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रायगढ़ की 1 महिला किसान गायत्री पैकरा को मिला फसल विविधीकरण चैम्पियन अवॉर्ड

रायगढ़ की 1 महिला किसान गायत्री पैकरा को मिला “फसल विविधीकरण चैम्पियन” अवॉर्ड  बहुफसली खेती का प्रेरणादायक मॉडल

रायगढ़ की मिट्टी हमेशा से मेहनतकश किसानों और कृषि नवाचारों की पहचान रही है। इसी धरती से निकली एक महिला किसान गायत्री पैकरा ने पूरे राज्य में उदाहरण पेश किया है। उनकी मेहनत, सोच और प्रयोगों ने उन्हें “फसल विविधीकरण चैम्पियन” जैसे सम्मान से नवाज़ा है। यह केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि आधुनिक खेती सिर्फ रासायनिक खाद या महंगे उपकरणों पर निर्भर नहीं है — बल्कि सोच, समझ और सतत कृषि मॉडल पर आधारित है।

आज, जब परंपरागत खेती कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है — मौसम के उतार-चढ़ाव, बारिश की अनियमितता, इनपुट लागत में बढ़ोतरी और बाजार की अनिश्चितता — ऐसे समय में गायत्री पैकरा का बहुफसली (multi-cropping) मॉडल किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।


गायत्री पैकरा — एक साधारण किसान से नवाचार की मिसाल तक

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ी गायत्री पैकरा शुरुआती दिनों से ही खेती-किसानी से जुड़ी रहीं। लेकिन उन्होंने कभी भी खेती को केवल जीविका का साधन नहीं माना, बल्कि अपने खेत को एक सजीव प्रयोगशाला की तरह विकसित किया।

जहां आसपास के किसान धान, गेहूँ या कोसरी जैसी सीमित फसलों पर निर्भर थे, वहीं गायत्री ने धीरे-धीरे खेती में विविधता लाने की ठान ली। उनका मानना था कि—

“यदि खेत में फसलों की विविधता होगी, तो जोखिम कम होगा और आय कई गुना बढ़ेगी।”


उनका बहुफसली मॉडल इतना खास क्यों है?

गायत्री पैकरा ने खेती की पूरी व्यवस्था को नए ढंग से तैयार किया। उन्होंने अलग-अलग मौसम, मिट्टी की स्थितियों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए फसलें चुनीं।

उनके मॉडल में शामिल हैं—

इस मॉडल से एक ही जमीन पर कई प्रकार की फसलें एक साथ उगती हैं। इससे:

  1. आय में स्थिरता

  2. मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि

  3. कीट व बीमारियों का कम प्रभाव

  4. खर्च में भारी कमी

  5. बाजार में तुरंत बिकने वाली फसलों से नियमित आय

यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी बड़ा आकर्षण बना हुआ है। Lalluram


फसल विविधीकरण का आर्थिक प्रभाव

गायत्री पैकरा ने जिस तरह अपने खेत को बहुआयामी बनाया, उसने उनकी आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। पहले जहां परिवार की आय का बड़ा हिस्सा केवल धान और गेहूं पर निर्भर था, अब साल भर अलग-अलग स्रोतों से पैसा आया करता है।

फसल विविधीकरण से उन्हें इन क्षेत्रों से लाभ मिला—

आज उनकी आय पहले से लगभग दोगुनी हो चुकी है। और यह वृद्धि पूरी तरह प्राकृतिक खेती आधारित कृषि मॉडल से हुई है, जिसमें लागत बेहद कम है।


छोटे किसानों के लिए एक व्यवहारिक मॉडल

अक्सर लोग सोचते हैं कि फसल विविधीकरण केवल बड़े किसानों द्वारा अपनाया जा सकता है। लेकिन गायत्री पैकरा ने इस मिथक को तोड़ दिया है। उन्होंने सिर्फ 2–3 एकड़ भूमि पर ऐसा मॉडल विकसित किया जो आज कई किसानों के लिए प्रेरणा है।

वे अपने गांव और आस-पास के किसानों को प्रशिक्षण भी देती हैं। उनके मॉडल की खासियत है कि:

उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाओं ने भी विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।


महिला किसान के रूप में उनकी चुनौतियाँ

गायत्री की यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। एक ग्रामीण महिला के रूप में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा—

लेकिन उन्होंने लगातार सीखते हुए अपने मॉडल को इतना मजबूत बनाया कि आज कई कृषि विशेषज्ञ भी उनके काम को सराहते हैं। विभिन्न सरकारी अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक उनके खेत का निरीक्षण करते हैं और छात्रों को भी वहां प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।


पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान

गायत्री पैकरा का मॉडल सिर्फ आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के ज़रिये पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।

उनकी प्रमुख पर्यावरणीय पहलें हैं—

आज उनके खेत में तितलियाँ, कीट-भक्षी कीड़े और पक्षियों की कई प्रजातियाँ दिखाई देती हैं। यह सतत कृषि का जीवंत उदाहरण है।


“फसल विविधीकरण चैम्पियन” अवॉर्ड — उनके प्रयासों का सम्मान

कुछ ही वर्षों में गायत्री पैकरा का मॉडल इतना लोकप्रिय हो गया कि जिला और राज्य स्तर पर उनकी चर्चा होने लगी। उनके काम की गहराई, नवाचार और सतत प्रभाव को देखते हुए उन्हें “फसल विविधीकरण चैम्पियन अवॉर्ड” प्रदान किया गया।

यह सम्मान उनके लिए बेहद गर्व का क्षण था, क्योंकि यह पुरस्कार सिर्फ एक किसान के नाम नहीं, बल्कि गांव और महिला सशक्तिकरण दोनों की जीत को दर्शाता है।

पुरस्कार समारोह में उन्होंने कहा—

“किसान अगर सीखने को तैयार हो जाए, तो खेती आज भी सबसे अच्छी आजीविका है। बस हमें फसलों में विविधता लानी होगी और मिट्टी को जिंदा रखना होगा।”


उनकी सफलता का क्षेत्र पर प्रभाव

गायत्री पैकरा की उपलब्धियों का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उनके काम से प्रभावित होकर—

रायगढ़ जिला प्रशासन भी अब उनके मॉडल को अन्य ब्लॉकों में प्रचारित कर रहा है।


सीखने योग्य बातें — गायत्री का संदेश

गायत्री पैकरा का मॉडल हर किसान के लिए प्रेरणा है। उनसे मिलने वाली मुख्य शिक्षाएँ हैं—


 गायत्री पैकरा की कहानी हर किसान की कहानी बन सकती है

रायगढ़ की महिला किसान गायत्री पैकरा ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नवाचार का रास्ता हमेशा खुला है। उनके बहुफसली मॉडल ने कृषि में जोखिम कम किया, आय बढ़ाई, पर्यावरण को संरक्षित किया और सामाजिक परिवर्तन की राह खोली।

उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि—

“जब बदलाव की इच्छा हो और मेहनत निरंतर हो, तो एक छोटा किसान भी राज्य भर में मिसाल बन सकता है।”

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