की सुनवाई के बाद युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी करना पाये जाने पर बीमा की राशि 62 हजार 5 सौ रूपए तथा मानिसक क्षति के रूप में 10 हजार व वाद व्यय 5 हजार रूपए देने का आदेश जारी किया है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय चक्रधरनगर स्टेडियम रोड निवासी श्रीमती श्वेता किण्डो पति स्व. यश किण्डो प्रियदर्शिनी एच. पी. गैस एजेंसी की प्रबंधक है तथा गैस सिलेण्डर परिवहन के लिए ट्रक (क्रमांक सीजी 13 एएफ 6932) भी एजेंसी के नाम पर क्रय किया गया है।
घटना — क्या हुआ था?
उक्त ट्रक का युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की रायगढ़ शाखा से प्रीमियम राशि 40 हजार 614 रूपए अदा कर बीमा करवाया गया था। उस वक्त बीमा की अवधि 22 मई 2022 से 19 मई 2023 तक थी। इस दौरान 27 नवंबर 2022 की रात को ऐजेंसी कार्यालय के पास ही सडक़ किनारे निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़ी ट्रक को अज्ञात वाहन पीछे की ओर से ठोकर मार कर फरार हो गया था।
वाहन की ठोकर से ट्रक क्षतिग्रस्त हो गया था। सुबह जब इस बात की जानकारी मिली तब श्रीमती श्वेता किण्डो ने तदाशय की सूचना युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के रायगढ़ शाखा कार्यालय एवं क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर को दी गई। वहीं कंपनी की ओर से बीमा क्लेम के लिए सर्वेयर भेजा गया था। सर्वेयर के सुझाव पर श्रीमती श्वेता किण्डो ने मरम्मत के संबंध में कोटेशन बिल तैयार कर क्लेम फार्म कंपनी कार्यालय में जमा करने कहा गया।
क्षतिग्रस्त ट्रक को हरिओम मोटर गैरेज में मरम्मत के लिए ले जाया गया जहां मैकेनिक ने क्षति का आंकलन कर एक लाख व्यय होने का कोटेशन बिल बना कर दिया गया था। वहीं श्रीमती श्वेता किण्डो ने कोटेशन बिल के साथ आवेदन जमा किये जाने पर कंपनी की ओर से कहा गया कि स्वयं की रकम से मरम्मत कराने के बाद अंतिम बिल प्रस्तुत किये जाने के बाद बीमा की राशि का भुगतान कर दिया जावेगा।

ट्रक की मरम्मत कराने के बाद व्यय हुए एक लाख रूपए के बिल के साथ संपूर्ण जानकारी शपथ पत्र के साथ युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के रायगढ़ शाखा में जमा कराया गया था। वहीं 20 अक्टूबर 2023 को बीमा कंपनी की ओर से आवेदिका को पत्र के माध्यम से सूचना दी गई कि ट्रक के चालक संजय कुमार के पास वैध लायसेंस नहीं होने के कारण क्षतिपूर्ति दावा निरस्त कर दिया गया है।
इस पर श्रीमती श्वेता किण्डो ने पुन: एक शपथ पत्र देते हुए बताया कि खड़े ट्रक को अज्ञात वाहन ने ठोक कर क्षतिग्रस्त किया है तथा दुर्घटना के समय चालक के द्वारा वाहन नहीं चलाया जा रहा था। इस शपथ पत्र के बाद कंपनी द्वारा गोलमोल जवाब आवेदिका को दिया गया। वहीं क्लेम की राशि नहीं मिलने पर श्रीमती यश किण्डो ने अपने उपभोक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा गया जिसका जवाब देते हुए कंपनी ने राशि अदा करने से स्पष्ट मना कर दिया।
वहीं अपने द्वारा दिये गये दस्तावेजों की सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लिये जाने पर कंपनी की ओर से भेजे गये दस्तावेज में उसके आवेदन के बजाए एक अन्य फर्जी आवेदन दिया गया। इस पर श्रीमती श्वेता किण्डो ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बीमित राशि दिलवाने की फरियाद लगाई।
वहीं उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल व सदस्यद्वय राजेन्द्र पाण्डेय एवं श्रीमती राजश्री अग्रवाल ने उभयपक्ष की सुनवाई के बाद युनाईटेड इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी करना पाया गया। वहीं सर्वेयर द्वारा निर्धारित राशि 62 हजार 5 सौ रूपए तथा मानिसक क्षति के रूप में 10 हजार व वाद व्यय 5 हजार रूपए देने का आदेश जारी किया है।
ट्रक, मालिक और बीमा
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परिवादकर्ता — श्वेता किण्डो — ने एक ट्रक खरीदा।
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ट्रक का इस्तेमाल अपनी गैस एजेंसी में सिलेंडर लाने‑ले जाने और बेचने के व्यवसाय के लिए किया जाता था।
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ट्रक का बीमा उन्होंने United India Insurance Company से कराया था। प्रीमियम राशि ₹ 40,614 थी। बीमा अवधि 20 मई 2022 से 19 मई 2023 तक थी।
दुर्भाग्यपूर्ण घटना — ट्रक को ठोकर
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27 नवंबर 2022 की सुबह, ट्रक जो स्टेडियम रोड के पास खड़ा था, एक अज्ञात वाहन द्वारा पीछे से टकरा गया। इसके कारण ट्रक क्षतिग्रस्त हो गया।
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घटना की सूचना तुरंत बीमा कंपनी को दी गई। कंपनी ने सर्वेयर भेजा, जिसने कोटेशन/बिल तैयार कराने को कहा।
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ट्रक को गैरेज में मरम्मत के लिए ले जाया गया। मरम्मत की अनुमानित लागत ₹ 1,00,000 बताई गई।
क्लेम, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी की नाकामी
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श्वेता ने कोटेशन और क्लेम फार्म सबमिट किया। मरम्मत के बिल और शपथ पत्र भी जमा किए। बीमा कंपनी ने आश्वासन दिया कि बिल प्रमाण के बाद राशि दी जाएगी।
