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रायगढ़ मतदाता सूची अपडेट 2025 19,341 मतदाताओं का 2003 से लिंक नहीं मिला, 81,000 नाम कटने की पूरी जानकारी

रायगढ़ में मतदाता सूची अपडेट2025 और 19 हजार मतदाताओं का 2003 से लिंक नहीं मिलना — पूरी जानकारी

भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है उसका मतदाता। हर व्यक्ति को मतदान करने का अधिकार मिलता है और यह अधिकार तभी सुरक्षित रहता है जब मतदाता सूची यानी वोटर लिस्ट सटीक और अपडेटेड हो। हाल ही में रायगढ़ जिले में हुए अपडेट के दौरान यह पाया गया कि चार विधानसभा क्षेत्रों में 81 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने हैं, जबकि 19,341 मतदाताओं का 2003 की सूची से कोई लिंक नहीं मिला

मतदाता सूची को शुद्ध करने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को एसआईआर के बाद प्रारंभिक सूची प्रकाशित कर दी गई। इसमें 19341 वोटर ऐसे मिले हैं जो 2003 की सूची में परिजनों से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं दे सके हैं। अब इनको नोटिस दिए जाएंगे। रायगढ़ सीट पर दस हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं। एसआईआर के बाद अब मतदान केंद्रों की संख्या भी 1156 से बढक़र 1217 हो जाएगी। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य पूरा हो चुका है।

अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली है। मतदाता सूची को त्रुटिरहित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण का काम किया जा रहा था जिसका प्रारंभिक ड्राफ्ट मंगलवार को प्रकाशित किया गया। एसआईआर में सबसे पहले 1200 मतदाताओं से अधिक संख्या वाले मतदान केंद्रों का युक्तियुक्तकरण किया गया।


मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया का महत्व

मतदाता सूची की सटीकता लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें निम्न लाभ होते हैं:

  1. केवल वैध मतदाता ही मतदान कर सकते हैं

  2. डुप्लीकेट या मृतक मतदाताओं के नाम हट जाते हैं।

  3. फर्जी प्रविष्टियों की संभावना कम होती है।

  4. चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होते हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया इसी उद्देश्य के लिए होती है। इसमें पुराने रिकॉर्ड और नए डेटा की तुलना की जाती है ताकि वोटर लिस्ट को त्रुटिरहित बनाया जा सके। SIR में पुरानी सूची, जैसे 2003 की सूची, को आधार बनाया जाता है।


रायगढ़ में हालिया अपडेट

रायगढ़ जिले की चार विधानसभा सीटों में SIR प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि:

इसका मतलब यह है कि इन मतदाताओं का परिवार रिकॉर्ड, पते या पहचान 2003 की सूची में नहीं मिल पाया। इस स्थिति में इन मतदाताओं के नाम लिंक न मिलने की श्रेणी में रखे जाते हैं।

अब रायगढ़ जिले की चारों विधानसभाओं में मतदानप केंद्रों की संख्या 1156 से बढक़र 1217 हो जाएगी। वोटर लिस्ट भी फिल्टर हो गई है। सबसे चौंकाने वालसा आंकड़ा अनमैपिंग वोटर्स का है। ऐसे 19341 मतदाता हैं जिन्होंने 2003 की सूची में अपने माता-पिता, या किसी अन्य संबंधी की जानकारी नहीं दी है। मतलब इन मतदाताओं की प्रामाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं। इस बात की संभावना है कि इनमें से कई बाहर से आकर अवैध रूप से भी बसे हों। अब इन 19341 लोगों को नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद उनको दोबारा फॉर्म भरकर वैधता साबित करने दस्तावेज देने होंगे।

