“रायगढ़ में 139 करोड़ रुपए बिजली बिल बकाया सरकारी विभागों पर वसूली की बड़ी कार्रवाई शुरू”


 रायगढ़ में 139 करोड़ रुपए शासकीय बिजली बिल बकाया — प्रशासन ने शुरू की सख्त वसूली कार्रवाई

 14 अक्टूबर 2025, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

रायगढ़ जिले में सरकारी विभागों और संस्थानों पर कुल 139 करोड़ रुपए के बिजली बिल का बकाया होने की जानकारी सामने आई है। बिजली कंपनी (CSPDCL) ने इस मामले में अब सख्ती दिखाते हुए वसूली अभियान शुरू कर दिया है।
प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो सरकारी कार्यालयों की बिजली आपूर्ति भी काटी जा सकती है

रायगढ़ में 139 करोड़ रुपए शासकीय बिजली बिल बकाया — विद्युत विभाग ने सर्वे और नोटिस जारी किए हैं। Patrika News


 मामला क्या है?

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की रिपोर्ट के अनुसार, रायगढ़ जिले में सरकारी विभागों — पंचायत, नगर निगम, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, जनपद पंचायतों और सरकारी आवास परिसरों पर कुल 139.12 करोड़ रुपए का बकाया बिजली बिल दर्ज है।

यह बकाया कई वर्षों से जमा होता जा रहा था, लेकिन अब विभाग ने जिला-स्तरीय सर्वे और नोटिस प्रक्रिया शुरू की है। हर विभाग को उनके उपभोक्ता नंबर के अनुसार बकाया सूची दी गई है और एक निश्चित समयसीमा में भुगतान करने को कहा गया है।


 किन विभागों पर कितना बकाया?

बिजली विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के अनुसार बकाया राशि का ब्योरा इस प्रकार है:

विभाग / संस्था अनुमानित बकाया राशि (₹ करोड़ में)
नगर निगम रायगढ़ 27.5
पंचायत एवं ग्रामीण विभाग 19.3
शिक्षा विभाग (स्कूल, हॉस्टल आदि) 24.7
स्वास्थ्य विभाग 11.6
सिंचाई विभाग 9.8
जनपद पंचायतें एवं अन्य शासकीय संस्थाएं 46.1
कुल 139.0 करोड़ रुपए (लगभग)

कई स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पंचायत भवनों के मीटर लंबे समय से चालू हैं, लेकिन भुगतान नियमित रूप से नहीं किया गया।


 नोटिस और चेतावनी

रायगढ़ विद्युत मंडल के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि “कई बार पत्राचार और मौखिक अनुरोध के बावजूद बिल जमा नहीं किए जा रहे थे। अब संबंधित विभाग प्रमुखों को लिखित नोटिस भेजे जा रहे हैं। यदि एक माह में राशि जमा नहीं होती, तो बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि किसी सरकारी भवन का नया कनेक्शन मांगा जाता है, तो पहले पुराना बकाया निपटाना अनिवार्य होगा।


 बकाया बढ़ने के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में “बजट आवंटन की देरी, फाइल प्रक्रिया की जटिलता और आपसी जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति” इस समस्या की मुख्य वजह है।
कई बार विभागों के बीच यह विवाद होता है कि बिजली खर्च किस मद से भुगतान किया जाए — परिणामस्वरूप बिल महीनों तक अटके रहते हैं।

कभी-कभी पंचायत भवनों, स्कूलों और जल आपूर्ति पंपों के बिल स्थानीय निकायों पर डाल दिए जाते हैं, लेकिन पंचायतों के पास नियमित फंड नहीं होता। इस कारण बिजली बिल का भुगतान लंबित रहता है और बकाया लगातार बढ़ता चला जाता है।


 बिजली कंपनी की तैयारी

CSPDCL ने रायगढ़ में बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान दल बनाया है।
यह दल प्रत्येक शासकीय उपभोक्ता के मीटर रीडिंग, भुगतान रिकॉर्ड और बकाया स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
जहाँ उपभोक्ता सक्रिय हैं लेकिन भुगतान नहीं हुआ, वहाँ कनेक्शन काटने की चेतावनी,
और जहाँ भवन बंद पड़े हैं, वहाँ कनेक्शन निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

विभाग का उद्देश्य सिर्फ वसूली नहीं, बल्कि नियमित भुगतान की व्यवस्था स्थापित करना है ताकि भविष्य में ऐसा भारी बकाया फिर न हो।


 प्रशासन का बयान

रायगढ़ कलेक्टर ने इस पर कहा —

“बिजली बिल सरकारी धन से भुगतान किया जाना चाहिए। यदि कोई विभाग लापरवाही करता है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि 30 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करें।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगले माह से समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसमें प्रत्येक विभाग की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।


 जनता पर क्या असर?

