कलेक्टर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ धान केंद्रों में मची खलबली! केंद्रों में 7 बड़ी गड़बड़ियां उजागर

तौल में पकड़ाया बड़ा खेल, एक केंद्र प्रबंधक को थमाया नोटिस… जानें पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का मौसम आते ही प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो जाती है। किसानों की मेहनत का सही मूल्य सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में धान उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा औचक निरीक्षण किए जाते हैं। हाल ही में रायगढ़ जिले में कलेक्टर द्वारा की गई एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने पूरे तंत्र में खलबली मचा दी। तौल प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद एक धान उपार्जन केंद्र प्रबंधक को नोटिस थमाया गया, जबकि अन्य केंद्रों को भी सख्त चेतावनी दी गई।
यह कार्रवाई केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि किसानों के हक से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आइए जानते हैं पूरे मामले की पृष्ठभूमि, कार्रवाई का तरीका, सामने आई गड़बड़ियां, प्रशासन के निर्देश और इसके दूरगामी प्रभाव—पूरी जानकारी विस्तार से।
धान खरीदी व्यवस्था: किसानों की आजीविका की रीढ़

छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है। यहां लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए धान पर निर्भर हैं। राज्य सरकार हर वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके। यह प्रक्रिया धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से संचालित होती है।
समर्थन मूल्य पर धान व्यवस्था व्यवस्था को पूरी तरह से संतुलित, स्टालों और किसान हितैषी बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने कहा कि सख्ती करने का निर्देश दिया गया है। बालोद के तहत बेल्जियम के डॉक्टर मैथ्यू मिश्रा ने आज डौंडीलोहरा एवं डौंडी विकासखंड के विभिन्न धान समूह के सहयोगियों का अध्ययन कर गहनता के आधार पर निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने डौंडीलोहारा विकासखंड के गंजी तथा डौंडी विकासखंड के चिखलाकसा, कोटागांव, भर्रीटोला एवं घोटिया धान समूह में उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक्स का सूक्ष्म संबंध स्थापित किया। उन्होंने अब तक कुल धान की मात्रा, ग्रामवार औसत निर्माण, रकबा के दान की स्थिति और पंजाबी संधारण के विस्तार की समीक्षा की है।
निर्धारित मात्रा से अधिक धान मिलने पर की गई कड़ी कार्यवाही
डौण्डी विकासखण्ड स्थित धान खरीदी केन्द्र चिखलाकसा के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मौके पर धान बोरों की तौल कराई। तौलाई के दौरान चार अलग-अलग बोरों में धान की मात्रा निर्धारित मानक 40 किलो 680 ग्राम से अधिक, लगभग 41 किलोग्राम पाई गई। इस गंभीर अनियमितता पर कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए समिति प्रबंधक एवं कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा समिति प्रबंधक श्री भगवान सिंह ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन कतई स्वीकार्य नहीं होगा।
रकबा समर्पण और सत्यापन पर विशेष जोर
धान खरीदी केन्द्र गैंजी के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने रकबा समर्पण की स्थिति की जानकारी लेते हुए एक टोकन वाले किसानों के साथ-साथ 02 एकड़ से अधिक एवं 10 एकड़ से अधिक रकबा रखने वाले किसानों की संख्या की भी समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने धान विक्रय हेतु पहुँचे किसान श्री दीपक यामले से चर्चा कर उन्हें धान बिक्री के पश्चात शेष रकबे का अनिवार्य रूप से समर्पण करने की समझाइश दी।
किसान द्वारा घर में शेष लगभग 130 क्विंटल धान रखे होने की जानकारी पर कलेक्टर ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम को किसान के घर भेजकर भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए।
इन केंद्रों पर:
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किसान अपनी उपज लाते हैं
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तौल की जाती है
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गुणवत्ता की जांच होती है
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रसीद दी जाती है
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भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है
यदि इस श्रृंखला में कहीं भी गड़बड़ी हो, तो उसका सीधा नुकसान किसान को होता है।
कलेक्टर की सर्जिकल स्ट्राइक: अचानक निरीक्षण से हड़कंप

