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रायगढ़(2025) खरसिया हाईवे हादसा कार ट्रक से टकराकर चकनाचूर, शिक्षक की मौत

रायगढ़(2025) खरसिया हाईवे हादसा कार ट्रक से टकराकर चकनाचूर, शिक्षक की मौत और चालक गंभीर

एक दिल दहला देने वाली घटना, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया


रायगढ़–खरसिया हाईवे पर उस रात आम दिनों की तरह ही वाहनों का आवागमन चल रहा था। मौसम शांत था, सड़क सूखी थी और ट्रैफिक भी बहुत भारी नहीं। लेकिन देखते ही देखते एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना घट गई जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। हाईवे पर तेज रफ्तार से आ रही एक कार सड़क किनारे खड़े एक भारी ट्रक से इतनी जोरदार टकराई कि आवाज़ कई मीटर दूर तक सुनाई दी। टक्कर की ताकत इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठे एक व्यक्ति—जो कि स्थानीय विद्यालय में शिक्षक थे—ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कार चालक गंभीर रूप से घायल है और जिंदगी–मौत के बीच जूझ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-49 (NH-49) पर स्थित रायगढ़-खरसिया मार्ग पर बुधवार की रात एक और भयावह सड़क दुर्घटना दर्ज की गई। खरसिया थाना क्षेत्र के पतरापाली के पास हुई इस दुर्घटना में सड़क किनारे खड़े एक भारी-भरकम ट्रक से तेज रफ्तार कार (Maruti Suzuki Fronx, क्रमांक CG13AZ6595) की भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वह क्षतिग्रस्त होकर रेलिंग एवं डिवाइडर से जा टकराई।

यह दुर्घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर उठता एक बड़ा सवाल है।


हादसा कैसे हुआ — चश्मदीदों की नजर से

घटना देर शाम/रात के बीच की मानी जा रही है, जब हाईवे पर रोशनी मध्यम रहती है और वाहनों की हेडलाइट ही रास्ता दिखाती है। चश्मदीदों के अनुसार, कार काफी तेज गति में थी और संभवतः अचानक स्टेयरिंग संतुलन बिगड़ गया। ठीक उसी समय, सड़क किनारे एक बड़ा ट्रक खड़ा था, जिसके पीछे पर्याप्त रिफ्लेक्टिव संकेत या चेतावनी बोर्ड नहीं दिखाई दे रहे थे।

कुछ लोगों ने बताया कि कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद दुकानदार और राहगीर सन्न रह गए। लोग बदहवास कार के पास भागे और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। कई मिनटों की मशक्कत के बाद चालक को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया, जबकि उसके बगल में बैठे शिक्षक को बचाने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।


मृतक और घायल — एक परिवार का उजाला बुझा

कार में बैठे मृतक की पहचान स्थानीय स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक के रूप में हुई। वे अपने सौम्य स्वभाव, मिलनसार व्यवहार और विद्यार्थियों से आत्मीय संबंध के लिए जाने जाते थे। उनकी अचानक मौत से स्कूल प्रशासन, छात्र और पूरा समुदाय सदमे में है।

ड्राइवर की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उसे प्राथमिक उपचार के बाद उन्नत चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार चोटें गहरी हैं और अगला 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


घटनास्थल का दृश्य — जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ

जो लोग दुर्घटना के बाद मौके पर पहुँचे, उन्होंने बताया कि कार पूरी तरह मुड़-तुड़कर मशीन के ढेर जैसे बन गई थी। सामने का हिस्सा ट्रक के भीतर तक घुसा हुआ था। कांच के टुकड़े सड़क पर बिखरे थे और वाहन के हिस्से कई मीटर दूर तक फैले हुए थे।

हाईवे पर घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस दल ने तुरंत पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और मार्ग को सुचारू करने की कोशिश की। जब तक वाहन हटाए गए, तब तक लंबा जाम लग चुका था। राहगीरों के चेहरों पर डर, चिंता और आक्रोश साफ नजर आ रहा था।


क्या सिर्फ तेज रफ्तार कारण थी?

या फिर हाईवे की खामियां भी जिम्मेदार?

अक्सर हादसों को सिर्फ ड्राइवर की गलती कहकर खत्म कर दिया जाता है, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है—

सड़क किनारे खड़ा भारी वाहन

क्या ट्रक सही तरीके से पार्क किया गया था?
क्या उसके पीछे चमकीले रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगे थे?
क्या खड़ी गाड़ियों का रिकॉर्ड रखने के लिए कोई व्यवस्था है?

हाईवे की रोशनी

रात के समय कई जगह स्ट्रीट लाइट न होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। हाईवे का यह हिस्सा भी अंधेरे और दृश्य-अस्पष्टता के लिए कुख्यात माना जाता है।

ब्लैक स्पॉट की बढ़ती लिस्ट

रायगढ़–खरसिया रोड पर पहले भी कई हादसे दर्ज हो चुके हैं। कई लोग इस पूरी बेल्ट को ‘हाई रिस्क ज़ोन’ बताते हैं, जहां तेज़ रफ्तार, भारी वाहन और मोड़ों का जाल मिलकर डरावनी स्थितियां बनाते हैं।


पुलिस की कार्रवाई — जांच किस दिशा में बढ़ रही है?

पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया, ट्रक को जब्त किया और चालक से पूछताछ शुरू कर दी है।
जांच का मुख्य फोकस है:

तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा वाहन के टूटे हिस्सों, ब्रेक सिस्टम और टायर मार्क्स की जांच भी की जा रही है।


परिवारों पर पड़ा असर — दुख की गूंज

एक शिक्षक की मौत सिर्फ एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी को प्रभावित करती है।
उनके विद्यार्थी, सहकर्मी और पड़ोसी सदमे में हैं।
घर में माता–पिता, पत्नी–बच्चे या भाई–बहन—यह निर्भर करता है कि वह जिस परिवार का हिस्सा थे, वह अब असहनीय खालीपन और आर्थिक–भावनात्मक संकट से गुजर रहा है।

घायल चालक के परिवार की हालत भी तनावपूर्ण है। अस्पताल के बाहर रिश्तेदारों की निगाहें डॉक्टरों के हर शब्द पर अटक जाती हैं।

हादसों की खबरें अक्सर कुछ मिनटों में पढ़कर आगे बढ़ जाने वाली होती हैं, लेकिन उन परिवारों के लिए जिन पर यह वज्रपात होता है—जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। रायगढ़–खरसिया हाईवे पर हुई इस भीषण दुर्घटना ने दो परिवारों को ऐसी चोट दी है जिसकी भरपाई शायद कभी न हो पाए।

शिक्षक की अचानक मौत ने उनके घर को गहरे सन्नाटे में धकेल दिया है। सुबह जिन कमरों में बच्चों की पढ़ाई की आवाज़ें और उनकी हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम और अविश्वास पसरा हुआ है। परिवार के सदस्यों को यकीन ही नहीं हो रहा कि जो व्यक्ति रोज सुबह मुस्कुराकर स्कूल के लिए निकल जाता था, वह अब कभी लौटकर घर की देहरी पार नहीं करेगा।

शिक्षक की माता-पिता के लिए यह दर्द असहनीय है। माता के हाथों में अब भी वह टिफ़िन बॉक्स है जिसे वह हर दिन प्यार से भरकर देती थीं, और पिता बार-बार उसी सड़क की ओर देखते हैं जहां से बेटे का आखिरी सफर गुज़रा था। पत्नी या बच्चों (यदि हों) के लिए यह हादसा जिंदगी का सबसे बड़ा खालीपन बन गया है—जिसके साथ अब जीना भी एक संघर्ष है।

उधर घायल चालक के परिवार की हालत भी कम दुखद नहीं। अस्पताल के बाहर बेसब्र इंतजार करते परिजनों की निगाहें हर बार डॉक्टर के चेहरे पर टिक जाती हैं—इस उम्मीद में कि अगला वाक्य शायद राहत की कोई किरण लेकर आए। लेकिन अनिश्चितता और भय का बोझ हर मिनट उन्हें और भारी लगने लगता है

इस हादसे ने साफ साबित कर दिया कि सड़क पर होने वाली एक चूक सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को तोड़ देती है। किसी का सहारा छिन जाता है, किसी की उम्मीद, और किसी की पूरी दुनिया।

दुख की यह गूंज लंबे समय तक इन परिवारों के दिलों में ही नहीं, पूरे समाज में सुनाई देती रहेगी—सड़क पर सावधानी और जिम्मेदारी की एक कड़ी याद बनकर।

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सड़क सुरक्षा — हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।

1. हाईवे पर गति सीमा का पालन

तेज रफ्तार हमेशा खतरनाक होती है—चाहे वाहन चाहे जितना सुरक्षित क्यों न हो।

2. सड़क किनारे वाहनों के लिए सख्त नियम

खड़े ट्रक और बसें दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती हैं। उनके लिए चमकीले संकेत, रिफ्लेक्टर और सही पार्किंग के नियम कड़ाई से लागू होने चाहिए।

3. हाईवे लाइटिंग और साइनबोर्ड

जहां दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं, वहां प्रकाश और संकेतों की आवश्यकता अनिवार्य है।

4. लोगों में जागरूकता

रात में लंबे सफर पर ब्रेक लेना, नींद में गाड़ी न चलाना और सीट बेल्ट का इस्तेमाल—ये छोटी सावधानियाँ बड़े हादसे रोक सकती हैं।

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यह हादसा हमें क्या सिखाता है?

सड़क पर हर सेकंड हमारी जान के लिए कीमती है।
एक पल का ध्यानभंग, एक छोटी-सी गलती या एक गलत पार्क किया वाहन—कभी-कभी पूरी जिंदगी पलट देता है।

रायगढ़–खरसिया हाईवे पर हुआ यह हादसा आने वाली पीढ़ियों को भी याद दिलाएगा कि सड़कें सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सतर्कता का इम्तिहान भी हैं।


 बदलाव जरूरी है, अभी और इसी वक्त

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जब तक सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन, ड्राइवर, वाहन मालिक और आम नागरिक मिलकर संजीदा प्रयास नहीं करते, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं।
एक शिक्षक की मौत और एक परिवार की तबाही हमें यही संदेश देती है—

हाईवे सिर्फ यात्रा का मार्ग नहीं, जीवन और मृत्यु के बीच की एक पतली रेखा भी है।
और उस रेखा को सुरक्षित रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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