तोमन कुमार की ओलंपिक की ओर बढ़ती यात्रा संघर्ष से स्वर्ण तक की प्रेरणा

जब जीवन हमें झटके देता है, तब कुछ लोग टूट जाते हैं—कुछ लोग उभर कर आते हैं। तोमन कुमार की कहानी ऐसे ही लोगों में से है। एक CRPF कांस्टेबल से para-archer विश्व चैम्पियन बनने का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाता है कि इंसान की इच्छाशक्ति और दृढ़ता कितनी बड़ी हो सकती है। इस ब्लॉग में हम उनकी ज़िंदगी, संघर्ष, उपलब्धियों और भविष्य की राह पर नज़र डालेंगे।
प्रारंभिक जीवन और CRPF में शामिल होना

तोमन कुमार मूलतः छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखते हैं और वे बिंदास स्वभाव और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं। सुरक्षा क्षेत्र में सेवा करने का जुनून उन्हें CRPF में ले आया। उन्होंने सुरक्षा के क्षेत्र में चुनौतियाँ स्वीकार कीं और देश की सेवा करते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।
CRPF में सेवा करते हुए ही उन्होंने यह सिखा कि जीवन में अनुशासन और समर्पण कितने महत्वपूर्ण हैं। ये गुण आगे उनके Para Archery की यात्रा में भी सहायक सिद्ध हुए।
वही घटना जिसने सब बदल दिया
2022 में, तोमन कुमार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में तैनात थे। इसी दौरान एक IED विस्फोट हुआ जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गए। इस हमले में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया। cgcurrentaffairs.com+3Deccan Herald+3PTI News+3
यह घटना उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ थी — लेकिन यह अंत नहीं, एक शुरुआत थी। उस समय, बहुत मुश्किल थी—शारीरिक कमी, मानसिक संतुलन खोने का डर — लेकिन तोमन ने हार नहीं मानी।
पुनरुत्थान: Para Archery से जुड़ाव
विस्फोट के बाद, जीवन में एक नई दिशा की तलाश शुरू हुई। उन्होंने para sports, विशेषकर para archery की ओर रुख किया। उन्होंने NCDE (National Centre for Divyang Empowerment) तेलंगाना में प्रशिक्षण लिया।
उनका प्रशिक्षण अपेक्षाकृत नया था — उन्होंने 2023 के अंत में ही इसे गंभीरता से लेना शुरू किया। लेकिन उनकी मेहनत, लगन और धैर्य ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया।
कठिन मुकाबले और विश्व मंच पर सफलता
2025 में Para Archery World Championships, Gwangju (South Korea) में अपने पदार्पण पर ही उन्होंने पुरुष compound open individual में स्वर्ण पदक जीता।
यह जीत उनके लिए और छत्तीसगढ़ और भारत के लिए बहुत बड़ी थी — क्योंकि उन्होंने disability को अवसर में बदल दिया।
रोचक भाग यह है कि फाइनल में उनकी भेंट fellow Indian प्रतियोगी Rakesh Kumar से हुई, लेकिन Rakesh को तकनीकी समस्या के कारण वापस लेना पड़ा, जिससे तोमन स्वर्ण विजेता बन गए।
इसके अलावा, उन्होंने mixed team में भी भाग लिया और ब्रॉन्ज पदक प्राप्त किया, जहां उनकी टीम में Sheetal Devi थीं।
भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 5 पदक जीते, जिसमें 2 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य शामिल था — यह भारत के para archery के इतिहास में एक श्रेष्ठतम परिणाम था।
संघर्ष, मानसिक मजबूती और प्रेरणा
तोमन की सफलता सिर्फ शारीरिक कौशल की नहीं रही, बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी कहानी है। चोट और विकलांगता के बाद खुद को फिर से स्वीकारना, निराशा और शारीरिक सीमाएँ पार करना — ये आसान नहीं होता। उन्होंने मेहनत, आंतरिक आत्मबल और उद्देश्य के साथ आगे बढ़े।
उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ मेंtribal क्षेत्रों में छिपी प्रतिभा को मौका मिले — उन्हें यह विश्वास है कि अगर अवसर और संसाधन मिलें, तो युवा खेलों में कुछ बड़ा कर सकते हैं।
वे कहते हैं:
“मेरा सपना है 2028 ओलिंपिक में क्वालीफाई करना … पहले एशियाई खेलों में पदक लाना होगा।”
ओलिंपिक की ओर लक्ष्य 2028 तक का सफर
उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजेलिस ओलिंपिक है। हालांकि अभी तक Paralympic खेलों में हिस्सा लिया जाएँगे, लेकिन उन्होंने “ओलिंपिक की ओर बढ़ती यात्रा” कहकर उनका यह प्रयास संकेत दिया कि वे उच्चतम स्तर पर प्रदर्शन चाहते हैं।
वे 2026 एशियाई खेलों को एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं। यदि वहाँ पदक मिले, तो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाइंग संभव हो सकने के अवसर बनेंगे।
उनका कहना है कि अभी दो चरण (qualification steps) बाकी हैं।
छत्तीसगढ़ की गर्व: राज्य एवं समाज में असर
तोमन की उपलब्धियाँ न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि राज्य स्तर पर भी गर्व की बात हैं। छत्तीसगढ़ सरकार और जनता ने उन्हें अपने प्रेरक नायक के रूप में देखा है।
उनकी सफलता से यह संदेश गया है कि adversity ही नहीं, अवसर बन सकती है। युवाओं में खेल के प्रति आशा और जुनून बढ़ा है।
सरकारों और खेल विभागों को भी यह सिखाती है कि संसाधन और समर्थन मिलें तो खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
चुनौतियाँ और आगे की राह
अन्य लाभों के बावजूद, तोमन को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना होगा:
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अनुकरणीय प्रदर्शन करना — विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
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शारीरिक देखभाल और फिटनेस — विकलांगता की स्थिति के कारण अधिक देखभाल और उपचार जरूरी है।
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संयम बनाए रखना — निरंतर प्रशिक्षण, मानसिक तनाव और असफलता से डटकर खड़े रहने की जरूरत है।
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संसाधन और समर्थन — बेहतर उपकरण, कोचिंग, वित्तीय सहायता और सुविधाएँ.
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क्वालीफाइंग बाधाएँ — ओलिंपिक या बड़े खेलों में क्वालीफाइंग मानदंड बहुत उच्च हैं।
अगर ये सब तय हो जाएँ, तोमन के लिए भविष्य सुनहरा हो सकता है।
तोमन कुमार की यात्रा हमें यह सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियाँ भी अवसर बन सकती हैं — यदि दृष्टिकोण, साहस और समर्पण हों। एक CRPF कांस्टेबल से लेकर para archery विश्व चैम्पियन बनने तक, यह सफर प्रेरणा का प्रतीक है।
उनकी कहानी न सिर्फ छत्तीसगढ़ या भारत के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो विपरीत परिस्थितियों से लड़ रहा है। उन्होंने दिखाया है कि सीमाएँ होती हैं — लेकिन जीतने का जज़्बा अगर सच्चा हो, तो कोई force नहीं रोक सकती।
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