कानन पेंडारी जू ने खोया 1 और अनमोल सदस्य बाघिन रागिनी का निधन

वन्यजीव केवल जंगलों में रहने वाले जीव नहीं हैं। वे हमारी पारिस्थितिकी तंत्र की धुरी हैं और उनके संरक्षण से न केवल प्राकृतिक संतुलन बना रहता है बल्कि हमें प्रकृति के महत्व का भी एहसास होता है। जब कोई महान जीव हमें छोड़कर जाता है, तो केवल एक जानवर नहीं जाता, बल्कि उसके साथ जुड़ी सारी कहानियाँ, संरक्षण के प्रयास और हमारे साथ उसके संबंध भी यादों में रहते हैं। ऐसी ही कहानी थी कानन पेंडारी जू की बाघिन रागिनी की, जिसने अब अपने जीवन का अंतिम अध्याय पूरा कर लिया।
कानन पेंडारी जू, बिलासपुर के पास स्थित, छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख चिड़ियाघर और वन्यजीव अभयारण्य है। यह केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि वन्यजीव संरक्षण, शिक्षा और शोध का भी केंद्र है। यहाँ विभिन्न जीव जैसे बाघ, शेर, भालू, हिरण, पक्षी और अन्य छोटे वन्य जीव प्राकृतिक वातावरण के करीब अनुभव के साथ रखे जाते हैं।
बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क (Kanan Pendari Zoological Garden) की 22 साल की बाधिन रागिनी ने दम तोड़ दिया है. रागिनी वर्ष 2018 में रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी से एक्सचेंज के तहत कानन पेंडारी लाई गई थी. रागिनी को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से रेस्क्यू किया गया था. वह उम्रदराज हो चुकी थी और पिछले सात वर्षों से पार्क के अस्पताल परिसर के केज में रखी गई थी.
जू प्रशासन के अनुसार, जब रागिनी को 11 अगस्त 2018 को नंदन वन जंगल सफारी, रायपुर से कानन पेंडारी लाया गया था, तब जांच में सामने आया कि उसके के-नाइन दांत नहीं थे. (कानन पेंडारी जू की बाघिन रागिनी की हुई मौत)इसी कारण वह कच्चा मटन नहीं खा पाती थी, और उसे रोजाना 5 से 6 किलो बारीक कीमा बनाकर दिया जाता था. पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी और विशेष देखभाल के चलते रागिनी सात साल तक जीवित रही.
वह ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी से भी पीड़ित थी, जिसमें हड्डियों की संरचना प्रभावित हो जाती है. मृत्यु के बाद जिला स्तर की पशु चिकित्सक समिति ने पोस्टमार्टम किया. इस दौरान जू प्रशासन और नेचर क्लब बिलासपुर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.गौरतलब है कि काजीरंगा क्षेत्र में रागिनी और उसके तीन साथी बाघों ने लंबे समय तक आतंक फैला रखा था. रेस्क्यू के बाद तीन बाघों को गुवाहाटी जू भेजा गया, जबकि रागिनी को छत्तीसगढ़ लाया गया था. उसके साथ लाए गए बाघ शिवा की वर्तमान उम्र करीब 15 वर्ष बताई जा रही है. इस तरह कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क ने एक उम्रदराज और दुर्लभ बाधिन को खो दिया है.
बाघिन रागिनी: एक अनमोल जीवन
रागिनी कानन पेंडारी जू की एक प्रतिष्ठित बाघिन थी। उसकी उम्र लगभग 22 वर्ष थी, जो बाघों के लिए बहुत अधिक है। बाघों की औसत जीवन अवधि जंगल में लगभग 12-15 साल होती है, जबकि पिंजरे में संरक्षित बाघ कुछ अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। रागिनी का जीवन इसे प्रमाणित करता है कि निरंतर चिकित्सा, देखभाल और उचित पोषण से वन्यजीव की आयु बढ़ाई जा सकती है।
रागिनी को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से बचाया गया था और 2018 में कानन पेंडारी जू लाया गया। जू प्रशासन ने पाया कि उसके दांत में समस्या थी, जिससे वह सामान्य कच्चा मांस नहीं खा सकती थी। इसलिए उसे रोजाना विशेष रूप से तैयार किया गया कीमा दिया जाता था ताकि वह पर्याप्त पोषण प्राप्त कर सके।
रागिनी का जीवन केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं था। उसने वर्षों तक जू में रहकर वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों का हिस्सा बनने का कार्य किया। वह कई पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही और उसकी मौजूदगी ने जू की शोभा बढ़ाई।

