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खरसिया खाद घोटाला 2025 1 बोरी खरीदी, 34 बोरी का मैसेज – संतोष ट्रेडर्स पर फर्जीवाड़े का आरोप

खरसिया में खाद घोटाला 2025 डीलर का फर्जीवाड़ा एक बोरी खरीदी, 34 बोरी का मैसेज आया – सिस्टम से खेल, किसान परेशान

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन है। इसी जीवन-रेखा पर उस वक्त गहरी चोट पड़ती है, जब खाद वितरण जैसे संवेदनशील तंत्र में फर्जीवाड़ा सामने आता है। खरसिया क्षेत्र से सामने आया ताज़ा मामला न केवल एक किसान की जेब पर वार है, बल्कि सरकारी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) आधारित खाद वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। आरोप है कि एक खाद डीलर ने अवैध रूप से 34 बोरी खाद बेच दी, एंट्री दूसरे किसान के खाते में कर दी, और पीड़ित किसान के मोबाइल पर एक बोरी यूरिया खरीदने के बाद 34 बोरी का मैसेज आ गया।


घटना का सार (एक नज़र में)


पूरा मामला कैसे सामने आया?

पीड़ित किसान ने बताया कि वह एक बोरी यूरिया खरीदने दुकान पर गया था। भुगतान और अंगूठा/OTP सत्यापन के बाद उसे लगा कि प्रक्रिया पूरी हो गई है। लेकिन कुछ ही देर में उसके मोबाइल पर जो SMS आया, उसने उसे हिला दिया—एक बोरी नहीं, बल्कि 34 बोरी यूरिया की खरीद दर्शाई गई थी।

किसान ने तुरंत दुकान से पूछताछ की। जवाब टाल-मटोल भरा रहा। बाद में पता चला कि वास्तविक एंट्री किसी दूसरे किसान के खाते में कर दी गई, जबकि SMS और लिमिट कटौती पीड़ित के मोबाइल/आधार-लिंक्ड खाते में दिखाई दे रही थी। यही वह बिंदु है जहाँ सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका गहराती है।

खाद की अफरा-तफरी रायगढ़ जिले में सामान्य बात है। इसकी वजह कृषि विभाग है जो थोक डीलरों को मनमानी करने की छूट देता है। खरसिया में थोक डीलर संतोष ट्रेडर्स ने अवैध रूप से खाद दूसरे को बेची, लेकिन एंट्री एक दूसरे किसान के नाम पर कर दी। एक बोरी यूरिया खरीदने के बाद 34 बोरी उर्वरक क्रय का मैसेज आया तो मामला खुला। केंद्र सरकार उर्वरकों पर सब्सिडी देती है। इसलिए खाद को बिना आधार कार्ड और बिना पीओएस मशीन में एंट्री के नहीं बेचा जा सकता।

थोक डीलर हो चाहे खुदरा व्यापारी, सभी को उर्वरक विक्रय के समय पीओएस में एंट्री करनी अनिवार्य है। वासतविक किसान तक ही खाद पहुंचे, इसके लिए बायोमीट्रिक को अनिवार्य किया गया है, लेकिन खरसिया में खाद थोक डीलर संतोष ट्रेडर्स में गड़बड़ी सामने आई है।खरसिया के मौहापाली निवासी किसान भरत पटेल ने संतोष ट्रेडर्स में जाकर आधार बेस्ड बायोमीट्रिक प्रक्रिया से एक बोरी नीम कोटेड यूरिया खरीदी, लेकिन उनके मोबाइल पर आए मैसेज से वह हैरान रह गए।

मैसेज में भरत पटेल के नाम पर 20 बोरी नीम कोटेड यूरिया तथा 14 बोरी पोटाश की खरीदी किए जाने की सूचना दी गई। 34 बोरी खाद का मूल्य 26,810 रुपए बताया गया और इसके बदले सरकार ने किसान के नाम पर 33,993.60 रुपए की सब्सिडी दी है। सवाल यह है कि किसान ने इतना उर्वरक नहीं खरीदा तो किसने खरीदा। सरकार सब्सिडी की राशि काटकर किसानों को खाद आपूर्ति करती है। खाद कंपनियां खरसिया रैक प्वाइंट पर खाद भेजती हैं, जहां से पूरे जिले के थोक डीलरों और डबल लॉक सेंटरों तक परिवहन किया जाता है।

