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ऑटो किराया विवाद रात में तय किराए से ज्यादा पैसे वसूल रहे चालक, यात्रियों में आक्रोश

रात में ऑटो चालकों द्वारा तय किराए से अधिक राशि वसूली की शिकायतें बढ़ती मनमानी और घटता भरोसा

  


भूमिका शहर की सड़कों पर रात की मनमानी का सफर

रायगढ़ शहर, जो दिनभर चहल-पहल और व्यस्तता से भरा रहता है, रात ढलते ही मानो बदल जाता है। दुकानों के शटर गिरते हैं, सड़कों पर रौनक कम हो जाती है, और ऐसे में घर लौटने के लिए लोगों को सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है।
लेकिन इस समय ऑटो चालकों द्वारा तय किराए से अधिक राशि वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

कई यात्रियों का कहना है कि रात के समय चालकों द्वारा “रात का बहाना” बनाकर तय किराए से 1.5 से 2 गुना तक किराया वसूला जा रहा है, और विरोध करने पर सवारी छोड़ देने की धमकी तक दी जाती है।

रात में ऑटो चालकों द्वारा तय किराए से अधिक राशि वसूली की शिकायतें। Public


यात्रियों की मुश्किलें मजबूरी में देना पड़ता है ज्यादा किराया

शहर के मुख्य बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, और अस्पतालों के बाहर यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रात 9 बजे के बाद से ही ऑटो चालकों की मनमानी शुरू हो जाती है।

स्थानीय निवासी दीपक शर्मा बताते हैं —

“मैं रोजाना रात में ड्यूटी से लौटता हूँ। स्टेशन से घर तक का किराया 60 रुपये है, लेकिन रात को कोई भी चालक 100 रुपये से कम में नहीं चलता। मना करो तो कहते हैं — ‘भाई, रात का टाइम है, ऑटो कम चलते हैं।’ मजबूरन देना पड़ता है।”

महिला यात्रियों के लिए स्थिति और भी असुविधाजनक है। रात में सवारी कम होने की वजह से उन्हें सुरक्षा की चिंता रहती है और इस कारण वे विवाद से बचते हुए ज्यादा किराया देकर ही घर लौट जाती हैं।


प्रशासनिक तय दरें और वास्तविकता में अंतर

नगर परिवहन विभाग द्वारा ऑटो किराए की दरें पहले से तय की गई हैं —

लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। रात के समय यही किराया ₹25–₹30 प्रति किलोमीटर तक वसूला जा रहा है।

कुछ चालकों का कहना है कि पेट्रोल और सीएनजी के दाम बढ़ने, रखरखाव और रात के समय सुरक्षा जोखिम की वजह से वे अधिक किराया लेते हैं।
हालांकि, यह तर्क कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि किराया बढ़ाने या ‘नाइट चार्ज’ तय करने का अधिकार केवल परिवहन विभाग के पास है।


शिकायतें बढ़ीं, पर कार्रवाई न के बराबर

पिछले एक महीने में शहर के कंट्रोल रूम और परिवहन कार्यालय में ऐसी दर्जनों शिकायतें आई हैं।
लेकिन अब तक किसी भी चालक पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया —

“हमारे पास यात्रियों की मौखिक शिकायतें आती हैं, लेकिन बहुत कम लोग लिखित में शिकायत दर्ज कराते हैं। बिना साक्ष्य कार्रवाई करना मुश्किल होता है।”

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि यात्रियों में शिकायत दर्ज कराने की जागरूकता कम है और चालकों को इसका पूरा फायदा मिलता है।


ऑटो चालकों की सफाई “हम मजबूर हैं, मनमानी नहीं करते”

जब ऑटो चालकों से इस मुद्दे पर बात की गई, तो उनका पक्ष कुछ अलग था।

ऑटो चालक संघ के सदस्य रमेश यादव का कहना है —

“रात में सवारी बहुत कम होती है। लेकिन हमें वही किलोमीटर कवर करने होते हैं, पेट्रोल भी खर्च होता है, और खाली लौटने का खतरा भी रहता है। ऊपर से रोड पर गड्ढे, सुरक्षा का डर अलग। इस वजह से हम थोड़ा ज्यादा किराया मांगते हैं।”

