रायगढ़ में ऑनलाइन ठगी का बढ़ता संकट 22 मामलों में पुलिस की विफलता, अभी तक कोई चालान नहीं

डिजिटल युग में तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी जैसे अपराध भी बढ़ गए हैं। रायगढ़ जिले में हाल ही में ऑनलाइन ठगी के 22 मामले सामने आए हैं, जिनमें पीड़ितों ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस अभी तक किसी भी मामले में चालान पेश करने में असफल रही है। इस विफलता ने लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
ऑनलाइन ठगी आमतौर पर सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, बैंकिंग एप्स और डिजिटल वॉलेट के जरिए होती है। लोगों को नकली प्रोफाइल, फर्जी ऑफर और निवेश के लालच में फंसाया जाता है। रायगढ़ में सामने आए 22 मामलों में पीड़ितों ने दावा किया कि उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
ऑनलाईन ठगी के मामलों में अभी भी रायगढ़ पुलिस क्षमतावान नहीं बन सकी है। करीब दो सालों में 22 प्रकरण दर्ज किए गए जिसमें से एक में भी चालान पेश नहीं हो सका। ये आंकड़े विधानसभा में रखे गए थे।आजकल लूट-डकैती से ज्यादा मामले ऑनलाईन ठगी के सामने आ रहे हैं। धोखे से लोगों के बैंक एकाउंट में ही डाका डाला जा रहा है।
आरोपी दूसरे राज्य का हुआ तो रायगढ़ पुलिस को पहचान करने में पसीने छूट जाते हैं। पहचान हो भी गई तो गिरफ्तारी मुश्किल होती है। जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक रायगढ़ जिले में 22 ऑनलाईन ठगी के अपराध दर्ज किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि आरोपी को पकडक़र सजा दिलाना तो दूर, चालान तक पेश नहीं किया जा सका है।
इसमें से भी 3 प्रकरण खात्मा में चले गए। ठगबाज फोन पर ही पूरी लूट कर डालते हैं। जब तक पता चलता है, तब तक बैंक एकाउंट से रकम निकाली जा चुकी होती है। पुलिस खोजबीन करती भी है तो दूसरे राज्य का आरोपी होने पर पहले ही कदम पीछे हो जाते हैं। चालान जमा करने की संख्या शून्य इसीलिए है क्योंकि आरोपी पकड़ में नहीं आया। ठगी गई रकम भी तभी बचाई जा सकती है जब पीडि़त तुरंत बैंक से संपर्क करके एकाउंट से ट्रांजेक्शन को होल्ड करवा ले।
डिजिटल अरेस्ट का एक भी मामला नहीं
इस अवधि में रायगढ़ जिले में डिजिटल अरेस्ट का एक भी मामला सामने नहीं आया। ऑनलाईन ठगी के मामलों से बचने के लिए पुलिस केवल जागरुकता अभियान पर फोकस कर रही है। जो अपराध हो चुके हैं, उनमें आरोपी को पकडऩा और राशि वापस दिलाना नामुमकिन जैसा है। आरोपी पकड़ा भी जाता है तो रकम खर्च हो चुकी होती है। इसलिए अपराध को होने से रोकना बेहतर माना जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और विफलता

