छत्तीसगढ़ का ‘खजुराहो’ अब विश्वस्तरीय: 146 करोड़ की भव्य भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर, अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण, स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है। इसे अक्सर छत्तीसगढ़ का ‘खजुराहो’ कहा जाता है। प्राचीन काल में नागवंशीय शासकों द्वारा निर्मित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपने नक्काशीदार शिल्पकला और आकर्षक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
अब इस ऐतिहासिक स्थल को आधुनिक और विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल में बदलने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना की शुरुआत की गई है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली है और स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का भी एक बड़ा कदम है।
भोरमदेव का ऐतिहासिक महत्व
भोरमदेव मंदिर लगभग 7वीं से 12वीं सदी के बीच का निर्माण माना जाता है। यह मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और इसकी नक्काशी और मूर्तिकला मध्यकालीन भारतीय कला की गहरी समझ प्रस्तुत करती है।
मंदिर परिसर में भगवान शिव की प्रमुख मूर्ति और अन्य देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी है। यहाँ की शिल्पकला और मूर्तिकला की तुलना अक्सर मध्य प्रदेश के खजुराहो से की जाती है, इसलिए इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहा जाता है।
भोरमदेव सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि स्थापत्य कला और इतिहास के अध्ययन के लिए भी आते हैं।Amar Ujala
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत कबीरधाम जिले के भोरमदेव कॉरिडोर का 01 जनवरी को भूमिपूजन करेंगे। इस कॉरिडोर के लिए केन्द्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रूपए की स्वीकृति मिली है। इसके अंतर्गत ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र भोरमदेव मंदिर परिसर एवं आसपास के स्थलों के समग्र विकास किया जाएगा।
भोरमदेव मंदिर परिसर में आयोजित किए जा रहे भूमिपूजन समारोह में उप मुख्यमंत्री अरूण साव और विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, पर्यटन एवं संस्कृतिमंत्री राजेश अग्रवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, लोकसभा संसद संतोष पाण्डेय विधायक श्रीमती भावना बोहरा, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा सहित अनेक पूर्व विधायक, आयोग निगम मंडल के अध्यक्ष और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप तैयार की गई यह परियोजना धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और पर्यटन विकास का त्रिवेणी संगम बनेगी। इसके पूरा होने से भोरमदेव क्षेत्र विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा, वहीं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। भोरमदेव कॉरिडोर में मुख्य मंदिर से लेकर मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा जलाशय तक फैले ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए उनका संरक्षण और विकास किया जाएगा।
इसके लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन, पुरातत्व विभाग एवं कबीरधाम जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार की है। भोरमदेव मंदिर परिसर का भव्य विकास के अंतर्गत मुख्य मंदिर में छह आकर्षक प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जिनमें नागद्वार प्रमुख होगा। परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक विशाल संग्रहालय का निर्माण, पिलर हॉल, गार्डन, चिल्ड्रन पार्क, प्रसाद मंडप, अनुष्ठान भवन, यज्ञ स्थल, और सीढ़ियों का निर्माण किया जाएगा।मंदिर परिसर के तालाब का सौंदर्यीकरण करने के साथ-साथ यहां म्यूजिकल फाउंटेन भी बनाया जाएगा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए ठहरने हेतु डोम, छायायुक्त मार्ग, स्टेज और भंडारा भवन का निर्माण प्रस्तावित है।
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसके तहत निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
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मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का संपूर्ण सौंदर्यीकरण और संरचना विकास।
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पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं और आरामदायक अनुभव की व्यवस्था।
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धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना।
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स्थानीय रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद, भोरमदेव न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
भूमिपूजन और परियोजना की शुरुआत
1 जनवरी 2026 को भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना का भूमिपूजन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
भूमिपूजन समारोह छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में एक नया अध्याय था, जिसमें सरकार ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
परियोजना की लागत और वित्तीय पहलू
