रायगढ़ के 10 से ज्यादा हाथी प्रभावित गांवों में सड़क नहीं, ग्रामीण परेशान | वित्त मंत्री से मांग

रायगढ़ के 10 से ज्यादा हाथी प्रभावित गांवों में सड़क का अभाव बना बड़ी समस्या, ग्रामीणों ने वित्त मंत्री से की सड़क निर्माण की मांग

छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। लेकिन इन्हीं जंगलों के बीच बसे कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। विशेष रूप से 10 हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का न होना ग्रामीणों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। इन गांवों में रहने वाले लोग न सिर्फ जंगली हाथियों के खतरे के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं, बल्कि सड़क के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी आवश्यक जरूरतों तक पहुंच भी कठिन हो गई है। अब ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर सीधे राज्य के वित्त मंत्री से सड़क निर्माण की मांग की है।

हाथी प्रभावित क्षेत्र और रायगढ़ की स्थिति

रायगढ़ जिले के कई वनांचल क्षेत्र ऐसे हैं जहां पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। धरमजयगढ़, घरघोड़ा, लैलूंगा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में 10 हाथियों के झुंड अक्सर देखे जाते हैं। इन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। फसलों को नुकसान, घरों को तोड़ना और कभी-कभी जान-माल की हानि जैसी घटनाओं ने ग्रामीणों के जीवन को और कठिन बना दिया है।

इन परिस्थितियों में सड़क का न होना समस्या को और गंभीर बना देता है। आपात स्थिति में न तो एंबुलेंस समय पर पहुंच पाती है और न ही वन विभाग या प्रशासन की टीमें जल्दी गांव तक पहुंच पाती हैं।Kelo Pravah+1

सड़क नहीं, तो विकास नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव आज भी कच्चे रास्तों के भरोसे हैं। बारिश के मौसम में ये रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। कई गांव ऐसे हैं जहां मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 5 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।

सड़क न होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चे रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करते हैं, जिससे कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं बीमार बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

रायगढ़ जिले का लैलूंगा ब्लाक आदिवासी अंचल होनें के साथ-साथ पहाड़ों से घिरा इलाका है, यहां का अधिकांश गांव 10 हाथी प्रभावित है और यहां सड़क नही होनें की वजह से इस क्षेत्र के लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

10 हाथियों के खतरे के बीच सफर

 10 हाथी प्रभावित गांवों में रात के समय बाहर निकलना अपने आप में जोखिम भरा होता है। ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे रास्तों से गुजरते समय हाथियों के अचानक सामने आ जाने का डर हमेशा बना रहता है। यदि पक्की सड़क होती, तो वाहन के माध्यम से आवागमन अपेक्षाकृत सुरक्षित और तेज होता।

रायगढ़ जिले का लैलूंगा ब्लाक आदिवासी अंचल होनें के साथ-साथ पहाड़ों से घिरा इलाका है, यहां का अधिकांश गांव हाथी प्रभावित है और यहां सड़क नही होनें की वजह से इस क्षेत्र के लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को लेकर भाजपा मण्डल अध्यक्ष मनोज सतपथी ने प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी को पत्र लिख कर सड़क निर्मा  कराये जाने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार भाजपा मण्डल अध्यक्ष मनोज सतपथी ने बताया कि लैलूंगा विकासखण्ड के कई ग्राम पंचायत ऐसे है जहां वर्तमान स्थिति सड़क नही होनें की वजह से लोगों के लिये आवागमन करने कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा रहा है। साथ ही सुदुर वनांचल लैलूंगा के अधिकांश गांव हाथी प्रभावित है। जिससे यहां डामरीकरण सड़क होना अति आवश्यक है।

मनोज सतपथी ने प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मिलकर लैलूंगा क्षेत्र के लमडांड से कोड़ामाई उषाकोठी, ओडिसा तक, सारसमाल मुख्य मार्ग से भेड़ीमुडा ब होते हुए बनेकेला मुख्य मार्ग तक, चिंगारी से दियागढ़ तक प्रधानमंत्री सड़क, ग्राम पोटेबिरनी स्कूल से बोरोडीही होते हुए कोयलारडीह तक सड़क निर्माण, के अलावा रायगढ़ मुख्य मार्ग से टिपाझरन होते हुए ग्राम बरडीह तक सड़क निर्माण कराये जाने की मांग की है।

ग्रामीण यह भी बताते हैं कि कई बार 10 हाथी रास्तों को पूरी तरह नुकसान पहुंचा देते हैं, जिससे पहले से खराब रास्ते और भी दुर्गम हो जाते हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

सड़क के अभाव में ग्रामीण अपनी उपज को बाजार तक समय पर नहीं पहुंचा पाते। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई किसान और लघु वन उत्पाद संग्रहकर्ता केवल इसलिए बेहतर दाम नहीं पा पाते क्योंकि परिवहन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सामाजिक दृष्टि से भी गांव पिछड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंच पाता, क्योंकि अधिकारी और कर्मचारी इन दुर्गम गांवों तक जाने से कतराते हैं। इससे विकास की गति और धीमी हो जाती है।

ग्रामीणों की आवाज: वित्त मंत्री से उम्मीद

इन समस्याओं से परेशान ग्रामीणों ने अब अपनी मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। गांव के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर राज्य के वित्त मंत्री से हाथी प्रभावित गांवों तक पक्की सड़क निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क बनती है, तो न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि आपदा और आपातकालीन स्थितियों में भी राहत मिलेगी।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सड़क निर्माण से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बेहतर होंगे और पलायन की समस्या भी कम होगी।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और जीवन रक्षा का सवाल है। प्रशासन द्वारा सर्वे कराकर इन गांवों को प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग की जा रही है।

वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के बीच समन्वय की भी आवश्यकता बताई जा रही है, ताकि सड़क निर्माण के दौरान वन्यजीवों और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।

पर्यावरण और विकास में संतुलन

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही कार्य किया जाना चाहिए। यदि वैज्ञानिक तरीके से सड़क बनाई जाए, तो हाथियों के प्राकृतिक गलियारों को नुकसान पहुंचाए बिना भी ग्रामीणों को सुविधा दी जा सकती है।

इसके लिए अंडरपास, साइन बोर्ड और निगरानी व्यवस्था जैसी व्यवस्थाएं भी सड़क परियोजना का हिस्सा होनी चाहिए।

सरकार से अपेक्षाएं

ग्रामीणों को उम्मीद है कि राज्य सरकार और वित्त मंत्री उनकी मांग को गंभीरता से लेंगे। बजट में हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान कर सड़क निर्माण को मंजूरी दी जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके।

सरकार द्वारा यदि समयबद्ध तरीके से सड़क निर्माण कराया जाता है, तो यह इन गांवों के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।

रायगढ़ के 10 हाथी प्रभावित गांवों में सड़क का अभाव केवल सुविधा की कमी नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानवीय समस्या है।10 जंगली हाथियों के खतरे, दुर्गम रास्ते और विकास से कटे गांवों की तस्वीर आज भी कई सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों की वित्त मंत्री से की गई सड़क निर्माण की मांग उनकी मजबूरी और उम्मीद दोनों को दर्शाती है।

अब यह सरकार और प्रशासन पर निर्भर करता है कि वह इन दूरदराज के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कितनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाती है। यदि समय रहते सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए गए, तो यह न सिर्फ ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि रायगढ़ जिले के समग्र विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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