हालांकि, कई चालक यह भी मानते हैं कि कुछ ऑटोचालक स्थिति का गलत फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे पूरे पेशे की छवि खराब होती है।


शहर के प्रमुख स्थान जहाँ शिकायतें अधिक हैं

  1. रेलवे स्टेशन परिसर देर रात ट्रेनें आने पर यात्रियों को निर्धारित किराए से दुगना भुगतान करना पड़ता है।

  2. जिंदल रोड और बस स्टैंड क्षेत्र यहाँ पर रात में ऑटो की संख्या कम होने के कारण चालकों की मनमानी बढ़ जाती है।

  3. चक्रधर नगर, कोतरा रोड, और सिटी मॉल एरिया देर रात काम से लौटने वाले युवाओं और स्टाफ को अतिरिक्त किराया देना पड़ता है।

  4. राजस्थान मोड़ और तिलकनगर चौक: यहाँ यात्रियों ने कई बार ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है।


सोशल मीडिया पर उठने लगी आवाज़ें

अब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। कई स्थानीय नागरिकों ने Facebook ग्रुप और X (Twitter) पर पोस्ट कर कहा कि प्रशासन को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि उन्हें रात में “डबल फेयर” देना पड़ा, जबकि कुछ ने बताया कि चालकों ने मना करने पर अपशब्द भी कहे।


समाधान क्या हो सकता है?

इस समस्या के समाधान के लिए कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है —

  1. रात के समय तय किराए की सूची सार्वजनिक करना:
    हर ऑटो में रेट चार्ट होना अनिवार्य किया जाए, ताकि यात्री भ्रमित न हों।

  2. ऑनलाइन शिकायत पोर्टल को सक्रिय करना:
    एक QR कोड आधारित प्रणाली विकसित की जाए, जिससे यात्री तुरंत शिकायत दर्ज कर सकें।

  3. प्रशासनिक निगरानी बढ़ाना:
    ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को रात के समय औचक जांच करनी चाहिए।

  4. ऑटो चालक संघ की जवाबदेही तय करना:
    हर संघ से यह सुनिश्चित करवाया जाए कि उनके सदस्य तय दर से अधिक किराया न लें।

  5. जनजागरूकता अभियान चलाना:
    शहर में पोस्टर, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाए।


कानूनी पहलू किराया वसूली पर कानून क्या कहता है?

मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 66 और 192A के तहत,
अगर कोई चालक तय दर से अधिक किराया वसूलता है, तो उस पर जुर्माना और वाहन जब्ती तक की कार्रवाई की जा सकती है।

इसके बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई कम दिखती है, जो प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाती है।
अगर नगर निगम और परिवहन विभाग मिलकर संयुक्त टीम बनाएँ, तो यह समस्या काफी हद तक सुलझाई जा सकती है।


जनता की अपेक्षाएँ भरोसेमंद परिवहन सेवा चाहिए

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे किसी चालक के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन्हें केवल “ईमानदार और सुरक्षित सेवा” चाहिए।
रात में काम से लौटने वाले डॉक्टर, नर्स, सुरक्षा कर्मी, और निजी कंपनियों के कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

सुनीता वर्मा (नर्स) बताती हैं —

“हमारा ड्यूटी टाइम रात 10 बजे खत्म होता है। उस समय पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं मिलता, और ऑटो वाले मनमाना किराया मांगते हैं। अगर शहर में तय दरें लागू की जाएँ और निगरानी बढ़े, तो राहत मिलेगी।”

 पारदर्शी व्यवस्था और सख्ती ही समाधान

“रात में ऑटो चालकों द्वारा तय किराए से अधिक राशि वसूली”
सिर्फ किराया विवाद नहीं, बल्कि शहर के परिवहन तंत्र की कमजोरी को दर्शाने वाली एक गहरी समस्या है।

अगर प्रशासन, चालक संघ और आम जनता मिलकर जिम्मेदारी निभाएँ —
तो यह स्थिति सुधर सकती है।
निगरानी, पारदर्शिता और सख्त दंड ही ऐसे मामलों को रोकने का एकमात्र रास्ता है।

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