GST रेड फिल कोल के मालिक प्रवीण झा ने सरेंडर किए ₹11 करोड़ — पूरी जानकारी
छत्तीसगढ़ में हाल ही में जीएसटी (GST) विभाग द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई ने कोयला उद्योग में हलचल मचा दी है। इस कार्रवाई में कई कोयला कंपनियों के कार्यालयों और गोदामों पर छापेमारी की गई, जिसमें प्रमुख रूप से फिल कोल (Feel Coal) के मालिक प्रवीण झा और अन्य संचालकों को टारगेट किया गया। इस कार्रवाई के तहत प्रवीण झा ने ₹11 करोड़ की टैक्स राशि सरेंडर की, जो कि इस केस को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
रायगढ़ में कोल डिपो फिल कोल बेनीफिकेशन और महावीर कोल वॉशरी पर स्टेट जीएसटी की छापेमार कार्रवाई पूरी हो गई। लंबे समय बाद जीएसटी ने कोयला कारोबारियों पर हाथ डाला है। फिल कोल ने 11 करोड़ की अवैध कमाई सरेंडर की है। वाणिज्यिक कर विभाग की इस कार्रवाई का नेतृत्व सचिव मुकेश बंसल कर रहे थे। उनके निर्देशन में जीएसटी टीमों ने करीब दर्जन भर ठिकानों पर कार्रवाई की।
बिलासपुर के फिल कोल, महावीर कोल वॉशरी और पारस पावर एंड कोल के करीब 11 ठिकानों में छापेमारी की गई। रायगढ़ में फिल कोल बेनीफिकेशन नवापारा टेंडा और महावीर कोल वॉशरी भेंगारी के फैक्ट्री और दफ्तर में छापा मारा गया है। शुक्रवार को स्टेट जीएसटी की टीमें दोनों फर्मों के रायगढ़ स्थित ठिकानों पर पहुंची।शनिवार को भी कार्रवाई जारी रही। मिली जानकारी के मुताबिक फिल कोल के मालिक प्रवीण झा, प्रदीप झा और दिव्यांश झा ने 11 करोड़ की कमाई सरेंडर की है। वहीं महावीर कोल वॉशरीज प्रालि ने दस करोड़ सरेंडर किए हैं।
अधिकारियों ने ऑफिस, घर, प्लांट और वॉशरी में दस्तावेज खंगाले। फिल ग्रुप ने कोयले का रिजेक्ट मटेरियल भी बड़े पैमाने पर खरीदा। इसका उपयोग कहां किया गया पता नहीं। जितना कोयला एक नंबर में डिपो पहुंचा, उससे अधिक बिक्री की गई। सवाल उठता है कि जितना कोयला नहीं था, उससे ज्यादा मात्रा का विक्रय कैसे किया गया। संभव है कि कोयले में छाई, डस्ट, रिजेक्ट आदि को मिलाकर बेचा गया हो।
लाइसेंस निरस्त नहीं किया
फिल कोल बेनीफिकेशन तो कोयले की ट्रेडिंग करता है। फर्म को रायगढ़ में दोबारा अनुमति देने के लिए तत्कालीन खनिज अधिकारी ने लॉबिंग की। अवैध कोयला पकड़े जाने के बावजूद लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया बल्कि पहले से अधिक मात्रा में भंडारण की अनुमति दी गई। जीएसटी रेड से यह बात साबित हो गई कि ये फर्म मिलावटी कोयला सप्लाई कर रही हैं जिससे अवैध कमाई हो रही है। मिलावटी कोयले से प्लांट को नुकसान होता है। प्रदूषण भी बढ़ता है।
GST रेड क्या होती है?
