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तंत्र‑मंत्र में 3 मर्डर लालच और अंधविश्वास में ढाई करोड़ के लिए हुई तीन जिंदगियों की हत्या

तंत्र‑मंत्र में 3 मर्डर लालच, अंधविश्वास और खूनी अनुष्ठान की भयावह कहानी

भारतीय समाज में विज्ञान, तकनीक और आधुनिक शिक्षा के बढ़ते प्रभाव के बावजूद अंधविश्वास आज भी कई लोगों की सोच और निर्णयों को नियंत्रित करता है। जब अंधविश्वास में लालच और भय जुड़ जाते हैं, तब उसका परिणाम केवल व्यक्तिगत नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के लिए भी एक भयानक चेतावनी बन जाता है। तंत्र‑मंत्र के नाम पर किया गया यह ट्रिपल मर्डर उसी कड़वी सच्चाई का उदाहरण है, जहां कुछ लोगों ने कुछ ही महीनों में करोड़पति बनने के सपने में तीन जिंदगियां खत्म कर दीं।

यह कहानी है उस खूनी अनुष्ठान की, जिसमें पांच लाख रुपये को ढाई करोड़ बनाने का झांसा दिया गया, मुंह में नींबू दबाया गया, जमीन पर रहस्यमय घेरा बनाया गया, गले में नारियल बांधा गया और अंत में रस्सी से गला कसकर तीनों की जान ले ली गई। सब कुछ एक कथित तांत्रिक के इशारे पर किया गया, जिसने कहा था –
“रस्सी जितनी जोर से खींचोगे, उतना ही रुपया बरसेगा।”

पुलिस के रडार पर 5 संदिग्ध
एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में सिविल लाइन और उरगा थाना टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने मुख्य आरोपी राजेंद्र बैगा सहित बिलासपुर से आए उसके चार सहयोगियों और तांत्रिक को फार्महाउस तक पहुंचाने वाले एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है।
पुलिस अब मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक सैंपल, डिजिटल लोकेशन और ज़हर के ट्रेस की गहन जांच कर रही है।

डॉग स्क्वॉड और एफएसएल टीम ने मौके से अहम सैंपल एकत्र किए हैं। पुलिस इसे मनी डबलिंग फ्रॉड के साथ-साथ अंधविश्वास आधारित हत्या के तौर पर देख रही है, हालांकि अशरफ मेमन के पुराने कारोबारी विवाद को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। यह कहानी पैसे के लालच और अंधविश्वास के खतरनाक गठजोड़ का एक भयावह उदाहरण है, जिसने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। पुलिस मामले की तह तक जाने में जुटी हुई है।


अंधविश्वास की जड़ें और लालच का जाल

भारत के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी तंत्र‑मंत्र, झाड़‑फूंक और बलि जैसी मान्यताओं पर गहरा विश्वास है। आर्थिक तंगी, अशिक्षा और सामाजिक असुरक्षा के कारण लोग जल्दी ऐसे झूठे वादों में फंस जाते हैं, जो उन्हें रातों‑रात अमीर बनने का सपना दिखाते हैं।

इस मामले में भी कुछ लोगों को बताया गया कि अगर वे एक विशेष तांत्रिक अनुष्ठान करेंगे, तो उनका पैसा कई गुना होकर वापस आएगा। शुरुआत में उन्हें पांच लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया। तांत्रिक ने दावा किया कि इस रकम से एक ऐसा अनुष्ठान होगा, जिससे देवी‑देवताओं की कृपा प्राप्त होगी और कुछ ही दिनों में यह राशि ढाई करोड़ में बदल जाएगी।

लालच ने उनकी सोच को धुंधला कर दिया। उन्होंने यह नहीं सोचा कि क्या सच में ऐसा संभव है, न ही किसी समझदार व्यक्ति से सलाह ली। यही अंधविश्वास आगे चलकर एक खौफनाक अपराध में बदल गया।

तांत्रिक अनुष्ठान की तैयारी

बताया जाता है कि तांत्रिक ने अनुष्ठान के लिए कुछ अजीब और डरावने नियम तय किए। उसने कहा कि यह पूजा सामान्य नहीं है और इसमें खास प्रतीकों का इस्तेमाल होगा।

अनुष्ठान के दौरान जिन चीजों का प्रयोग किया गया, उनमें शामिल थे:

तांत्रिक ने समझाया कि यह घेरा बुरी शक्तियों को रोकता है और अनुष्ठान करने वालों को देवी की शक्ति से जोड़ता है। उसने चेतावनी दी कि यदि किसी ने नियम तोड़ा, तो धन नहीं मिलेगा और अनिष्ट हो सकता है।


खूनी अनुष्ठान की शुरुआत

अनुष्ठान के दिन माहौल रहस्यमय और भयावह था। तांत्रिक ने मंत्र पढ़ने शुरू किए और उपस्थित लोगों को निर्देश देने लगा। तीन लोगों को अनुष्ठान के केंद्र में बैठाया गया। उनके मुंह में नींबू रखे गए, गले में नारियल बांधे गए और जमीन पर बने घेरे के भीतर बैठाया गया।

तांत्रिक ने कहा कि यह सब बलि का प्रतीक है और इससे धन की वर्षा होगी। धीरे‑धीरे माहौल और डरावना होता गया। मंत्रों की आवाज़, धुएं की गंध और तांत्रिक की ऊंची आवाज़ ने वहां मौजूद लोगों को मानसिक रूप से जकड़ लिया।

फिर आया वह पल, जिसने इस पूरे अनुष्ठान को हत्या में बदल दिया।

“रस्सी जितनी जोर से खींचो, उतना बरसेगा रुपया”

