“रायगढ़ में 10 महिला समूहों द्वारा संचालित आंगनवाड़ी ‘रेडी-टू-ईट’ पहल”

रायगढ़ में महिला संचालित आंगनवाड़ी ‘रेडी-टू-ईट’ पहल एक नई दिशा की शुरुआत

रायगढ़, छत्तीसगढ़—राज्य का पहला जिला बन गया है जहाँ महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए पोषक ‘रेडी-टू-ईट’ भोजन का उत्पादन और वितरण शुरू किया गया है। यह पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुपोषण उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता को साकार करती है।

 रायगढ़ में महिला संचालित आंगनवाड़ी ‘रेडी-टू-ईट’ पहल की शुरुआत

रायगढ़ जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित “रेडी-टू-ईट” भोजन उत्पादन पहल की शुरुआत की गई है। यह पहल आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए पोषक आहार प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया, और 10 महिला समूहों को अनुबंध सौंपे गए हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और बच्चों के पोषण के लिए महत्वपूर्ण कदम है। The Times of India


 पहल का उद्देश्य और महत्व

यह योजना महिला समूहों को आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए पोषक आहार तैयार करने का कार्य सौंपती है, जिससे बच्चों की पौष्टिकता में सुधार और महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। रायगढ़ जिले में कुल 2,709 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिन्हें अब महिला समूहों द्वारा पोषक भोजन प्रदान किया जाएगा। इससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आहार मिलेगा और महिलाओं को आय के नए स्रोत प्राप्त होंगे।


 उत्पादन केंद्र और वितरण

कोटर्लिया ग्राम पंचायत में एक उत्पादन केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ महिला समूह पोषक भोजन का उत्पादन कर रहे हैं। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस केंद्र का उद्घाटन किया और उत्पादन प्रक्रिया का निरीक्षण किया। यह केंद्र रायगढ़ शहरी, रायगढ़ ग्रामीण, पुशौर, खरसिया, घरघोड़ा, तमनार, लैलुंगा, मुकदेगा, धर्मजयगढ़ और कपु ब्लॉकों में महिला समूहों द्वारा संचालित किया जाएगा।


 योजना के लाभ

  • महिला सशक्तिकरण: महिला समूहों को आय के नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

  • कुपोषण में कमी: बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषक आहार मिलेगा, जिससे कुपोषण की समस्या में कमी आएगी।

  • स्थानीय विकास: स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।


 भविष्य की दिशा

यह पहल राज्य के अन्य जिलों में भी लागू की जाएगी, जिससे महिला सशक्तिकरण और बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार होगा। यह राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह महिला सशक्तिकरण और बच्चों के पोषण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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