जिले के निर्माण और विकास कार्यों की गुणवत्ता-समयसीमा की समीक्षा विकास की रफ्तार पर प्रशासन की पैनी नज़र

रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में से एक है। यहाँ सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और ग्रामीण जल-आपूर्ति जैसी योजनाओं पर निरंतर काम चल रहा है।
लेकिन सरकार के लिए सिर्फ काम शुरू करना ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और समयसीमा के भीतर पूरा होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी उद्देश्य से हाल ही में जिला कलेक्टर ने सभी विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें निर्माण की प्रगति, उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता, बजट और कार्य-समाप्ति की समयसीमा पर विस्तृत चर्चा की गई।

यह समीक्षा इसलिए भी अहम है क्योंकि कई परियोजनाएँ समय से पीछे चल रही थीं या उनमें गुणवत्ता संबंधी शिकायतें मिल रही थीं।
जिले के निर्माण/विकास कार्यों की गुणवत्ता-समयसीमा की समीक्षा। kelopravah.news+1
समीक्षा बैठक का उद्देश्य

कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक का मुख्य उद्देश्य था —
“सभी विकास और निर्माण कार्यों को निर्धारित मानक एवं तय समयसीमा के भीतर पूरा कराना, ताकि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके।”
बैठक में PWD, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा विभाग, और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
मुख्य बिंदु थे
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चल रहे निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन।
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उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जाँच रिपोर्ट।
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विलंबित परियोजनाओं के कारणों का विश्लेषण।
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समयसीमा में सुधार और नई डेडलाइन तय करना।
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भविष्य की कार्यप्रणाली के लिए दिशा-निर्देश जारी करना।
जिले में प्रमुख विकास परियोजनाएँ
रायगढ़ जिले में वर्तमान में निम्नलिखित प्रमुख निर्माण और विकास योजनाएँ जारी हैं:
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मुख्य मार्गों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण (NH-49)
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ग्रामीण पेयजल योजना (जल जीवन मिशन)
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सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण एवं स्मार्ट क्लासरूम निर्माण
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार
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आवास योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास निर्माण
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खेल मैदानों और सामुदायिक भवनों का निर्माण
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शहर में जलनिकासी और सीवरेज लाइन सुधार कार्य
इनमें से कई कार्य अपनी अंतिम चरण में हैं, जबकि कुछ में निर्माण एजेंसियों को समय बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई है।
गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि —
“किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक निर्माण स्थल की नियमित जाँच होनी चाहिए।”
इसके लिए जिले में तीन-स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लागू की गई है:
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पहला स्तर: विभागीय इंजीनियर द्वारा दैनिक निरीक्षण।
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दूसरा स्तर: ज़िला गुणवत्ता नियंत्रण टीम द्वारा साप्ताहिक समीक्षा।
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तीसरा स्तर: राज्य स्तरीय दल द्वारा औचक निरीक्षण।
प्रत्येक निर्माण एजेंसी को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे उपयोग की गई सामग्री की लैब-टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि निर्माण की मजबूती और दीर्घकालिक टिकाऊपन सुनिश्चित किया जा सके।
समयसीमा पालन के लिए सख्त निर्देश
कई परियोजनाएँ बारिश और तकनीकी कारणों से देर से चल रही थीं। प्रशासन ने इन एजेंसियों को नया शेड्यूल सौंपते हुए निर्देश दिया है कि
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कार्य समय पर पूरा न होने पर पेनल्टी लगाई जाएगी।
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“हर प्रोजेक्ट की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट” अनिवार्य की गई है।
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धीमी गति वाले प्रोजेक्ट्स पर “कंट्रोल रूम मॉनिटरिंग सिस्टम” लागू किया गया है।
कलेक्टर ने कहा —
“विकास कार्य केवल कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए। समयसीमा का पालन विकास की असली कसौटी है।”