तांत्रिक ने अचानक रस्सी उठाने का निर्देश दिया। उसने कहा कि यह रस्सी धन को खींचने का माध्यम है। जैसे‑जैसे रस्सी खींची जाएगी, वैसे‑वैसे देवी प्रसन्न होंगी और धन बरसेगा।

अंधविश्वास में डूबे लोगों ने तांत्रिक की बातों पर आंख बंद कर भरोसा किया। उन्होंने रस्सी खींचनी शुरू की। शुरुआत में हल्का दबाव था, लेकिन तांत्रिक बार‑बार चिल्लाकर कहता रहा –
“और जोर लगाओ… देवी तभी खुश होंगी।”

धीरे‑धीरे रस्सी कसती गई। तीनों लोग तड़पने लगे, लेकिन इसे अनुष्ठान का हिस्सा समझकर किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की। कुछ ही देर में तीनों की सांसें थम गईं।

जो लोग वहां मौजूद थे, उन्हें तब एहसास हुआ कि यह कोई तांत्रिक क्रिया नहीं, बल्कि निर्मम हत्या थी।


तीन जिंदगियों का अंत

इस अंधविश्वास और लालच ने तीन परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। जिन लोगों को ढाई करोड़ का सपना दिखाया गया था, उन्होंने अपने ही हाथों से तीन लोगों की जान ले ली।

तीनों की मौत दम घुटने से हुई। नींबू और रस्सी ने उनकी सांस रोक दी थी। नारियल और घेरे जैसी चीजें केवल एक मनोवैज्ञानिक भ्रम थीं, जिनका इस्तेमाल तांत्रिक ने लोगों को डराने और नियंत्रित करने के लिए किया।


अपराध के बाद की स्थिति

हत्या के बाद वहां अफरा‑तफरी मच गई। कुछ लोग डर के मारे भाग खड़े हुए, तो कुछ ने इसे छुपाने की कोशिश की। लेकिन सच ज्यादा देर तक छुप नहीं सका। जब घटना की जानकारी बाहर आई, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि पैसे के लालच में इस तरह का अपराध किया जा सकता है। गांव और आसपास के इलाकों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया।


पुलिस जांच और खुलासे

जैसे ही मामले की जानकारी पुलिस को मिली, जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित हत्या है।

पुलिस ने जब आरोपियों से पूछताछ की, तो तांत्रिक अनुष्ठान की पूरी कहानी सामने आई। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि तांत्रिक पहले भी लोगों को इसी तरह के झांसे देता रहा था।

पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया और तांत्रिक के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी खुद भी अंधविश्वास में फंसे हुए थे और तांत्रिक की हर बात को सच मान बैठे थे।

अंधविश्वास कैसे बनता है अपराध की वजह

यह घटना दिखाती है कि अंधविश्वास केवल व्यक्तिगत सोच का मामला नहीं है, बल्कि यह सामूहिक अपराध का कारण भी बन सकता है। जब लोग तर्क और विज्ञान को छोड़कर किसी के भी दावे पर आंख बंद कर भरोसा कर लेते हैं, तब वे खुद भी अपराधी बन जाते हैं।

तांत्रिकों और ढोंगी बाबाओं की सबसे बड़ी ताकत होती है लोगों का डर और लालच। वे बीमारी, गरीबी और असफलता का डर दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।


समाज की जिम्मेदारी

इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर समाज में अंधविश्वास क्यों जिंदा है। इसके पीछे कई कारण हैं:

जब तक इन मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराती रहेंगी।


कानून और सख्त कार्रवाई की जरूरत

तंत्र‑मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर होने वाले अपराधों के खिलाफ सख्त कानून और प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है। केवल आरोपियों को सजा देना ही काफी नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी उतना ही जरूरी है।

लोगों को यह समझाना होगा कि कोई भी तांत्रिक अनुष्ठान उन्हें रातों‑रात अमीर नहीं बना सकता। मेहनत, शिक्षा और सही दिशा में किया गया प्रयास ही जीवन में सफलता का रास्ता है।


भविष्य में संभावित खतरे

यदि समय रहते अंधविश्वास के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे और भी भयावह मामले सामने आ सकते हैं। आर्थिक संकट और बेरोजगारी के दौर में लोग जल्दी झूठे वादों में फंस जाते हैं।Amar Ujala

इसलिए जरूरी है कि:


एक कड़वी सीख

यह ट्रिपल मर्डर केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सीख है। यह बताता है कि अंधविश्वास और लालच मिलकर इंसान को कितना अंधा बना सकते हैं।

पांच लाख को ढाई करोड़ बनाने का सपना देखने वालों ने यह नहीं सोचा कि वे किस रास्ते पर जा रहे हैं। अंत में न पैसा मिला, न सुख, बल्कि तीन जिंदगियां चली गईं और कई परिवार बर्बाद हो गए।

तंत्र‑मंत्र के नाम पर हुआ यह ट्रिपल मर्डर समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या हम आज भी अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल पाए हैं? क्या लालच हमें इंसानियत से नीचे गिरा सकता है?

इस घटना से यही संदेश मिलता है कि विज्ञान, तर्क और कानून ही समाज को सुरक्षित रख सकते हैं। जब तक हम अंधविश्वास को चुनौती नहीं देंगे, तब तक ऐसे खूनी अनुष्ठान हमारी सामाजिक संरचना को खोखला करते रहेंगे।

यह जरूरी है कि हर व्यक्ति जागरूक बने, सवाल पूछे और किसी भी चमत्कारी दावे पर आंख बंद कर भरोसा न करे। तभी ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता है।

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