भले ही यह बकाया सरकारी विभागों का है, लेकिन इसका असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है।
क्योंकि जब सरकारी कार्यालयों का भुगतान नहीं होता, तो बिजली कंपनी के राजस्व पर दबाव बढ़ता है, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं पर सर्विस चार्ज और मीटर रेंट जैसी लागतें बढ़ाई जा सकती हैं।

रायगढ़ शहर में पहले ही बिजली बिल दरों में मामूली बढ़ोतरी की चर्चा चल रही है, और यह मामला उस चर्चा को और तेज कर सकता है।


 पहले भी हुई थी ऐसी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब रायगढ़ या छत्तीसगढ़ में शासकीय विभागों पर इतना बड़ा बिजली बकाया सामने आया हो।
2022 और 2023 में भी बिलासपुर, कोरबा और रायपुर जिलों में मिलाकर करीब 600 करोड़ रुपए का बकाया दर्ज किया गया था।
तब भी सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था और विभागों को आपसी समायोजन से भुगतान करना पड़ा था।

इस बार रायगढ़ का मामला खास इसलिए है क्योंकि यहां औद्योगिक और शासकीय उपभोग दोनों ऊँचे स्तर पर हैं — यानी बिजली खपत अधिक और भुगतान कम हो रहा है।


ऊर्जा विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा विश्लेषक और रायगढ़ पॉवर प्रोजेक्ट के पूर्व अधिकारी ए.के. वर्मा का कहना है —

“जब सरकारी विभाग स्वयं समय पर बिल नहीं चुकाते, तो यह आम जनता के लिए गलत संदेश जाता है। बिजली कंपनी को मजबूर होकर उद्योगों और निजी उपभोक्ताओं से राजस्व बढ़ाने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक असंतुलन पैदा होता है।”

उनके अनुसार, सरकार को एक सिंगल-विंडो पेमेंट सिस्टम बनाना चाहिए जिसमें सभी विभागों के बिजली भुगतान एक केंद्रीय खाते से स्वचालित रूप से हों।


 समाधान और सुझाव

  1. डिजिटल भुगतान प्रणाली — सभी शासकीय कार्यालयों के लिए बिजली बिल का भुगतान ई-ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा जाए।

  2. जिम्मेदारी तय करना — प्रत्येक विभाग के प्रमुख को मासिक रूप से बिजली भुगतान रिपोर्ट देना अनिवार्य हो।

  3. बजट प्रावधान स्पष्ट करना — बिजली बिल के लिए अलग फंड सुनिश्चित हो ताकि अन्य मदों में न फंसे।

  4. नियमित ऑडिट — ऊर्जा विभाग हर छह माह में शासकीय उपभोक्ताओं का ऑडिट करे।

  5. पारदर्शिता पोर्टल — बकाया सूची सार्वजनिक की जाए ताकि जनता भी जान सके कौन-कौन से विभाग जिम्मेदार हैं।


रायगढ़ की बिजली स्थिति

रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है — जहाँ Jindal Power, Nalwa Steel, Monnet Ispat, MSP Plant जैसी कंपनियाँ कार्यरत हैं।
यहाँ औद्योगिक बिजली खपत प्रति माह 300 मिलियन यूनिट से अधिक है।
लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और शासकीय भवनों की बिजली स्थिति अभी भी सुधार की प्रतीक्षा में है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर लोड बढ़ने, पुराने मीटरों और खराब तारों की समस्या भी बकाया संकट को और गहराती है।


 आगे क्या?

  • जिला प्रशासन ने सभी विभागों से 15 नवंबर 2025 तक भुगतान रिपोर्ट मांगी है।

  • बिजली कंपनी ने संकेत दिया है कि यदि 50% राशि भी जमा नहीं हुई, तो सप्लाई डिसकनेक्शन और नाम सार्वजनिक करने की कार्रवाई की जाएगी।

  • इस बीच, राज्य सरकार एक विशेष नीति तैयार कर रही है ताकि ऐसे बकाया राज्यभर में कम किए जा सकें।

रायगढ़ में 139 करोड़ रुपए का शासकीय बिजली बिल बकाया केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनुशासन की कमी का संकेत है।
बिजली कंपनी का राजस्व राज्य के विकास से जुड़ा हुआ है — इसलिए यह ज़रूरी है कि सभी विभाग समय पर भुगतान करें।

यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में बिजली व्यवस्था पर और भार पड़ेगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर भी पड़ सकता है।

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