भोरमदेव कॉरिडोर की अनुमानित लागत 146 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से दी जा रही है।
परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थल का विकास नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक और सामाजिक अवसरों का सृजन भी करेगा। इससे स्थानीय रोजगार में वृद्धि, पर्यटन से जुड़े व्यवसायों का विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
परियोजना के प्रमुख घटक
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना सिर्फ एक सड़क निर्माण या पार्किंग स्थल तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक और सुव्यवस्थित पर्यटन अनुभव प्रदान करने वाली परियोजना है। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
1. प्रवेश द्वार और सुंदर मार्ग
मंदिर परिसर में कई बड़े और आकर्षक प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इन द्वारों के माध्यम से पर्यटक और श्रद्धालु आराम से परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
2. संग्रहालय और शैक्षणिक केंद्र
भोरमदेव और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों से संबंधित वस्तुओं को प्रदर्शित करने के लिए एक आधुनिक संग्रहालय का निर्माण होगा। यह संग्रहालय न केवल पर्यटकों के लिए ज्ञान का स्रोत होगा, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन केंद्र के रूप में भी काम करेगा।
3. पार्क और विश्राम स्थल
पर्यटक आराम और आनंद के लिए सुंदर हरे-भरे पार्कों और बैठने की व्यवस्था का आनंद ले सकेंगे। पेड़ों से छाया, बैंचें और पैदल पथ पर्यटकों के अनुभव को और बढ़ाएंगे।
4. जल और तालाब परियोजनाएँ
मंदिर परिसर के तालाब और जलाशयों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसमें पानी के आसपास के क्षेत्र का लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था और पैदल पथ शामिल हैं।
5. आधारभूत सुविधाएँ
पर्यटकों की सुविधा के लिए पेयजल, शौचालय, ड्रेनेज, और आराम स्थल जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
6. खानपान और मनोरंजन क्षेत्र
पर्यटकों के लिए कैफेटेरिया, फूड कोर्ट और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा बोटिंग और पानी आधारित खेल जैसी गतिविधियाँ भी शामिल होंगी।
परियोजना का डिजाइन और शैली
भोरमदेव कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समान डिजाइन में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर को सुंदर, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है।
इस प्रकार के कॉरिडोर से न केवल धार्मिक यात्रा सुगम होती है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश और आधुनिक सुविधाएँ भी विकसित होती हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
1. रोजगार सृजन
कॉरिडोर परियोजना के तहत स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, पर्यटन गाइड, स्टॉल संचालक और छोटे व्यवसायों के लिए नई संभावनाएँ खुलेंगी।
2. क्षेत्रीय आर्थिक विकास
पर्यटन में वृद्धि से आसपास के गांव और कस्बे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे। स्थानीय कारीगर, किसान और व्यवसायी भी इस विकास से लाभान्वित होंगे।
3. सांस्कृतिक पहचान
यह परियोजना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को स्थापित करेगी और स्थानीय समुदाय में गर्व और आत्मविश्वास बढ़ाएगी।
भोरमदेव कॉरिडोर और पर्यटकों के लिए अवसर
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शैक्षणिक और ऐतिहासिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। यहाँ पर्यटक और शोधकर्ता:
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मंदिर और शिल्पकला का अध्ययन कर सकेंगे।
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वार्षिक उत्सवों और धार्मिक मेलों का अनुभव कर सकेंगे।
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स्थानीय कला और संस्कृति के प्रदर्शन का आनंद ले सकेंगे।
इस परियोजना के माध्यम से भोरमदेव मंदिर को न केवल धार्मिक स्थल बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन हब बनाया जाएगा।
भोरमदेव कॉरिडोर का भविष्य
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगी। इसके पूरा होने पर यह स्थल:
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राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बन जाएगा।
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स्थानीय रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देगा।
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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करेगा।
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना छत्तीसगढ़ के लिए एक स्वर्णिम अवसर है, जो राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रस्तुत करेगी।
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना सिर्फ एक पर्यटन स्थल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
भोरमदेव अब सिर्फ एक ऐतिहासिक मंदिर नहीं रहेगा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ का विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनेगा, जहाँ इतिहास, आस्था और आधुनिकता का संगम देखने को मिलेगा।
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