रागिनी की अंतिम दिनचर्या और मृत्यु
दिसंबर 2025 में रागिनी ने अंतिम साँस ली। उसकी उम्र और पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए यह प्राकृतिक मृत्यु मानी गई। रागिनी के स्वास्थ्य में वर्षों से हड्डियों की कमजोरी और अन्य उम्र संबंधी समस्याएं थीं। जू प्रशासन और पशु चिकित्सक टीम ने उसकी अंतिम घड़ी में भी पूरी देखभाल सुनिश्चित की।
मृत्यु के तुरंत बाद जिला-स्तरीय पशु चिकित्सक समिति ने उसका पोस्ट-मार्टम किया। इसमें उसकी मौत के कारणों का विश्लेषण किया गया और स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियाँ संकलित की गई। रागिनी का अंतिम संस्कार वन विभाग और पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार सम्मानपूर्वक संपन्न हुआ।
रागिनी की चुनौतियाँ और देखभाल
रागिनी का स्वास्थ्य जीवन भर चुनौतीपूर्ण रहा। उसके दांतों की कमी और हड्डियों की समस्या ने उसके सामान्य जीवन को प्रभावित किया। इसे देखते हुए जू प्रशासन ने उसे विशेष भोजन, नियमित चिकित्सा और वातावरण में सुधार के जरिए स्वस्थ जीवन देने का प्रयास किया।
जू में रागिनी के लिए विशेष केज बनाए गए थे, जिसमें उसे आराम, सुरक्षा और पर्याप्त पोषण मिलता था। इसके अलावा पशु चिकित्सकों की टीम ने उसकी नियमित जांच, बीमारियों की रोकथाम और पोषण का ध्यान रखा। रागिनी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि वन्यजीवों की लंबी उम्र केवल संरक्षण के प्रयासों से ही संभव है।
जू में अन्य मौतों का सिलसिला
रागिनी की मौत से पहले कानन पेंडारी जू ने कुछ अन्य प्रतिष्ठित जानवरों को भी खोया था।
शेर भीम, जो किडनी की समस्या से जू में संघर्ष कर रहा था, मार्च 2025 में मृत्यु को प्राप्त हुआ। इसी तरह सफेद बाघ आकाश की अचानक दिल की समस्या के कारण अप्रैल 2025 में मृत्यु हुई।
इन घटनाओं ने यह प्रश्न उठाया कि क्या चिड़ियाघरों में पर्याप्त संसाधन, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ निगरानी मौजूद हैं। यह स्पष्ट करता है कि वन्यजीवों की देखभाल में निरंतर सुधार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक हैं।

वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा का महत्व
कानन पेंडारी जू केवल जानवरों को प्रदर्शित करने का स्थान नहीं है। यह बच्चों, छात्रों और पर्यटकों के लिए शिक्षा और जागरूकता का केंद्र है। यहाँ लोग जानवरों के व्यवहार, उनके जीवन और संरक्षण की आवश्यकताओं को समझ सकते हैं।
रागिनी की कहानी दर्शाती है कि वन्यजीवों के जीवन में कितने पहलू होते हैं। उनका जीवन केवल शिकार करने या जंगल में रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोज़मर्रा की चुनौतियों, चिकित्सा, पोषण और देखभाल का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। Lalluram
बाघिन रागिनी की मौत
बाघिन रागिनी की मौत सिर्फ़ एक जानवर की मृत्यु नहीं है। यह संरक्षण, संघर्ष और देखभाल के उन प्रयासों की याद है, जो उसे बचाने और लंबे जीवन प्रदान करने के लिए किए गए थे। लगभग 22 वर्ष की लंबी जीवन यात्रा ने यह साबित किया कि निरंतर संरक्षण और देखभाल वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक जीवनकाल तक जीवित रखने में सहायक होती है।
रागिनी हमें याद दिलाती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल शब्दों में नहीं बल्कि प्रयास, समर्पण और विज्ञान के माध्यम से साकार होता है। उसका जीवन और उसके द्वारा दी गई सीख हमें यह सिखाती है कि प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है।
रागिनी की याद और उसकी विरासत हमेशा कानन पेंडारी जू में जीवित रहेगी। उसके जीवन ने न केवल वन्यजीव संरक्षण के महत्व को प्रदर्शित किया बल्कि हमें यह भी सिखाया कि हर प्राणी का जीवन मूल्यवान है और उसका सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है।
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