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लेकिन 20 अक्टूबर 2023 को कंपनी ने बताया कि क्लेम निरस्त कर दिया गया है — कारण: “चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।”
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परिवादकर्ता ने शपथ पत्र देकर कहा कि वाहन खड़ा था और चालक वाहन नहीं चला रहा था। इसके बावजूद कंपनी ने क्लेम को स्वीकार नहीं किया। अंततः, श्वेता ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की।
फोरम का फैसला — न्याय मिला
Raigarh District Consumer Disputes Redressal Forum ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है।
फोरम ने आदेश दिया:
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बीमा कंपनी को ₹ 62,500 रूपए,
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मानसिक पीड़ा के लिए ₹ 10,000 रूपए,
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वाद व्यय के रूप में ₹ 5,000 रूपए,
कुल मिलाकर ₹ 77,500 का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए।
कारण — कंपनी द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस न होने के आधार पर क्लेम को खारिज करना उचित नहीं था, क्योंकि दुर्घटना के समय वाहन खड़ा था; और सर्वेयर तथा मरम्मत बिल सब वैध थे।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है — व्यापक परिप्रेक्ष्य
1. बीमा कंपनियों की मनमानी पर अंकुश
फैसले ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियाँ दावे खारिज करते समय सिर्फ कागज़ी बहानों का सहारा नहीं ले सकतीं। यदि दुर्घटना हुई है, सर्वेयर ने मरम्मत प्रमाणित किया है, और दस्तावेज़ी प्रक्रिया पूरी हुई है — तो सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज करना जायज़ नहीं।
2. उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा
यह घटना दिखाती है कि यदि ग्राहक जागरूक हो, दस्तावेज सही रखें और न्याय के लिए आवाज उठाएँ — तो उपभोक्ता फोरम उनके हक में निर्णय दे सकते हैं। Amar Ujala
3. बीमा कंपनियों के लिए चेतावनी
बीमा कंपनियों को ध्यान रखना होगा कि वे क्लेम निरस्तीकरण करते समय justifiable कारण दें। अन्यथा, फोरम उन्हें हर्जाना देने का आदेश दे सकता है।
4. अन्य मामलों में मिसाल
इस फैसले से संकेत मिलता है कि उपभोक्ता हित और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है। बीमा कंपनियों को अब दावे समय पर और निष्पक्ष रूप से निपटाने होंगे।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया। इसमें, एक ट्रक मालिक को उसके दावे के लिए भुगतान नहीं मिला। बीमा कंपनी ने ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने का हवाला दिया। लेकिन उपभोक्ता फोरम ने पाया कि दुर्घटना के समय ट्रक खड़ा था, ड्राइविंग नहीं हो रही थी; इसलिए कंपनी का इनकार अनुचित था। परिणामस्वरूप, फोरम ने बीमा कंपनी को हर्जाना देने का आदेश दिया।
यह फैसला न केवल प्रभावित व्यक्ति के लिए न्याय है, बल्कि उन दर्जनों मामलों के लिए मिसाल बनता है, जहाँ बीमा कंपनियाँ अक्सर तकनीकी बहानों के पीछे छुप कर दावे खारिज कर देती हैं।
सीख — बीमा ग्राहक के लिए
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पॉलिसी खरीदते समय — दस्तावेज़ पढ़ें, शर्तों पर स्पष्ट जानकारी लें।
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दावे करते समय — घटना की सूचना तुरंत दें; सर्वेयर बुलाएँ; मरम्मत/नुकसान का कोटेशन और बिल जमा करें।
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डॉक्युमेंटेशन रखें — घटना का फोटो/वीडियो, रिपोर्ट, मरम्मत का विवरण, बिल आदि।
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यदि क्लेम ठुकराया जाए — घबराएँ नहीं; नोटिस भेजें; फोरम/न्यायालय में शिकायत करें।
संभावित चुनौतियाँ
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बीमा कंपनियाँ भविष्य में दावों को कड़ा कर सकती हैं।
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छोटे व्यवसायी कानूनी प्रक्रिया में पहुँच नहीं पाते, जिससे न्याय सीमित रह सकता है।
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बीमा कंपनियों को प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।
रायगढ़ में श्वेता किण्डो को न्याय मिला। यह मिसाल है कि अगर ग्राहक जागरूक और दस्तावेज‑संपन्न हों — तो बीमा कंपनियों को भुगतान करना होगा।
रायगढ़ जिले में बीमा अवधि के दौरान ट्रक को अज्ञात वाहन के चालक के द्वारा पीछे से ठोकर मारकर क्षतिग्रस्त कर देने के बाद युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के द्वारा बीमा भुगतान करने में आनाकानी करने के मामले में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए परिवादी को क्षतिपूर्ति भुगतान करने का आदेश जारी किया है।
बीमा सिर्फ एक कागज़ नहीं, बल्कि भरोसे का वादा है। और इस वादे को निभाना बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है।
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