ज्यादा कीमत पर बेचने का खेल

खाद का खेल बहुत गजब है। उदाहरण के लिए संतोष ट्रेडर्स को 100 बोरी यूरिया मिला जिसे किसानों को बेचा जाना था। खाद की सब्सिडी राशि काटने के बाद कीमत किसानों को चुकानी होती है। 100 बोरी में से केवल 50 बोरी ही किसानों को मिली और बाकी 50 बोरी डीलर ने ग्रामीण क्षेत्रों के दूसरे खुदरा विक्रेताओं को ज्यादा कीमत पर बेच दी। फिर उन्होंने किसानों को दोगुनी कीमत पर खाद बेचा। सब्सिडी किसी विक्रेता के खाते में नहीं जाती, केवल खाद निर्माता कंपनियों को दी जाती है।


DBT आधारित खाद वितरण प्रणाली: कहाँ चूक हुई?

सरकार ने खाद में कालाबाज़ारी रोकने के लिए DBT लागू किया है। इसमें:

  1. किसान की पहचान (आधार/मोबाइल)

  2. पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन पर एंट्री

  3. SMS/रसीद जनरेशन

  4. किसान की वार्षिक/मौसमी सीमा का अपडेट

इस केस में आशंका है कि:


किसान पर असर: केवल आर्थिक नहीं, मानसिक चोट


वीडियो बयान: क्या कहते हैं पीड़ित?

पीड़ित किसान के वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि वह कैमरे पर SMS दिखाकर कह रहा है—“मैंने एक बोरी ली, पर 34 बोरी का मैसेज आया।”
वीडियो में उसकी आवाज़ का कंपकंपाना, चेहरे की चिंता और सवाल—“अब मेरी लिमिट कौन लौटाएगा?”—इस पूरे मामले की गंभीरता बताने के लिए काफी है।


नियमों के मुताबिक क्या है अपराध?

खाद नियंत्रण आदेश और DBT दिशानिर्देशों के तहत:


प्रशासनिक जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई

इस पूरे मामले में कृषि विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका निर्णायक है। कृषि विभाग को चाहिए कि वह समयबद्ध कार्रवाई करे।


सिस्टम सुधार: आगे ऐसी घटना न हो, कैसे?

  1. डबल-वेरिफिकेशन SMS: किसान की पुष्टि के बाद ही स्टॉक आउट

  2. रियल-टाइम अलर्ट: असामान्य मात्रा पर स्वतः अलार्म

  3. वीडियो/सीसीटीवी लॉग: PoS के साथ लिंक

  4. किसान डैशबोर्ड: अपनी खरीद हिस्ट्री तुरंत देखें

  5. हेल्पलाइन: शिकायत पर 48 घंटे में समाधान


किसानों के लिए जरूरी सावधानियाँ


सामाजिक असर: भरोसे की खेती

खाद वितरण में एक भी फर्जीवाड़ा पूरे गांव के भरोसे को हिला देता है। किसान समय पर खाद न मिलने से उत्पादन घटता, लागत बढ़ती और अंततः उपभोक्ता तक असर पहुँचता है। इसलिए यह मामला केवल एक दुकान या एक किसान तक सीमित नहीं—यह सिस्टम की परीक्षा है।

खरसिया का यह मामला चेतावनी है कि तकनीक तभी सफल है, जब ईमानदारी और निगरानी साथ हों। पीड़ित किसान को न्याय, लिमिट बहाली और दोषियों पर सख्त कार्रवाई—यही न्यूनतम अपेक्षा है। साथ ही, प्रशासन को ऐसे फर्जीवाड़ों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए त्वरित सुधार लागू करने होंगे, ताकि किसान निश्चिंत होकर खेती कर सके।

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