रायगढ़ जिले में किसानों से लगातार मिल रही शिकायतों और प्रशासनिक इनपुट्स के आधार पर कलेक्टर ने अचानक औचक निरीक्षण का फैसला लिया। इस निरीक्षण को प्रशासनिक भाषा में “सर्जिकल स्ट्राइक” कहा जा रहा है क्योंकि यह अप्रत्याशित, तेज और निर्णायक कार्रवाई थी।
निरीक्षण के दौरान:
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धान तौल मशीनों की जांच की गई
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रजिस्टर और डिजिटल एंट्री का मिलान हुआ
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किसानों से सीधे बातचीत की गई
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मौके पर मौजूद कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया
इसी दौरान एक उपार्जन केंद्र पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। Amar Ujala
तौल में पकड़ाया बड़ा खेल: क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?
निरीक्षण के दौरान जो सबसे गंभीर मामला सामने आया, वह था धान की तौल में हेराफेरी। जांच में पाया गया कि:
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तौल मशीन की सेटिंग में गड़बड़ी
मशीन में तकनीकी छेड़छाड़ कर तौल कम दिखाई जा रही थी, जिससे किसानों को वास्तविक वजन से कम भुगतान हो रहा था। -
मैनुअल और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर
कागजी रजिस्टर में दर्ज वजन और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए गए वजन में अंतर पाया गया। -
मानक प्रक्रिया का उल्लंघन
तौल के समय किसानों को मौके पर मौजूद नहीं रहने दिया जा रहा था, जो नियमों के विरुद्ध है। -
पूर्व शिकायतों की अनदेखी
किसानों द्वारा पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन केंद्र प्रबंधन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
इन सभी बिंदुओं ने प्रशासन को यह स्पष्ट संकेत दिया कि मामला साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का है।
केंद्र प्रबंधक को नोटिस: जवाब देना होगा
जैसे ही अनियमितताएं सामने आईं, कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से उपार्जन केंद्र प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि:
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तौल में गड़बड़ी क्यों पाई गई
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नियमों का उल्लंघन किस आधार पर किया गया
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किसानों की शिकायतों को क्यों नजरअंदाज किया गया
प्रबंधक को निर्धारित समय-सीमा में जवाब देने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में:
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निलंबन
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सेवा से हटाने
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आर्थिक दंड
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कानूनी कार्रवाई
जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
अन्य केंद्रों को चेतावनी: अब नहीं चलेगा खेल
यह कार्रवाई केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं रही। कलेक्टर ने जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों को स्पष्ट संदेश दिया कि:
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सभी तौल मशीनें नियमित रूप से कैलिब्रेट की जाएं
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किसानों की मौजूदगी में ही तौल हो
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डिजिटल और मैनुअल रिकॉर्ड में पूर्ण सामंजस्य रखा जाए
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किसी भी शिकायत को तुरंत दर्ज कर समाधान किया जाए
साथ ही, अगले कुछ दिनों में और भी औचक निरीक्षण किए जाने की चेतावनी दी गई।
किसानों की प्रतिक्रिया: प्रशासन पर बढ़ा भरोसा
इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद किसानों में संतोष और राहत का माहौल देखने को मिला। कई किसानों ने कहा कि:
“पहली बार लगा कि हमारी बात सुनी जा रही है। तौल में गड़बड़ी से हमें हमेशा नुकसान होता था।”
कुछ किसानों ने यह भी मांग की कि:
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हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं
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तौल की रसीद तुरंत मोबाइल पर भेजी जाए
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शिकायत के लिए अलग से हेल्पलाइन हो
प्रशासनिक दृष्टिकोण: पारदर्शिता सर्वोपरि
जिला प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
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हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए
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तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो
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दोषी पाए जाने पर उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए
यह कदम छत्तीसगढ़ शासन की उस नीति के अनुरूप है, जिसमें किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
धान खरीदी में पारदर्शिता क्यों जरूरी?
धान खरीदी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी है। यदि इसमें गड़बड़ी होती है तो:
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किसान का भरोसा टूटता है
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ग्रामीण आय प्रभावित होती है
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सरकारी योजनाओं की साख पर सवाल उठते हैं
इसलिए ऐसे समय पर कलेक्टर की यह कार्रवाई मील का पत्थर मानी जा रही है।
आगे की राह: क्या बदल सकता है?
इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उम्मीद की जा रही है कि:
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तौल प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी
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कर्मचारियों में जवाबदेही बढ़ेगी
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किसानों की शिकायतों में कमी आएगी
यदि प्रशासन इसी तरह सक्रिय रहा, तो धान खरीदी व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव है।
किसानों के हक की जीत
कुल मिलाकर, रायगढ़ में कलेक्टर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने यह साफ कर दिया है कि धान उपार्जन केंद्रों पर किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तौल में पकड़ाया बड़ा खेल और केंद्र प्रबंधक को थमाया गया नोटिस न केवल दोषियों के लिए चेतावनी है, बल्कि ईमानदार व्यवस्था की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।
यह कार्रवाई किसानों के लिए न्याय और भरोसे की जीत है—और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश कि कागजों पर नहीं, जमीन पर सुधार चाहिए।

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