Site icon City Times Raigarh

जंगली सूअर के शिकार में मौत का जाल करंट की चपेट में 2 लोगों की दर्दनाक मौत, वारदात छिपाने के लिए झाड़ियों में फेंकी गई लाशें

जंगली सूअर का शिकार बना मौत का कारण करंट की चपेट में आने से 2 लोगों की दर्दनाक मौत, वारदात छिपाने के लिए झाड़ियों में फेंकी गई लाशें

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा या अवैध शिकार की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन जब यही गतिविधियां इंसानी जान पर भारी पड़ जाएं, तो पूरा समाज झकझोर उठता है। जंगली सूअर के शिकार के इरादे से जंगल गए दो लोगों की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा जितना दर्दनाक था, उससे कहीं अधिक भयावह उसका बाद का पहलू रहा—साथियों ने सच्चाई सामने लाने के बजाय वारदात को छिपाने की कोशिश की और दोनों शवों को झाड़ियों में फेंक दिया।

चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के संबलपुरी नाला के पास झाडिय़ों में दो लोगों का शव मिलने से क्षेत्र में हडक़ंप मच गया। मामले की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतकों की शिनाख्त की, तब चार दिन से लापता छोटे रेगड़ा निवासी पुनीलाल यादव व संदीप उरांव के रूप में हुई। पूछताछ में यह बात सामने आई कि गांव के अन्य लोगों के साथ मृतक जंगली सूअर का शिकार करने जंगल में विद्युत प्रवाहित तार लगाये थे, जिसकी चपेट में आने से उनकी मौत हो गई थी।

उनकेे अन्य साथियों ने बात को छिपाने का प्रयास करते हुए शव को संबलपुरी नाले के पास लाकर झाडिय़ों में छिपा दिया था। इस मामले में पुलिस चार संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।मिली जानकारी के अनुसार चक्रधरनगर थानांतर्गत ग्राम छोटे रेगड़ा निवासी पुनीलाल यादव (उम्र 51 वर्ष ) व संदीप उरांव (उम्र 24 वर्ष) सोमवार की सुबह घर से निकले थे। दो दिनों तक उनके वापस नहीं लौटने पर चिंतित परिजनों ने काफी खोजबीन की परंतु उनका पता नहीं चल पाया इस पर उन्होंने चक्रधरनगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस के अलावा परिजन भी उनकी पतासाजी में जुटे थे। शनिवार की सुबह ग्रामीणों ने संबलपुरी नाला के पास बगीचा टिकरा की झाडिय़ों में दो लोगों के शव देखे तो पुलिस को इसकी सूचना दी। लाश मिलने की जानकारी होने पर चक्रधरनगर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंच कर शव की शिनाख्त के लिए पुछताछ शुरू की तथा छोटे रेगड़ा से लापता हुए दो लोगों के परिजनों को भी बुलवाया गया। दोनों मृतकों की पहचान पुनीलाल यादव व संदीप उरांव के रूप में हुई तथा उनके हाथ में जलने का निशान भी था।


घटना का पूरा घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, कुछ लोग देर शाम जंगल की ओर निकले। उद्देश्य था—जंगली सूअर का शिकार। यह इलाका पहले से ही वन विभाग द्वारा संरक्षित बताया जाता रहा है, जहां शिकार प्रतिबंधित है। शिकारियों ने सूअर को फंसाने के लिए बिजली का तार बिछाया था, जिसे नजदीकी बिजली स्रोत से अवैध रूप से जोड़ा गया। यही घातक जाल आखिरकार उनके लिए ही काल बन गया।

अंधेरे में, जमीन पर फैले करंटयुक्त तार का अंदाजा किसी को नहीं हुआ। दो लोग अचानक करंट की चपेट में आ गए। तेज झटका लगते ही वे जमीन पर गिर पड़े। साथ मौजूद अन्य लोग घबरा गए। कुछ ही पलों में यह साफ हो गया कि दोनों की मौत हो चुकी है। घबराहट और कानून के डर ने इंसानियत पर पर्दा डाल दिया।

इस पर पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो यह बात सामने आई कि  छोटे रेगड़ा के सात ग्रामीण पुनीलाल यादव, संदीप उरांव, राजू उरांव, विकास उरांव, जय किशन, रमेश उरांव के अलावा आकाश उरांव मिलकर लंबे अर्से से क्षेत्र के जंगल में 11 केव्ही के तार से अवैध रूप से हुकड़ी फंसा कर करंट प्रवाहित तार बिछाते हुए जंगली सूअर का शिकार करते आ रहे थे।

वहीं विद्युत प्रवाहित तार के संपर्क में आने से दोनों की मौत होने का आशंका जाहिर की गई। संभावना व्यक्त की जा रही है कि शिकार के लिए बिछाये गये तार की चपेट में आने से इनकी मौत हो गई है और मामले को छिपाने के लिए अन्य साथियों ने शव को यहां लाकर छिपा दिया है। पुलिस ने दोनों के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाते हुए मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।