इन 22 मामलों में पुलिस ने शिकायतों को दर्ज जरूर किया, लेकिन जांच प्रक्रिया धीमी और अधूरी रही। किसी भी आरोपी के खिलाफ चालान पेश नहीं किया गया। चालान पेश न होने का मतलब है कि मामले कोर्ट में नहीं पहुंचे और आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
पुलिस के इस धीमे रवैये पर सवाल उठते हैं। आम नागरिक पूछ रहे हैं कि आखिर 22 गंभीर मामलों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कई लोग तो अब खुद ही कानूनी सलाह लेने पर मजबूर हैं।
पीड़ितों की शिकायतें और अनुभव
पीड़ितों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें लगातार आश्वासन ही दिया गया। कुछ पीड़ितों ने बताया कि उन्हें पुलिस से बार-बार जांच के बारे में पूछताछ करनी पड़ रही है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही।
इस विफलता से प्रभावित लोग न केवल आर्थिक रूप से हानि में हैं, बल्कि मानसिक तनाव और अवसाद का सामना भी कर रहे हैं। कई लोग अपने बैंक अकाउंट और डिजिटल वॉलेट में जमा रकम को लेकर चिंतित हैं।
ऑनलाइन ठगी के प्रकार
रायगढ़ में सामने आए मामलों में मुख्यतः तीन प्रकार की ठगी देखने को मिली:
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सोशल मीडिया ठगी: फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाना।
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फर्जी निवेश और लॉटरी ठगी: उच्च रिटर्न का लालच देकर पैसे लेने वाले फर्जी एजेंट।
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ई-कॉमर्स और ऑनलाइन शॉपिंग ठगी: नकली वेबसाइट और भुगतान लिंक के जरिए पैसे निकालना।
इन तरीकों से ठग सीधे पीड़ितों के बैंक अकाउंट या डिजिटल वॉलेट में घुसपैठ करते हैं और रकम हड़प लेते हैं।
पुलिस की चुनौतियाँ
पुलिस के लिए ऑनलाइन ठगी के मामले चुनौतिपूर्ण होते हैं। इसका कारण यह है कि तकनीक बहुत तेज़ी से बदलती है और अपराधी अक्सर अपने ट्रेस मिटा देते हैं।
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डिजिटल साक्ष्य इकट्ठा करना कठिन होता है।
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कई मामले राज्यों और देशों की सीमा पार से जुड़े होते हैं।
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शिकायतकर्ता अक्सर पूरी जानकारी नहीं देते या समय पर रिपोर्ट नहीं दर्ज कराते।
हालांकि, यह समझने योग्य है कि तकनीकी चुनौतियों के बावजूद 22 मामलों में कोई चालान पेश न होना गंभीर नाकामी है।
नागरिकों के लिए सावधानी
रायगढ़ में हाल के मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहना होगा। कुछ महत्वपूर्ण सुझाव हैं:
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कोई भी अनजान व्यक्ति या फर्जी प्रोफाइल पर भरोसा न करें।
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सोशल मीडिया पर मिलने वाले उच्च रिटर्न वाले ऑफर से सावधान रहें।
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ऑनलाइन लेन-देन केवल विश्वसनीय वेबसाइट और एप्स पर ही करें।
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किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
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अपने बैंक और डिजिटल वॉलेट अकाउंट की सुरक्षा को मजबूत करें।
प्रशासन की जिम्मेदारी

सिर्फ नागरिक ही नहीं, बल्कि प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से कार्रवाई हो। Amar Ujala
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पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए प्रशिक्षण और उपकरण चाहिए।
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साइबर अपराध की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम बनानी होगी।
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समय पर चालान पेश करना और आरोपी को कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है।
यदि प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई करेगा, तो न केवल ठगी के मामलों में कमी आएगी, बल्कि लोगों का विश्वास भी बहाल होगा।
रायगढ़ में ऑनलाइन ठगी के 22 मामले दर्शाते हैं कि डिजिटल दुनिया में अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था कभी-कभी इस तेजी का सामना नहीं कर पाती। पुलिस की विफलता से न केवल पीड़ितों को आर्थिक हानि हुई है, बल्कि उनके मनोबल और विश्वास को भी ठेस पहुँची है।
इस समस्या का समाधान केवल पुलिस की जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार से ही संभव है। साथ ही, लोगों को अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक और सतर्क रहना होगा।
ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से कार्रवाई और सख्त कानून प्रवर्तन ही भविष्य में ऐसे अपराधों को रोक सकता है और रायगढ़ को सुरक्षित डिजिटल शहर बनाने में मदद करेगा।
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