जनसहभागिता और पारदर्शिता
प्रशासन ने इस बार जनता को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। हर ब्लॉक और पंचायत में एक “निगरानी समिति” बनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधि, जनपद सदस्य और ग्रामीण नागरिक शामिल रहेंगे।
ये समितियाँ
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निर्माण कार्य की प्रगति पर नज़र रखेंगी।
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किसी भी अनियमितता की सूचना सीधे जिला प्रशासन को देंगी।
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फोटो और वीडियो सबूत के रूप में भेज सकेंगी।
इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ठेकेदारों पर भी जवाबदेही तय होगी।
विभागवार स्थिति का संक्षेप
(1) लोक निर्माण विभाग (PWD):
रायगढ़ शहर के मुख्य सड़कों और पुलों का 70% कार्य पूरा हो चुका है। शेष हिस्सों को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य।
(2) जल जीवन मिशन
ग्रामीण क्षेत्रों में 1500 से अधिक घरों में नल-जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। गुणवत्ता जांच के लिए 20 जल प्रयोगशालाएँ सक्रिय हैं।
(3) शिक्षा विभाग
50 स्कूलों में भवन सुधार कार्य प्रगति पर है। कुछ स्कूलों में स्मार्ट क्लास और पुस्तकालय निर्माण कार्य जारी है।
(4) स्वास्थ्य विभाग
धरमजयगढ़ और बरमकेला ब्लॉक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार हो रहा है। मातृ एवं शिशु वार्ड के निर्माण की गति बढ़ाई गई है।
(5) ग्रामीण विकास विभाग
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3000 से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। दिसंबर तक 100% लक्ष्य हासिल करने की योजना है।
निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग
प्रशासन ने “Raigarh Project Monitoring App” लॉन्च करने की तैयारी की है।
इस ऐप के माध्यम से:
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अधिकारी निर्माण की तस्वीरें और लोकेशन अपलोड करेंगे।
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आम नागरिक भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
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हर प्रोजेक्ट का रियल-टाइम स्टेटस देखा जा सकेगा।
यह कदम तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में अहम है और अन्य जिलों के लिए उदाहरण बन सकता है।
मीडिया और सोशल रिपोर्टिंग
कलेक्टर ने स्थानीय मीडिया को भी इस प्रक्रिया में भागीदार बनाया है।
पत्रकारों को परियोजनाओं का वास्तविक चित्रण प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया ताकि जनता को सच्ची जानकारी मिले।
इसके अलावा, प्रशासन ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी कार्य की गलत जानकारी फैलाने पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सही और रचनात्मक सुझावों का स्वागत रहेगा।
ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी अधिकारी या ठेकेदार निर्माण कार्य में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा —
“सरकारी धन जनता की संपत्ति है। इसका दुरुपयोग अपराध है और इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।”
अब हर प्रोजेक्ट साइट पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें लागत, ठेकेदार का नाम, अवधि और संपर्क नंबर अंकित रहेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों ने इस समीक्षा को सकारात्मक कदम बताया।
रायगढ़ निवासी अरविंद ठाकुर ने कहा —
“पहले निर्माण कार्य में देरी और गुणवत्ता की शिकायत आम थी, लेकिन अब प्रशासन की निगरानी से तेजी आई है।”
वहीं सोनाली साहू, जो स्थानीय शिक्षिका हैं, बोलीं —
“यदि हर विभाग में ऐसी समीक्षा नियमित होती रहे, तो विकास कार्यों का लाभ वास्तव में जनता तक पहुँचेगा।”
अपेक्षित परिणाम
इस समीक्षा से यह उम्मीद बढ़ी है कि
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सभी परियोजनाएँ तय समयसीमा में पूरी होंगी।
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कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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जनता का विश्वास प्रशासन में और मजबूत होगा।
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भविष्य में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
रायगढ़ प्रशासन की यह पहल सिर्फ एक औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि विकास की दिशा में जवाबदेही और पारदर्शिता का सशक्त उदाहरण है।
यदि सभी विभाग तय निर्देशों का पालन करते हैं, तो आने वाले महीनों में जिले का बुनियादी ढाँचा और जनसुविधाएँ एक नए स्तर पर पहुँच सकती हैं।
जिले की विकास यात्रा तभी सफल मानी जाएगी जब हर गाँव, हर मोहल्ला और हर नागरिक उसके लाभ को महसूस कर सके।
“गुणवत्ता और समयसीमा” — यही दो शब्द आज के प्रशासनिक दृष्टिकोण की असली पहचान बन चुके हैं।
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