चार सन्देहियों को लिया गया हिरासत में

ग्रामीणों से पूछताछ में जब यह बात सामने आई कि मृतक गिरोह बना कर जंगली सूअर का शिकार करते आ रहे है। इस पर उनके गिरोह में शामिल लोगों को पता कर राजू उरांव, विकास उरांव, जय किशन, रमेश उरांव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है । बताया जा रहा है कि गिरोह में शामिल एक शख्स आकाश उरांव फरार है, जिससे शक की सुई उन्हीं की ओर घूम रही है। पुलिस द्वारा पूछताछ किये जाने के बाद ही वास्तविक घटना का खुलासा हो पायेगा।


मौत के बाद भी नहीं थमी क्रूरता

हादसे के बाद साथियों के सामने दो रास्ते थे—या तो तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना देते, या फिर सच्चाई छिपाते। दुर्भाग्य से उन्होंने दूसरा रास्ता चुना। मृतकों की पहचान उजागर न हो, इसलिए दोनों शवों को पास की झाड़ियों में फेंक दिया गया। यह कृत्य न केवल अपराध को और गंभीर बनाता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे डर और स्वार्थ इंसान को अमानवीय बना देता है।


शव मिलने से खुला राज

कुछ दिनों बाद स्थानीय ग्रामीणों को जंगल में दुर्गंध महसूस हुई। तलाश करने पर झाड़ियों के बीच दो शव मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में करंट से मौत की आशंका जताई गई। घटनास्थल से बिजली के तार, हुक और अन्य सामग्री बरामद हुई, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह हादसा शिकार के दौरान हुआ।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। मोबाइल कॉल डिटेल्स, ग्रामीणों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर धीरे-धीरे पूरी साजिश सामने आने लगी।


पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

मामले की जांच में छत्तीसगढ़ पुलिस की भूमिका अहम रही। पुलिस ने अवैध शिकार, बिजली चोरी, गैर इरादतन हत्या और सबूत मिटाने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया। संदिग्धों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

जांच में यह भी सामने आया कि इससे पहले भी इस इलाके में इसी तरह के करंट जाल बिछाए जाते रहे हैं, जिससे जंगली जानवरों के साथ-साथ इंसानों की जान को भी खतरा बना रहता है।


अवैध शिकार: कानून और खतरे

भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कड़े कानून हैं। जंगली सूअर को लेकर अक्सर किसान फसल नुकसान की शिकायत करते हैं, लेकिन इसका समाधान अवैध शिकार नहीं है। बिजली के करंट से शिकार करना बेहद खतरनाक और गैरकानूनी है। इससे न केवल जानवरों की मौत होती है, बल्कि राह चलते इंसान, चरवाहे और बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानून को नजरअंदाज करने की कीमत कितनी भारी पड़ सकती है।


ग्रामीण इलाकों में करंट जाल की समस्या

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में करंट लगाकर जानवर पकड़ने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। लोग इसे आसान और सस्ता तरीका मानते हैं, लेकिन इसके दुष्परिणाम घातक हैं। हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें किसान, शिकारी या निर्दोष ग्रामीण मारे जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली का अवैध उपयोग न केवल अपराध है, बल्कि यह सामूहिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।Amar Ujala


परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतकों के परिवारों के लिए यह हादसा किसी वज्रपात से कम नहीं था। घर से निकले लोग वापस नहीं लौटे। जब सच्चाई सामने आई, तो परिवारों को न केवल अपनों को खोने का गम झेलना पड़ा, बल्कि यह जानकर और भी पीड़ा हुई कि मौत के बाद उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई और ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे।


सामाजिक और नैतिक सवाल

यह घटना समाज के सामने कई सवाल छोड़ जाती है। क्या जानवरों से फसल बचाने के नाम पर इंसानी जान को जोखिम में डालना सही है? क्या कानून का डर इंसानियत से बड़ा हो गया है? शवों को छिपाना केवल अपराध नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का पतन भी है।


वन विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी

वन विभाग लगातार जागरूकता अभियान चलाता है कि अवैध शिकार न करें और करंट जाल का इस्तेमाल न करें। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर और सख्त निगरानी की जरूरत है। ग्रामीणों को वैकल्पिक उपायों के बारे में जानकारी देना और फसल सुरक्षा के सुरक्षित तरीकों को बढ़ावा देना समय की मांग है।


भविष्य में कैसे रोकी जाएं ऐसी घटनाएं

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कई स्तरों पर काम जरूरी है।

जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाया गया करंट जाल दो जिंदगियों को निगल गया और कई परिवारों को जीवनभर का दुख दे गया। इससे भी अधिक दुखद यह रहा कि हादसे के बाद सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई। यह घटना हमें याद दिलाती है कि कानून, सुरक्षा और इंसानियत—तीनों का सम्मान जरूरी है। एक गलत फैसला न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी तबाह कर सकता है।

Next-

रायगढ़ में 1भयंकर हादसा पुलिया के नीचे गिरा ट्रैक्टर, रेत में दबे मजदूर – 7 बड़ी बातें जो झकझोर देंगी

Exit mobile version