रायगढ़ में जंगल में मिली महिला की लाश रहस्य से भरा मामला

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। जिले के एक सुदूरवर्ती जंगल क्षेत्र में एक महिला की मृत लाश संदिग्ध अवस्था में पाई गई है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि उसकी मौत बिजली के तारों से करंट लगने के कारण हुई होगी, जो कथित रूप से जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए स्थानीय शिकारी या ग्रामीणों द्वारा बिछाए गए थे।
यह घटना न केवल एक इंसानी जान के नुकसान का मामला है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर ऐसे “इलेक्ट्रिक जाल” जंगलों और खेतों में किस हद तक आम हो गए हैं, और प्रशासन इन्हें रोकने में कितना कारगर है?

एक महिला की जंगल में मृत पाई गई लाश — मामला संभवतः शिकारी द्वारा बिछाए गए इलेक्ट्रिक तारों से जुड़ा है. Dainik Jagran English
घटना स्थल और प्रारंभिक जानकारी

यह घटना रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव के नजदीकी जंगल की है।
शनिवार सुबह स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल में लकड़ी और चारा लेने जाते वक्त एक महिला का शव देखा। महिला की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष बताई जा रही है। सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया।
जांच के दौरान पास ही में लोहे के तारों में बिजली प्रवाहित होने के सबूत मिले, जिनसे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि महिला की मौत करंट लगने से हुई है।
इलेक्ट्रिक जाल जानवरों से फसलों की रक्षा या मानव जीवन के लिए खतरा?
ग्रामीण इलाकों में किसानों द्वारा जंगली सुअर, हाथी और अन्य जानवरों से अपनी फसल बचाने के लिए बिजली के तार खेतों में बिछा देने की प्रथा अब काफी आम हो गई है।
हालांकि यह तरीका कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन वन क्षेत्रों से सटे गांवों में यह प्रथा जारी है।
रायगढ़, कोरबा, जशपुर और सरगुजा जैसे जिलों में हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें जानवरों के साथ-साथ इंसानों की भी मौत होती है।
वन विभाग लगातार इस पर रोक लगाने की बात करता है, लेकिन निगरानी की कमी और ग्रामीणों की आर्थिक विवशता के चलते यह गंभीर समस्या बनी हुई है।
पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके से साक्ष्य इकट्ठा किए, और फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तारों में हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित किया गया था, जो किसी ट्रांसफॉर्मर या घरेलू बिजली लाइन से जोड़ा गया था।
थाना प्रभारी ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है, और आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस को शक है कि यह तार फसलों की सुरक्षा के नाम पर बिछाया गया जाल था, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि महिला वहां किस कारण पहुंची।
वन विभाग ने भी यह संकेत दिया है कि घटना “अवैध विद्युत जाल” से जुड़ी है, और यदि ऐसा पाया गया तो दोषियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में जंगली जानवरों, खासकर सुअरों और हाथियों का आतंक बढ़ गया है।
रात-रात भर फसलें चौपट हो जाती हैं, इसलिए कई किसान मजबूर होकर बिजली के तार लगाते हैं।
हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह एक खतरनाक चलन है, जो अब इंसानों की जान लेने लगा है।
एक स्थानीय किसान ने कहा —
“हमने कई बार अधिकारियों को बताया कि जंगली सूअर हमारी पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं। कोई स्थायी समाधान नहीं मिलने के कारण कुछ लोग करंट लगाकर फसल बचाने की कोशिश करते हैं।”
वहीं, दूसरी ओर गांव के कुछ बुजुर्गों ने प्रशासन से मांग की है कि
“ऐसे इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग हो और बिजली के तारों पर नियंत्रण लगे, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
घटना सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
महिला की मौत को केवल “दुर्घटना” कहकर छोड़ देना, ग्रामीणों के अनुसार, न्याय के साथ अन्याय होगा।
महिला आयोग की स्थानीय इकाई ने भी महिला की पहचान और उसके परिजनों को मुआवज़ा देने की मांग की है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं केवल सुरक्षा-की-कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम हैं।
कानूनी दृष्टिकोण
भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या जानवर को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से बिजली का तार बिछाना अपराध है।
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भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या)
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विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 (बिजली का अवैध उपयोग)
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और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
के अंतर्गत कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
पुलिस ने अब इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की गुत्थी हत्या या दुर्घटना?
हालांकि पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि यह एक दुर्घटना हो सकती है, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ हत्या की आशंका भी पैदा करती हैं।
जांच अधिकारी ने बताया कि शव के आसपास के निशान इस ओर इशारा करते हैं कि महिला की मौत रात के समय हुई।
यह भी जांच का विषय है कि वह जंगल में क्यों और कैसे पहुँची?
फोरेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल कॉल डिटेल से यह साफ होगा कि क्या महिला किसी काम से वहां गई थी या उसे जानबूझकर वहां बुलाया गया।
जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधि
यह घटना उस बड़ी समस्या का हिस्सा है जो आज पूरे छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में देखी जा रही है।
मनुष्य और वन्यजीवों के बीच बढ़ता टकराव न केवल पर्यावरणीय, बल्कि सामाजिक संकट बन चुका है।
फसलें बचाने के नाम पर बिजली के जाल, जंगलों में अवैध शिकार, और वन-सीमा के भीतर बसावट — ये सभी ऐसे कारण हैं जो इन घटनाओं को जन्म देते हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से विचार
इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की मृत्यु तक सीमित नहीं रहतीं;
ये पूरे समाज की सुरक्षा-संवेदनशीलता, प्रशासनिक विफलता और मानवीय मूल्य-संकट को उजागर करती हैं।
महिला की मौत हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि
“क्या हमारी फसलों की सुरक्षा इंसानी जान से ज्यादा कीमती है?”
ग्रामीणों की समस्याएँ वास्तविक हैं, लेकिन समाधान “मौत के जाल” नहीं हो सकते।
जरूरत है ऐसे उपायों की जो फसलों की रक्षा के साथ-साथ जीवन की रक्षा भी करें।
समाधान और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को इस दिशा में तीन स्तरों पर कार्य करना होगा
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तकनीकी उपाय
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फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग या गैर-विद्युतीकृत बैरियर सिस्टम को बढ़ावा देना चाहिए।
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बिजली विभाग और वन विभाग संयुक्त रूप से ऐसे क्षेत्रों का निरीक्षण करें।
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सामाजिक जागरूकता
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ग्रामीणों को बताया जाए कि करंट लगाकर सुरक्षा करना न केवल अपराध है, बल्कि आत्मघाती कदम भी है।
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कानूनी कड़ाई
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अवैध विद्युत जाल लगाने वालों पर कठोर कार्रवाई हो और उदाहरण बने।
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रायगढ़ जिले में जंगल में मिली महिला की लाश सिर्फ एक “खबर” नहीं, बल्कि मानवता और व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस हद तक हमने अपने पर्यावरण और जीवन-संतुलन के साथ समझौता कर लिया है।
अगर प्रशासन, समाज और ग्रामीण मिलकर संवेदनशीलता के साथ काम करें,
तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और एक सुरक्षित, मानवीय समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
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