GST रेड एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें GST विभाग किसी कंपनी या व्यापारिक संगठन के कर उल्लंघन, फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग, या अवैध वित्तीय लेनदेन की जांच करता है।
छापेमारी के दौरान विभाग:
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कंपनी के कार्यालय, गोदाम और पंजीकृत ठिकानों पर दस्तावेज़ों की जांच करता है।
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बैंक खातों और लेनदेन की समीक्षा करता है।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट और बिक्री रिकॉर्ड की तुलना करता है।
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यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जुर्माना, टैक्स वसूली और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुई GST रेड ने यह साबित किया कि विभाग अब कोयला कारोबार में टैक्स चोरी और नियम उल्लंघन पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
बिलासपुर और रायगढ़ में रेड की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायगढ़ क्षेत्र में कोयला व्यापार काफी बड़ा है। इस क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियां नियमों का उल्लंघन करके टैक्स में छूट या लाभ पाने की कोशिश करती रही हैं।
हाल ही में GST विभाग ने 11 ठिकानों पर रेड की। प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:
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फिल कोल (Feel Coal) – मालिक प्रवीण झा और अन्य।
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महावीर कोल वॉशरी (Mahavir Coal Washery)।
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पारस कोल एंड बेनेफिकेशन (Paras Coal & Beneficiation)।
इन सभी कंपनियों के दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद विभाग ने ₹27.5 करोड़ की राशि वसूल की। इसमें से फिल कोल ने ₹11 करोड़ सरेंडर किए।
फिल कोल का मामला
फिल कोल कोयला व्यापार में एक प्रमुख नाम है। कंपनी का कारोबार कई वर्षों से चल रहा है और यह राज्य में कई पावर प्लांट्स को कोयला सप्लाई करती है।
हालांकि, विभाग की जांच में यह सामने आया कि:
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कंपनी ने वास्तविक मात्रा से अधिक कोयले की बिक्री दिखा दी।
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मिक्सिंग या मिलावटी कोयला बेचा गया।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग किया गया।
इन अनियमितताओं के आधार पर GST विभाग ने प्रवीण झा और अन्य संचालकों को टैक्स राशि जमा करने के लिए कहा। दबाव के चलते कंपनी ने ₹11 करोड़ सरेंडर कर दिए।
जांच के कारण और अनियमितताएं
GST रेड के दौरान विभाग ने कई तरह की अनियमितताओं की पहचान की:
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फर्जी बिलिंग:
कंपनी ने वास्तविक बिक्री से अधिक बिलिंग दिखाकर कर चोरी की कोशिश की। -
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग:
कई बार व्यापारियों द्वारा ITC का गलत इस्तेमाल कर कर देय राशि कम दिखाई जाती है। -
कोयले की मिलावट:
डस्ट और रिजेक्ट कोयले को मिलाकर बेचा गया, जिससे प्लांटों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। -
लेनदेन रिकॉर्ड में गड़बड़ी:
कुछ बिक्री या खरीदी के रिकॉर्ड में पारदर्शिता नहीं रखी गई।
इन सभी अनियमितताओं के चलते GST विभाग ने सख्त कार्रवाई की।
सरेंडर राशि का महत्व
₹11 करोड़ की राशि सरेंडर करना केवल वित्तीय वसूली नहीं है, बल्कि यह कंपनी के लिए एक चेतावनी भी है। इससे यह संदेश गया कि सरकार किसी भी कंपनी को टैक्स चोरी करने नहीं देगी।
साथ ही, यह अन्य कोयला व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए भी उदाहरण है कि नियमों का पालन करना अनिवार्य है।Dainik Jagran English+1
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
GST रेड के दौरान विभाग:
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दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच करता है।
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कंपनियों के GST पंजीकरण और लाइसेंस की वैधता की पुष्टि करता है।
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यदि नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया जाता है, तो जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
फिल कोल का मामला फिलहाल सरेंडर राशि जमा करने तक सीमित है। लेकिन विभाग की आगे की जांच में अधिक जुर्माना या पेनल्टी की संभावना बनी हुई है।
कोयला उद्योग पर प्रभाव
यह GST रेड कोयला उद्योग के लिए एक चेतावनी और जागरूकता संदेश है। इससे व्यापारियों में यह संदेश गया कि:
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नियमों का पालन अनिवार्य है।
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टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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विभाग लगातार निगरानी रख रहा है।
भविष्य में संभावित कदम
GST विभाग अब भी जांच कर रहा है। आने वाले समय में संभावित कदम हो सकते हैं:
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कंपनियों के GST पंजीकरण की समीक्षा और रद्दीकरण।
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अधिक जुर्माना और पेनल्टी।
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कानूनी कार्रवाई और व्यापारिक संचालन पर प्रतिबंध।
इससे यह भी स्पष्ट होगा कि केवल सरेंडर राशि जमा करना ही पर्याप्त नहीं है; नियमों का पालन करना और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है।
फिल कोल के मालिक प्रवीण झा ने ₹11 करोड़ सरेंडर कर GST विभाग की सख्ती और कार्रवाई को स्वीकार किया है। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि:
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कोयला उद्योग में नियमों का पालन अब अनिवार्य है।
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टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग पर विभाग सख्त है।
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अन्य कंपनियों के लिए यह एक चेतावनी और उदाहरण है।
GST रेड केवल एक वित्तीय कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापारिक पारदर्शिता और कानून का पालन सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
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