19 हजार मृतकों का नाम था दर्ज

मतदाता सूची में अब तक 18923 ऐसे वोटर्स का नाम दर्ज था जो मृत हो चुके हैं। मृत होने के बावजूद चुनावी प्रक्रिया में इनका डाटा मौजूद था। 39,950 वोटर दिए गए पतों पर ही नहीं मिले। ये लोग दूसरे विदेश, दूसरे राज्य या शहर में हमेशा के लिए शिफ्ट हो चुके हैं। 3175 मतदाता ऐसे मिले जिनके नाम रायगढ़ के साथ कहीं और भी दर्ज हैं। इनमें ज्यादातर संख्या ओडिशा, उप्र और बिहार के निवासियों की है। अब इनका नाम रायगढ़ से कटेगा। राज्यों के विधानसभा चुनाव अलग-अलग वर्ष में होने की वजह से ये लोग दोनों जगहों पर मतदान कर रहे थे।


81 हजार नाम कटने के कारण

रायगढ़ जिले में मतदाता सूची से नाम कटने के मुख्य कारण हैं:

  1. अनसुलझा रिकॉर्ड: 19,341 मतदाता जिनका 2003 से कोई लिंक नहीं मिला।

  2. मृतक मतदाता: करीब 18,923 नाम मृतक के रूप में सूची में दर्ज थे।

  3. स्थायी रूप से स्थानांतरित: 39,950 मतदाता दिए गए पते पर नहीं मिले।

  4. डुप्लीकेट नाम: 3,175 मतदाता अन्य स्थानों पर भी सूचीबद्ध पाए गए।

इन कारणों की वजह से कुल मिलाकर चार विधानसभा में 81 हजार नाम कटने की प्रक्रिया सामने आई।


2003 की सूची क्यों आधार?

2003 की मतदाता सूची इसलिए आधार के रूप में ली जाती है क्योंकि:

यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खाता, तो उसे “लिंक न मिला” श्रेणी में रखा जाता है।Kelo Pravah


जिन मतदाताओं का लिंक नहीं मिला — क्या करना होगा?

जिन मतदाताओं का 2003 की सूची से लिंक नहीं मिला, उन्हें आमतौर पर नोटिस भेजा जाता है। उन्हें यह करना होगा:

  1. BLO या ERO के कार्यालय में दस्तावेज जमा करना।

  2. माता-पिता का पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या अन्य पहचान प्रमाण दिखाना।

  3. डिजिटली फॉर्म भरना या अपडेट करना।

यदि समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो उनका नाम अंतिम सूची से हटाया जा सकता है।


SIR प्रक्रिया का महत्व

SIR का मुख्य उद्देश्य है:

यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू है और केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं है।


पूरे देश में समान समस्या

रायगढ़ के मामले जैसी स्थिति अन्य राज्यों में भी देखने को मिली है। उदाहरण के लिए:

इससे स्पष्ट है कि SIR प्रक्रिया एक संपूर्ण डेटा सत्यापन अभियान है, जो चुनाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।


चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

दस्तावेज न होने की समस्या

कई ग्रामीण क्षेत्रों और आव्रजन परिवारों के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं, जिससे उनका नाम हटने का खतरा बढ़ जाता है।

सूचना और जागरूकता का अभाव

बहुत से मतदाता अपडेट प्रक्रिया से अनजान रहते हैं। यदि उन्हें नोटिस या जानकारी नहीं मिलती, तो उनके नाम सूची से हट सकते हैं।

तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ

पुरानी सूचियों का डिजिटल डेटा कमज़ोर होता है। यह डेटा लिंक न मिलने का मुख्य कारण बनता है।


सकारात्मक पहलू

  1. सूची त्रुटिरहित होगी।

  2. डुप्लीकेट वोट खत्म होंगे।

  3. केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान कर पाएंगे।

रायगढ़ जिले की चार विधानसभा सीटों में 81 हजार से अधिक नाम कटने और 19,341 मतदाताओं का 2003 से लिंक न मिलने की स्थिति केवल एक आकड़ा नहीं है। यह मतदाता सूची सुधार और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।

इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि डेटा सत्यापन और लोकतांत्रिक अधिकार के बीच संतुलन बनाना कितना महत्वपूर्ण है। सही समय पर अपडेट और जागरूकता से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।

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